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सोमवार, 30 दिसंबर 2013

               संघर्ष को समर्पित एक कबीर की फकीरी जिंदगी का नाम था  ;;राजनारायण ;
                           
नेताजी के नाम से प्रसिद्द राजनारायण जी वही जिन्होंने देश का इतिहास बदला अजेय प्रधानमंत्री को पहले कोर्ट में हरा कर और फिर वोट से हरा कर ,वाही राजनारायण जिनको पढ़े बिना कानून की पढाई पूरी नहीं हो सकती ,वाही राजनारायण जिनको जाने बिना समझा ही नहीं जा सकता है लोक तंत्र के सही मायने को ,वाही राजनारायण जिन्होंने देश में लोकतंत्र के विपक्ष को मायने दिया बल्कि एक समय खुद प्रतीक बन गए थे विपक्ष के ,वाही राजनारायण जिन्होंने एक समय सरकारों को अपने हिसाब से उल्टा पुलटा | वे हर वक्त केवल जन और जनतंत्र की सोचते थे जागते हुए और मुझे लगता है की सोते हुए भी । लखनऊ की दो घटनाये उनके आम जन की चिंता और उसकी लड़ाई को दर्शाने के लिए काफी है । पहली -एक समय तक लखनऊ रेलवे स्टेशन के अन्दर रिक्शा नहीं जा सकता था । नेताजी अन्दर रिक्शे से जाने की जिद कर बैठे और मना होने पर उसी रिक्शे पर खड़े होकर भाषण देने लगे । मजमा जुटने लगा हजारो की भीड़ लग गयी रास्ते  बंद हो गए ,लोगो की ट्रेन छूटने लगी पर नेताजी कहा मानने वाले थे । जब सरकार ने रिक्शे को अन्दर जाने की इजाजत दे दिया तभी उनका वो तात्कालिक आन्दोलन समाप्त हुआ और आज सभी स्टेशन में रिक्शे से जा सकते है ।दूसरा - ऐसा ही उनका रिक्शा आन्दोलन राजभवन में प्रवेश को लेकर हुआ और फिर सरकार को झुकना पड़ा तथा वे राजभवन में रिक्शे से ही गए ।
इस तरह के आन्दोलनों के वर्णन से पूरा ग्रन्थ तैयार हो सकता है ।उन्हें आज की तरह अच्छाई ,बुराई ,फायदा ,नुक्सान सोचने की आदत नहीं थी । जहा भी जन तकलीफ में दिखा या कोई बात जन के खिलाफ दिखी ,जहा भी जनतंत्र को खतरा दिखा या कोई कमजोरी दिखी राजनारायण जी वहा स्वतः मौजूद दिखते थे और जहा वो खड़े हो जाते थे वही आन्दोलन अपने आप पैदा हो जाता था ।
गडवाल का बहुगुणा जी का चुनाव हो या बाबू  बनारसी दास जी का  ,माया त्यागी कांड हो या चौधरी चरण सिंह जी के खिलाफ उनका चुनाव ,पंडित कमलापति त्रिपाठी जी के खिलाफ उनका बनारस का चुनाव हो या इंदिरा जी के खिलाफ रायबरेली का चुनाव राजनारायण जी की संघर्ष क्षमता ,नेतृत्व क्षमता ,आदर्श राजनैतिक सोच ,विरोधी के प्रति भी मर्यादा का पालन ,जीत और हार को सहज भाव से स्वीकार करने का गुण ,तमाम ऐसी बाते है जिनका आज अभाव दीखता है और लोग उनसे बहुत कुछ सीख सकते है ।
वे केंद्र सरकार के मंत्री बने तो सादगी की मिसाल ही नहीं पेश किया बल्कि ऐसा काम किया की रूस के प्रावदा ने लिखा की भारत में एक ही मंत्री है जो सचमुच समाजवादी फैसले कर रहा है । बेयर फूट डॉक्टर की उनकी योजना के द्वारा दूरस्त गाँवो में प्रारंभिक चिकत्सा की सुविधा पहुचाने के साथ लाखो को रोजगार देने का काम भी हुआ । चलते फिरते पूर्ण अस्पताल वाली गाड़ियाँ भी उनकी गरीबो और गाँवो को चिकित्सा सुविधा देने के उनकी चिंता और चिंतन को दर्शाती है ।
पंजाब के बटवारे के समय संसद में दिया गया उनका भाषण और उसमे आने वाले समय में आतंकवाद और अलगाववाद के सर उठाने की चिंता उनके दूर तक देख सकने वाली क्षमता  दिखती है ।जनता सरकार बन जाने पर इंदिरा जी को पूर्व प्रधानमंत्री होने और स्वतंत्रता सेनानी होने के नाते उचित सम्मान और निवास तथा सुरक्षा देने के बारे में मंत्रिमंडल में कही गयी बातें उनके बड़े दिल और लोकतंत्र के प्रति आस्था को को दिखाती है जब उन्होंने कहा की न्यायलय इंदिरा जी के साथ क्या करेगा ये उसका काम है पर हमारी सरकार को उनके साथ वो करना चाहिए जो हम अपने लिए सही समझते है । उन्होंने यहाँ तक कह दिया था की यदि उन्हें दिल्ली में निवास नहीं दिया तो उन्हें तो केवल एक कमरे की जरूरत है ,वे अपना मंत्री वाला बाकी  घर इंदिरा जी को दे देंगे । ये एक बडा सोचने और आगे का राजनीतिक व्यव्हार तय करने वाले नेता का वक्तव्य था ।उनकी बात नहीं मानी गयी और तत्कालीन गृहमंत्री अपने काम पर ध्यान देने के स्थान पर केवल इंदिरा जी के पीछे पड़  गए और उसका जो परिणाम सामने आना था आया ,वर्ना जानने वाले जानते है की राजनीती की दशा और दिशा कुछ और होती ।
एक किसान नेता और सचमुच जनाधार वाले नेता को प्रधानमंत्री बनाने का उनका सपना और संकल्प जूनून तक चला गया जब बिना जनधार वालो ने जनधार वालो को अपमानित करना शुरू किया और देश अपने तरीके से हांकने का प्रयास किया । उनका विद्रोही स्वाभाव और उग्र हो गया जब षड़यंत्र द्वारा गरीबो के नेतृत्व को प्रदेशो में पदस्थ करने की मुहीम चली । उन्होंने आगे आने वाले समय की गुप्त चुनौतियों को देखा उसकी जड़ पर हमला करना शुरू कर दिया जब आधे लोग सत्ता में आये और दल में आये आधो को आने वाले षड़यंत्र के लिए अलग छोड़ दिया गया ।
क्या क्या लिखूं ? क्या लिखूं की कैसे उनको जरा सा बीमार जान कर इंदिरा जी पैदल ही उनके घर तक चली आई थी प्रधानमत्री होते हुए ,क्या लिखूं की संजय गाँधी को उन्होंने संघर्ष का क्या मंत्र दिया ,क्या लिखूं की उन्होंने ऐसे तमाम लोग जिन्होंने अपने शहर नहीं देखे थे उन्हें प्रदेश और देश की राजधानी दिखा दिया ,क्या लिखूं की देश के कानून की पढाई करने वाले और अदालत में जाने वाले राजनारायण जी को पढ़े बिना काम नहीं चला पाएंगे ? क्या लिखूं की अपने को संसदीय दल का नेता चुन लिए जाने के बाद एक दिन पहले तक उनकी लानत मलानत करने वाले को उन्होंने नेता चुनवाया और प्रधानमंत्री बनवा दिया ? क्या ये लिखूं की उनकी बात मान ली गयी होती और इस्तीफ़ा नहीं देकर सदन चलाया गया होता तो राजनीती कुछ और होती ? क्या ये लिखू की वो भी जाति की राजनीती कर रहे होते तो जिंदगी भर संसद में रहे होते पर इतिहास नहीं रचा होता । क्या ये लिखूं की इतने बड़े नेता जिसने दिल्ली को पलटा  ,प्रदेशो के नेतृत्व तय किया उनके बच्चो को कोई नहीं जानता  था ,या ये लिखू की जब उनका दल कमजोर हो गया था और उनके एक बेटे ने मनीराम बागड़ी से कहलवाया की टाइप और फोटोस्टेट मशीन उसे दे दिया जाये तो उसका खर्च चल जायेगा तो नेताजी ने जवाब दिया की पार्टी का है पैसा जमा कर दो ले जाओ ,क्या क्या बताऊ ?
जहा तक व्यक्तिगत अनुभव का सवाल है तो नेताजी की केंद्रीय मंत्री होने के बावजूद बिना स्थानीय प्रशासन की जानकारी के मुझ जैसे किसी भी कार्यकर्ता के घर अचानक पहुँच जाते थे की चाय पिलाओ और चलो कही चलना है । आन्दोलन में 20 जानवरों को लाठी चार्ज होता है शाम को जेल जाते है और 21 जनवरी को सुबह 10 बजे नेता जी दिल्ली से चल कर आगरा की जेल में हाजिर है ।104 बुखार में दवाई लेकर मेरी शादी की पार्टी में खड़े है और लोगो से मिल रहे है । मेरी बेटी के पैदा होने पर निमत्रण देने पर कहते है की मै  व्यस्त हूँ कर्पूरी ठाकुर और सतेन्द्र नारायण सिन्हा की पंचायत की जिम्मेदारी चंद्रशेखर जी मुझे दिया है और पार्टी वाले दिन केवल आधे घंटे के लिए दलबल को लेकर वो पहुँच जाते है । कभी नहीं लगा की उनसे कोई पद मांगे ,वैसे ही बड़ी ताकत महसूस होती थी । देश में कही भी हो लगता था की राजनारायण जी साथ खड़े है किसी से डरने की जरूरत नहीं है । ऐसा हुआ भी जब हैदराबाद में कोई दिक्कत आई पर बस एक फ़ोन किया और समस्या ख़त्म । इतने बड़े संबल ,इतने बड़े लड़ाके  ,इतने बड़े और सच्चे समाजवादी ,इतने बड़े दिल वाले ,इतने बड़े राजनैतिक भविष्यवक्ता ,लोकतंत्र और सिधान्तो के इतने समर्पित इंसान और भारत के लोकतंत्र को मायने देने वाले महामानव को मेरा शत शत नमन ।

