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सोमवार, 2 मई 2011

"ओसामा के मानने वाले इतने और उसे दफ़नाने वाला कोई नहीं ,बेचारा !

                                                                                                                                                           
                                                      ओसामा मारा गया ,ओसामा मारा गया ,ये समाचार क्या उछला पूरीं दुनिया में लोग ख़ुशी से उछल पड़े | कुछ छुपे हुए लोगो के चेहरे पर मुर्दनी छा गयी ,उनके खैरख्वाह और पालने वालों के चेहरे भी काले पड़ गए |था ही  यह बड़ा समाचार दोनों तरफ के लोगो के लिए |जिसने दुनिया को हर वक्त दहशत में जीने को मजबूर कर रखा था | जिसने, खुद को दुनिया का राजा समझने वाले अमरीका को उसी के साधनों का इस्तेमाल कर एक बार तो परास्त कर ही दिया था, वो ओसामा अपने आका,अपने पालने वाले पाकिस्तान की आई एस आई और फ़ौज  के द्वारा बनाये गए सबसे सुरक्षित इलाके के सबसे सुरक्षित घर में ही मारा गया | बहुत दिनों से घर में सबसे बड़े आतंकवादी को पालते हुए पाकिस्तान ,अमरीका से उसे और दूसरे आतंकवादियों को मारने के लिए अरबों डालर लेता रहा और उसी पैसे से ओसामा सहित सभी आतंकवादियों को पालता भी रहा| पाकिस्तान का यह चेहरा जिसके बारे में भारत लगातार दुनिया को तथा अमरीका को बता रहा था और उसे सहायता देने का विरोध कर रहा था दुनिया के सामने बहुत स्पस्ट रूप से आ गया |ये मुद्दा तो दुनिया और दुनिया में ही मौजूद अमरीका सहित सभी उसके दोस्त शायद बाद में तय कर सके |अगर उन्हें केवल भारत को तरक्की से रोकने की नाकाम  कोशिश के लिए पाकिस्तान को हथियार नहीं बनाना है तो वह कोई सही निर्णय ले सकेंगे |                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                 दुनिया कें सबसे बड़े वांटेड ,सबसे बड़े इनामी ,सबसे बड़े आतंकवादी का उस वक्त का चेहरा[ अगर किसी कैमरेमें कैद हो ]पूरी दुनिया देखना चाहती है, जब मौत उसके सामने थी और वो लाचार था और ये जान गया था कि अब उसके हाथ में कुछ नहीं है और अब वह मरने ही वाला है |मै भी देखना चाहता हूँ की किसी को भी और कितनो को भी बिना किसी कारण क्रूरता से मौत बाटने वाला और बूढ़े औरत और बच्चे की मौत पर अट्टहास करने वाला अपने मौत पर हँसा या नहीं |मौत उसके चहरे पर खौफ बन कर नाच रही थी या वह अपनी मौत पर भी अट्टहास कर रहा था ,या सद्दाम की तरह शांत चहरे से मौत को स्वीकार कर रहा था |यदि यह चेहरा सारी दुनिया सहित ओसामा के साथियों को भी देखने को मिल जाये तो बहुत भला हो जायेगा पूरी इंसानियत का | इंसानों को तसल्ली तो मिलेगी ही ,यह भी देखने को मिलेगा की मौत की दहशत का फर्क क्या होता है, जब आम आदमी मरता है बिना किसी कारण के ,बिना किसी दुश्मनी के |जब कोई बच्चा स्कूल जा रहा होता है ,या जब कोई बूढ़ा बच्चे की उंगली पकडे चल रहा होता है या जब कोई माँ बच्चे की दवा खरीद रही होती है या जब कोई अपने परिवार के साथ एक दिन इस आशा से निकला होता है बाजार या सिनेमा, कि रोज रोज कि भाग दौड़ से अलग आज थोडा ख़ुशी हासिल करेगा और ये आतंकवादी कभी बम फोड़ कर या कभी ए के ४७ से गोलियां दाग कर इन सभी मासूमों को मौत कि नीद सुला देते है |कभी ये तालिबान किसी औरत को गोलियों से भून देते है, कभी केवल पढ़ने के कारण ,कभी केवल संगीत सुनने के कारण किसी को कोड़े मार कर किसी को पत्थर मार कर मौत कि नीद सुलाते रहे है |उन सारे मरे हुए लोगो के परिजन और शुभचिंतक ये देखने को बेक़रार है कि मौत और मौत में क्या फर्क होता है |जब आम इन्सान मरता है या मौत देखता है तो बहुत रोता है| क्या ये मौत के सौदागर भी रोते है ,क्या उनके चेहरों पर ,उनकी आँखों में भी दहशत दिखती है ?