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मंगलवार, 30 दिसंबर 2014

          संघर्ष को समर्पित एक राजनीतिक कबीर की फकीरी जिंदगी का नाम था ; लोकबन्धु राजनारायण ;

                                                                                                                                [डॉ ० सी ०पी ० राय ]

हमें नफरत नहीं थी अंग्रेजो की कौम औ सूरत से ,हमें नफरत थी तो उनके अन्दाजे हुकूमत से
गर अपनों की हुकूमत अपनी खातिर हो नहीं सकती तो अपनों की भी सूरत से मोहब्बत हो नहीं सकती |

लोकबन्धु राजनारायण के लिए ये चा र पंक्तियां दिशा निर्देशक का काम करती थी | तभी तो जहा देश की स्वतंत्रता के लिए नेता जी कुल चार बार जेल गए वाही आज़ादी के बाद अपनों के शासन में कुल करीब १५ वर्ष जेल में बिताए | जब भी जहा भी उनको जनता का कष्ट दिखलाई पड़ता या आज़ादी के सपनो का खून होता दिखलाई पड़ता वही वो आन्दोलन का शंख बजा देते थे |
आज़ादी की लड़ाई से लेकर आपातकाल उनके संघर्ष की कहनियाँ ही पसरी हुयी है भारतीय लोकतंत्र के इतिहास में |अगर हर आन्दोलन का तारीखवार वर्णन करूँगा और विस्तार में जाऊँगा तो किताब बन जाएगी इसलिए बस इशारतन ही जिक्र करूँगा यहाँ | वो मजदूरों का आन्दोलन हो उत्तर प्रदेश से लेकर आसनसोल तक जहा उन्होंने नक्सलवादियो का किला तोड़ते हुए समाजवादी संगठन खड़ा कर दिया था मजदूरों का | वो किसानो का आन्दोलन हो अदलपुरा से लेकर अरदाया तक या लखनऊ की धरती पर विशाल प्रदर्शन जिसमे ; किसान जागा पन्त भागा ; के नारे लगे थे ,वह किसान आन्दोलन रहा हो जिसमे राजनारायण जी को बुरी तरह पीट कर बंद कर दिया गया और आचार्य नरेन्द्र देव की मध्यस्थता से समझौता हुआ | १९५३ में गोरखपुर में रेल मजदूरों पर गोली चलने के खिलाफ आन्दोलन हो ,१९५४ में नहर के पानी का रेट बढ़ने पर आन्दोलन हो ,मिर्जापुर में मजदूर आन्दोलन हो ,५५ में गोरखपुर हो या या लखनऊ का छात्र आन्दोलन ,;;और बहुत महत्वपूर्ण १९५६ में जब वो हजारो हरिजनों को लेकर कशी विश्वनाथ मंदिर में घुस गए थे और तब संघियों ने तथा फासिस्ट ताकतों ने न सिर्फ हरिजनो के मदिर प्रवेश का विरोध किया बल्कि राजनारायण जी पर घटक हमला भी कर दिया था | १९५७ के सिबिल नाफ़रमानी आन्दोलन के संचालक बने ,बिक्रीकर के खिलाफ आन्दोलन ,बिहार में सोशलिस्ट पार्टी के आन्दोलन का सञ्चालन ,;;; स्वतंत्र भारत में जगह जगह लगी अंग्रेजो की मूर्ती तोड़ने पर गिरफ्तार हुए और स्वतंत्र भारत की सरकार में इसके लिए १९ महीने की सजा और ४०० रूपये का जुरमाना हुआ वाही से मूर्ती भंजन प्रथा शुरू हुयी तथा सरकार को बाध्य होकर सभी अंग्रेजो की मूर्तियाँ हटानी पड़ी और काशी में किंग एडवर्ड अस्पताल का नाम बदल कर शिवप्रसाद गुप्त अस्पताल हुआ ,१९५८ में खाद्य आन्दोलन ,और सम्पूनानन्द की सरकार में समितियों का बहिष्कार का फैसला ,१९६० में रास्त्रव्यापी आन्दोलन के संचालक बनाये गए ..देश भर में घूम घूम कर आन्दोलन ,लाल बहदुर शास्त्री के निवास पर पर्दर्शन जैसे हजारो आन्दोलन और उसमे सिद्धांत के साथ साथ अपने शरीर को विरोध का इस कदर हथियार बना देना की तमाम बार की पिटाई से पैर टूटे ,सर टूटा ,और जेलों में रहते रहते तमाम बीमारियों ने पकड़ लिया |
पहले लखनऊ रेलवे स्टेशन पर रिक्शा नहीं जा सकता था तो एक दिन राजनारायण जी वही विरोध पर अड़ गए ,,धीरे धीरे बड़ी संख्या में जनता एकत्र हो गयी तो मजबूर होकर रिक्शा जाने की इजाजत देनी पड़ी | ऐसा ही एक दिन उन्होंने राजभवन पर भी किया और उनका रिक्शा अन्दर गया |
वो चाहते तो जातिगत आधार पर सुरक्षित स्थान पर चुनाव लड़ कर हमेशा सासद रह सकते थे पर जैसे डॉ लोहिया ने कहा था नेहरु जी के खिलाफ चुनाव लड़ते हुए की मैं जनता हूँ की मैं पहाड़ से टकरा रहा हूँ और उसे गिरा नहीं सकता पर उसमे दरार पैदा कर कमजोर तो कर ही सकता हूँ ,,उन्ही के रस्ते पर चल कर अजेय ताकत बन गयी कांग्रेस और बलशाली नेता इंदिरा गाँधी के खिलाफ वो चुनाव लडे और ये भी इतिहास है की उनको कोर्ट में भी हराया और फिर वोट में भी हराया | उनका संघर्ष ही था की बहुत बड़ी संख्या में गर्रीब परिवारों के लोग जिन्होंने अपने शहर नहीं देखे थे वो प्रदेश और देश की राजधानियों में पहुंचे और स्थापित हुए |
एक बार जब संसद में नेहरु मंत्रिमंडल की मंत्री तारकेश्वरी सिन्हा ने डॉ लोहिया से कहा की क्या आप पागलो को साथ लेकर घुमते है तो डॉ लोहिया नाराज हो गए और कहा की तारकेश्वरी अगर मुझे कुछ और राजनारायण मिल जाये तो मैं देश को बदल दूंगा और तुम लोगो को भी बेदखला कर दूंगा | इसी प्रकार एक मौके पर आचार्य नरेन्द्र देव विदेश जा रहे थे तो उस वक्त के आन्दोलन के बारे में पुछा गया की कैसे चलेगा तो आचार्य जी ने कहा की उसे नेता जी चलाएंगे और उनके नामकरण के बाद से राजनारायण जी को नेताजी कहा जाने लगा |
जब राजनारायण जी केंद्र में स्वस्थ्य मंत्री बने तो उन्होंने परिभाषा ही बदल दिया और जमीन पर बैठना तथा बिना ए सी के रहना और उस समय रूस के अखबार प्रावदा ने लिखा की हिंदुस्तान में एक ही मंत्री है जो जन का मंत्री है और समाजवादी फैसले कर रहा है | राजारायण जी ने चालित अस्पताल चलाये थे की वो गाँवो में जाकर गरीबो का इलाज करेंगे और बेयर फुट डाक्टर के नाम पर उस समय १५ लाख लोगो को नौकरी दे दिया था | पर आर एस एस की कुटिल चलो को देख कर वो विचलित हो गए तथा जिस तरह किसानो और गरीबो के मुख्यमन्त्रियो के खिलाफ साजिश हो रही थी उस पर वो मुखर हो गये तथा तत्कालीन जनसंघ के लोगो की दोहरी सदस्यता के सवाल पर सरकार टूट गयी |
उन्होंने किसानो की लडाई लड़ने वाले किसान नेता चौ चरण सिंह को प्रधानमंत्री बनाने का सपना देखा तो फिर उसे पूरा कर के ही रहे | एक दौर था जब देश का प्रधानमंत्री ,प्रदेशो के मुख्यमंत्री उन्होंने बनाये बिगाड़े पर खुद उनका परिवार कहा है | मनीराम बागड़ी ने एक दिन जब ज्यादातर लोग साथ छोड़ गए थे तथा पार्टी ख़त्म जैसी हो गयी थी राजनारायण जी का नगर निगम में क्लर्क बेटा आया हुआ था ,कहा की पार्टी का काम तो अब कुछ रहा नहीं इसलिए टाइप राईटर और फोटोस्टेट मशीन इसे दे दे ये अपने बच्चो के लिए कुछ कम लेगा इन मशीनों से तो उन्होंने जवाब दिया की पार्टी का है पार्टी कोष में पैसा जमा कर दे और ले जाये जबकि दूसरी तरफ एक प्रमुख नेत्री ने बताया की आज ही अचानक उनकी बेटी के लिए एक लड़का मिल गया है जो दो दिन बाद ही विदेश चला जायेगा तो उसी राजनारायण जी ने उनकी शादी की पूरी व्यवस्था कर दिया |
उनके साथ रहने पर न तो किसी पद की जरूरत महसूस हुयी और न कही किसी से डर लगा | ८० में एक दिन मैं छात्र आन्दोलन में लाठीचार्ज के बाद गिरफ्तार हो गया पता नहीं उन्हें कहा से पता चला दूसरे ही दिन सुबह दिल्ली से चल कर और पूरे प्रशासन के साथ वो आगरा की जेल थे | जब मेरी शादी की पार्टी थी उसी दिन उनके परिवार में भी और उन्हें १०० से ज्यादा बुखार था पर वो मेरी शादी में हाजिर थे ..उससे भी जायदा तो तब हुआ जब मेरी बेटी पैदा हुयी और कुछ कार्यक्रम था उसी दिन उन्होंने बिहार के दो पूर्व मुख्यमन्त्रियो कर्पूरी ठाकुर और सत्येन्द्र नारायण सिन्हा को दिल्ली बुलाया था उनका विवाद निपटाने को और मुझे मना कर दिया था आने को पर अचानक सभी को साथ लिए हुए घर पर आ खड़े हुए | जब केंद्र में मंत्री भी थे तो अचानक जब घर आ जाते थे तब पता लगता था | ये थी इतनी बड़े नेता की खासियत |
मानवीय पक्ष और राजनीती की ऊँचाइयाँ तथा रिश्ते भी उनसे सीखे जा सकते है ,एक दिन थोडी से परेशानी पर तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा जी पैदल तीन मूर्ती लेन वाले घर आ गयी तो इंदिरा जी और संजय गाँधी के निधन पर मैंने उन्हें बिलखते देखा | ऐसा क्या कहा था उन्होंने संजय गाँधी से की उसी दिन से वो सड़क पर संघर्ष करने वाला हो गया | लोगो की चुगली और कान भरने से चरण सिंह से दूरी हो गयी थी पर मैंने उन्हें उनके लिये परेशां रहते हुए देखा | जनेश्वर जी और ब्रजभूषण तिवारी साथ छोड़ गए थे पर चुनाव में मैंने उनकी सहायता करते और जीत की कामना करते हुए देखा था | मुलायम सिंह यादव जी के बारे में वो कहते थे की ये आगे जाकर बड़ा नेता बनेगा और हमारे आन्दोलन को आगे बढ़ाएगा जो सच भी हुआ कुछ मायनो में |
वो चाहे कितने भी कमजोर हो गए हो पर जीतनी भीड़ उनके आसपास रहती थी वो मंत्रियो के यहाँ भी नहीं होती थी | देश के सभी बड़े नेता डालो की सीमाए तोड़ कर उनसे मिलने आते थे तथा सलाह करते थे | ये बताना भी समीचीन होगा की जब चंद्रशेखर जी भारत यात्रा कर रहे थे तो उन्होंने ये रहस्य खोला की यदि राजनारायण जी उनकी जिंदगी में नहीं आये होते काशी तो वो तो नौकरी करना चाहते थे पर राजनारायण जी उन्हें राजनीती में ले आये |एक दिन देश के सात ७ बड़े नेता बैठे थे नेता जी के यहाँ और खिचड़ी तथा लिट्टी चोखा खा रहे थे उस दिन नेता जी ने बड़ी वेदना से कहा की यह दें देखने को मैं क्यों जीवित हूँ जब सत्ता मदांध है और विपक्ष रश्म अदायगी कर रहा है | क्या कानून की पढाई राजनारायण को पढ़े बिना पूरी हो सकती है क्या लोकतंत्र में विपक्ष को मायने देने वाले योद्धा को याद किया बिना लोकतंत्र को जिन्दा रखा जा सकता है |
आज जब सत्ता तथा उससे जुड़े लोगो की भाव भंगिमा ,बोल और कदमो से लोकतंत्र की हत्या होने और फासीवाद स्थापित करने के इरादे की बू आ रही है तो आज जरूरत है एक राजनारायण की और आज के दौर में एक काम केवल मुलायम सिंह यादव ही कर सकते है | समाजवादी आन्दोलन अगर गाँधी के विचार ,लोहिया की हुंकार ,जयप्रकाश की सम्पूर्ण क्रांति और राजनारायण के सतत और निरपेक्ष संघर्ष कर्पूरी ठाकुर रामसेवक यादव जैसे लोगो की सादगी को अपना हथियार बनाएगा तभी देश के लिए सपने देखे गए वो पूरे होंगे और राजनारायण जी को सच्ची श्रधान्जली होगी |
         