सोमवार, 16 दिसंबर 2013

दो दिनों के आगरा प्रवास में मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने सबका दिल जीत लिया ।वो कार्यकर्ता रहा हो ,मीडिया हो ,व्यापारी हो या शादी के अवसर पर मिलने वाले सभी लोग ।सभी आश्चर्यचकित थे कि कोई मुख्यमंत्री इतना सरल ,सौम्य ,ज्ञानी और सभी को सारे प्रोटोकोल और सुरक्षा को दरकिनार कर अपनेपन से मिलाने वाला और सभी पूरा सुनने और संतुस्ट करने वाला भी हो सकता है क्या ।मुख्यमंत्री जी इन दो दिनों में आपको देख कर बीस साल पहले वाले नेताजी याद आ गए ।प्रशासन को आपने कडा सन्देश भी दिया ।अब बहुत कुछ बदल जायेगा ।
सभी का आपको सलाम ।आप बढ़ते रहे और अगले बीस साल प्रदेश का नेतृत्व करते रहे ।जय हिन्द जय समाजवाद ।
देश के संविधान में ये संशोधन कब हुआ की लोकतंत्र में जनप्रतिनिधि और राजनैतिक कार्यकर्त्ता केवल प्यादे होंगे जो हर बुराई की गाली सुनने का काम करेंगे और असली राज नौकरशाह चलाएंगे ????? मैं पढ़ नहीं पाया |
ये संशोधन कब होगा की नौकरशाह अनुबंधित होंगे और उनकी जवाबदेही भी होगी और उसके आधार पर उनकी नौकरी चलेगी ||||
मैं तो सोच रहा हु की शर्म के मारे राजनीति ही छोड़ दूँ और वो काम करूँ जहा सब सर झुकाते है ,,, क्या ? बताऊंगा |
चापलूसी से केवल व्यक्तिगत फायदा हो सकता है पर समाज ,प्रदेश और देश का तो बिलकुल नहीं | इसके लिए सच बोलना और सच सुनना पड़ेगा |
मैं हूँ या कोई और यदि पद की प्रतिष्ठा को न बचा सके तो बेहतर है की पद छोड़ दे ,क्योकि प्रतिष्ठा नीचे से नहीं ऊपर से तय होती है | यदि पद का इस्तेमाल जनता के हितो की रक्षा के लिए न होता हो तो ये पद नहीं बल्कि पाप है |
चाहे राजनीती में है या प्रशासन तंत्र में क्या कभी दिल पर हाथ रख कर इमानदारी से सोचते है की वे गरीब जनता से क्या ले रहे है और बदले में उसे क्या दे रहे है ??? ये तो सामान्य नियम है की आप जब किसी से कुछ लेते है तो ब्याज सहित लौटाते भी है | पर शायद आज ये विचार मर गया है | पर इसी विचार के कारण मैं अपराध बोध से ग्रस्त हो रहा हूँ |

शुक्रवार, 22 नवंबर 2013

क्या लिखूं ,लगता है कि सब गड मड हो गया है जीवन में । पता ही नहीं है कि जीवन कहा तक और कब तक और उसकी दिशा क्या होगी । कितना बुरा होता है, ऐसा जीवन हो जाना न । और जब ये किसी बाहरी घटना के कारण नहीं ,किसी बाहरी व्यक्ति के कारण नहीं बल्कि बहुत अपनों के कारण या अपने ही कारण हो तो क्या करेगा कोई । शायद इससे बड़ी कोई भी लड़ाई नहीं हो सकती है जिंदगी से । पर इस लड़ाई में भी ---ऐसी लड़ाइयों को लड़ते लड़ते आदी हो गया हूँ मैं । फिर भी अपने आप से लड़ना मुश्किल तो होता है न । बाहरी ताकतो से तो लड़ाई को कभी कुछ भी नहीं समझा मैंने और धीरे धीरे ही सही लड़ाइयां जीतता रहा मैं ,,पर लगता है कि अब हार रहा हूँ ,,,जो मेरा स्वाभाव नहीं है ,,,इसीलिए समझा नहीं पा रहा हूँ कि कैसे लड़ूं अपने आप से ऐसी लड़ाई । कोई भी तो नहीं है साथ ,,,कितना अकेला हो गया हूँ ,,,सचमुच अचानक अकेला हो जाना या धीरे धीरे ही सही बहुत दुखद अहसास होता है । क्या क्या कहूं ,, क्या क्या सहा ,,,क्या क्या देखा ,,,क्या क्या खोया ,,,और क्या क्या नहीं पाया ,,, क्या क्या दर्द है खून के कतरे कतरे में ,,,हर बूँद में आंसू की ,,, हर आह में ,,,हर सांस में ,,,हर सोच में ,हर पल ,,,हमेशा हमेशा ,,,हर कदम दर कदम । अब मूँद लूं आँखे तभी शायद ये लड़ाई ख़त्म होगी ,पता नहीं जीत होगी या हार होगी ।

सोमवार, 4 नवंबर 2013

मेरा कितना दुर्भाग्य है की मैं कवि हूँ ,लेखक हूँ ,कुछ स्वतंत्र चिंतन भी करता हूँ पर एक पार्टी का पदाधिकारी भी हूँ | मैं ये सारे काम स्वतंत्र रूप से करता हूँ जिसका नुक्सान मुझे राजनीती में भी होता है और साहित्य में भी तथा जीवन में भी | पर उससे ज्यादा दुर्भाग्य ये है की लोग मेरी कविता पर कुछ लिखने के बजाय उसमे राजनीती ढूढते है ,मेरे स्वतंत्र विचारो पर चर्चा करने के बजाय उसमे भी राजनीती ढूँढते है और राजनीती पर जब कुछ लिखता हूँ तो उसमे अपनी खुंदक निकाल कर गालियाँ देते है | और जो राजनीती में बड़े है वो भी मेरी कविताओ और स्वतंत्र विचारो से कुपित रहते है | जो साथी है वो चाहते है की मैं अपनी पार्टी के पक्ष में ना लिखू और राजनीती से और अपने पद बाहर हो जाऊं | मैंने एक बड़ा समय ऐसा भी देखा है जब ऐसा वक्त आता है और आप कष्ट में होते है ,आप का कोई वजूद नहीं होता है तो को पडोसी और सारे दोस्त पहचानने से इनकार कर देते है यहाँ तक की जाती बिरादरी औत्र रिश्तेदार भी आप को नहीं पहचानते | लोगो की चिन्ता छोड़ कर अपना काम करे और आगे बढे और ऐसे लोगो को दोस्ती से हटाते जाये बस यही एक रास्ता है मस्त रहने का और आगे बढने का | याद आ गया वो किस्सा की घोड़े पर क्यों बैठे है और घोडा है फिर भी पैदल क्यों चल रहे है | गुडबाय ऐसे तथाकथित दोस्तों |
आप को अपने घर के मालिक से या किसी भी स्तर के मुखिया से नाराजगी होती है तो क्या आप अपना घर गुन्डो के हवाले कर देते है या क्या आप उसमे आग लगा देते है ??? अगर नहीं तो ये बात देश पर भी लागू होती है |
समय बदल रहा है बहुत तेजी से । लोग भी बदल रहे है । दुनिया केवल स्वार्थ और पैसे के पीछे भाग रही है । स्वार्थ और पैसे ,थोड़े थोड़े फायदे के लिए कोई भी समझौता करने को तैयार है लोग । कितना बदल गया है मेरा समाज भी मेरा देश भी । मै तो हतप्रभ हूँ लोगो के करतब देख कर ,लोगो की बातें सुन कर । 