अगर इंसानों जैसी दहशत इस शैतान कि आँखों में भी दिख गयी तो हो सकता है कि बड़ी तादात में शैतान उस दहशत को देख कर रास्ता बदल ले या अपनी मादों में छुप कर अपने अंत का इंतजार करे | दोनों ही हालत में भला तो इंसानियत का ही होगा |
तो राष्ट्रपति ओबामा ने अमरीका के अहंकार कि भाषा बोल ही दिया कि हम जो भी चाहे कर सकते है |जब २६/११ हुआ था क्या तब क्या कर रहे थे ? तब क्या नहीं चाहा था अपने देश कि सुरक्षा ?पर बोला तो सच ही है कि अमरीका जो भी चाहे वो कर सकता है | वह जब चाहे  तब किसी देश पर हमला कर सकता है ,जब चाहे किसी देश को खतरनाक हथियार रखने वाला सिद्ध कर सकता है ,जब चाहे किसी को भी सत्ता से बेदखल कर सकता है ,जब चाहे भारत जैसे देश के खिलाफ जो अपने ऊपर हुए आक्रमण का केवल जवाब दे रहा था सातवाँ बेडा भेज सकता है |जो किसी देश के मंत्री की डर के मारे नंगा कर तलाशी ले सकता है ,जो केवल इसलिए हर इन्सान को आतंकवादी समझ सकता है कि उसका नाम कुछ मुसलमान जैसा है |हा अमरीका कुछ भी कर सकता है |जो पाकिस्तान आतंकवाद कि खेती करता है उसको इस खेती के लिए पर्याप्त पैसा और हथियार देने का काम केवल अमरीका ही कर सकता है |पर इस काम के लिए तो अमरीका के वो लोग तो बधाई के पात्र है ही जिन्होंने पाकिस्तान में होते हुए भी ओसामा को मार गिराया, अपनी सरकार कि अपनी जनता में विश्वसनीयता कायम करने के लिए ही सही | साथ ही डरपोक अमरीकियों ने ये भी ऐलान कर दिया है दुनिया के सामने कि अब कुछ भी हो सकता है |ये कुछ भी, अमरीका और उसके दोस्तों के यहाँ भी होगा या उन्हें छोड़ कर बाकी सारी दुनिया में होगा| अमरीका के पैसे और हथियार कि मदद से और पाकिस्तान के सम्पूर्ण प्रयासों से होगा ये दुनिया को आने वाले समय में बहुत ध्यान और दिलचस्पी के साथ देखना होगा और उसके लिए एक संयुक्त रणनीति भी बनानी होगी|
                         ओसामा के मानने वाले इतने और उसे दफ़नाने वाला कोई नहीं ,बेचारा! कितना बदकिस्मत निकला | पूरी दुनिया पर आतंक का राज कायम करने का सपना देखने वाले को दो गज जमीन भी नहीं नसीब हुई ,बेचारा !ओसामा | बताया गया कि उसे पाताल में भेज दिया गया जहा हिन्दू मान्यताओं के अनुसार नाग रहते है | आदमी के वेश में पैदा हुए एक नाग को नागलोक ही पहुंचा दिया अमरीका ने |पर अब क्या होगा ?केवल अपना अहम् संतुस्ट कर क्या अमरीका इस तथाकथित आतंकवाद विरोधी लड़ाई को छोड़ कर केवल अपने घर और अपने लोगो कि रक्षा तक सीमित हो जायेगा? क्या वो अब अफगानिस्तान ,इराक और आतंकवाद कि राजधानी पाकिस्तान को छोड़ कर घर वापस चला जायेगा ?बड़ा सवाल है ये सचमुच आतंकवाद का शिकार और लक्ष्य रहे देशो के चिंतन में |
                                                                                                                     डॉ सी. पी. राय[पूर्व राज्यमंत्री ]
                                                                                                                      स्वतंत्र राजनैतिक चिन्तक