गुरुवार, 27 नवंबर 2014

कितने संघियों और भाजपाइयो के घर और मन में मंदिर है और उसमे सचमुच के राम भी बिराजमान है ??
इनके पापो पर लिखते हुए उंगलियाँ दर्द कर जाती है और बोलते हुए गला ।
अब कितना करे ? ये तो शर्महीन हो गए है ।
क्या ऐसा नहीं हो सकता की चोर ,डकैत ,सबसे बड़ा रईस बनने की इच्छा रखने वाले सरकारी पदों की आड़ में ये सब न करे बल्कि जो वो है और जो उनकी इच्छा है उसी उसी तरह का काम कर के हासिल करे ?? सरकारी सभी तरह के पद तत्काल छोड़ दे | या फिर कोई सरकार क्या कभी आएगी जो अंग्रेजो के द्वारा हम लोगो का शोषण करने ,हम लोगो को प्रताड़ित करने लिए और लूटने के लिए १६ अगस्त १९४७ को छोड़ी गयी व्यवस्था और मानसिकता से भी देश को आज़ाद करवा सके ??
असली आज़ादी तो तभी आएगी वर्ना आज़ादी अधूरी है |
लगता है कि ऊपर वाला भी कलियुगी हो गया है और कलियुग की बुराइयो और उसके वाहको के ही साथ खड़ा हो गया है अपनी सम्पूर्ण ताकत के साथ ।
आप टैक्स चोरी करो ,जमाखोरी करो ,कालावाजारी करो ,मुनाफाखोरी करो ,मिलावाटखोरी करो और गरीबो का खून चूसो और खूब कमाओ तथा दुनिया के सबसे बड़े रईस बन जाओ -- पर फिर धन और वैभव का भौड़ा प्रदर्शन कर लोगो की गरीबी का,गरीबो का ,जरूरत मंदों का मजाक तो मत उडाओ ।
और मीडिया के दोस्तों रईस थोड़े से है और जिनके पास खाना ,कपड़ा ,छत ,दवाई और पढाई नहीं है वो करोडो है और आप इन करोडो को कुछ लोगो का वैभव परोस कर क्या करना चाहते हो ।
देखना कही गरीबो का असंतोष बाहर न आ जाये ।
मेरा मतलब शायद समझ रहे होगे आप दोनों ही ।
भारत का लोकतंत्र सबसे असफलतम प्रधानमन्त्री के नीचे कराह रहा है |इतनी दिन में ही मोदी जी की असफलता ,अज्ञानता और हीन भावना तथा अल्पदृष्टि सामने आ चुकी है जिसे ढकने के लिए इनका थिंक टैंक और संघ मिल कर नए नए सस्ती लोकप्रियता के आयोजन कर और इवेंट मैनेजमेंट कर जनता का ध्यान इनकी असफलतावो और वादा खिलाफी से हटाना चाहते है ,,पर अगले ६ महीने में ये सभी चीजें जनता में नफ़रत पैदा करने लगेगी |
इसलिए बस जरूरी ये है की हर वक्त सिद्धांतो ,,पर खास कर ,भारत के इतिहास और अस्मिता से जोड़ कर इन्हें कठघरे में खड़ा किया जाये | तब ये बौखालायेंगे और और बड़ी गलतियाँ करेंगे तथा लोकतंत्र पर हमला करने की कोशिश करेंगे और वही अवसर लोकतान्त्रिक शक्तियों के खड़े होने का होगा |
देखे कौन कौन क्या करता है ?? ये भी मेरा राजनीती शास्त्र के विद्यार्थी के रूप में व्यक्तिगत बयांन है |
मोदी और संघ एक मानसिकता है जो लोकतंत्र ,,इंसानियत और हिंदुस्तानियत के खिलाफ है और इनसे मेरी सैधांतिक लड़ाई है | मैं इन्हें उस राज के स्थापित करने तक नहीं पहुँचने देना चाहता हूँ जिसमे मैं गैस चैम्बर में डाल दिया जाऊं या काल कोठरी में सडा दिया जाऊं इसलिए मैं तो अंतिम सांस तक इनसे लड़ता रहूँगा और लोगो को जगाता रहूँगा |
कृपया कोई इस लडाई से मुझे न रोके और खुद को मेरी वजह से डर लगे तो मुझे खुद से अलग कर दे |
लड़ाई है लोकतंत्र की ,,हिंदुस्तानियत की और इंसानियत की और मैं संघ को इन चीजो का दुश्मन मानता हूँ
लखनऊ में तो अभी गर्मी का मौसम है पता नहीं बनारस और दिल्ली का क्या हाल है ? कश्मीर से आकर एक दोस्त ने बताया की वह भी गर्मी है ।
हाथी के साथी भी कुछ ऐसे ही बताये जा रहे है ।
महारास्त्र में व्यापार और सौदेबाजी नयी ऊँचाइयाँ छूने को बेक़रार है ।
मौसम विभाग मौन है तो आज का बुलेटिन समांप्त करते है ।
रास्ट्रीय स्वयं सेवक संघ अन्दर से बंट गया है अगड़ो और पिछडो में ,मराठी और गैर मराठी में तथा चित्पावन और गैर चित्पावन ब्राह्मणों में ।देश में लोकतंत्र कायम रखने वालो और फासीवादी शासन चाहने वालो में ।
इसमें मेरा कोई हाथ नहीं है ।कसम से ।पर मैं इसकी गन्दी सोच का खात्मा जरूर चाहता हूँ ।
सबकी प्रोन्नति ,अच्छी पोस्टिंग वो कर्मचारी से अधिकारी तक ,ठेकेदार से व्यापारी तक सबका ख्याल सबका विकास पर क्या कभी किसान ,बेरोजगार नौजवान और गरीब के लिए भी कुछ--;:; :इन लोगो जैसा ही;;;;: होगा ?
क्या कभी कोई गरीब राजनीतिक कार्यकर्तावो के बारे में भी सोचेगा की उसके घर में आटा है या नहीं ,उसका बच्चा स्कूल जा रहा है या नहीं और उसकी बीबी दवा बिना मर तो नहीं रही है ??
सभी दलों से मेरा ये सवाल है ?????
जो लोग आज़ादी की लडाई में जब अंग्रेजो भारत छोड़ो कहना था तो दुम दबा कर या तो कही छुप गए या अंग्रेजो के मुखबिर हो गए ,अब आज़ादी के इतने सालो बाद नारा लगा रहे है की अब देश को लोकतंत्र से मुक्त करो और अकेले हमारा फासीवादी राज लाओ ।
सब दलों को खत्म करने की मांग कर रहे है ये ।आज उत्तर प्रदेश की धरती पर भी यही कहा गया ।
एक चुनाव क्या जीत गए जनता से झूठ बोल कर और भारत से लेकर अमरीका तक के अपवित्र साधनों का इस्तेमाल कर के और उसके बाद सभी वादों से मुकर कर अपनी अयोग्यता और अक्षमता सिद्ध कर भी अपने बारे में इतनी ग़लतफ़हमी पैदा हो गयी है ।
क्या कहते है आप साथी ? क्या ये नारा लोकतंत्र का नारा है ? क्या इनके मंसूबे चकनाचूर करने को मुझे कमर नहीं कस लेना चाहिए और क्या इस मुहीम पर निकल नहीं जाना चाहिए साथियों की मदद लेकर ।
मैं इनके इरादों को ध्वस्त कर दूंगा ।वादा रहा ।
राजनीती में अगर विरोध में है तो संघर्ष और खुद के जनता के लिए कार्यक्रम और वादों को लोगो तक पहुंचना तथा सत्ता की हर बुराई और कमजोरी पर हमला करना और जनता के साथ हर पल खड़ा होना होता है ।
पर -----
अगर खुद सत्ता में है तो जितना जरूरी वादों को पूरा करना तथा विकास करना है उतना ही जरूरी वो काम तथा विकास बिना बाधा और भेद भाव के लोगो तक पहुंचे ये भी है ।
उससे भी ज्यादा जरूरी उसका सम्पूर्ण और आखिरी व्यक्ति तक प्रभावशाली प्रचार करना है ताकि लोग जहा अपने हक़ पर निगाह रखे तथा विकास की निगरानी करे वही उनके मनो में ये बैठे की आप क्या क्या कर रहे है ।
और -----
उससे भी ज्यादा जरूरी आखिरी कार्यकर्ता को भी सत्ता तथा संगठन दोनों से जोड़े रखना और उसे ये एहसास करवाना की वो भी सत्ता का बराबर का भागिदार है तथा उसके सुख और दुःख से पार्टी तथा सत्ता जुडी हुयी है ।
और ----
उससे साथ ही बहुत महत्वपूर्ण है केवल तन्त्र के बजे पार्टी तथा सरकार दोनों स्तरों पर समाज के मुद्दों से जुड़ना और सामाजिक मुद्दों पर भी सतत कार्यक्रम चलाना ।
और----
जरूरी है की विरोधी के हर राजनीतिक दांव पेंच को तुरंत भोथरा करते रहना ।विरोधी किसी चीज का श्रेय ले उसके पहले अपने ही संगठन से उठवा कर उसे श्रेय देना ।
विरोधी हमला करे उसके पहले उसके खेमे और उसके पाले में घुस कर उस सार्थक और धारदार राजनैतिक और सैधांतिक हमला कर देना और उसे उसके पाले में ही घेर कर उस पर हमला करते रहना ।
फिर जीत पर जीत आप की होगी क्योंकि जनता का और कार्यकर्ताओ का दिल जीत लेंगे आप ।विरोधी के हर वार को भोथरा और नाकाम कर देंगे आप ।
( बस यूँ ही आज का विचार है ये )
आज आई बी एन 7 पर बहस थी देश के प्रधान् प्रचारक के आस्ट्रेलिया दौरे पर ।ये बीजेपी बताएगी की -1- दूसरे देशो में प्रायोजित सभाए कर क्या हासिल करना चाहती है ? -2- मोदी जी दूसरे देश में अपने देश की व्यवस्था की बुराई कर क्या हासिल करना चाहते हैं ? -3-मंच पर कमल का फूल था रास्ट्रीय झंडा नहीं तो वो बीजेपी की मीटिंग होती है या प्रधान मंत्री की ? -4- कुछ मुसलमानों या वैसे कपडे पहन कर बैठे लोगो को एक ही स्थान पर बैठा कर और कुछ सीखो को एक स्थान पर बैठा कर और कुछ लोगो को बीजेपी के झंडे के रंग की कमीज पहना क्या सिद्ध करना चाहते है ? -5 - देश में कही भी सभा हुयी हो या विदेश में जहा भी हो रही है एक ही तरह की सीटी की आवाज ,हॊऒऒ की आवाज और मोदी मोदी की आवाज आती है ।क्या सभी जगह लोगो की आवाज एक ही जैसी है ? क्या उन देशो में रहने वाले इसी तरह सीटी बजाते है और हुडदंग करते है ? -6- देश से जो हजारो लोग इन सभाओ के लिए भेजे जाते है और गायक इत्यादी जिनके नाम पर लोगो को बुलाया जाता है उनका खर्च कौन करता है ? -7 - आज तक इन सभी इवेंट्स पर बीजेपी कितना खर्च कर चुकी है ?
और देश जानना चाहता है की मोदी जी ने इन 6 महीनो में देश के लिए क्या किया तथा अपने इतने सारे विदेशी दौरों से देश के लिए क्या लाये ?
प्रधानमन्त्री हर घंटे ड्रेस बदलने ,भाषण देने ,पूर्व सरकारों के किये गए कामो का श्रेय लेने और उन्ही का नाम बदल कर अपना बताने तथा इवेंट मैमेजमेंट ही करेंगे या कुछ काम भी करेंगे ?
कुछ सवाल -----
कभी संघ या तथाकथित हिंदूवादी ताकतों ने ऐसा अभियान क्यों नहीं चलाया --
कोइ हिन्दू या हिंदुस्तानी बच्चा भीख नहीं मांगेगा
कोई हिन्दू या हिंदुस्तानी बहन शरीर नहीं बेचेगी
कोई हिन्दू या हिंदुस्तानी फुटपाथ पर नहीं सोयेगा
इन मुद्दों से वोट नहीं मिलता और दंगा नहीं होता तथा समाज नहीं बंटता इसीलिए न ।
क्या आप सभी भी ये चाहते है ?----जो मैं चाहता हूँ ?
1- कोई बच्चा चौराहो पर भीख न मांगे
2- कोई भी रात को फुटपाथ पर न सोये
3- कोई बहन बेटी शरीर बेचने को मजबूर न हो ।
यदि हा तो आप सभी इसे इतना फैलाइए और इसकी चर्चा कर दीजिये की सरकारे ये करने को मजबूर हो जाये ।
हुजुर दुनिया पूछ रही है की भारत का प्रधानमन्त्री कितना फालतू है और कितना बोलता है ।
लोग दो सवाल पूछ रहे है -----
1- भारत में कोई काम नही है क्या प्रधानमन्त्री के पास
2- भारत में भाषण देने पर पाबन्दी है क्या की पी एम् जहा भी जाते है घंटो लम्बा भाषण देते है ।
हुजुर आप को तकलीफ है की आप देश के लिए मर नहीं पाए आज़ादी की लड़ाई में इसलिए देश के लिए जीना चाहते है ।
पर थोडा सा इतिहास पर नजर डाल लीजियेगा कि आज़ादी की लडाई के समय आप का मात्री संगठन भी था और आप के आदर्श तथा आप की विचारधारा के आप के बहुत से नेता भी थे पर तथ्य ये है की उन लोगो ने आज़ादी की लडाई में हिस्सा लेने के स्थान पर उस लडाई का विरोध ही नहीं किया बल्कि मुखबिरी कर के आज़ादी की लडाई लड़ने वालो को जेल भिजवाया और सजा दिलवाया और मरवाया ।
क्या गारंटी है की आप तब रहे होते तो अपने आदर्शो वाला ही काम नहीं किया होता ??
देश के लिए जीने पर सवाल अभी छोड़ देता हूँ ।
हमें सिखाया गया था की सच बोलो ,इश्वर से डरो ,गलत काम मत करो ,किसी को धोखा मत दो ,छल मत करो इत्यादी इत्यादि ।ये कोई साजिश थी क्या ?
वर्ना आज झूठे ,मक्कार ,धोखा देने और छल करने वाले , थाली में छेद करने वाले ,पीठ में छुरा घोंपने वाले ,दलाल ,छिनाल और हर तरह का काम करने वाले तथा हर चीज पेश करने वाले ही सफल हो रहे है ।
हमारे शिक्षको और बुजुर्गो ने हमें गलत बात क्यों सिखाया और गलत रास्ता क्यों दिखाया ।
अगर मुझे सही याद है तो देश में एक विदेश मंत्री ने भी शपथ लिया था और शायद वो सुषमा स्वराज थी ??
कहा है वो ? इस्तीफ़ा दे दिया या अपना काम नहीं कर रही है ?
सुना है मोदी जी भारत यात्रा पर आ रहे है ? स्वागत है ।
जब से पता चला है की बिना इन्वेस्टमेंट के ,बिना रिस्क के और केवल जुबान चला कर बाबा और संत तथा व्यापारी नुमा बाबा बड़े बड़े पूंजीपतियों से भी आगे है धन ,वैभव,और ऐश में तो देश ले पूंजीपतियों के साथ साथ ज्यादा बोलने वाले नेताओ ने भी सोचना शुरू कर दिया है की बाबा का काम ही या भी क्यों न डाल लिया जाये ।
देश के आजकल चर्चित और केवल बोलने वाले नेता ने तो बाबा की तरह बोलने का अभ्यास भी शुरू कर दिया है ऐसा लोग उनके बोलने के नए अंदाज से समझ रहे है ।
सच तो ये है की मैं भी सोच रहा हूँ की और कोई कारोबार करने के लिये तो धन नहीं है तो यही अजमा लूँ ।हा हा हा
लीजिये गौरवशाली हिन्दू सरकार की बात शुरू हो गयी ।
ताकि आप न पूछे की महंगाई क्यों ख़त्म होने के स्थान पर बढ़ गयी ?
ताकि आप न पूछे की 100 दिन में काला धन लाने और हर नागरिक को लाखो रुपये देने का क्या हुआ ?
ताकि आप न पूछे की पाकिस्तान इतने सैनिक मार कर पार्सल भेज चूका आप का एक के बदले 100 का क्या हुआ ?
ताकि आप ये न पूछे की कश्मीर में 370 पर बोलती क्यों बंद है ?
ताकि आप ये न पूछे की चीन से जमीन छीनने वाले थे वो तो और घुस गया ?
ताकि आप ये न पूछे की विदेश में नाच गाने पर कितना और कहा से खर्च हो रहा है ?
ताकि आप ये न पूछे की एक साल के लिए नौकरियां क्यों बंद कर दिया जबकि बेरोजगारी ख़त्म करने का दावा था ?
ताकि आप ये न पूछे की रेल का किराया इतना बढा दिया और रेल का बुरा हाल क्यों है ?
ताकि आप ये न पूछे की भारत के प्रधानमंत्री के पीठ पर हाथ रखने का अधिकार किसी पूंजीपति को कैसे मिला ?
ताकि आप ये नहीं पूछे की कोई अडानी देश से बड़ा कैसे हो गया ?
ताकि आप कोई भी सवाल न पूछे देश के प्रधान प्रचारक से ?
क्या देश अब भी नहीं जागेगा ?