रविवार, 3 नवंबर 2013

सैकड़ो या हजारो साल हो गए अँधेरा मिटाते जिन्दगी से ,समाज से और मानवता से पर मिटा बिलकुल नहीं बल्कि समय के साथ और गहराता जा रहा है |नकली और बनावटी रोशनी कोई अँधेरा केवल कुछ देर के लिए भुला सकती है मिटा नहीं सकती | उस दिन का इंतजार है जब असली रोशनी ,वो ज्ञान की हो ,सच्चाई की हो ,यथार्थ की हो, रौशन कर देगी सब कुछ हमेशा के लिए |

शनिवार, 2 नवंबर 2013

एक गाने के लिए प्रसिद्ध [ पुरुष या महिला मत पूछियेगा ] ने बहुत बार बाला साहब ठाकरे की खूब तारीफ किया ,वाही बाला साहब जिन्होंने उत्तर प्रदेश और बिहार वालो को खूब गलिय दिया जिंदगी भर और शुरवात में हत्याएं भी करवाया था | अब ये किसी की भी तारीफ करे ???
फिल्म के एक और महान आदमी माने जाते है बड़े गर्दिश में थे तो एक नेता ने उनकी मदद किया और उन्होंने कुछ साल का फर्क होने पर भी उस नेता को पिता कहा पर पैसा मिला तो हिटलर की तारीफ भी कर दिया | क्या कहूँ मैं इन फिल्म वालो के बारे में | गायकों को मेरी बात से तकलीफ नहीं होनी चाहिए ,

शनिवार, 26 अक्तूबर 2013

कल घोषणा नाथ सिंह ने बताया की यदि हिटलर आएगा तो चीन और पाकिस्तान मंगल गृह पर भाग जायेंगे वैसे उनकी मानसिक स्थिति तो उनके उद्बोधन से ही स्पष्ट हो गयी | क्या जब बीजेपी के ६ साल सरकार थी ,अटल और अडवाणी सहित घोषणा नाथ भी मंत्री या मुख्यमंत्री थे और दुश्मन घर के भीतर घुस आया और ये सोते रहे ,दुश्मन संसद में घुस आया और ये सोते रहे ,देश के जगह धमाके करता रहा और ये सोते रहे ,,,उस वक्त बीजेपी देशद्रोही थी ???? अयोग्य थी शासन के लिए ??? अटल इत्यादि अयोग्य थे ??? या उस वक्त हिटलर मंगल गृह पर की साधना कर रहा था ??? ये भी पता लगाना जरूरी है की जब ये सरे हमले हुए थे और शहीदों के ताबूत तक में दलाली ली गयी थी .... जब देश के बड़े आतंकवादी को सैकड़ो करोड़ रूपये के साथ कंधार में देश के मंत्री बीजेपी के ही पहुंचा कर आये थे तो उस वक्त हिटलर ने किस किस का कुरता फाड़ा था ??? या कोई वक्तव्य भी दिया था क्या ???
जब बंगला देश ने हमारे ११ सैनिको को मार कर और जला कर हमें सौंपा था तो हिटलर और उसकी जमात ने क्या किया था ???\
जब नवरत्न कम्पनियाँ घूस लेकर औने पौने में बेचीं गयी तो हिटलर और उसके लोगो की क्या भूमिका थी ??
जब चीनी मिले घूसखोरी के साथ बेचीं गयी तो हिटलर और उसकी जमात के लोगो की क्या भूमिका थी ???
जब इनका अध्यक्ष रँगे हाथ पकड़ा गया था तो हिटलर को गुसा आया था क्या और गुस्से में क्या किया था ??
जब जोशी जी कश्मीर विजय करने निकले थे और फिर डर के मारे कह दिया था की सड़क टूट गयी और और नरसिम्हा राव से गिदगिड़ा कर कहा था की एक बार इज्जत बचा लो फिर कभी कश्मीर का नाम भी नहीं लूँगा [ जो आज तक सही साबित हुआ है ] और सेना के जहाज से जाकर जल्दी से झंडा फहरा कर भागे थे तथा पत्रकार ने पूछा की झंडा तो फहराने के बजाय अपने डर के मारे गिरा दिया इस पर क्या कहना है तो भागते हुए कहा था की भारत जाकर बताऊंगा ,,, उस पर हिटलर और और उसकी जमात का आज क्या रुख है ???
भगवान् राम को बेघर कर दिया और दुनिया में बहुत से मन्दिर गिरवा दिए ,भगवान् इन्तजार कर रहे है ,हिटलर उनसे कब मिलेंगे और अपना वादा कब पूरा करेंगे ??
३७० .. सामान कानून ,कश्मीर इत्यादि के बारे में क्या राय है आज ???
देश में शिक्षा व्यवस्था की रीढ़ बन कर बहुत अच्छा योगदान देने वाले ईसाई समाज के बारे में क्या राय है ???
क्या हिटलर पाकिस्तान पर हमला कर इंदिरा गाँधी जैसा इतिहास रचेंगे ?? जिनकी शहादत को भी हल्का और राजनीती का विषय मानते है इस जमात के लोग ???
कम्पूटर का विरोध करने वाले और आधुनिक क्रांति जिसके कारन आज भारत दुनिया में एक ताकत है उसके जनक की शहादत पर राजनीती करने वाले हिटलर क्या अपनी जमात के पुराने वक्तव्यों पर आत्मग्लानी अनुभव करेंगे ???
आजादी की लड़ाई में हिस्सेदारी तो दूर बल्कि स्वतंत्रता सेनानियों की मुखबिरी करने का गुनाह करने वाले इस जमात के लोगो को क्या आज शर्मिंदगी महसूस होती है ???
दुनिया को रोशनी देने वाले महामानव महत्मा गाँधी की हत्या करने वाले और लगातार उनकी हत्या को उचित ठहराने वाले इस जमात के लोग क्या उस हत्या पर शर्मिंदा है ?? क्या उन्होंने बापू की हत्या को जायज ठहराने वाली किताबे बेचना बंद कर दिया है ??
सरदार पटेल ने इन पर प्रतिबन्ध भी लगया था और इन्हें जेल भी भेजा था और इन लोगो ने उन्हें बहुत गलिय दिया था ?? आखिर आज किस साजिश के तहत उनके नाम का इस्तेमाल कर रहे है ???
सावरकर की दो रास्त्र वाली नीति पर इनका अब क्या विचार है ??
हेगडेवार की किताब जिसमे उन्होंने हिटलर को महान बताया है और उसकी विचारधारा को भारत के लिए आदर्श बतया था और उसी को आदर्श मान कर संघ की नीव राखी थी ,, उस पर आब क्या विचार है ???
देश की नयी विदेश नीति क्या होगी ??
देश की नयी रक्षा नीति क्या होगी ??
क्या सेना का राजनीतिककरण करने और तमाशाही लादने का इरादा है ????
देश के किसानो के प्रति नीति क्या होगी ??
दश के मजदूरों के प्रति नीति क्या होगी ??
देश की नयी शिक्षा नीति क्या होगी ??
देश की स्वस्थ्य नीति क्या होगी ?
देश की रोजगार नीति क्या होगी ??
देश का संविधान यही रहेगा या बदल दिया जायेगा ??
देश की न्याय प्रणाली स्वतंत्र रहेगी या सत्ता की कठपुतली बन जाएगी ??
देश की प्रेस मीडिया स्वतंत्र रहेगी या संघ के द्वारा सम्पादित होगी हिटलर की तरह ??
बुद्धिजीवियों ,लेखको ,कवियों ,को इनका चरण और भाट बा जाना होगा या स्वतंत्रता होगी या मार दिया जायेंगे ??
देश की शिक्षा का पाठ्यक्रम क्या होगा सरस्वती शिशु मंदिर वाला ?? ?????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????????/
बहुत से सवाल है जिनका देश जवाब चाहता है पर ये जवाब देने के बजाय केवल सवाल उछालते है ||
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जिस उत्तर प्रदेश और बिहार ने आजादी की लड़ाई का भी नेतृत्व किया और बाद में भी उसका मजाख उड़ने ,उसे कमजोर दिखने और उसके बच्चो को मजदूर बताने ,उसकी माताओं को बुजदिल बता कर क्या सिद्ध करना चाहते है ???
क्रांति उत्तर प्रदेश और बिहार करता है ,, परिवर्तन उत्तर प्रदेश और बिहार करता है और सरे घोटाले ,,, साडी काले कारनामे ,, सारा अपवित्र व्यापार गुजरात करता है -----
सीमा पर जान उत्तर प्रदेश का जवान देता है और कफ़न चोरी गुजरती करता है  ----
साहित्य उत्तर प्रदेश और बिहार रचता है और अपराध साहित्य ,घोटाला साहत्य गुजरात रचता है ---
-----------उत्तर प्रदेश बाँझ नहीं हुआ है --- देश की और उत्तर प्रदेश की बीजेपी बाँझ और दिवालिया हुयी है ------
अपने दिवालियेपन को देश पर और खासकर उत्तर प्रदेश पर लादने की साजिश न करे _____
उत्तर प्रदेश महान है और देश को यही रास्ता भी दिखायेगा और नेतृत्व भी करेगा -------
देश चलाना मिलावट ,कालाबाजारी ,मुनाफाखोरी नहीं है बल्कि संकल्पशक्ति का काम है और गुजरती ---
---------और हिटलर जी अगर देश में ६६ साल में कुछ नहीं हुआ --- तो खुद तुम्हारे अनुसार एक चाय बेचने वाला इतना बड़ा पद कैसे पा गया ---- ये जो करोड़ो रुपये तुम खर्च कर रहे हो अपने प्रचार पर ये तुम्हे तुम्हारे घर की खुदाई में मिला है क्या ??? जिस जहाज और हेलिकोप्टर का इस्तेमाल कर रहे हो ये संघ को अंग्रेज दान दे गए थे क्या ?? आज दुनिया प्रमुख ७ देशो में हमें गिनती है ,,क्या वे शाखाये जो ख़त्म हो चुकी है वहा के बड़े नेकर वाले कारनामे देख कर कर रही है क्या ??
हिटलर इतने सवाल और आरोप है की ------- बस अब अगली किश्त में ---
तुम उत्तर प्रदेश को गली देने की हिम्मत करो और फिर मजा देखते जाओ |
तुम जैसे लोगो के कर्मो से महत्मा गाँधी और सरदार पटेल की धरती अपवित्र हो गयी है ???
तुम्हारी जमात ने पहले बापू के शरीर की हत्या किया और फिर तुमने उनकी आत्मा को मारा |||
महान उत्तर प्रदेश तुम्हे बर्दाश्त करने को तैयार नहीं है ;;; दुबारा आओ तो उत्तर प्रदेश को गाली मत देना -------------
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शुक्रवार, 25 अक्तूबर 2013

क्या कुछ बददिमाग या दिमाग का इस्तेमाल ही नहीं करने वाले या दिमाग केवल विध्वंस के बारे में इस्तेमाल करने वाले या भावहीन चीख चिल्लाहट करने वाले इस महान लोकतंत्र के नेता हो जायेंगे ? कुछ चेहरे तो टी वी पर आते ही मन गिजगिजा जाता है | देश इन्हें कैसे झेलेगा और ये देश का क्या करेंगे ?? क्या भारत की वर्तमान लोकतान्त्रिक व्यवस्था पर पुनर्विचार करने की जरूरत है ??
संघ के लोग अगर चाहे तो किसान का शोषण न हो और उसे वाजिब दाम मिले | संघ के लोग अपना मूल कार्य मुनाफाखोरी , मिलावटखोरी और जमाखोरी बंद कर दें तो देश में मंहगाई बहुत कम हो जाये | पता नहीं सरकारें इन्हें बेनकाब क्यों नहीं कर रही है और इन पर सख्त कार्यवाही क्यों नहीं कर रही है ??? सारा बिचौलिया कारोबार और ये सब काम करने वालो को हर शहर के लोग पहचानते है ,सुबह किसी मैदान में आदर्श की बात करते और लाठी भाला चलाते देख सकते है और दिन में दुकानों पर ये सब करते हुए इन्हें पहचाना जा सकता है |

गुरुवार, 24 अक्तूबर 2013

अब तो किसी के टूट जाने की स्थिति हो गयी है | पता नहीं मन को तकलीफ है या तन को तकलीफ है ? आज के दौर में इन्सान को पत्थर दिल [ भावनाशून्य ] और कपटी होना चाहिए | मुह में राम बगल में छुरी बहुत पुरानी कहावत है | वरना आप के लिए यही नरक मौजूद है |
मैं देख रहा हूँ की इस बार एक सरकार में ऐसे लोगो की संख्या काफी बढ़ गयी है जो अगर आप से पैसा न मिले तो आप की नमस्ते भी नहीं लेंगे | ऐसे मंत्रियो की फ़ौज से चुनाव कैसे जीता जाये | और अधिकारी तो भ्रस्ताचार के कीचड में अन्दर तक धंसे हुए भैंसे हैं जिनकी सफाई का इन्त्जाम किसी के पास नहीं है | कुछ मंत्री तो चुनाव भी जीतना चाहते है पर अपनों के रिश्तेदारों से भी पैसे वसूल कर |वक्त आने पर हिसाब तो होगा |बहुत से है जो दिन रात केवल अपने जमीर और नेता को बेच रहे है | जहा कमाने वाला केवल एक और बाकि सब केवल बर्बाद करने वाले हो वहा का परिणाम तो आसानी से समझा जा सकता है |
ये एक प्रदेश का किस्सा है जो बार बार दुहराया जाता है | साल पूरा होते होते जनता भगाने की बात करने लगती है | कोई बात नहीं लगे रहो लुटेरो |
क्या इस लोकतान्त्रिक देश में किसी का अपने नाम के आगे राजा लिखना लोकतंत्र का मजाख नहीं है | इस पर शीघ्र पी आई एल होनी चाहिए | ९९ % राजाओ ने देश से गद्दारी किया था आजादी की लड़ाई में | उनका वही चरित्र आज भी है |

रविवार, 20 अक्तूबर 2013

सोना तो फिलहाल मिला नहीं . आर्कियोलागिकल सर्वे ऑफ़ इण्डिया ने कल ही कह दिया था कि सोना भूल जाओ . एक स्वप्न के आधार पर खुदाई का आधार अंधविश्वास हो या आस्था ,आज इक्कसवी सदी में जनता को जरूरत है अपने दिमाग की खुदाई करने की . स्वपन से १००० टन सोने की बात कहने वाले संत श्री के शिष्य स्वामी ओमजी ने मोदी समेत प्रदेश व केंद्र सरकार को चिट्ठी भेजी. गौर फरमाए .