क्या भारत भी सोमालिया और उन तमाम देशो की तरह हो जायेगा जहा धार्मिक कट्टरता उन्ही को दिन रात खा रही है और वो देश नर्क बन गए है ।
मैं तो बहुत चिंतित हूँ ।क्या होगा मेरे देश का ? क्या हिटलर राज्य आएगा यहाँ ? और अलग विचार रखने वालो गैस चैम्बर और गोली मिलेगी ।
संघी और तथाकथित हिन्दुवों के ठेकेदार महात्मा गाँधी ,जवाहर लाल नेहरु ,सरदार पटेल ,डॉ राजेंद्र प्रसाद ,चक्रवर्ती राजगोपालाचारी ,बाबा साहेब अम्वेदकर ,श्यामा प्रसाद मुखर्जी ,लाल बहादुर शास्त्री ,इंदिरा गाँधी ,मोरारजी देसाई ,चौ चरण सिंह ,राजीव गाँधी ,वी पी सिंह ,चंद्रशेखर ,नरसिम्हा राव ,अटल बिहारी वाजपेयी ,अडवाणी ,मनमोहन सिंह को हिन्दू नहीं मानते ।
इसलिए कह रहे है की चौहान के बाद अब हिन्दू सरकार आई है ।
क्या इरादा है इनका ?
ये कभी भूख ,गरीबी ,बेरोजगारी ,अशिक्षा ,स्वस्थ्य और तरक्की की बात क्यों नही करते ?
किस युग में जी रहे है ये और भारत को किस युग और माहौल में ले जाना चाहते है ?
कभी जब बाढ़ आती है तो कभी कभी कूड़ा करकट भी घर की बैठक से लेकर छत तक पहुँच जाता है | ऐसा ही एक बाढ़ में हो गया है | सफाई हो जाएगी तो कूड़ा करकट जहा होना चाहिए वहा पहुँच जायेगा |
साफ़ साफ़ मत पूछिए |
राजनीती में बहुत से लोग परजीवी बनकर आते है और खुराक पाते ही ताड़ की तरह बढ़ने लगते है जिसमे न तो छाया होती है और न फल लगता है | बस खाद पानी सब सोख कर बढ़ते जाते है बस खुद और खुद के लिए |
क्या इन ताड़ो के पेड़ से कभी राजनीती और देश को मुक्ति मिलेगी ?
अगर बहुत से लोगो के अनुभव से बर्बाद और बदनाम होने से बच सकते हो तो क्या बुराई है कि उस रास्ते पर कदम जाते ही रोक लो ।
बचपन में जब तक संस्कृत पढना मजबूरी थी इतना भारी और बोर लगता था की मास्टर साहब 33 नंबर देकर बस पास कर देते थे और जब क्लास 9 में जाने पर उससे पीछा छूटा तो लगा कैद से मुक्त हो गए ।
आज तक नहीं समझ पाया इतना पढने के बाद की क्या सिखाया संस्कृत ने ।और इतना ज्ञान का भंडार है तो कोई किसी भी क्लास में पढना क्यों नहीं चाहता ।
कही धीरेन्द्र ब्रह्मचारी की तरह अपने लोगो को इसी बहाने स्कूल और कालेजो में भरने की साजिश तो नहीं जैसे उन्होंने अपने सारे शिष्य योग टीचर बनवा दिए ।
अब ये तो सभी जानते है की क्या किया इतने वर्षो में योग और उसके टीचर ने ।

वैसे तो संघी दो मोर्चे पर काम करते है - 1- अपनी अयोग्यता ,अदूरदर्शिता ,असफलता से ध्यान हटाते है विवाद छेड़ कर और -2- अपने लोगो को मीडिया ,शिक्षा से लेकर हर क्षेत्र में भर देते है भविष्य में फासीवाद लाने के हथियार के रूप में ।
मैं तो समझ रहा था की अभी चुनाव के भाषण और इवेंट ही चल रहे है और जैसे फौजियों और बाहर रहने वालो के डाक से आने वाले वोट के लिए भी लोग संपर्क करते है उसी तरह विदेश में रहने वाले भारतीय वोटरों से भी सभाओ के माध्यम से संपर्क चल रहा है ।
पर आज कई लोगो की पोस्ट पढ़ा की केंद्र सरकार का रिपोर्ट कार्ड क्या है तो झटका लगा की कोई सरकार है क्या दिल्ली में ?
चलिए अब मैं भी 6 महीने का आकलन करता हूँ दूरबीन लगा कर ।
पर नम्बर एक से आखिरी नम्बर तक मौजूद प्रधान मंत्री और सभी विभागों के मंत्री जी आप तो अपनी सभाए जारी रखो ।जब थोडा आराम करना हो तो भारत के आरामगाह में भी आ जाया करो ।
दुनिया में किसी बच्चे ने पैदा होने के बाद संस्कृत में माँ बोल है क्या ?
जो जहा पैदा होता है मुह से वहां की भाषा के शब्द बिना सिखाये निकल जाते है ।
निरक्षर लोगो को भी मानस रामायण कंठस्थ है क्योकि वो सरल बोली वाली भाषा में है ।
बाकी भाषाये व्यक्ति अपनी इच्छा और ज्ञान तथा रोजी रोटी से जोड़ कर सीखता है ।
महामानव लोग नयी क्रांति करेंगे की बच्चा पैदा होते ही संस्कृत बोलेगा और उसी से रोटी कमाएगा ।
रोजगार और रोटी पर रोक लगाने वाले ,गरीब से छीन कर पूंजीपतियों की तिजोरी भरने वाले अब देश से दुनिया तक अपने बूते पर मिलने वाले रोजगार पर भी ग्रहण लगाना चाहते है ।
भारत के लोगो को दुनिया में रोजगार इसलिए मिला की वो टूटी फूटी अंग्रेजी जानते थे और चीन ,रूस जर्मनी के लोगो को इसीलिए नहीं की वो नहीं जानते थे ।
ये ईसा पूर्व की मानसिकता पता नहीं देश को कहा ले जाएगी क्योकि ऐसी मानसिकता वालो का जहा भी शासन आया उन देशो और वहां के लोगो की दुर्दशा सभी ने देखा और देख रहे है ।
ईश्वर मेरे भारत को नकली रामभक्तो से बचाए जिनका राम आदर्शो और मर्यादा का वाहक नहीं बल्कि दंगो और नफरत का वाहक है ।
प्रतिदिन करोडो लोग किसी न किसी से मिलते है पर कुछ लोग अपनी मुलाकात का भी प्रचार करते है और पता नहीं इस प्रचार के लिए क्या क्या करते है ।
वर्ना किसी को क्या पता की किस गाडी में कौन किस घर या दफ्तर में घुसा ?
ये प्रचार की भूख बीमारी है या धंधे के लिए जरूरी है ?
पार्टी संगठन और कार्यकर्ता अपने नेता के नेतृत्व में जनता की तकलीफों और अकांक्षाओ के लिये संघर्ष करते है ।अधिकारी उस वक्त नेता का भी गिरेबान पकड़ लेते है और कर्यकरताओ तथा जनता पर गोली और लाठी चलाते है ।
चुनाव होता है और जनता उस संघर्ष का सम्मान करते हुए भारी मतों से पार्टी को भरी बहुमत से विजयी बनाती है और सरकार बन जाती है ।
और वही अधिकारी असली राजा बन जाते है इन्होने पिछले पांच साल पीटा और अपमानित किया था और कार्यकर्ता तथा जनता फिर दूर से मायूस सत्ता को निहारते है ।सत्ता को कैद कर लेती है फिर से नौकरशाही और तंत्र ।यही कहानी बार बार दोहराई जा रही है मेरे देश में ।फिर वही अधिकारी नचाने लगते है सत्ता को अपनी उंगलियों पर बहुत विनम्र भाव् से और खा जाते है सरकार तथा संगठन को क्रूरता से ।
कार्यकर्ता और समर्थक जनता उत्पीडित होते है और आवाज इस लिए नहीं उठा सकते की तथाकथित रूप से अपनी सरकार है और अगर ज्यादा हो जाने पर आवाज उठाने की हिमाकत कर दें तो फिर वही अधिकारी उसे पीटते है और मुकदमे लाद कर अपराधी बना देते है ।
मुहम्मद बिन तुगलक का इतिहास और कारनामे पढ़े है कुछ वैसे ही फैसले करने लगते है नौकरशाह और जनता की पूँजी और अधिकार को उसके जाने से रोकने और अपनी तिजोरियां भर देने में लगा देते है पूरी ताकत पूरी आपसी एकता और समझ के साथ ।लड़ाते रहते है राजनैतिक शक्ति को और एक दूसरे को जनता में खलनायक सिद्ध करने को सारे हथियार भी देते है और मदद भी करते है उनका ऐसा प्रचार करने हेतु ।ताकि सारी चर्चा में रहे राजनैतिक लोग और ये लूट ले सारे खजाने को ,ताकि को न देखे की कितनी कोठियां और कितनी बड़ी बड़ी बन गयी इनकी ।घर में झोपडी नहीं थी पर कितनी समपत्तियाँ बना लिया इन्होने और किस किस नाम के क्या क्या बना लिया इन्होने ।
राजनैतिक ताकते कब खुद राज करंना और नौकरशाहो को आदेशित करना सीख पाएंगी और कब इस स्थायी व्यवस्था को जवाबदेह बना पाएंगी और कब एक दूसरे को नीचा दिखाने के बजाय एक दूसरे का सम्मान करना तथा सहयोग से जनहित में करते हुए स्वस्थ और वास्तविक लोकतंत्र कायम करना सीख पाएंगी और कब इस तंत्र की कठपुतली बनना नहीं बल्कि इनको आदेशित कर और समयबद्ध तथा गुणवत्ता के मानक पर खरा काम करवाना सीख पाएंगी और कब राजनैतिक ताकत की तरह इस तंत्र में बैठे लोगो को भी यदि उन्हें जनता नकार दे और उनके काम को तो वो भी पद पर न रहे ऐसी व्यवस्था कायम कर पाएंगी ।ये बड़ा सवाल मेरे जेहन में काफी वर्षो से है और मुझे उद्वेलित करता रहता है की यह नौकशाही द्वारा संचालित नकली लोकतंत्र कब तक चलेगा ।
आज एक विज्ञापन देखा आगरा पर और किसी थीम पार्क की चर्चा तो ये विचार अपने आप को उद्वेलित करने लगा ।
सबको शिकायत है भ्रस्ताचार से और सभी बुराइयों से ।पर जिंदगी भर इमानदार रहने वाला जब बच्चे को पढ़ाने जाता है तो लाखो की फीस इमानदारी के पैसे से जमा नहीं होती ,जब इलाज के लिए जाता है और बीमारी बड़ी हो तो इमानदारी उसके काउंटर पर भो खोटा सिक्का बता दी जाती है और बेटी की शादी तो हो ही नहीं सकती क्योकि ईमानदारी प्रशंसा नहीं बल्कि उपहास का विषय बन जाती है और दहेज़ के तराजू में इसका पलड़ा आसमान देखने लगता है ।
किस विषय पर ईमानदारी की तारीफ करे ।जाने दीजिये ये उपदेश की चीज है दूसरो के लिए बाकी जेब भरी हो तो आदेश दीजिये की क्या चाहिए ।
आदर्शो और ईमानदारी की कलयुग में कितनी सजा निर्धारित किया है ईश्वर ने या शास्त्रों ने कही किसी शास्त्र में इसका कोई वर्णन है क्या ?
आप के इन अवगुणों की सजा आप की पत्नी ,परिवार तथा बच्चो को भी मिलेगी क्या ये भी उसमे लिखा है ? क्योकि बाकी सभी व्यवस्थाओ में तो सजा सिर्फ गुनाहगार को मिलती है परिवार को नहीं ।
किसी विद्वान ने पढ़ा हो तो कृपया मेरा भो ज्ञानवर्धन करने की कृपा करे ।
ऊपर वाले बेइमान होंने के लिए भी अरक्षित कर दिया है अवसर ।अवसर ही नहीं तो चाह कर भी नहीं हो सकता कोई ।पर बहुत लोग अवसर होने पर भी कायरता वश नहीं हो पाते है बेइमान ।
बड़ा गूढ़ शास्त्र है ये ।

बुधवार, 1 अक्तूबर 2014

बापू ये देश आप को अपनी आँखे झुका कर सलाम करता है ,अपनी सम्पूर्ण भावनाओ से आप को दुनिया का महामानव मानते हुए आप का आभार व्यक्त करता है  और आज भी आप का कर्जदार है केवल आप की मानवता और आजादी की लड़ाई के लिए ही नहीं इस बात के भी लिए की देश आप के हत्यारों की असली जिम्मेदार विचारधारा को आज भी सजा नहीं दे पाया ,उसे मिटा नहीं पाया | हम जानते है आप भटक रहे हो देखने को की आप का देश कही उस विचारधारा के पैरो तले कराहने न लगे |
बापू आप कही हम लोगो पर हंस तो नहीं रहे हो या हमारी किस्मत पर रो तो नहीं रहे हो ,कही आप को ये तो नहीं लग रहा की हम आप की विरासत को सहेज कर रख नहीं पाए ,कही हम के द्वारा सिखाई गयी सत्य और अहिंसा के मूल मन्त्र को फैला नहीं पाए ,आप के द्वारा दी गयी आजादी को जिम्मेदारियों और नागरिकता के मूल मन्त्र से सजा नहीं पाए ,आपके सत्याग्रह को लोगो के दिलो में बसा नहीं पाए |
बापू आज कही आप दर कर कही बैठ गए हो कही छुप कर की ये क्या हो रहा है और ये कौन सी साजिश है आप को फिर से मारने की की जो हर रोज पानी पी पी कर गलियां देते थे ,जिन्होंने आप को मारने की व्यवस्था किया था और फिर उसका हर्ष मनाया था और मिठाइयाँ बांटा था ये पलटी कैसे मारा उन्होंने ? सचमुच आप बहुत दहशत में होगे इस वक्त की इस बार ये कौन से मौत देने जा रहे है आप को ? अब इनका क्या इरादा है ? आज़ादी की पूरी लड़ाई में तो ये आप के खिलाफ खड़े थे और आप के बहुत से साथियों को इन्होने पकड़वाया और गवाहियाँ देकर सजा करवाया था | ज्यो ही देश आजाद हुआ ये अचानक धर्म विशेष के राज्य के पक्षधर हो गए और तांडव मचा दिया था इन्होने | जब लाखो की क़ुरबानी के बाद देश आज़ादी का जश्न मना रहा था उस वक्त ये तुम्हारे विचार की हत्या करने उतर गए थे मैदान में | जब तुम शांति करवा कर लौटे तो पैर छूने के बहाने से दाग गिया था गोली इन्होने तुम्हारे कृशकाय शरीर में |
आखिर चौकने की बात तो है बापू ,,आप भी चौंक रहे है और आप के सभी पुजारी भी चौंके है चौंका है ये तुम्हारा पूरा देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में आप को मानने वाले चौंके भी है और चौकन्ना भी है |
बापू आप विश्राम करिए ,आप ने बहुत पुरसार्थ पहले ही किया है ,उतार दिए थे अपने महंगे कपडे की जब तक यहाँ सभी के शरीर पर पूरा कपडा नहीं होगा आप एक कपडे में रहेंगे ,,देख रहे होगे आप गरीबी का मजाक उड़ाते लोगो को हर घटे बदलते कपडे और विचार ,,आप हो गए कृशकाय पर नहीं झुके उनके सामने जिनका सूरज नहीं डूबता था बल्कि उनके सूरज को पच्छिम में जाकर डूब जाने को मजबूर करा दिया ,,चाहे किसी से मिले या कही भी गए अपनी वेश भूषा में गए और अपनी शर्तो पर मिले पर तुमारी ये खुद्दारी कही दम तोड़ती दिख रही है |
पूरी दुनिया में तुम्हे सिखा दिया अहिंसा का मंत्र और हिसक लोग तुम्हे खिलौना बना कर खेलने की कोशिश कर रहे है | तोड़ दी आप ने देशो की सीमाए मानवता के सवाल पर, पर मानवता को कुचल देने का पूर्ण इरादा रखने वाले आप की भावना का मजाक उडा रहे है | आप ने लिख लिख कर जगा दिया था देश को और भगा दिया था आज़ादी के दुश्मनों को और आज लिख और बोल बोल कर लोग आप की दी गयी आज़ादी और लोकतंत्र को ग्रहण लगा रहे है |
हाँ बापू हमें याद है हमारा नारा ;;बापू हम शर्मिंदा है तेरे हत्यारे जिन्दा है ;; पर क्या करे भावनाओ में बहने वाला ये देश कभी कभी १९४७ की तरह की अफवाहों और भावनाओ में बह जाता है ,,फिर जब भी जाता है और सुधार देता है अपनि भूल को और पश्चाताप कर लेता है और फिर मजबूत हो जाता है आप का देश ,आप की दी गयी आज़ादी ,आप के सपने का लोकतंत्र ,और मानवता | पर बापू बीच बीच में ग्रहण लगता रहता है आप के प्यारे हिन्दोस्तान को | हम शर्मिंदा है बापू इस बार बार लगने वाले ग्रहण के लिए | बापू फिर भी हम आप को प्रणाम करते है आप को आप के जन्मदिन पर और बस विश्वास ही दिला सकते है की आप ने अकेले इतना बड़ा साम्राज्य पलट दिया था तो अब तो आप के मानने वालो की बहुत तादात है |
आप बस देखते रहो अपनी बेचैनी छोड़ कर हम पहरेदार बन कर खड़े है और आप के  प्यारे देश को अब गुलाम नहीं होने देंगे और दुबारा आप की हत्या नहीं होने देंगे वो चाहे किसी भी तरह करने को कोशिश हो रही हो ? आप के हत्यारे पहचाने हुए है और हमारी निगाह में है | हमें याद है आप का नारा करो या मरो ,,हमें याद है आप का भजन और उसका मर्म ;इश्वर अल्ला तेरो नाम ;; अगर भेष और भाषा बदल कर कोई साजिश भी हो रही है तो उसे हम सफल नहीं होने देंगे बापू | हम खुर्दबीन से देख रहे है गोलवलकर की किताब का भाष्य कहा कहा हो रहा है और उसका रास्ता कहा तय हो रहा है ,,हम ढूढ़ रहे है वो पुस्तके जिनमे तुम्हे हर मारा गया हाउ बापू |
आप विश्राम करिए बापू हम खड़े है उसी तरह जिस तरह गरीब का बेटा खड़ा है सरहद पर की आप के दुश्मनों की फ़ौज चाहे कितना भ्रस्ताचार कर रही है और भर्स्ट व्यापर कर रही है पर वो खड़ा है की बापू के देश पर कोई गन्दी निगाह न पड़े | हम हम खड़े है बापू | हम हम समझ रहे है की हत्यारों के परिवारी जानो द्वारा आपकी तरफ बढ़ना आप को सचमुच बहुत बेचैन किये है पर बापू आप तो अनंत शक्तियों के मालिक हो तभी तो ये पूरी कोशिश कर भी महज आप के शरीर को मार पाए |  कहा मार पाए आप को | आप तो खड़े हो विचारो के साथ पूरी दुनिया में ,जिधर भी ये जाते है आप खड़े दिखाते हो और जिसके यहाँ भी जाते है वो बस आप की ही चर्चा करता है और आप की याद पर जाने को मजबूर करता है | क्या बीतती होगी इन पर बापू ये तो उसी क्षण बिना मौत ही मर जाते होंगे अपनी निगाह में ,अपने दिल में ,| बापू मजबूर हो गए है ये और इनके परिवारी जन आप की तरफ बढ़ने को दुनिया के सामने शर्मिंदगी से बचने को जब तक ये उतने शक्तिशाली न हो जाये की हर इन्सान के दिल से ,देश के कोने कोने से और दुनिया के चप्पे चप्पे से आप को मिटा न दे और ये मुझे तो संभव नहीं दिखता इसलिए बापू अपने विचारो की ताकत पर भरोसा कर आप विश्राम करिए और आपकी आभा पर विश्वास कर हम भी बैठ जाते है पर आँखे खोले हुए और हर पल चौक्कना इनके वार से आप को बचने के लिए |
अच्छा बापू हमें माफ़ करना अब तक के लिए की ३० जानवरों १९४८ को आप से किया वादा हम पूरा नहीं कर पाए की आप की हत्या करने वाली विचारधारा को अब सर नहीं उठाने देंगे | लेकिन हमें और शर्मिदा तो आप नहीं देखना चाहेंगे इसलिए हम पर विश्वास करते हुए अपने जन्मदिन को मनाने दीजिये और आप भी जन्मदिन पर हमरा कृतघ्न प्रणाम स्वीकार करिए बापू |
इन्सान का इन्सान से हो भाईचारा ,यही पैगाम तुम्हारा | तुम्हारे प्रिय नेता जी का नारा ;जय हिन्द |