आदरणीय नरेन्द्र भाई,

कानपुर की धरती पर आपका स्वागत करते हुए विनम्रता पूर्वक कहना चाहता हूं कि केंद्र सरकार तथा श्रीमती सोनियां गांधी पर हमला करने की हड़बड़ी में आपने संत की मर्यादा का भी उल्लंघन कर दिया है। सत्य संकल्प संत श्री स्वामी शोभन सरकार जी ने जो सपना देखा, वह इस राष्ट्र को विश्व की सबसे शक्तिशाली आर्थिक शक्ति बनाने का है। उसी सपने की तामीर के लिए स्वामी जी ने भारत सरकार को अमेरिका तथा ब्रिटेन दोनों देशों के पुर संयुक्त स्वर्ण भंडार से अधिक स्वर्ण उपलब्ध कराने का संकल्प लिया था। जिसके तहत उन्होंने केंद्र सरकार, राज्य सरकार तथा जिला प्रशासन को पत्र भेजकर अनुरोध किया कि डौंड़ियाखेड़ा में एक स्थान की जीएसआई से करा ली जाए तथा यदि जीएसआई जांच में तथ्य प्रमाणित हों तो खनन कार्य करा लिए जाएं। स्वर्ण संपदा भारत सरकार के मुद्रा कोष को सौंप दी जाए। यहां तो केवल 1000 टन की बात है, शोभन सरकार ने तो राष्ट्र को 21000 टन स्वर्ण कोष उपलब्ध कराने का संकल्प अभिव्यक्त किया है। आप जैसे प्रभावशाली राजनेता से गुजारिश है कि अनर्गल प्रलाप करके समय न व्यर्थ करें। देश के सरकारी अमले सहित संसद में सभी दलों के प्रतिनिधियों तथा मीडिया भी आइए। श्री स्वामी शोभन सरकार से एक बार याचना करके तो देखिए, तत्क्षण यदि देश की आकांक्षाएं पूरी न कर दें तो आपके मित्र पत्रकार दीपक चौरसिया के सामने अपना सर कलम कराने के लिए वहीं हाजिर रहूंगा। चौरसिया जी ने पूछा है कि यदि सोना न मिला तो क्या ओम बाबा सर कलम करवाएंगे? मेरा जवाब है हां। हम रघुवंशी हैं, शोभन सरकार रघुवंश शिरोमणि। प्राण जाएं पर वचन न जाई। हम कहते नहीं जीते हैं। श्री शोभन सरकार जी के सपने पर आपकी प्रतिक्रिया तो आ गई। श्री महंत नृत्य गोपालदास जी, श्री लक्ष्मीकांत वाजपेई तथा कानपुर के भाजपाई एवं विश्व हिंदू परिषद के अगुवाकारों की प्रतिक्रिया भी अगर तीन बजे पूर्व कानपुर की जनता को सुनवा सकें तो सुनवा दीजिए। आपकी सरकार अटल जी के नेतृत्व में अपना कार्यकाल पूरा कर चुकी है। तब आपकी सरकार काला धन स्विस बैंक से क्यों नहीं ला पाई। राम सेतु आपकी पार्टी की आस्था का विषय है। मेरा कहना है कि इस रामसेतु को स्वयं भगवान राम ने लंका विजय के बाद अयोध्या वापसी के समय पुष्पक विमान में बैठने के बाद विभीषण के अनुरोध पर ध्वस्त कर दिया था। इस तथ्य की पुष्टि पदम्पुराण से की जा सकती है। कृपया अपनी पार्टी के प्रवक्ताओं विशेषत: सुधांशु मित्तल से कहिए कि अध्ययन कर लें, उसके बाद आस्था का विवाद खड़ा करें। आज आप सोशल मीडिया के सबसे बड़े हिमायती हैं। क्या वह दौर भी देश की जनता को याद दिलाएंगे। जब सैम पित्रोदा इस देश की कम्प्यूटीकरण की बुनियाद सी डाट परियोजना पर कार्य शुरू करके रख रहे थे। तब आपकी पार्टी श्री अटल बिहारी वाजपेई जैसे प्रभावशाली व्यक्ति के नेतृत्व में गली-गली यह दुष्प्रचार कर रहे थे कि यदि कम्प्यूटरीकरण हो गया तो देश बेरोजगारी के भंवर में फंस जाएगा। क्या आप आज स्वीकार करने का साहस करेंगे। आप लोगों का उस समय का स्टैंड गलत था। बोफोर्स में दलाली के अलावा आपने उसकी गुणवत्ता पर भी प्रश्न उठाए थे, जो सोना के मनोबल पर विपरीत प्रभाव डालती थी। आपकी सरकार के कार्यकाल में बोफोर्स के दलालों का पर्दाफाश नहीं हो पाया तथा कारगिल युद्ध के दौरान यदि यह बोफोर्स न होती तो आपके देश की स्थिति क्या होती? क्या आपको देश को बताएंगे? टिहरी बांध के निर्माण के समय से ही अभी कुछ दिनों पूर्व तक आपकी पार्टी इसे देश के लिए भयंकर खतरा एवं अभिशाप बता रही थी। केदारनाथ त्रसदी के बाद यह बांध देश का रक्षक व वरदान बनकर सामने आया है। अगर यह न होता तो टिहरी के नीचे तबाही का जो आलम होता, उससे कम से कम आज आपकी जहां रैली हो रही, कानपुर बच न पाता। मोदी जी एक सवाल और भी आपकी पार्टी ब्रांडिंग करने के लिए जितना धन आज प्रतिदिन व्यय कर रही है वह काला है अथवा सफेद? क्या आप बताने की कृपा करेंगे। आप मीडिया की नजरों में देश के भावी प्रधानमंत्री के रूप में देखे जा रहे हैं। आम जनता तथा देश का संत समाज कुछ बिंदुओं पर आपका नजरिया जानना चाहती है। मैं आम जनता और संतों के इन सवालों पर आपको सार्वजनिक बिंदुवार चर्चा करने के लिए सादर आमंत्रित करता हूं। एक लंगोटी, एक अंचला, एक मोबाइल मेरी कुल प्रापर्टी है। राजनीति में कोई रुचि नहीं है। लेकिन देश के आम अदने सड़कछाप नागरिक जो कुल वोटरों का लगभग पचास प्रतिशत होंगे, के सवालों के अलावा आपसे पूछना चाहता हूं खुले मंच पर समय देने की कृपा करें। एक प्रश्न और पूछना चाहता हूं, थल सेना अध्यक्ष के पद पर रहा वो व्यक्ति जो अपनी उम्र विवाद के कारण उस समय चर्चा में आया जब वो सेवानिवृत्त के करीब था, के तब के नासूम कथनों पर आपका क्या नजरिया है। आपके सबसे बड़े हिमायती बाबा रामदेव जी ने अन्ना हजारे के आंदोलन के बाद पतंजलि योग पीठ की 80 एकड़ अवैध कब्जे वाली जमीन किन परिस्थितियों में कब्जा मुक्त की थी। क्या आप प्रकाश डालेंगे यदि आप प्रधानमंत्री होते और खजाने की कोई सूचना आपको मिलती तो आप क्या कार्यवाही करते क्योंकि वर्तमान कार्यवाही में आपको देश की जग हंसाई दिखाई दे रही है। अत: अनुरोध है कि कृपया समय दे दीजिए, संवाद हो जाए।

आभार, सम्मान एवं अभिवादन सहित भवदीय
ऊँ श्री शोभन आश्रम, शोभन कानपुर देहात।
गरीबी और बेरोजगारी विमर्श की कुछ लेखन धाराएँ भी जन्म लेंगी क्या ? जाति धर्म से अलग ? मानवीय असमानता भी तो एक विषय है और सबसे बड़े विषय किसान और मजदूर की तरफ लेखको और कवियों का ध्यान कभी फैशंवश ही जाता है | क्या ये भी महत्वपूर्ण विमर्श बन सकते है ? या ये सब बिकाऊ माल नहीं है और इन्हें क्रेता नहीं मिलेंगे और इनाम भी नहीं मिलेगा ??
आज ए बी पी न्यूज़ पर राजीव गाँधी का किस्सा और उस समय का घटनाक्रम दुबारा सामने से घूम गया | अज्ञानता और अनुभवहीनता और एक गलती कर उसको दूसरी गलती से बराबर करना और उचित तथा सच और समाज तथा देशहित पर फैसला करने के स्थान पर राजनीतिक तात्कालिक हितो पर फैसला कर बैठना ,गलत और अनुभवहीन सलाहकार होना ,केवल खुश करने की कोशिश करना ,बहुत छोटा सा फायदा [ व्यक्तिगत या पार्टी का देखना ] सचमुच देश और समाज हित में साबित नहीं होते और अंततः नेता के लिए भी उचित साबित नहीं होते है |
सीखने और समीक्षा करने लायक ये कार्यक्रम है | जो इतिहास से सबक नहीं लेता और उसे भूल जाता है वो फिर उसी इतिहास के सामने जा खड़ा होता है |
देश और समाज खुद से और पार्टी से बड़ा होता है | ये आज भी लोग कैसे समझेंगे ? देश को बर्बाद करने के बाद समझेंगे या उससे पहले समझने की कोशिश करेंगे ?
मैंने तो बहुत कुछ निषकर्ष निकाल लिया और बहुत कुछ जो भूला था याद कर लिया ,सुन भी लिया और गुन भी लिया | जय हिन्द |

शनिवार, 19 अक्तूबर 2013

कोई उत्तर प्रदेश में आया ,पहुंचा ,भाषण दिया ,लोगो को वहा जाने से नहीं रोका गया ,५० हजार लोग आये और गए किसी के साथ कोई घटना और दुर्घटना नहीं हुयी | वापस वो अपने घर भी चले गए तो उनकी माँ ने उनसे पूछा की तू इतना झूठ क्यों बोलता है की उत्तर प्रदेश में कोई जाकर वापस नहीं आता है और तुझे भाषण नहीं देने देंगे ? तेरी तो सारी बाते झूठ निकली | बेटा झूठ थोडा समझदारी से बोला कर वर्ना जनता में पोल खुल जाएगी और सपना सपना ही रह जायेगा |
माँ ने ये भी पूछा की सच बता क्या वहा सचमुच -१- सभी इन्टर पास बच्चो को लैपटॉप मिल रहा है ? -२ -क्या वहा बचो की शिक्षा मुफ्त है ? -३- क्या वहा किसानो के कर्जे सचमुच माफ़ हुए है ? -४ - क्या वहा सभी खेतो तक और टेल तक पानी पहुंचा है ? -५ - क्या वहा केवल एक रुपये में सारा इलाज होता है ? -६- क्या वहा सभी इन्टर पास लडकियों को तीस हजार रूपया मिलाता है ? - ७- क्या वहा गरीब के बच्चियों की शादी में सर्कार पैसा देती है ? -८- क्या वहा समाज के सभी तबको ,विकलान्गो,विधवाओ ,वृद्धो को सरकार सहायता देती है ? -९- क्या वहा व्यपर्रियो और किसानो का पांच लाख का सरकार ने बीमा किया है ? १०- क्या वहा सभी जिले चार लेन की सडको से जोड़ी जा रही है ? ११- क्या वहा नए मेडिकल कालेज ,स्कूल ,कालेज ,खोले गए है और खोले जा रहे है ? १२- क्या वहा मेडिकल के छात्रो की सीटे बढ़ गयी है ? -१३ -क्या वहा नए बिजली घर खोले जा रहे है ? -१४ - क्या वहा का मुख्यमंत्री सचमुच नौजवान है और उत्तर प्रदेश को सबसे आगे ले जाना चाहता है ? -१५ - तो बेटा तुम लोग वहा दंगे क्यों करवा रहे हो ,,अगर देश का भला करना चाहते हो तो वहा के मुख्यमंत्री को काम करने से रोकने के लिए पैसे भिजवा कर माहौल क्यों बिगड़ रहे हो ?
बेटा अगर वहा इतने ज्यादा काम सचमुच हो रहे है तो तुम वो सब काम क्यों नहीं कर रहे हो ? बस उनका नारा चुरा कर अपने प्रदेश में भी टेबलेट बांटने की बात कर दिया ?
बेटा मुझे तो तुम्हारी बहुत चिंता लग रही है | पहले ही तुमने बहुत पाप किया है | ऐसा न हो की तुम्हारे झूठ ,पाप और चालबाजियां तुम्हे ही बर्बाद कर दें ? तुमने किसी को नहीं छोड़ा कम से कम भारत को तो छोड़ दो |
पर बेटा जब तुम उत्तर प्रदेश पहुँच गए तो मुझे चैन पड़ गया की अब तुम सुरक्षित हो क्यों यहाँ तो तुमने इतने पाप किये है की हर वक्त दिल डरा रहता है की पता नहीं किसकी औलाद सामने आ जाये | तुमने लोगो को बहुत डरा दिया है पर बेटा देखो बंज्जारा ही बोल गया | रावण और कंस जैसे लोगो से भी लोग डरते थे ,कौरवो से भी डरते थे पर बेटा--- मैं बूढी मा तेरा वो हाल नहीं देखना चाहती | इसलिए बेटा सुधर जा ,,इतने झूठ ,पाप और ,अहकार ,और सभी को ख़त्म कर तनाशाह बनने की सोच भी मत | ये तेरी माँ की इच्छा है | पर तू तो अँधा हो गया है हिटलर बनने के लिए | और ये माँ अपने बच्चे को हिटलर बनाते नहीं देखना चाहती है |

रविवार, 13 अक्तूबर 2013

रावण को जलाने के स्थान पर हम अपनी बुराइयो को जला देते तो कैसा होता ? घूस लेने और देने के इरादे को जला देते तो कैसा होता ? जमाखोरी ,मुनाफाखोरी ,मिलावटखोरी के कारोबार को जला देते तो कैसा हो ? जाती और धर्म के नाम पर पनपने वाली नफरत को जला देते तो कैसा होता ? धर्म और जाति के नाम पर वोट डालना हो या चाहे कितना गलत आदमी हो पर पार्टी के नाम पर उसे वोट देने की आदत को जला देते तो कैसा होता ? सरकारी तंत्र में बैठे चोरो को मालिक समझाने की मानसिकता को जला दे तो कैसा हो ? कोख में बेटियों को मारने की इच्छा जला दे ,वातावरण को प्रदूषित करने की आदत को जला दे तो कैसा हो ?
पर हम इन सभी को नहीं जलाएंगे ;;; बस जलाएंगे हर साल पुतले और रावण को असली रावण को भूज जायेंगे एक वर्ष तक और खुद रावण से भी बड़े रावण बन जायेंगे और करते रहेंगे उससे भी बहुत ज्यादा और बहुत बुरे काम |
फिर एक दिन पुँतला जलाने के लिए जैसे सारे पाप कर हम धोने चले जाते है किसी पवित्र स्थान पर या किसी देवी या देवता के सामने और वहा से लौट कर फिर तरोताजा होकर करने लगते है सारे पाप फिर से |
मैं ऐसे नकली दशहरे की शुभकामना कैसे दूँ ?? दूंगा जिस दिन असली रावण मरेगा ,जलेगा |

शनिवार, 12 अक्तूबर 2013

                                        देश के गरीबो की आवाज थे डॉ लोहिया
                                                                                           
                                                                                                                                      इस देश के अनोखे नेता डॉ राममनोहर लोहिया को हम याद करते है || वही डॉ लोहिया जिसने उस वक्त जर्मनी से अर्थशास्त्र में पी एच डी किया जब हिटलर उभर रहा था और उनके अपने विचारो के कारन उनके प्रोफ़ेसर ने उनका पी एच डी का इन्टरवियू समय से पहले करवा दिया की हिटलर के सत्ता में आने के पहले वे जर्मनी छोड़ दे । वही डॉ लोहिया जो जर्मनी गए तो जर्मन नहीं जानते थे और जर्मन जाने बिना वहा छात्र नहीं बन सकते थे तो उन्होंने अपने प्रोफ़ेसर से केवल दो महीने का समय माँगा और जब दो माह बाद वो दुबारा अपने प्रोफ़ेसर से मिले तो जर्मन बोलते हुए मिले | वाही डॉ लोहिया जो देश के करो या मरो नारे के मुख्या चिन्तक थे और गाँधी जी को इस हद तक ले जाने के लिए उन्हें पूरे एक हफ्ते तक उनके साथ रह कर तर्क करना पड़ा था | वाही डॉ लोहिया जिन्होंने १९४२ में जब सारे नेता जेल चले गए थे तो भूमिगत रह कर देश की आजादी की लड़ाई को धार दिया | वाही डॉ लोहिया जिनको लाहौर की जेल में आजादी की लड़ाई के लिए भरी यातनाएं डी गयी थी और फिर भी नहीं झुके थे | वही डॉ लोहिया जिनको गाँधी जी ने कलकत्ता बुला लिया था जब देश आजादी का जश्न मना रहा था उस वक्त रक्तपात से डूबे कलकत्ता को शांत करने के लिए ,ये अलग बात है की उनका जिक्र नहीं होता है | वाही डॉ लोहिया जिनको गाँधी जी ने पहले देश के सरकार में मंत्री बन कर जिम्मेदारी लेने को कहा पर लोहिया जी की दृष्टि और चिंतन को सुनकर उन्हें ३० जानवरी की शाम को राजनीतिक चर्चा के लिए बुलाया था ,पर उस दिन जब लोहिया वहा पहुचने वाले थे तो कुछ दूर पहले उन्हें पता लगा की बापू की फासीवादी ताकतों ने हत्या कर दिया ,वर्ना कोई राजनीतिक तस्वीर उभर सकती थी |