हमें जीत को ताकत में ,उत्साह को विनम्रता में ,ख़ुशी को और ज्यादा जिम्मेदारी में ढाल लेना होगा ।सर ठंडा और पैर जमीन पर रखना होगा ।तब 2017 भी अपना होगा ।
जब बीजेपी जीत जाती है तो उसका पूरा श्रेय आर एस एस ले जाती है ।
इस चुनाव में संघ दशहरा की छुट्टी पर था या होनोलुलु गया हुआ है ?
प्रधान प्रचारक जी जिस वक्त चीन के राष्ट्रपति भारत के दौरे पर हो उसी वक्त सीमा पर हरकत महज जापान की धरती पर की गयी वो हरकत की जा मैं तेरे साथ नहीं खेलता बल्कि तेरे पडोसी के साथ खेलूँगा का जवाब भी था और उनकी तरफ से चेतावनी भी ।
मेरे विचार से चीन tuch with care की चीज है ।
मैं दिल्ली में बैठा विदेश नीति का विद्वान तो नहीं हूँ जो 52 साल से चीन की समस्या का निदान ढूढ़ रहे है पर देशभक्त नागरिक जरूर हूँ जो देश के साथ फिर 1962 नहीं देखना चाहता ।इस बार हुआ तो बस तबाही होगी ।
आज मैंने रामबारात के अवसर पर जनकपुरी में मुख्य अतिथि के रूप में एक परंपरा का विरोध करते हुए उसे मानने से इनकार कर दिया ।
इन मंचो पर हर बार मंत्रियो और अधिकारियो को अतिथि के रूप में बुला कर सम्मानित किया जाता है ।
इस बार मैं मुख्य अतिथि था तो मैंने इस परंपरा से इंकार करते हुए इस मंच पर माला पहनने और सम्मानित होने से इनकार कर दिया ।
चाहे स्वरुप ही सही पर ये भगवांन का मंच है उस पर भगवान् के आलावा और कोइ कैसे समानित हो सकता है ।मैंने आगे के लिए भी आयोजको से आग्रह किया की ये परंपरा बंद करे ।
कल शाम केंद्रीय मंत्री वालियांन और बीजेपी के नेताओ ने इसी मंच पर मुकुट धारण कर अपना स्वागत करवाया था ।वो लोग राम भक्त है इसलिए ये कर सकते है पर मैं असली राम को जानने और समझने वाला हूँ इसलिए मैंने ये किया ।
अब सही गलत का फैसला तो सचमुच की श्रद्धालु जनता ही कर सकती है ।हे राम हे राम हे राम ।
पता नहीं क्यों मुझे ऐसा लगता है की बाहरी कूड़ा करकट और मैल साफ़ करने से पहले अपने मन की ,आत्मा और दिमाग की मैल साफ़ करना ज्यादा जरूरी है ,क्योकि ये मैल ज्यादा घातक और नुकसानदायक और खतरनाक है ।जय हिन्द ।
प्रधान प्रचारक जी आप अभी तक केवल भाषण कर रहे है और भाषण भी बहुत उथला होता है। अब करना कब शुरू करेंगे ।देश इन्तजार कर रहा है ।
आज भी सयुक्त रास्त्र संघ में अपनी अज्ञानता को छुपाने के लिए ऐसी ऐसी बाते कही जिसमे वहां बैठे हुए लोगो की कोई रूचि नहीं थी ।दिख रहा था की लोग ऊब रहे है ।कही का ईंट कही का रोड़ा टाइप का भाषण था और क्या नागपुर ने आदेश दिया था योग जैसी बाते करने के लिए ।क्या मतलब उन लोगो का ।
भारतीय लोगो को तो ताली बजाना ही था और खत्म होने पर खड़े होकर भी बजाना था ।पर अगर अन्य लोग भी खड़े होते तो बात होती ।
मीडिया के दोस्तों आप लोग तिल का ताड़ बना कर दिखाने की कोशिश कर रहे है और कुछ ऐसा बताने की कोशिश कर रहे है की कुछ अभूतपूर्व हो रहा है ।ये आप की अज्ञानता के कारण है या फिर कुछ और कारण है इसके पीछे ये चर्चा हो रही है अब जनता में ।
आप हवा तो बनाते हो पर उसकी सच्चाई दूसरे लोग खोल देते है अन्य माध्यमो से ।
आप की तथास्थाता तथा विश्वसनीयता भी जरूरी है भारत के लोकतंत्र के लिए प्लीस उसे बचाए रखिये वरना एक खम्भा जनता के लिए बेमायने हो जायेगा ।
और प्रधान प्रचारक जी घूमना फिरना तो बहुत हो गया अब वादे पूरे करने पर भी कुछ समय दीजिये ।और जो बड़ी बड़ी बाते किया था कुछ उसका भी मुजाहिरा हो जाये ।
अब आप के भाषण बोर करने लगे है ।
जयललिता को मिली पूर्ण सजा क्या भारतीय राजनीती को कुछ बदलेगी ?और नेताओ के साथ साथ अधिकारियो के ,इंजीनियरों का ,ठेकेदारों का और दलालों का कार्य कलाप कुछ बदलेगा ?दलाल और छिनाल [ इसका गलत अर्थ न लगाये मेरा मतलब सब कुछ छीन लेने वाले से है धन दौलत और इज्जत भी ] कुछ ज्यादा ही तरक्की कर रहे है |देखते है भाई क्या होता है ,औऊऊऊऊऊ
ये अमेरिका में ताली बजाने वाले और भारत की तर्ज पर नारा लगाने वाले कितने में मिले ? इनको मैनेज करने वाले जो एक महीने पहले से अमेरिका में डेरा डाले है उन भाजपाइयो और संघियों को क्या इनाम मिलेगा और मीडिया में बैठे संघी दोस्तों को कुछ ऊपर से मिल रहा है या नहीं दिवाली गिफ्ट में या कमिटमेंट है नागपुर के प्रति ,,,,अरे वही वाला हस्तिनापुर के सिंहासन से बंधे होने वाला |
समाजवादी पार्टी की सरकार और इसके मुख्यमंत्री अखिलेश यादव बनाम प्रधान प्रचारक --+.
बीजेपी के 100 दिनों के कामों को जनता देखचुकी है और
हमारे युवा हृदय् सम्राट माननीय
मुख्यमंत्री श्री अखिलेश यादव जी ने दो साल छ:माह में
जो कर दिखाया है वो आज तक किसी भी मुख्यमंत्री ने
नही किया है !
>लैपटॉप वितरण -वादा पूरा किया
>मुफ्त पढ़ाई -वादा पूरा किया
>मुफ्त दवाई -वादा पूरा किया
>मुफ्त सिंचाई -वादा पूरा किया
>मुफ्त इलाज -वादा पूरा किया
>मुफ्त ड्रेस वितरण -वादा पूरा किया
>लायन सफारी -वादा पूरा किया
>किसान कर्ज माफी -वादा पूरा किया
>मुफ्त तीर्थ यात्रा -वादा पूरा किया
>बुनकरों की बिल माफी -वादा पूरा किया
>बेरोजगारी भत्ता -वादा पूरा किया
>साईकिल वितरण -वादा पूरा किया
>शिक्षक भर्ती -प्रक्रिया जारी
>TET भर्ती- प्रक्रिया जारी
>चिकित्सक भर्ती -वादा पूरा किया
>सफाई कर्मी का स्थायीकरण-वादा पूरा किया
>शिक्षा मित्रों समायोजन -वादा पूरा किया
>मेट्रो निर्माण -लखनऊ का कार्य शुरू, कानपुरका DPR
प्रक्रिया में।
>41 हजार अनुदेशक भर्ती किये
>शिक्षामित्र शिक्षक बनाये
सविंदा सफाईकर्मी का वेतन 13600 किया
>महिला सुरक्षा -1090 का सफल आयोजन
>समाजवादी पेंशन योजना -प्रक्रिया जारी
>एंबुलेंस सेवा -वादा पूरा किया
>ग्रीन पार्क स्टेडियम का निर्माण -वादा पूरा किया
>पुलिस भर्ती -रिजल्ट घोषित
>सड़क निर्माण -कार्य शुरू कर दिए गए
>दुग्ध उत्पादन -अमूल्य, अमूल, मदर डेयरी के
कईडेयरी खोल, वादा पूरा किया
>गौ हत्या - प्रतिबंध लगा करवादा पूरा किया
>फसल बीमा योजना -वादा पूरा किया,फसलनुकसान में
दोगुनी राशि का भुगतान
>बैटरी चालित रिक्शा -60000लोगों को वितरण कर
वादा पूरा किया
>दुग्ध उत्पादन में बढ़ोतरी का लक्ष्य - नम्बर
एकहो वादा पूरा किया।
>वैट या कर कटौती -वैट कम कर, कोई
नया करना लगा वादा पूरा किया
>लखनऊ आईटी हब- निर्माण कार्य शुरू,वादा पूरा किया।
>2017 तक 24 घंटे बिजली के लिए प्रयास-यूपी सरकार चार
सबस्टेशन 400
KV 21 सबस्टेशन220KV और 63 सबस्टेशन 132 KV
कैपिसिटी केनिर्माणाधिन है जब कि 10 सबस्टेशन
कमीशनयानि चालू कर दिए गए हैं। आगे के तीन महीनेमें
39और प्राइमरी सबस्टेशन को चालू कर दिएजायेंगे,इस
वित्तीय वर्ष में 40 और सबस्टेशन के
निर्माणका प्रस्ताव रखा है ।1.34 लाख गांवों के
विद्युतिकरण, मीटर,केबलिंग,भूमिगत विद्युतिकरण,
ट्रांसफार्मर के लिएसरकार ने 7282 करोड़ रुपये दिए गए
हैं कार्य चलरहा है ।आपूर्ति सुधार, पावर प्लांट, थर्मल
पावर प्लांटकेनिर्माण, रखरखाव, एवं नये निर्माण के
लिए22000करोड़ रुपये का कार्य प्रगति पर है ।
कई जिलों में सोलर पावर प्लांट के कार्य PPP के तहत
प्रगतिशील हैं ।विधायक निधि में 25 लाख
प्रति वर्षचिकित्सा सहायता के लिये अनिवार्यकिया !
गरीब की सवारी साईकिल को वैट से मुक्त किया ।
20 जिला मुख्यालय प्रराम्भिक चरण में 4 लेंन सड़को से जुड़ रहे है ।
पांच साल पूरा होने तक अधिकतर जिला मुख्यालय 4 लेंन सडको से जुड़ जायेंगे ।
पांच साल पूरा होने से पहले खुद बिजली का 2 हजार मेगावाट उत्पादन शुरू कर देंगे ।
पांच साल पूरा होने तक लखनऊ के साथ कानपूर और शायद आगरा में भी मेट्रो का कार्य शुरू हो जाये ।
2017 तक अधिकतम सड़के बन चुकी होंगी ।
उत्तर प्रदेश सरकार बुजुर्गो को तीर्थ यात्रा करवा रही है मुफ्त
उत्तर प्रदेश सरकार मानसरोवर यात्रियों को पैसा देती है
2017 तक दस लाख से अधिक को रोजगार दे देगी ।
2017 तक कई शहरो सी सी टीवी कैमरे लग जायेंगे और पोलिस का आधुनिकीकरण हो जायेगा
बिजली में हम आत्मनिर्भर हो जायेंगे बशर्ते -
यदि केंद्र सरकार कोयला सप्लाई समय से करे और प्रचुर
मात्रा में करें तो यूपी भी उजाले में जी सकता है
प्रधान प्रचारक ने कहा क्या किया क्या --
100 दिन में महगाई ख़त्म कर दूंगा - बढा दिया
100 दिन में काला धन ले आउंगा - क्या हुआ और कितने पैसे आये
पाकिस्तान एक मरेगा तो हम सौ पर उसने तो कई मार दिए -क्या किया
चीन को मुहतोड़ जवाब हम देंगे - क्या दिया
पूरे देश को बिजली देंग- उत्तर प्रदेश की काट रहे है
कांग्रस मुक्त करना है - सब कांग्रेस के कार्यो का फीता काट कर अपना बताने की कोशिश
कांग्रेस की नीतिया ज्यो की त्यों अपना लिया है ।
आज इतना ही काफी है तुलना करने को ।
समाजवाद और गांधीवाद साथ साथ चलने वाले विचार है समता सम्पन्नता और मानवता के लिए ।
प्रदेश के विकास में भागीदार बने !
हम पेड मीडिया तो नही पर अपने द्वार शेयर कर के
दूसरो को जरूर जागरूक कर सकते है !
जय हिन्द |
संघ वाले राम माधव और कई लोग कई दिनों से अमेरिका में है और मीडिया में घुसे संघियो के साथ मिल कर जो कर रहे है वो सभी देख रहे है ।क्या कभी देखा है आप ने की किसी भी प्रधानमन्त्री और उनकी पार्टी ने या उनके पीछे खड़ी ताकतों ने ऐसा किया है ।क्या ये देश के साथ की गयी वादाखिलाफी और असत्य तथा असफलता से ध्यान हटाना नहीं है ?
दुनिया में रहने वाले प्रधानमंत्री से मिलते है और उनके मुद्दे होते है और ये दिखा भी केवल एक चेनल पर कि विज्ञानं की तरक्की करे ।क्या हम दुबारा भारत आकर रह सकते है ?क्या वहां हमें सभी सुविधाएँ मिलेंगी ? इत्यादि ।
क्या संघ के इरादे के बारे में जो सोचता रहा हूँ वही सब करने की तयारी में है संघ ?
मैं थोडा सहज हुआ था उपचुनावों की इनकी हार से पर अब फिर असहज हो रहा हूँ देश के लोकतंत्र के भविष्य को लेकर ।
भारत के लोगो की नाच गाने ,मेले ,कव्वाली ,,भजन सब अच्छा लगता है और इसी में गम भूल कर राम जाते है इसलिए कोई बात नहीं | वैसे सब होता रहा है और हो रहा है की आप मूल मुद्दों को भूल जाओ ,असंतुस्ट न हो जाओ और चर्चा न शुरू कर दो की किसी ने चुनाव में और उससे पहले क्या क्या कहा था | हो वो सब रहा है जो कभी नहीं कहा था | बाकि आप सभी की मर्जी |
बड़ी पुँरानी कहावत है ;;;थोथा चना बाजे घना ::: जय हिन्द ,,,
क्या अमरीकी जनता में भी बीजेपी का प्रचार हो रहा था ।ऐसी घटना पर सिंगापुर के प्रधानमन्त्री ने वहा की हिंदुस्तानी जनता को कह दिया था की आप सब हिंदुस्तान लौट जाओ पर सिंगापूर में रहना है तो यही का नागरिक बन कर रहो ।दूसरे देश की राजनीती का हिस्सा मत बनो ।
ग्रेटर नॉएडा से होते हुए नॉएडा एक्सटेंशन में सैमसंग के कार्पोरेट ऑफिस में ।क्या ये नॉएडा ,ग्रेटर नॉएडा और यहाँ मौजूद ये सारे ऑफिस और फैक्ट्री प्रधान प्रचारक की देंन है ?
आकर देखिये क्या शानदार है सब और चौड़े नेकर वालो को लगता है की देश में 1947 से कुछ हुआ ही नहीं ।गुजरात में है कोई नॉएडा और ग्रेटर नॉएडा जैसा शहर ।
मेट्रो ट्रेन या तो पिछली सरकारों ने चलाया है या समाजवादी पार्टी सरकार ने चलाया और आगे भी चला रही है ।
बीजेपी की किसी सरकार ने एक भी मेट्रो चलाया हो तो मेरा ज्ञान बढा दीजियेगा ।अरे जो 15 साल में एक मेट्रो नहीं चला पाए वो बुलेट ट्रेन की फेंक रहे है ।
गुजरात में सड़को पर नाव चलना ,उद्घाटन के बाद ही पुलो का गिर पड़ना और दंगे दिख रहे है ये अलग बात है की मीडिया के बजाय सोशल मीडिया पर ।
फेकने वाले हमें भी बता दे की मीडिया को इतना डराया कैसे है ? या सब व्यापार के भ्रस्ताचार की --
चलिए समय ने सबका न्याय किया है ।झूठ के पांव नहीं होते ये सुना था पर ये भी सत्य है की जनता झूठ को किनारे तक पहुंचा कर रहती है ।
जय हिन्द ।
जरा चुनाव आयोग स्पष्ट कर दे की क्या सचमुच 125 करोड़ लोगो ने किसी को प्रधान प्रचारक चुना है ? या संख्या कुछ घटने की गुंजाईश है ? और कुल वोटर कितने है ?
अमरीका में तो सच ही बोला होगा ।क्योकि वही की वही वोबामा वाली एजेंसी ने चुनाव से लेकर पाच साल आगे तक का ठेका लिया है प्रचार और ब्रांडिंग का ।
कुछ समझ ????
आजकल डमरू बजाने वाले कही दिख नहीं रहे है सडको पर ,,पता नहीं कहा गायब हो गए है ,,,उनके डमरू पर इकट्ठे होने वाले लोग भी | डमरू वालो ने शक्ल और पेशा बदल लिया क्या ???
जब इंग्लैण्ड सहित कई देशो के राजाओ के बच्चो का भी फ़ौज में कुछ दिन केवल नौकरी करना नहीं बल्कि सीमा और युद्ध में जाना भी अनिवार्य है तो भारत में सभी नेताओ ,,अधिकारियो ,,इंजीनियरों ,,ठेकेदारों ,,और पूजीपतियो से पहले शुरू कर और बाकि लोगो की इच्छानुसार ऐसा अनिवार्य क्यों न हो ,,,मैंने तो अपने इकलौते बेटे को भेजा था पर अभी तक के दो प्रयास में भी उसका चयन नहीं हुआ ,,,पहले खुद और बेटे को भेजने के बाद ये विचार दे रहा हूँ |
क्या विचार है आप सभी का और वर्तमान पुलिस वालो का तीन साल में एक बार ६ महीने के लिए सीमा पर जाना अनिवार्य हो |
मेरे नेताओ ने रटाया था की एक पल की सम्मान की जिंदगी सौ साल के अपमान की जिंदगी से बेहतर होती है | क्या ये सच है ?? क्या उसके बाद जिंदगी का कोई मतलब नहीं ??? या कृष्ण ने कहां था अपमान होने पर ;;;
रे दुर्योधन मैं जाता हूँ
तुझको संकल्प सुनाता हूँ
याचना नहीं अब रण होगा
ये रण बड़ा भीषण होगा
दुर्योधन तू भूशाई होगा
हिंसा का उत्तरदायी होगा