देश के वणिक समाज के लोग अपने कार्यक्रम में उनकी फोटो लगाते है और उनको अपने समाज का गौरव बताते है और वे ये भूल जाते है तथा इसका जिक्र भी नहीं करना चाहते की उसी डॉ लोहिया ने इस देश में जाति तोड़ो अभियान चलाया था और तमाम लोगो ने अपने नाम से जाती का नाम हटा दिया था । ये लोग ये भी याद नहीं रखना चाहेंगे की उसी डॉ लोहिया ने कई लाखो जनेऊ तुड़वा कर जलवा दिया था । ये तो बिलकुल याद नहीं रखना चाहिए कि उसी डॉ लोहिया ने ; संसोपा ने बाँधी गांठ - पिछड़े पाए सौ में साठ : का नारा दिया था । जिसने मण्डल कमीशन की बुनियाद रखा । पर उनके नाम के साथ उनकी जाती चिपकाते हुए बताया जाता है की डॉ लोहिया भी दर असल बनिया थे और डॉ लोहिया को शायद इससे बड़ी गाली दी भी नहीं जा सकती जो उन्हें अपने कद से बहुत छोटा बना देती है ।

कुछ दूसरे हम जैसे लोग भी उन्हें शायद याद करेंगे जो उनके चित्र से अपने ड्राइंग रूम या ऑफिस सजाते है । हम जैसे लोग उनके इतिहास को याद करने की कोशिश करेंगे ,उन्हें याद करने की कोशिश करेंगे केवल एक व्यक्ति के रूप में ,एक नेता के रूप में और थोडा सा स्वतंत्रता सेनानी के रूप में भी शायद याद कर लें । पर उनकी बातो पर ध्यान नहीं देंगे ,उनके विचारो को अपनी अलमारियों के सबसे पीछे खाने के लिए छोड़ देंगे । डॉ लोहिया अगर चाहते तो पूरी जिंदगी सांसद रह सकते थे । वे चाहते तो नेहरु जी की सरकार से लगातार केंद्र का महत्वपूर्ण मंत्री रह सकते थे । वे चाहते तो दिल्ली के एक शानदार बंगले का सुख उठा सकते थे ।

पर फिर इतिहास चक्र कौन लिखता ,कौन सीता और सावित्री और द्रौपदी के बहाने औरतो की स्वतंत्रता की चर्चा छेड़ता । फिर चित्रकूट में रामायण मेला लगा कर संस्कृति को सहेजता कौन ? देश विभाजन के गुनाहगार की चर्चा नहीं कर सकते थे वे । राम ,कृष्ण ,शिव या केवल कृष्ण लिख कर इनके बहाने जीवन संस्कृति ,जिम्मेदारियों ,मर्यादाओ ,और न्याय की चर्चा नहीं कर पाते वे । तब कहा सगुण और निर्गुण की बात हुयी हुयी नए संदर्भो में । तब नहीं हुयी होती चर्चा संसद में अमीरी और गरीबी की इतनी बड़ी खाई की तीन आना बनाम छ आना की बहस के साथ । तब कौन भारत को चीन के आक्रमण से आगाह करता । कौन होता जो तिब्बत की लड़ाई लड़ता । तब शायद गोवा की आजादी और लम्बी हो जाती और नेपाल में जागरण का सूरज देर से पहुँचता । कौन दहाड़ कर कहता की हिमालय बचाओ और जिस पानी की आज चर्चा है उसकी बुनियाद किसने रखी होती गंगा बचाओ का अभियान चला कर और उसके बहाने सभी नदियों को बचाने की आवाज लगा कर । तब कौन कहता की दुनिया को सात क्रांतियों की जरूरत है वो रंग भेद के खिलाफ हो ,यानि चमड़ी की हो ,वो स्त्री पुरुष के बीच भेद की हो ,वो जाती के आधार पर भेदभाव के खिलाफ हो ,वो धर्म के आधार पर भेदभाव के खिलाफ हो ,गरीबी अमीरी के भेदभाव के खिलाफ हो इत्यादि । तब कौन इबारत लिखता चौखम्भा राज की जिसके आधार पर आज का भारत गाँव से देश तक चार सरकारों से संचालित होता है ।

यदि डॉ लोहिया ने सब सुख स्वीकार कर लिया होता तो कौन तोड़ता आज़ादी के बाद भी हमें मुह चिढाती अंग्रेजो की मूर्तियों को और महीनो इसके लिए जेल काटता राजनारायण जैसे साथियों के साथ और मूर्तियाँ आज भी हमारे सीने पर मूंग दल रही होती । तब कौन लड़ाई छेड़ता अंग्रेजी हाय हाय की जिसकी एक परिणिति अभी दिखलाई पड़ी है जब आई ए एस के इम्तहान से अंग्रेजी की बाध्यता समाप्त कर दी गयी है । तब कौन लड़ता नौजवानों के लिए विश्वविद्यालयो और कालेजो में जा जा कर और उन्हें आने वाले समय में लोकतंत्र का मजबूत हथियार बनाता । कौन कहता की किसान को उसकी उपज का मूल्य दो और गरीब को उसका हक़ । वे नहीं कह पाते ; संसोपा ने बांधी गांठ और पिछड़े मांगे सौ में साठ ; और आज का सामाजिक न्याय का परिदृश्य भी शायद दिखलाई नहीं पड़ता या अभी शैशव अवस्था में घुटने पर चल रहा होता । यदि उन्होंने मंत्री पद स्वीकार कर लिया होता तो कौन बताता इस देश को की पहाड़ जैसे सत्ता में बैठे लोगो से कैसे टकराया जा सकता है और कौन अहसास करवाता की विपक्ष भी कुछ होता है । कौन गैर कांग्रेसवाद का सिद्धांत देकर अजेय कांग्रेस की देश में नौ सरकारें गिरा कर रास्ता दिखाता की कांग्रेस की सरकार हटाई भी जा सकती है । कौन लड़ता नेहरु जी जैसे बड़े नेता से और ये कहने का सहस करता की मै जानता हूँ की पहाड़ से टकरा रहा हूँ पर टकराते टकराते मैं दरार तो पैदा कर ही दूंगा जिसे कल कोई गिर भी देगा ।

हाँ जो सब छोड़ने को तैयार होते है वही नए समाज की रचना करते है ,वही देशी की आजादी के योद्धा होते है ,वही सामाजिक और आर्थिक क्रांतियाँ करते है । वही समाज को रास्ता दिखाते है । वही उंच नीच के भेदभाव से लड़ते है । ऐसे लोग ही होते है क्रांतिदूत ,समाज परिवर्तक ,और महामानव । मुझ जैसे लोग लोग जो उन्हें पढ़ कर और जान कर राजनीती में आ गए पता नहीं उनके अभियान को कुछ इंच भी सरका पाए या नहीं । पता नहीं समाज को बदलने की बात करते करते खद ही बदल गए या नहीं । पता नहीं लोगो को न्याय दिलाते दिलाते खुद अन्याय का शिकार तो कही नहीं हो गए । लोगो को खुशहाल बनाते बनते खुद तो बर्बाद नहीं हो गए । पर आज मुझ जैसे उनके तमाम दीवानों का उस चिन्तक और त्यागी डॉ लोहिया को सलाम ।हाँ आज भी मुलायम सिंह यादव तथा अखिलेश यादव जैसे लोग उनके सपनो को याद कर कर के जमीन पर उतारने की कोशिश कर रहे है ,और कोशिश कर रहे है की डॉ लोहिया सदा जिन्दा रहे और उनके सिधान्तो की लौ जलती रहे । आइये कुछ उनके विचारो पर हम भी विचार भी कर ले । उन्हें पूरे देश का सलाम ।
देश के लोगो ,बुद्धिजीवियों और विशेषकर मीडिया के दोस्तों कल ११ अक्टूबर को एक अभिनेता के अलावा एक १९४२ के योद्धा ,१९७५ की लड़ाई के नायक और १९७७ के परिवर्तन के नायक जयप्रकाश नारायण का भी जन्मदिन था ??? शायद चकाचौंध में आप सभी भूल गए ??
वैसे ए बी पी के कार्यक्रम में चुनाव बाद खुद प्रधानमंत्री बनने के सवाल पर राजनाथ सिघ जी की मुस्कान बहुत कुछ चुगली कर गयी | मैंने काफी पहले खरगोश और कछुए की बात लिखा था |
मैं भूल गया था तो आज और अभी किसी ने याद दिला दिया की राजनाथ सिंह अपने मुख्यमंत्री काल में भी घोषणा मंत्री पद से नवाज दिए गए थे जनता और मीडिया द्वारा | आज ए बी पी टी वी के कार्यक्रम में भी उनका वाही रूप दिखा | इतने साल बाद भी नहीं बदले !!!!!!!!!!
मैं बड़ा दुखी हूँ की लोगो का दिल टूटा जे पी के आन्दोलन के बाद ,, फिर वी पी सिंह के सरकार में आने के बाद लोग ठगा महसूस करने लगे ,,, फिर अन्ना , केजरीवाल ,रामदेव इत्यादि के पीछे लोग पगला गए और हम जैसे लोग जो उसकी असलियत बता रहे थे उन्हें सिर्फ गली ही नहीं दिया बल्कि कुछ भी करने को उतारू हो गए और परिणाम वाही निकला जो मैं लगातार कह रहा था |
दुखी इस बात पर हूँ की ऐसे लोग फिर मुझे बहुत गलिया दे रहे है बल्कि धमकियाँ भी ,, एक ने तो यहाँ तक धमकी दे दिया की ,,, जब गाँधी को नहीं छोड़ा तो तू क्या चीज है ?/ फिर से आप सभी का दिल जोर से टूटेगा दोनों तरह | दोनों तरह की व्याख्या अलग से |