ये भी रास्ता है
और रस्त्र्कवि दिनकर ने जयप्रकाश आन्दोलन में कहा था --
कुर्सी खली करो की जनता आती है
और मैंने देखा है की फ़कीर बन कर सड़क पर उतर जाओ
सड़क तुम्हारी हो जाती है और सड़क तथा खेत खलिहान के लोग भी ,,
ये जज्बा भी पैदा किया जा सकता है ,,,,
जो तथस्थ है समय लिखेगा उनका भी इतिहास .....
एक जीत क्या मिल गयी की ये कहने लगना की की देश में आज से पहले सब बहुत बुरा था और जो भी व्यवस्था में रहे सब बहुत बुरे थे ,,पहली बार कोई आसमानी खुदा आया है ,,क्या दुनिया के किसी नेता ने विदेश में जाकर कभी ऐसा कहा है ? क्या देश इससे सहमत है ? और क्या इससे दुनिया को अच्छा सन्देश जा रहा है ?
क्या ये ठीक है ? अपने ही देश का आज़ादी के बाद के पूरे समय का मजाक उडाना क्या कही आज़ादी की लडाई में गद्दारी करने वाले संगठन का कोई छुपा कार्यक्रम का हिस्सा है ?
ये कहना की देश में बहुत हुआ है और अब नया क्या क्या हो रहा है तथा क्या सम्भावनाये है वो तो ठीक था पर ,,,खुद को चमकाने को बाकि सबको गिरा देना ये नयी राजनीती है और मेरी बात याद राखी जाये ,,,मैंने कहा था १६ मई को की देश एक अहंकारी को पा रहा है तो फिर मेरा दावा है की असफलतम प्रधानमंत्री को देखने जा रहा है और अब मेरा विचार और पक्का होता जा रहा है |
अगर आप फकीरी को लेकर सड़क पर निकल जाओ तो सड़क क्या दुनिया आप की है और आप जैसे सभी आप के साथ काफिला बना लेते है ।
बस इरादा मजबूत कर निकलने की देरी है ।
दोस्तों मैं अपनी वाल पर जो भी लिखता हूँ वो मेरे विचार होते है ।वो मेरे समर्थको के लिए होते है या तटस्थ लोगो के लिए ।
मैं आप में से किसी को टैग नहीं करता हूँ की मुझे पढना आप की मजबूरी हो और मैं आपसे कमेन्ट की अपेक्षा कर रहा हूँ ।
मैं संघियों के लिए तो कतई नहीं लिखता हूँ ,न किसी संघी की वाल पर या बीजेपी के किसी की वाल पर जाकर कोई कमेन्ट करता हूँ ।
इसे आप सभी मेरा अपना अभियान समझ ले जिससे आप सहमत नहीं है तो न तो पढ़िए और न कुछ लिखिए ।
अन्ना और केजरीवाल आन्दोलन तथा रामदेव यादव के प्रकरण में भी काफी लोग मेरी काफी आलोचना कर चुके और काफी गलियां दिया था और फिर अंतिम सच सामने आने पर पूर्ण मौन हो गए ।एक बार खेद ही व्यक्त कर दिया होता ।
प्रधान प्रचारक के मामले में तो काफी धमकिया भी मिल चुकी है क्योकि ये सीधे सीधे फासीवादियो का मामला है ।इसका अंतिम सत्य भी देखेंगे ।
आपातकाल का आतंक और तब कांग्रेसियों का रौद्र रूप भी देखा था और उनका परिणाम भी देखा ।
कुल मिला कर ये है की देश मेरे लिए दल का नहीं बल्कि दिल का सवाल है और दिल में भावनाएं होती है तथा दिमाग और अनुभव भी जुडा हो तो जिम्मेदार विचार और अभिव्यक्ति भी साथ होती है ।
बहुत से मामलों में मैं जिनके साथ खड़ा हूँ उनके ख़िलाफ़ भी अभिव्यक्ति दे चूका हूँ और देता रहता हूँ ।जिसका खामियाजा भी उठाया है
आप भारतीय हिटलर के समर्थक हो सकते हो पर मुझ पर हिटलर को थोप नहीं सकते ।मैं चाहे अकेला हूँ पर अपना कर्त्तव्य निभाता रहूँगा ।
उम्मीद है की आप भारत में फासीवाद को मजबूत करते हुए और एक व्यक्ति को हिटलर में तब्दील करते हुए खुश होंगे पर मुझे भारत की आज़ादी और लोकतंत्र की लड़ाई लड़ने से नहीं रोकेंगे ।
अब भी आप को निराशा ही हाथ लगेगी ।इश्वर से प्रार्थना है की महा मानव के बजाय कुछ लोगो को सचमुच में मानव ही बना दे अहंकार विहीन ,हिंसा और तानाशाही विहीन मानव और उनकी मतिभ्रम को ख़त्म कर उन्हें महान भारत की सेवा की तरफ प्रेरित करे जिसकी आजादी में फासीवादियो का कोई सहयोग नहीं था बल्कि गद्दारी से इतिहास भरा है तो अब कम से कम आज़ाद भारत के वाशिंदो की पीठ में छुरा न घोपे और आज़ादी तथा लोकतंत्र को रौंदने की कोशिश न करे ।और मेरा नारा है -- जय हिन्द ।
हिन्दोस्तान के बारे में और हिन्दोस्तानियो के बारे में एक बात सभी समझ ले ।
हाँ हिन्दोस्तानियो को चाहिए --
रोटी ----- कपड़ा ----मकान ---- गाड़ी ---- शिक्षा ----चिकित्सा ।सब कुछ चाहिए जो दुनिया में किसी के भी पास है ।
पर उसे सबसे साथ हर हाल में चाहिए ----
आज़ादी और उन्मुक्त हंसी ।

जो ये छीनने की कोशिश करेगा उसे हिन्दोस्तानी सबक सिखा कर अपनी आज़ादी और उन्मुक्त हंसी छीनना जानता है ।
मेरी कॉम को देश का सलाम ।
बेटियों की कोख में हत्या करने वालो जरा गिन कर देखो की पिछले खेलो से लेकर इस एशियाई खेलो तक देश का आप का सर ऊँचा करने वालो में बेटियां कितनी है ?
पदक जीतने वाले सभी को और विशेषकर बेटियों को मेरे नेता मुलायम सिंह यादव् ,मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ,समाजवादी पार्टी और मेरी तरफ से ढेरो बधाइयाँ ,शुभकामनायें और भविष्य के लिए मंगल कामना की ओलम्पिक में भी आप सभी देश का नाम बढ़ाये । जय हिन्द ।
फेकने वालो और मीडिया में दिन रात असत्य बोलने वालो मैं भी ढूढ़ रहा हूँ तुममे थोड़ी नैतिकता हो तो नेहरु जी ,शास्त्री जी ,इंदिरा गाँधी की फोटो भी दिखाओ और वीडियो जब वो दौरों पर गए तथा मुलायम सिंह यादव जब रक्षा मंत्री के रूप में रूस गए थे और पुतिन ने उनका स्वागत किया था जरा वो भी दिखाओ ।
पर ये सिद्ध करने की कोशिश की भारत में पहले सब बुरा था और कुछ नहीं हुआ तथा अब कोइ देवता आ गया है या देश को ये बताना की पहले दुनिया में भारत की कोई कीमत नहीं थी ये तुम्हारी बेईमानी है ।
अज्ञानी भर गए है मीडिया में या जान बूझ कर नागपुरी एजेंडे के तहत पीछे का सब मिटा कर नया इतिहास लिख रहे है तो अलग बात वर्ना दो धुरी वाले विश्व को नेहरु ,टीटो और नासिर की तिकड़ी ने गुट निरपेक्ष देशो को सौ से ज्यादा देश साथ लाकर चुनौती दिया था ।
इतिहास और भूगोल बदलने का काम किया था इंदिरा गाँधी ने किया और अमेरिका आकर खड़ा हो गया हिंद महासागर में पर परवाह नहीं किया और जो करना था कर के ही मानी ।
देश में अन्न का आभाव था तब जय जवान जय किसान के शास्त्री जी के नारे ने हालत बदल दिया और उसे कहते है जन नेता की आह्वान किया जनता से एक समय का अन्न छोड़ने का तो करोडो ने अन्न त्याग दिया था और हरित क्रांति ने हमें दूसरो को अन्न दान देने लायक बना दिया ।
संघी विरोध कर रहे थे कंप्यूटर का पर तत्कालीन प्रधान मंत्री लाये और आज उसी के कारण दुनिया में हमारा डंका बज रहा ।रोजगार भी मिला और तरक्की भी हुयी ।आई टी उद्योग लाये तत्कालीन प्रधान मंत्री और भारत खुद तरक्की करने के साथ दुनिया में छा गया ।
अमेरिका सहित कई देशो की तरह दिवालिया होने की कगार पर पहुँच गया था देश पर नरसिम्हा राव और मनमोहन सिंह न उसे पटरी पर लाये बल्कि दोनों के योगदान ने आज भारत की चौथी आर्थिक ताकत बना दिया तब आज किसी का स्वागत हो रहा है ।
नेहरु से शुरू कर सभी ने किया किसी ने नीव रखी तो किसी ने ईमारत को खड़ा किया ।किसी ने योजना बनायीं तो इन्दिरा ने दुनिया की परवाह न करते हुए परमाणु विस्फोट किया और आज हम परमाणु ताकत है ।नरसिम्हा राव् ने तैयार किया था पर परीक्षण नहीं हो पाया था तैयारी होंने के बावजूद क्योकि वो देश की अर्थव्यवस्था सुधार रहे थे पर डॉ कलाम ने खुद बताया की वाजपेयी जी को नरसिम्हा राव ने कहा था की तैयारी है परमाणु परीक्षण कर ले तब हुआ था ।पर नकली सम्मान बनाने वालो की तरह जो दूसरो के किये पर अपना नाम और मुहर लगा कर अपना बना देते है उसके आलावा क्या किया बीजेपी ने ।
याद रखना चाहिए की मुलायम सिंह यादव वो पहले रक्षा मंत्री थे जिनके समय उनके तेवर देख कर केवल एक हेलिकोप्टर की घटना जिस पर उन्हों एक छोटा आक्रमण ही कर दिया था पाकिस्तान पर फिर कभी गोली नहीं चली सीमा पार से ,न कोई घुसपैठ हुयी और न कोई आतंकवादी घटना हुयी और न चीन ने कोई हरकत किया ।
गैर कांग्रेस सबसे अच्छा शासन जनता पार्टी का था ।ये शासन आपातकाल के कोख से पैदा हुआ था पर देश ने संघ के कारण उसे खो दिया ।
दूसरी आज़ादी की लड़ाई से निकले हुए और जेल के दरवाजो से निकल कर शपथ लेने वाले इस दूसरे शासन में भी बीजेपी और इसके लोग बेईमान निकले ।बीजेपी तत्कालीन जनसंघ के कोटे से देश के उद्योग मंत्री बने थे वर्मा जी और उस आदर्श शासन में उन्होंने घूस खा लिया ।मोरारजी भाई उन्हें मंत्रिमंडल से निकालने लगे तो पूरी जनसंघ ये दुहाई देकर की पूरी सरकार और खासकर जनसंघ की बदनामी होगी उनसे पैसे लौटवाये पर उस वक्त के सबसे मह्त्वपूर्ण मंत्रालय से उन्हें हटा कर मोरारजी भाई ने ये मंत्रालय जोर्ज फर्नाडीस को दे दिया ।
प्रदेशो में भ्रस्ताचार कर रहे जन्संघियो पर जब चौ चरण सिंह ने तेवर दिखाए तो जनता पार्टी के भीतर बैठे संघियों ने सबसे बड़ी संख्या में जीत कर आये लोकदल और समजवादियों के खिलाफ साजिश कर प्रदेशो में सरकारे गिराने का षड़यंत्र किया ।
संघ और जनता पार्टी की दोहरी सदस्यता के सवाल पर दूसरी आज़ादी की कोख से निकली सरकार जो आदर्श काम कर रही थी गिर गयी ।
आप लोग ही थे जिन्होंने अतंकवादियो को कंधार पहुचाया और करोडो रूपये के साथ की उस पैसे से वो भारत पर हमला करे ।आप ही के समय कारगिल में दुश्मन घुस गया और आप नौटंकी करते रहे कभी बस यात्रा की और कभी मुशर्रफ को बिरयानी खिलाते रहे ।आप सोते रहे और दुश्मन संसद में पहुच गया ।सबसे ज्यादा आतंकी घटनाएं आप के समय हुयी और गरीब जवानों ने अपनी जाने देकर बचाया ।इसमें कही जमाखोरी ,मुनाफाखोरी और मिलावटखोरी करने वाले आप के किसी समर्थक के बच्चे का तो खून नहीं बहां और न किसी अदानी या अम्बानी का ही कोई योगदान दिखा ।इस देश में आप लोगो की विचारधारा और संगठन का योगदान क्या है देश का पेट किसान भरता है और आप उसकी उपज सस्ते में खरीद कर उसे महंगा सामान देते हो ।देश की रक्षा जवान करता है और आप उसके ताबूत में भी घूस खा जाते हो ।देश को मजदूर बनाता है और उसका शोषण तो करते ही थे अब उसे गुलाम बनाने के कानून वना रहे हो ।वाकी सारे काम और तरक्की खुद मेहनत कर आई टी से मनेजमेंट और विज्ञानं तक भी हमारे गरीब या माध्यम घरो के नैजवान करते है और आप की मिलावाटखोरी जहा उन्हें रोग दे रही है वही मुनाफाखोरी उनके जीवन को दूभर बना रही है ।वाकी आप के द्वारा बांटी गयी नफरत और आप के द्वारा कराये गए दंगो ने सबके किये को काफी पीछे कर दिया है ।अभी तक का तो कुल जोड़ घटाना इतना ही दिख रहा है आप का ।
ये बहुत थोडा लिखा है ।लगातार असत्य बोल कर बड़ी बड़ी बाते कर के केवल भ्रस्ताचार की कीचड में धंसे हुए लोगो ने अब तरीका बदल दिया है ।अब खुद संपत्ति रखने के स्थान पर पूंजीपतियों की सम्पत्ति बढा कर उसमे हिस्सेदार हो गए और देश के चुनाव को इतना महगा कर दिया की चुनाव लोकतंत्र पर बोझ बन जायेगा ।
खैर अब देश देख रखा है तरक्की की बड़ोदरा में सड़क पर नाव चल गयी तो क्या हुआ दुनिया आदर्श ड्रेनेज का ? कई दिन से बड़ोदरा जल रहा है ।जिन पुलो को साहेब ने बनाया उसमे से कई अभी गिरे है ।सफाई ऐसी की की चीन के रास्त्रपति से छुपाने के लिए मीलो लम्बी सड़क पर हरे कपड़ो की बाड़ लगानी पड़ी ।
शपथ में पाकिस्तान को बुला भेंट का आदान प्रदान किया और गिफ्ट में लाशे मिलने लगी ।चीन के साथ बढ़ा चढ़ा कर बाते की और चीन उसी समय घुस कर बैठ गया तथा अब हिन्द महासागर में डेरा डालने आ गया ।
तो मान्यवर हर घंटे कपडे बदलना आप का व्यतिगत मामला है तथा आप गरीबी से आये है और गरीब के लिए काम के रहे है तो गरीबी का मजाक मत उड़ाइए ।भूखा रहना आप का व्यक्तिगत मामला है इसका दुनिया के सामने तमाशा मत बनाइये ।आप बडबोले और अहंकारी है तो रहिये पर भारत आप का नहीं बल्कि 125 करोड़ लोगो का है और 125 करोड़ लोग अहंकार से घृणा करते है उन्हें दुनिया के सामने अहंकारी मत सिद्ध करिए ।आप के कोई विचार हो सकते है पर जैसे आप नहीं चाहते की भारत का कोई नागरिक दुनिया के किसी दूसरे देश का नारा न लगाये तो प्रधानमन्त्री पद का दुरूपयोग कर दूसरे देश में बसे भारतीय लोगो को वहां की जनता की निगाह में गद्दार मत बनाइये ।आप को खूब और कुछ भी बोलने का शौक है तो उसके लिए आप का पार्टी फोरम है तथा हर कुछ महीने में कही न कही चुनाव आने है खूब बोलिए ।
आप को सभी को नीचा दिखाने का शौक है तो वो आप अपने घर और अपनी पार्टी में ही पहले पूरा कर लीजिये पर मेरे देश को या देश के महान लोगो के बारे में दुनिया के सामने गलत मत बोलिए इससे हम 125 करोड़ लोगो को गुस्सा आता है ।
और आप को केवल 29 % लोगो ने चुना था और उसमे से काफी लोगो ने बाद में अपना पछतावा भी दिखा दिया तो 71 % लोगो पर अपनी महत्वाकांक्षा मत थोपिये ।
मुझे लगता है की आइना दिखाने को इतना ही काफी है ।और अब मेरे साथ ये देश उम्मीद करता है की हमारी खून पसीने की कमाई किसी देश में गाने बजाने और इवेंट मैनेजमेंट में मत बहाइये ।
आप प्रधान प्रचारक है तो देश के काम से जाइये और इस एहसास के साथ जाइये की देश ने आप को कहा से कहा पहुंचा दिया ।पर देश को और उसकी साख को प्रयोग के लिए और अपनी पिछली तस्वीर को धोकर महान बनने के लिए मत इस्तेमाल करिए ।
जय हिन्द ।

मंगलवार, 26 अगस्त 2014

राजनीती पहाड़ की चढ़ाई और बर्फ की फिसलन होती है -----------------------राजनीती पहाड़ की चढ़ाई है जिसपर धीरे धीरे पैर जमा कर और झुक कर ही चढ़ा जा सकता है तन कर कभी नहीं | वहा टिकने के लिए पैरो को जमा कर खड़े होने के साथ शांत भाव से सांस भी लेना होता है |
पर राजनीती बर्फ की फिसलन है जिस पर फिसलने पर केवल खायी ही नसीब होती है | फिसलने पर जो या जिसे पकड़ने की कोशिश होती है वो भी खाई में साथ जाता है | बड़े नसीब वाले होते है की चोटिल होकर किसी पत्थर या पेड़ से टकरा कर वही रुक जाये और फिर दुबारा ऊपर जाने का मौका मिला जाये |
दिल्ली में बैठे बीजेपी वालो और नागपुर के संघ ने कहा की सीमा पर एक सर गिरेगा तो हम सौ लायेंगे और १०० दिन से उसका परिणाम देश देख रहा है |
आज आदित्यनाथ कह रहा है की यदि कोई हमारी एक लड़की ले जायेगा तो हम मुसलमानो की सौ लड़कियां लेकर आयेंगे और उनके साथ पता नहीं क्या क्या करेंगे | वो एक मारेंगे तो हम सौ मारेंगे |
ये गेरुवा पहनने वाला सचमुच कोई धर्मगुरु बोल रहा है या कोई अपराधी बोल रहा है ये फैसला देश को करना है और केंद्र में सरकार बनाने वाली तथा सबका साथ सबका विकास का नारा देने वाली पार्टी का जिम्मेदार सांसद बोल रहा है तो देश समझ ले की केंद्र की नयी सरकार का साली एजेंडा क्या है ? क्या ये देश को गाजा और नामीबियब बनाने का एजेंडा नहीं है |
मेरी मांग है की प्रदेश सरकार तत्काल जो कानून बनता है उन अपराधिक धाराओ में आदित्यनाथ के खिलाफ कार्यवाही करे |
ऐसा व्यक्ति खुद में कानून व्यवस्था के लिए चुनौती है और इसका खुले आम घूमना किसी हालत में मानवता के लिए ठीक नहीं है |
क्या पूरे संघ परिवार का वेश्यालयों से हिन्दू बेटियों को मुक्त कराने का कभी कोई संकल्प और कार्यक्रम रहा है ??
क्या सड़क और फुटपाथ पर बच्चे पैदा करने वाली हिन्दू बहनों को वहा से सम्मान की जगह ले जाने का कभी कोई कार्यक्रम संघ परिवार का रहा है या है ??
क्या चौराहों पर गाडियों का धक्का खाते हुए भीख मांग रहे हिन्दू बच्चो को सड़क से उठा कर स्कूल या या सम्मान की जिंदगी देने का कोई कार्यक्रम कभी संघ परिवार का रहा है या है ?
क्या इनमे से कुछ देश ने कभी सुना या देखा है ?

मंगलवार, 19 अगस्त 2014

जिस घर में ,समाज में या देश में सब बस अपने लिए ही जीने लगे और केवल अपनी चिंता करने लगे उसका विनाश कौन रोक सकता है |
कुछ लोग कितने बदनसीब होते है की बचपन से बुढ़ापे तक अपनों द्वारा ही सताए और मारे जाते है लगातार हर पल हर क्षण | पता नहीं कौन सी ताकत ऐसो को भी बेशर्मी से जिन्दा रखती है ये सब बर्दाश्त करने के लिए ?
भारत में हिटलर और फासीवाद को स्थापित करने की प्रक्रिया कब तक पूरी हो जाएगी ?
कौन बचाएगा इस भारत को महाभारत बनने से ?
कोई भी कायर और कमजोर ,अज्ञानी और अभिमानी , असत्य वादी मेरा नेता तो नहीं हो सकता है | आप अपने बारे में सोचिये |
शपथ ग्रहण समारोह में खिलाई गयी चिकेन बिरयानी और भेंट में दी शाल और साडी लगातार असर दिखा रही है | उस निमंत्रण को भाई लोगो ने कितने अहंकार से देश के सामने उपलब्धि के रूप में परोसा था |
पर देश धोखा न खाए अकेले में हुयी वार्ता में मोदी जी और नवाज जी में तय हो गया था की दोनों लगातार एक दूसरे की सरकार को बचाते रहेंगे जैसे भी जरूरत होगी वो हॉटलाइन पर चर्चा होकर फैसला होता रहेगा |
हो सकता है की अगले लोकसभा चुनाव से ठीक पहले एक छोटा सा युद्ध नुमा भी कुछ हो जाये | ये फैसला तो वक्त और सरकार की प्रतिष्ठा के हिसाब से होगा |
कितना तिल तिल मर रहे होते है जब आप खौल रहे होते है अपनी खून की बूँद बूँद में और लगता है की सभी नसे फट जाएँगी पर इतने मजबूर भी होते है की न कुछ कह सकते है और न जोर से रो ही पाते है की कुछ दर्द बह जाये | कितने मजबूर होते है ऐसे लोग |
क्या कलयुग में सचमुच पैसा और पैसा पैदा करवाने वाले दलाल समाज ,देश ,संगठन ,आज़ादी और लोकतंत्र से बहुत बड़े हो गए है ? क्या अब कार्यकर्ताओ का स्थान मैनेजर ,दलाल और कम्पनियाँ ले लेंगी ?
क्या बचपन से विचारधारा और नारों के पीछे जिंदगियां बिगाड़े हुए लोग कही दूर उठा कर फेंक दिए जायेंगे ?
या ऐसे सभी लोगो को मिल कर कोई जयप्रकाश ढूढ़ना होगा और एक नया युद्ध छेड़ना होगा या किसी को चंद्रशेखर बन कर पैरो के छाले का एहसास करते हुए जागरण के लिए पदयात्रा करनी होगी और ऐसो से लोकतंत्र को बचाने की मुहिम छेड़नी होगी ?
कुछ लोगो की जिंदगी में दो तरह की चीजें होती है एक साथ -
-१- वो अपनी ही समस्याओ में मकड़ी की जाले की तरह उलझ कर ख़त्म हो जाते है और उनकी प्रतिभा ,योग्यता और क्रांति वाही दम तोड़ देती है |
-२- आप की योग्यता और प्रतिभा को कोई मान्यता ही नहीं देना चाहता है और उसे प्रदर्शित करने का अवसर ही नहीं मिलता तो आप बने रहिये कार्ल मार्क्स से लाल बहदुर शास्त्री और किसी के भी जैसे |
अब टीवी चेनेल्स पर समाचार ,परिचर्चा ,बहस इत्यादि देखना छोड़ ही देना चाहिए | अब टीवी केवल हंसी ,गाने का कार्यक्रम देखने या इतिहास और जंगल इत्यादि दिखने वाले कार्यक्रम ही देखिये |
बाकि पूरा समय तो किसी का भोपू बन गया है
एक व्यक्ति कह रहा है टीवी पर की उसका उद्देश्य बस सरकार बनाना है | भुखमरी ,अशिक्षा ,कुपोषण ,खेत खलिहान ,किसान मजदूर ,स्वस्थ्य शायद मुद्दे होते थे दलों के | पर अब मुद्दा केवल सरकार बनाना रह गया है |
मैं सामने खड़ा हो गया ठीक से पूरी ताकत के साथ तो वादा करता हूँ की तुम्हारी सरकार नहीं बनाने दूंगा |
कुछ समझदार लोग राय दे रहे है की बड़े क्रन्तिकारी मत बनो बल्कि चुपचाप दलालवत हो जावो | इस नए इजाद शब्द पर बहुत दिमाग लगाया तो पता चला की ये दण्डवत का पर्यायवाची है |
क्या आप ऐसे बापों को जानते है जिनकी हत्या उनके बच्चे ही कर देते हो | बहुत देखे होंगे | पर जहर देकर मार दो ,सोते में गला दबा दो ,गोली मार दो  तो एक बार में काम ख़त्म | पर मैं ऐसे पिता को जानता हूँ जिसकी बेटी उसे कई सालो से हर पल मार रही है | इतने बेचारे बाप को आप ने नहीं देखा होगा |

बुधवार, 13 अगस्त 2014

किसान के खेत से ( 1) एक रुपये किलो में खरीदा और गरीब के खाने की एकमात्र सब्जी आलू भी 50 ( पचास ) रूपया कर दिया जमाखोरो और मुनाफाखोरो ने अपनी सरकार आते ही ।
उन्ही लोगो को वादा किया था मोदी ने की अच्छे दिन आने वाले है ।बीजेपी प्रवक्ता कह रहे है कि गरीब टमाटर नहीं खाता तो आलू और दाल क्यों छीन लिया गरीब की थाली से
एक ऐसा आदमी जिसने पार्टी को कमजोर किया तमाम बदनामिया दी और लम्बे समय के वफादार जुझारू साथियों को बाहर करवाया और अहंकार तथा बत्त्मीजियो के कारण फिर खुद निकाल दिया गया के बारे में ये भी तथ्य है ---
-1- इन्होने पहले कांग्रेस और फिर बीजेपी में जाने का प्रयास किया किसी ने नहीं लिया इनकी ख्याति के कारण ।
-2-इतने बड़े योग्य और रणनीतिकार है की अपनी पार्टी बनायी और नहीं चला पाए और इनका पैसा भी नहीं काम आया
-3- इनकी पार्टी चुनाव लड़ी और हर सीट पर केवल कुछ सौ वोट मिले ।
-4- अजित सिंह की पार्टी में गए तो उनकी लुटिया डुबो दिया ।
-5- अजित सिंह की पार्टी से उस सीट से चुनाव लड़ा जहा डेढ़ लाख से ज्यादा जाट मतदाता है और इतने ही ठाकुर पर 22 हजार वोट पर सिमट गए ।
-6- अगर ये मीडिया के बहुत प्रिय या आकर्षण है तो इतने दिन से कहा बियाबान में भटक रहे है ।
-7 - आप खुद सोचिये की इनकी क्या योग्यता और क्षमता है ।
-8- अगर घर का कोई कोना खाली लगे तो घर में भी ऐसी चीजे तलाशी जा सकती है जिनसे वो कोन सज जाये पर लोगो का बाहर फेका कूड़ा लाकर घर के कोने को भरना ?
-9-जिसने इतनी गलियां दिया और नंगा कर देने की धमकी दिया उसे सम्मानित करना??
-10-2012 के विधानसभा चुनाव में 224 सीटें इस सज्जन के बिना आई है ।ये याद रखना होगा ।
क्या आप इस बात से सहमत है की मेरे नेता और बड़े भाई मुलायम सिंह यादव जी अगर चाहे तो हर घंटे में सौ अमर सिंह बना सकते है पर एक हजार अमर सिंह मिल कर भी सौ साल में भी एक मुलायम सिंह नहीं बना सकते है ।
अब आप ही सोचिये कि किसको किसकी जरूरत है ।
एक नयी चीज देखने में आ रही है की अगर आप के पास ज्ञान है और आप मुह भी खोल देते है तो लोग आप से कटने लगते है ।
आप बस मौन रहिये और हाँ में हाँ मिलाते रहिये तथा हर बात की बस तारीफ करते रहिये तो देखिये हर वक्त और हर दरवाजा आप के लिए खुला मिलेगा और कही आप अच्छे पेशकार है तो बात ही क्या घर अन्दर तक बेरोकटोक जाइये ।
पत्तों को जलाने या उन पर डंडा चलाने से क्या होगा ।पेड़ भी रहेगा और जड़ें भी और आप का सारा क्रोध निरर्थक हो जायेगा तथा डंडे चलाते चलाते आप शिथिल हो जायेंगे ।अगर इरादा चाणक्य का हो तो जड़ो में मट्ठा डालना चाहिए ।
इसका मतलब निकलना अपना अपना काम है ।
एक बार पढ़ लो तो बीजेपी समर्थकों का भी खून खौल जाएगा......!!
1.काला धन इस जन्म में वापस लाना मुश्किल - संसद में भाजपा सांसद
2. काले धन पर कोई जानकारी नहीं मिल रही, आगे बढ़ना मुश्किल - अरुण जेटली
3. गौ-मांस पर टैक्स 10% से घटाकर 6% किया - बजट के दौरान वित्त मंत्री जेटली
4. धारा 370 हटाने का कोई इरादा नहीं - गृह राज्य मंत्री रिजीजू
5. चीन गलती से भारतीय सीमा में घुस जाता है - गृह मंत्री राजनाथ सिंह
6. सैनिको की हत्या के बावजूद पाकिस्तान से वार्ता जारी रहेगी - विदेश मंत्री
7. राम-मंदिर हमारे एजेंडे में नहीं है - अमित शाह
8. रोबर्ट वाड्रा का मामला व्यक्ति केन्द्रित है , मोदी जी से बात नहीं कर सकता - बाबा रामदेव
9. रोबर्ट वाड्रा की सारी अति विशेष केन्द्रीय सुविधाए जारी रहेंगी- नरेंद्र मोदी
10. महंगाई बढ़ेगी , आम आदमी कडवी दवा के लिए तैयार रहे - नरेंद्र मोदी
11. निकट भविष्य में महंगाई घटने की कोई उम्मीद नहीं - अरुण जेटली
12. बलात्कार की घटनाएं होती रहती हैं - कानून मंत्री
13. न्याय-पालिका को सरकार अपने अधीन लाएगी - कानून मंत्री
14. सीबीआई तो पहले से ही स्वतंत्र है - कानून मंत्री
15. FDI को हर क्षेत्र में लाना सरकार की प्राथमिकता - वित्त मंत्री
16. स्वदेशी उत्पादों को FDI से नुकसान नहीं - बाबा रामदेव
17. दिल्ली में बिजली के दाम बढ़ाना जरुरी था - उर्जा मंत्री पियूष
18. भ्रष्टाचार को रोकना लगभग असंभव - वित्त मंत्री
19. चुनाव सुधार की प्रक्रिया लम्बी, अभी अमल नहीं - मोदी सरकार
20. पेट्रोल-डीजल के दाम बढ़ाना जरुरी - पेट्रोलियम मंत्री धर्मेन्द्र
21. घरेलु गैस के दाम अक्टुबर में विधानसभा चुनावो के बाद दोगुने किये जायेंगे - पेट्रोलियम मंत्री
22. जिस दिन मोदी PM बने , उसी दिन से व्यवस्था परिवर्तन हो चूका है - बाबा रामदेव
भक्तो और कुछ रह गया हो तो बता देना,गालियाँ देने से देश की सूरत नहीं बदलेगी,नियत साफ़ होनी चाहिए, ब्रांडेड सूट पहन कर कोई आम आदमी की नहीं सोचेगा,अम्बानी की ही सोचेगा.
अब भी वक़्त है,पार्टी की नहीं, देश की सोचो...
सच का साथ दो.....जय हिन्द!!
जिसे हम राजनीती समझते है वो आजकल बड़े पूजीपतियों का खेल निकलता हैं | पता नहीं किस फैसले के पीछे कौन सा पूंजीपति और पैसा काम कर रहा है | पता नहीं किसको किससे लेना है और किसको क्या देना है और इसके लिए मध्यस्थ चाहिए |
आज की राजनीती बहुत साधारण नहीं रहीं | अब सिद्धांत और कार्यक्रम की तथा दलों की लड़ाई नहीं हो रही बल्कि बड़े पूजीपतियो के घरानों की लडाई हो रही है | कार्यकर्त्ता ,समर्थक और जनता ये समझ कर वोट देती है और मरने मारने को तैयार हो जाती है की उसकी खुशहाली की लड़ाई हो रही है |
जब नेता और नीयत बदल रही है तो कार्यकर्ता और जनता को भी नए तरीके से सोचना चाहिये और फैसला करना चाहिए |
कर्म करो और फल की चिंता मत करो ।क्या ये शोषण के लिए गढा गया नारा नही है ।क्या ये गरीब को गरीब और गुलाम को गुलाम बनांये रखने के लिए नहीं रचा गया ?
मैं तो इसे इसी रूप में लेता हूँ ।
इश्वर से बस इतनी दुवा है की मोदी और संघ का पांच साल शासन रहने के बावजूद लोकतंत्र और स्वतत्रता कायम रहे ।लाखो लोगो की क़ुरबानी के बाद और सैकड़ो साल बाद मिली है ये ।
कही सचमुच फासीवाद न आ जाये वर्ना बर्बाद हो जायेगा मेरा मुल्क ।
मुलायम सिंह यादव जी सियाचीन सिर्फ गए नहीं बल्कि वहां रुके भी पर ये मीडिया को चर्चा लायक नहीं लगा ।एक तो यादव और दूसरे संघी नहीं होना उनका गुनाह है ।
कई दिन दिन से सियाचीन की ऐसे चर्चा की जा रही है और ऐसे महिमामंडन किया जा रहा है तथा बनावटी कहानियां गढी जा रही है मीडिया में बैठे संघियों द्वारा जैसे मोदी कोई अनोखा और ऐसा काम करने वाले पहले हो ।
देश के लोगो अब समझने की कोशिश करो संघी मीडिया का कमाल ।
अगर दिल्ली में सपा या कांग्रेस सरकार होती तो टीवी की सुर्खियों में - पांच साल की बच्ची से बलात्कार और सो रही है सरकार ।।स्कूलो में भी इज्जत महफूज नहीं आखिर क्या कर रही है सरकार ? एक बच्चे को पांच ने बेरहमी से चाकुओ से गोद ।कहा बचा सरकार का खौफ ।सरकार पस्त और बदमाश मस्त ।
और ये सब समाचार एक महीने तक बहसों का और प्राइम टाइम का विषय रहते ।
काश दिल्ली में मोदी सरकार नहीं होती तो अब तक विजय चौक पर मोमबत्तियां जलवा दिया होता मीडिया में घुसे संघियों ने ।
क्या आप सभी ने ये समाचार कही देखा क्या ? और देखा भी होगा तो कुछ पल में सामान्य समाचार के रूप में ।किसी ने मोदी पर सवाल नहीं उठाया होगा जैसे मध्यप्रदेश और राजस्थान पर नहीं उठाते है
शिकायत सिर्फ इतनी की मीडिया के लिए तो पूरा देश एक सामान होना चाहिए ।
मोदी सरकार और संघ गोलवलकर की किताब जिसमे हिटलर को महान बताया गया और उसकी राज्य व्यवस्था लागू करना संघ का लक्ष्य बताया गया और जो संघ की गीता है उसे कब से पाठ्यक्रम में शामिल कर रहे है ।
आज पहली बार भारत के कोई गृह मंत्री संसद में खड़े होकर इतना बड़ा असत्य ओन रेकोर्ड बोल रहे है ।
ये सभी को पता है की आज़ादी की लड़ाई में संघ ने हिस्सा नहीं लिया था बल्कि अंग्रेजो का साथ दिया था ।आज़ादी के बाद इतने वर्षो तक खुद संघ शर्मिंदा रहा और इस सवाल पर चुप रहा ।
क्या पूर्ण बहुमत की सरकार आते ही कही कोई कागज गढ़ लिया क्या ?
इतिहास का संघिकरण करने की दिशा क्या इसे भी एक सन्देश माना जाये ।
महंगाई और केंद्र सरकार की लगातार होती वादाखिलाफी तथा सारी बुराइयों से ध्यान हटाने के लिए संघ के 24 मुह में से कोई न कोई किसी न किसी तरह का वक्ताव्य देता रहेगा ।
हम उनके वक्तव्यों में उलझे तो समझ लीजिए ये लोग अपने खेल में सफल हो गए ।
इसलिए ये कुछ भी बोलते रहे उस पर उलझने के बजाय इनको उन मुद्दों पर बोलने को मजबूर करिए जिन्हें कह कर ये सत्ता में आये ।
क्या बदायूं की सी बी आई रिपोर्ट आ जाने के बाद सभी टीवी वाले उतना ही समय देंगे और बहस करेंगे तथा अपनी अत्म्लोचना करेंगे ?
क्या वो सभी नेता और अन्य लोग जो दिन रात पानि पी पी कर हम लोगो को बलात्कारियो का साथी बता रहे थे उतनी ही शिद्दत से क्षमा मांगते हुए सफाई देंगे ?
क्या अमरीकी विदेश विभाग और भारत का विदेश विभाग खेद व्यक्त करेगा ?
क्या सयुक्त रास्त्र संघ खेद व्यक्त करते हुए ये कहेगा की भारत से कई गुना बलात्कार अमरीका सहित उन देशो में होता है जो सयुंक्त रास्त्र संघ के दादा है ?
बस ऐसा ही अधिकतर मामलों का सच है जिसे कुछ पूंजीपतियों का पैसा और मोदी शाह की निगाहे बदलवा दे रही है ।
और उत्तर प्रदेश को बदनाम कर यहाँ का व्यवसाय ,आने वाली पूँजी और आने वाले सैलानी सबको रोक रही है ।
ये मेरी शंका और कोरा आरोप नहीं बल्कि सिद्ध हो चूका सच है जिसकी इबारत आसमान पर लिखी दिखलाई पड़ रही है ।
किसी व्यक्ति या मैनेजर की जरूरत महसूस करना या किसी से गठबंधन की चर्चा करना सिवाय अपने को कमजोर सिद्ध करने और विरोधी ताकत जो महज वक्ती हवा के सहारे बवंडर दिखलाई पड़ रही है और बवंडर की ही तरह जिस तेजी से आई उतनी ही तेजी से नीचे भी बैठ रही है उसके ही और हवा देने के आलावा और कुछ नहीं होगा ।
इन बातो में समय बर्बाद करने के स्थान पर समाजवादी पार्टी को अपने भीतर के लोगो को ही उनक योग्यता और क्षमता के अनुसार अधिकार और जवाबदेही तय करते हुए तत्काल काम पर लगा देना चाहिए ।
समाजवादी पार्टी को अपना रजिस्टर देख कर सभी जमीनी कार्यकरताओ से संवाद करना चाहिए और उन्हें विकास की किरण का एहसास करवाते हुए और सत्ता में भागीदारी देते हुए तथा उनकी व्यक्तिगत तथा पारिवारिक समस्याओ का योजनाबद्ध निराकरण करते हुए जनता में उतार देना चाहिये ।
समाजवादी पार्टी को दलों और मैनेजरो से गठजोड़ करने के बजाय सीधे जनता से गठजोड़ करना चाहिए और ये गठजोड़ अच्छी तरह हो गया तो तब तक नहीं टूटेगा जब तक हम खुद इसे बनाये रखेंगे अपनी नीतियों ,नेता ,नियत और कर्म तथा व्यवहार से ।
समाजवादी पार्टी को दो अलग फ्रन्ट पर काम करना चाहिए ।सरकार में बैठे लोग अपने कार्यो और छवि से जनता को जीते तो संगठन को अपने को सर्कार से अलग दिखाते हुए हमेशा जनता के साथ खड़ा रहना चाहिए और जनता की समस्याओं में अपनी सरकार के खिलाफ भी दूसरे दलों से पहले सड़क पर आ जाना चाहिए और किसी भी कार्यालय में यदि जनता परेशांन है तो संगठन को वहां बैठ कर जन समस्याओ का निदान करना चाहिए ।
हम पहले भी दो बार बुरी तरह हारे पर निराश नहीं हुए ।जहा 1984 में केवल दो सांसद जीते वही 1991 में दिल्ली और प्रदेश दोनों जगह सरकार होने के बावजूद केवल चार सांसद और 27 एम् एल ए आये थे ।
पर 22 मई को हारे और 31 को 425 विधायक और 85 संसद उमीदवारो की बैठक बुला लिया और आ गए 3000 से अधिक कार्यकर्ता ।अगस्त में आगरा में मैंने मंडलीय सम्मलेन बुला लिया जिसमे नेता जी सहित सभी नेता आये और उसकी अपार सफलता के प्रदेश भर में सड़क पर आ गए और फिर 1993 में सरकार बना लिया ।
इसलिए जरूरत सिर्फ इतनी है की नकारातम्क़ बात करने वालो से बचा जाए और संघर्ष से निकले हुए लोगो से फिर चर्चा चलायी जाये और आत्मविश्वास से खुद को और संगठन को लबरेज करते हुए जनता के बीच निकल लिया जाये ।
संगठन सत्ता द्वारा धेकेले जाने वाला धकेल संगठन न हो बल्कि सत्ता को जनहित की तरफ ले जाने वाला नकेल संगठन हो जैसा डॉ लोहिया ने कहा था ।
बाकी सब चर्चाएँ बेकार की बात है ।

गुरुवार, 24 जुलाई 2014

कुछ साथियों का कहना है कि उन्होंने तय किया है की वे समाजवादी पार्टी में और नेता जी के साथ तो जिंदगी भर रहेंगे पर समाजवाद शब्द को अलविदा कह कर ।
ये जान कर बहुत दुःख हुआ ।पर हो सकता है इन लोगो के मन में कोई दर्द हो या द्वन्द हो समाजवाद और समाजवादी शब्दों को लेकर ।
असली समाजवादी तो लड़ाकू होता है और जहा जुल्म ज्यादती और इंसानियत पर हमला देखता है तन कर खडा हो जाता है ।वो चापलूस और चुगलखोर नहीं हो सकता ।वो गरीबी अमीरी की खायी पाटने और समतामूलक समाज बनाने की बात तो कर सकता है और इस लड़ाई में समाज के वंचितों के साथ खड़ा हो सकता है पर जातिवादी नहीं हो सकता और अगर जातिवादी है तो समाजवादी नहीं हो सकता ।
असली समाजवादी व्यवस्था का पोषक नहीं हो सकता ।वो दलाल और ठेकेदार नहीं हो सकता ।
पर इन लोगो का नेता जी के लम्बे संघर्ष के प्रति सम्मान भाव और उनके साथ जिंदगी भर रहने की प्रतिबद्धता भी काबिले तारीफ़ है और संघर्ष के योद्धा का साथ न छोड़ना जब तक की कुछ स्वार्थी ताकते खुद न निकलवा दे अपने आप में सद्धान्तिक प्रतिबद्धता का ही एक रूप है और ऐसे लोगो की मानसिक ईमानदारी पर मुहर ।
पर एक सिद्धांत के प्रति ये नाराजगी की कुछ लोगो में शुरुवात कही पतन का सबब न बन जाये ।इसलिए इस पर तुरंत बहस जरूरी हो गयी ।पर अब बहस का युग ही खत्म हो गया है और उसका स्थान जबरदस्त चापलूसी और चुगली ने ले लिया है ।सभी तरह की बुराइयों के कीचड में सर तक भैंसे की तरह धंसे हुए लोग ही आसमान पर झंडा पहरा रहे है तो समाजवाद और समाजवादी शब्द का द्वन्द खासकर शुरू से समाजवादी आन्दोलन से निकले लोगो को ग्रस रहा हो ये स्वाभाविक ही है ।
सिधान्तो से विचलन सभी दलों में विचलन पैदा करता रहा है ।ज्यो ही कांग्रेस विचलित हुयी की शाहबानो या मंदिर का ताला या दोनों लोगो ने उसका हश्र देखा ।अपने मजबूत लोगो को कमजोर कर प्यादो को आगे करने का खामियाजा भूतो न भविष्यते इस बार भुगता ।
जनसंघ से बीजेपी तक के नारे से विचलंन ने बीजेपी और संघ को ठिकाने लगाया संघ की शाखाये तिहाई हो गयी और लम्बे समय तक रणनीत बना कर लाया हुआ नया नारा और नेतृत्व और  कांग्रेस में नेता विहीन सत्ता और अल्पसंख्यक समुदाय का अंतर्द्वंद उन्हें सत्ता में तो ले आई लेकिन फिर इनके नारे और समय की मांग का द्वन्द उनके विचलन का कारण बनेगा और वो दिखने लगा है की चौबीस घंटे दिखने और बोलने वालो की बोलती भी बंद है और दर्शन भी सम्पादित होकर हो रहा है ।नारे भाषण और हकीकत का फर्क तमाम लोगो को बेताज और बेनूर बनाता रहा है ।
1967,77,89 से लेकर आज तक ये कहानी जारी है ।
केवल शब्द असर तो करते है पर कुछ क्षण में असर विहीन भी हो जाते है ।जनता चमत्कार नहीं चाहती पर प्रतिबद्धता और शब्दों के इर्द गिर्द अपने नेतृत्व के मन का उछाल और कलम की स्याही जरूर देखना चाहती है ।अगर नेतृत्व इसके आसपास भी दीखता है तो जनता और संगठन दोनों ही विचलित नहीं होते है ।पर किसी अप्राप्य देवता को जिसपर चढ़ावा तो खूब आता हो पर जनता और भक्तो को कुछ न मिलता हो बल्कि बिचौलिया ही सब हड़प का रहा हो ये न जनता को स्वीकार है और न भक्तो को ।
इसलिए देवताओ का गाहे बगाहे दर्शन और चढ़ावे का जनता में समान और इमानदार वितरण बहुत आवश्यक है स्थायी रूप से बने रहने के लिए ।
खैर बात कुछ समाजवादी साथियों के विचलन से शुरू हुयी थी इसलिए औरो को उनके हाल पर छोड़ कर अपनी परवाह करते है और कोशिश करे की ये द्वन्द समाप्त हो क्योंकि लोग तो आते जाते रहते है पर देश समाज और संगठन चलता रहता है और सिधान्तो के आधार पर चलने वाली लड़ाइयाँ अनंत काल तक अपने उद्देश्यों में संशोधनो के साथ चलती रहती है ।व्यक्ति ख़त्म हो जाता है पर सिधांत कोई भी हो जिन्दा रहता है और ये भी सच है की बड़े बड़े सत्ताधारी चले गए पर सिधांत गढ़ने वाले कलमकार शास्वत सत्य की तरह किताबो और बहसो जिन्दा है ।इसलिए अपेक्षा की जा सकती है ऐसे दोस्तों से की कुछ भी छोड़ दो पर सिद्धांत मत छोड़ो और उसके लिए सामर्थ्य भर लड़ते रहो ।अगर प्रेरणा लेनी है तो समाजवादी आन्दोलन का इतिहास फिर से पढ़ डालो की किस तरह अपनी ही थानु पिल्लै की सरकार गिरा दिया था डॉ लोहिया ने जनता पर गोली चलाने के कारण ।बस जनता के साथ खड़े रहोगे तो असली समाजवादी रहोगे ।कुछ भी गलत हो जनता की तरफ से खड़े हो जाओ और ऐसा देख कर नेता जी भी आप के साथ ही खड़े मिलेंगे ।
लोकतंत्र और समाजवादी आन्दोलन में संगठन और कार्यकर्ता सत्ता के द्वारा धकेले जाने वाला धकेल संगठन नहीं होता बल्कि सत्ता पर जनता की नकेल कसने वाला नकेल संगठन होता है ।
ये एक बहस है परिणाम जो भी निकले ।शायद मेरी बात ये साथी भी समझ सकेंगे और जिमसे इन्हें शिकायत है वे लोग भो ।

शनिवार, 12 जुलाई 2014

बीजेपी अध्यक्ष लक्ष्मीकांत वाजपेयी जी ने जिस दिन बीजेपी के लोगो ने विधानसभा के सामने पुलिस पर हमला किया था उस दिन कहा था की ये लोग गाँधी के मानने वाले नहीं है बल्कि भगत सिंह और आज़ाद के मानने वाले है तो क्या निहत्था होकर चले |
गाँधी के बारे में क्या विचार है और उनके साथ क्या किया है ये तो दुनिया जानती है पर आप ने अपने मुह से ही फिर एक बार स्वीकार कर लिया |
जहा तक भगत सिंह और उनके साथियों को सवाल है तो आप उनके भी मानने वाले कभी नहीं रहे वाजपेयी जी बल्कि आप ने भगत सिंह को गलत समझा और गलत चीज के लिए उद्धृत किया है | भगत सिंह आतंकी और हमलावर नहीं थे बल्कि २३ साल में प्राण न्योछावर करने वाले क्रन्तिकारी थे जो समता और समाजवादी व्यवस्था में यकीन करते थे और इंसान इन्सान के फर्क को वो चाहे जिस तरह का हो गलत मानते थे |
माफ़ी मांग लेते तो --- पर आप की तरह उन्होंने आज़ादी की लड़ाई की पीठ में चुरा नहीं भोका और न दूसरी लड़ाई में ही माफ़ी मांगी |
अब आप किसके समर्थक है ये मैं क्या बताऊँ |
आज बीजेपी अध्यक्ष श्री लक्ष्मीकांत वाजपेयी जैसे वरिष्ट नेता ने कहा की नागिन की तरह उन् लोगो ने फोटो आंख में खींच लिया है और चाहे जो करना पड़े बदला लेकर रहेंगे | ये हमारे साथ साथ जनता को नयी जानकारी मिली की बीजेपी के लोगो में नाग और नागिन के गुण है | हम तो इंसान समझाते थे और आप की कुछ नीतियों से असहमत थे और कार्यो से भी पर ये नहीं पता था की इतना जहर क्यों भरा है |
आज खुद इतने वरिष्ठ नेता ने ही कह दिया है की ये लोग नाग और नागिन है तो हमे आश्चर्य के साथ दुःख भी है की राजनीति में नागिन और नाग भी आ गए | जनता को राजनीतिक नाग और नागिनो से सावधान रहना चाहिए | १९९१ से बहुत मुश्किल से उबर था प्रदेश की मुजफ्फर नगर कर दिया और जीत लिया और केवल जीतने और सरकार बनाने के लिए आप ये जारी रखना चाहते है तो याद रखिये की काठ की हांड़ी केवल एक बार चढ़ती है |

रविवार, 15 जून 2014

भूटान मुझे दे दो मैं ठीक कर दूंगा क्योकि यहाँ एक ही खानदान सैकड़ो साल से राज कर रहा है इसीलिए ये गुजरात नहीं बन पाया | ????? ठीक से पढ़ लिया न ,,,नागपुर से यही लिख कर दिया गया था न |
कभी आप ने सुना की वार रूम में पी एम् गया हो ,,बिना बड़ा युद्ध हुए ?
कभी आप ने सुना है की पी एम् ,रक्षामंत्री और सेनाध्यक्ष के बीच क्या बात हुयी वो कभी बाहर आई हो ?
फिर कुछ टीवी वालो ने कैसे दिखाया की वहा क्या क्या हुआ और क्या क्या बाते हुयी ?
यदि उन्हें सब पता है तो भी ये देश की सुरक्षा से गद्दारी है और यदि ये झूठी कहानी है ती भी देशद्रोह बनता है |
क्या अब किसी को हिटलर बनाने के लिए ऐसी भी मुहीम चलेगी ?
पता नहीं क्या क्या होता है सेना दारा एक्शन और गुप्तचर संस्थाओ द्वरा ! क्या अब सब नंगा होगा दुनिया के सामने ?
जो मेरी बाते समझ सकते हो केवल वाही कमेन्ट करे अज्ञानी नहीं ,,
फ़ौज के पूर्व बड़े अधिकारी और रॉ इत्यादि के पूर्व अधिकारी कमेन्ट कर सकते है |
ये देश को हम कहा ले जा रहे है और क्या करना चाहता है इनका थिंक थैंक ?

शुक्रवार, 6 जून 2014

मुझे पता नहीं क्यों हिटलर के कदमो की आहट सुनाई दे रही है | मैं काफी समय पहले से हिटलर के बारे में लिखता और देश को आगाह करता रहा हूँ और कोई खास वर्ग और विचारधारा मुझ पर लगातार आक्रामक रही |
कैबिनेट मंत्री शून्य ,संगठन शून्य , राज्यमंत्री और सभी सचिव सब सीधे रिपोर्ट करे |सांसद हिलने की भी हिम्मत न करे बिना पूछे |
देश ,देश के बुद्धिजीवी ,संविधानविद ,कानूनविद और सभी जागरूक लोग मेरी बातो को ध्यान से पढ़े और ध्यान रखे |
सैकड़ो सालो की गुलामी के बाद बहुत मुश्किल से मिली है ये आजादी लाखो की शहादत के बाद और बहुत बहुमूल्य है हमारा संविधान और लोकतंत्र | जिस दिन अभिनय शुरू हुआ था संसद के आदर का ,,भावना प्रधान होने का और विनम्र होने का तभी से मुझे कुछ खटक रहा था |
अन्ना ,,केजरीवाल और आप पर मुझे हजारो लोगो ने गलियां दिया और बह गया पूरा देश पर अंत में सच तो मैं ही साबित हुआ |
ऐसा भी हवा में क्या बहना की पैर जमीन ही छोड़ दे और फिर केवल पछतावा ही हाथ लगे | अब केवल पूरी जनता खुद खड़े होकर बचा सकती है और देश की फ़ौज सत्ता की कहानी से दूर ही रह कर ,,पहले की तरह अपनी भूमिका निभा कर
बात कडवी है पर सच है |
भाषण का सच और कुर्सी का सच ---

ऐसा याद आ रहा है की किसी ने कहा था की सरकार बनते ही जिन सांसदों पर अपराध की धाराएँ लगी होंगी उनके लिए सर्वोच्च न्यायलय से कहा जायेगा की एक साल में उनके मामलों में न्याय कर दिया जाये | यानि कोई अपराधी संसद में नहीं बैठ पायेगा |
बीजेपी के हो ६० से ज्यादा अपराधी आये है | फैसला हो गया तो सरकार अल्पमत में आ जाएगी और मिनी चुनाव हो जायेगा सभी दलों को मिला कर |

अब कुर्सी चुप है |

गुरुवार, 5 जून 2014

किसी किसी को पता नहीं कैसे पता चल गया कि आज विश्व पर्यावरण दिवस है ।इसकी चर्चा करिए और फिर दुनिया का पर्यावरण बर्बाद करिए शौक से ।
चाहे जितना बड़ा मकान बनाइये पर एक भी पेड़ मत लगाइए ।चाहे जितना पैसा खर्च करिए पर पानी को बहने दीजिये लेकिन बाटर रिचार्ज करने की व्यवस्था मत करिए ।नदी में खूब कचरा फेकिये और सरकार से साफ करने को कहिये ।सारे नाले और नालिया बंद कर दीजिये या घेर लीजिये और सरकार को गली दीजिये ।सड़क पर खूब पानी बहाइये और जब सड़क टूट जाये तो शासन को कोसिये ।सड़क पर थूकिये और कुछ भी कही भी फेंकिये तथा कही भी खड़े होकर नित्य कर्म भी निपटा सकते है और फिर नागरिकता का पाठ पढ़ाइये ।
जरा सोचिये की हम केवल देश के बाशिन्दे है या सचमुच नागरिक भी है ।
जिस दिन हम नागरिक हो जायेंगे विश्वास करिए 60% समस्याए अपने आप निपट जाएँगी । क्या कहा आप नागरिक ही तो है ।नही ! इसकी चर्चा भी करूँगा ।
पर्यावरण दिवस की मेरी तरफ से भी शुभकामना ।

बुधवार, 4 जून 2014

1- किसी को तत्काल ना कहने से उतना नुक्सान नहीं होता जितना हां कह कर झूठा साबित होने पर होता |
२- तत्काल निर्णय करने पर गलतियाँ कम होती है अच्छा होने के चांस ज्यादा होता है [ justice delayed justice denied ] पुरानी कहावत है |
३- कुछ विश्वसनीय लोगो से सलाह कर लेने में आप छोटे नहीं होते |
४- चापलूसों की तारीफ आप को बड़ा नहीं बनाती बस थोड़ी देर का नकली सुख देती है और कडवा या सच बोलने की हिम्मत करने वाले सच्चे दोस्त होते है |
५- किस काम के लायक कौन है ये जानना और उनसे वही काम लेना ही नेतृत्व का गुण है
६- जवाबदेही सभी की जरूरी होती है और हर तीन महीने में जवाब तो मिलना ही चाहिए की तीन महीने में क्या हुआ |
७- दुकान पर भी कुछ दो रुपये की चीज भी खरीदते है तो निगाह रखते है की कम या गलत तो नहीं दे रहा है | मतलब जिसे समझना हो समझे |
राय की आज की बस इतनी ही राय है सभी दोस्तों को |

मंगलवार, 27 मई 2014

भाषण का सच और कुर्सी का सच ++++मेरी पूरे देश से अपील है की कृपया मोदी जी ने पूरे चुनाव प्रचार में जो भी कहा है वो सब कही लिख कर रख लीजिये और जिस बात का वो उल्टा करते जाये वो भी लिखते जाइये और जो वादा पूरा करते जाये वो भी ।आप की अपेक्षा पर क्या खरा उतर रहा है वो भी ।प्रारंभ आज से ही --+
1- पाकिस्तान को सबक सिखाने और एक सर के बदले दस सर की बात किया था और पूर्व सरकार पर वहां के रस्त्रध्यक्ष को बिरयानी खिलाने का मजाक उड़ाया था और अब वैसी ही घटना होने पर पाकिस्तान के पी एम् को बिरयानी खाने बुला रहे है ।
2-- अपनी गरीबी का बहुत बखान किया और अब उनके शपथ ग्रहण की भव्यता देखिये और उसमे आने वालो को तथा उसका खर्च देखिये ।
3--दूसरे मुस्लिम से बात करें तो तुस्टीकरण और अब साहेब ने देश से तीस मुसलमान बुलाएँ है इस समारोह में और उसका प्रचार भी कर रहे है ।ये तुष्टिकरण नहीं है ?
मेरा ये धारावाहिक जारी रहेगा और इसका नाम रहेगा --भाषण का सच ,कुर्सी का सच ?
भाषण का सच और कुर्सी का सच +++बापू की समाधी पर जाना ही पड़ा ।कुर्सी में बहुत ताकत है ।बापू के खिलाफ जहर उगलने वाला संगठन आज क्या सोच रहा होगा की उन्ही का एक ---+?????
आगे कही ऐसा तो नहीं होगा की -1- पार्टी और संगठन की जरूरत ही ना रहे ?
-2-कोइ भी पैसे वाला लोगो से चुनाव लड़ने हेतु अपनी शर्तो पर आवेदन मांगेगा ।
-3- कोई ब्रांडिंग और प्रचार एजेंसी तथा सभाएं करने का ठेका लेने वाली एजेंसी तय करेगा ।
-4- सभी मीडिया पर भरपूर विज्ञापन देगा
-5- किसी विदेशी कंपनी को खास किस्म का ठेका देगा ।
और लोकतंत्र का पर्व पूरा हो जायेगा और देश को सरकार मिल जाएगी ।