बुधवार, 9 अक्तूबर 2013

देश की सत्ता पार्टी के नेता है और उन्हें भविष्य का नेता बना कर पेश किया जा रहा है | आज उनकी दो सभाएं थी पहले भी बहुत की है | क्या उनका भाषण किसी को अच्छा लगता है ? क्या ऐसा लगता है की भारत जैसे देश का नेता बोल रहा है ? क्या कोई सपने दिखते है ? क्या वे सपने हिंदुस्तानियत के सिद्धांतो पर कसे हुए दिखते है ? क्या सपनों के प्रति कोई संकल्प दिखता है ?
पता नहीं पूजीवादी ताकते ऐसे ही दो लोगो को आमने सामने खड़ा कर पूरे देश को इन्ही दो खेमो में बाँट क्यों देना चाहते है ?

मंगलवार, 8 अक्तूबर 2013

असाकाम के बारे में अब उनके कई शिष्य और शिष्याये बहुत कुछ बता रहे है | क्या बाकि भी ऐसे पाखंडियो के आश्रमों से भी ऐसी बातें उठेंगी ? या कौन पहले घंटी बांधे का इन्तजार ? बहुत सी शिष्याओ का संकट ये है की अब घर या समाज में कैसे लौटे ?? मैंने कई दिनों पहले ऐसा लिखा था | ये सब बाबा है या ---- और ये आश्रम है या कसाईखाना ? वाह रे धर्म के प्रचारको और वाह रे ऐसा धर्म | किसी भूखे को खाना मत दो ,किसी को पानी मत दो और अंधे होकर किसी को सब कुछ दे दो |
दिल्ली में कई तरह के लोग मिले ,बहुत ज्यादा पढ़े लिखे मैनेजमेंट के लोग भी और इंजीनियर भी और अन्य भी ,अधिकारी जो गुजरात में रह चुके है और सभी ने एक आग्रह किया की देखिये आप लोगो की बड़ी जिम्मेदारी है की भारत में हिटलर को आने से रोकिये वर्ना भुत बुरा हो जायेगा | समस्याए तो अपनी गति से ही पूरी दुनिया में हल हुयी है पर लोकतंत्र दुनिया में केवल किस्मत वालो को मिला है और केवल उन देशो में मजबूती से जिन्दा है जिनके संस्कार में लोकतंत्र निहित है |
अब लोगो का ये सार्थक आग्रह तो मानना ही पड़ेगा | हमें भी ,आप को भी और देश को भीं |

बुधवार, 2 अक्तूबर 2013

मैंने लिखा की इस देश बापू और शास्त्री जी जैसे लोग चाहिए ,हिटलर ,मुसोलिनी और माओ नहीं चाहिए तो कुछ लोग इतने नाराज क्यों हो रहे है ???? क्या उन्हें हिटलर मुसोलिनी और माओ चाहिए ???? तो खुल कर बोलो दोस्तों | बापू ,शास्त्री जी और पटेल जी के मखौटे पहन कर इन लोगो की ह्त्या मत करो |
दुनिया को रास्ता दिखाने वाले महत्मा गाँधी और जवान तथा किसान को हथियार बना कर दो तरह की जंग जीतने वाले लाल बहादुर शास्त्री को हमारा आप का पूरे देश का और मानवता का नमन | पर सावधान रहना होगा और शपथ लेना होगा आज की बापू के हत्यारे और दोनों के विचारो के दुश्मन इन दोनों की धरती पर सर न उठा सकें |
इस देश को और मानवता को बापू चाहिए शास्त्री जी चाहिए पर हिटलर ,मुसोलिनी और माओ ,नहीं चाहिए |

मंगलवार, 1 अक्तूबर 2013

भारत जैसे बड़े देश के अपने प्रधानमंत्री की बात से मुझे बहुत दुःख पहुंचा है और मैं अपना विरोध दर्ज करवाना चाहता हूँ | उनका ये कहना की किसी व्यक्ति के खिलाफ कई दल एक हो मुझे बहुत छोटी बात लगी | भारत को एक होकर खड़ा होना है तो चीन से और पाकिस्तान से निपटे ,आतंकवाद से निपटे ,भूख ,गरीबी ,बेकारी से निपटे ,मानवता विरोधी कार्यो से निपटे देश के अन्दर मौजूद इंसानियत के दुश्मनों से निपटे और साम्रदायिक विचारधारा से निपटे |
प्रधानमंत्री के मुह से किसी व्यक्ति का नाम लिया जाना उस व्यक्ति को बिना वजह नाम देता है और प्रधानमंत्री को छोटा करता है और प्रधानमंत्री जी आप केवल किसी पार्टी के नेता नहीं बल्कि मेरे प्रधानमंत्री भी है | इसलिए आप के इस वक्तव्य को मैं नकारता हूँ की ये एक व्यक्ति मनमोहन सिंह का बयांन है ये भारत के मेरे प्रधानमंत्री का बयान मानने और स्वीकारने को मैं तैयार नहीं हूँ | इस बयान के द्वारा आप को मुझे छोटा करने का अधिकार नहीं है और आप जिस व्यक्ति का नाम ले रहे है उसे आप हमारे ऊपर थोप नहीं सकते | वैसे भी किसी हिटलर वादी के लिए हिंदुस्तान और हिंदुस्तानियत में स्थान नहीं है |
प्रधानमंत्री जी अपने पार्टी की राजनीती में आप जो भी कहे पर ये बयांन वापस ले |
मानव जीवित रहेगा तो समाज भी रहेगा ,देश भी रहेगा और तभी जातियां रहेंगे और धर्म रहेंगे| जब लोग जीवित रहेंगे तभी कोई मंदिर में दिया जलाएगा और घंटी बजाएगा , मस्जिद में अजान होगी गुरद्वारे और चर्च में प्राथना होगी |
इंसान जीवित रहेंगे तभी रामायण और गीता पढ़ी जाएगी ,तभी कोई कुरान पढ़ेगा ,तभी कोई बाइबिल पढ़ेगा ,तभी कोई गुरुग्रंथ साहब का पाठ करेगा |
जब किसी मस्जिद में अजान होती है तो पास के किसी मंदिर की कोई ईंट नहीं हिलती और जब मंदिर में आरती होती है तो किसी मस्जिद की ईंट नहीं हिलती | सभी धर्म स्थलों के साथ यही है |
जब अलग धर्मो के ईश्वरों को एक दूसरे से अदावत नहीं है तो उनके मानने वालो को क्यों |

इसलिए इंसान को जिन्दा रहने दो |
मुझे संविधान सभा की पूरी कार्यवाही पढ़ने का मन हो रहा है और पता लगाना है की [ १ ] हमारा संविधान किसी एक ने बनाया या बहुतो ने बनाया ? [ २ ] हमारा संविधान खुद बनाया गया या कई देशो से उधार लेकर लिख दिया गया ? [ ३ ] संविधान बनाने वालो में किस किस की क्या भूमिका थी ? [ ४ ] क्या किसी ने संविधान बनाते हुए आरक्षण के प्रावधान का विरोध किया था ? किसने और क्या कहा था ?  [ ५ ] संविधान सभा में जातिगत और धार्मिक आधार पर क्या क्या संख्या थी ? [ ६ ] क्या सभी के समर्थन के बिना भी ये प्रावधान हो सकते थे ? [ ७ ] सचमुच में किसका क्या योगदान था ??
कोई पढ़ चूका हो तो प्लीस इन सवालो के जवाब प्रमाण सहित बता दे | शायद देश को जानना चाहिए ये सब जैसे ये जानना चाहिए की आजादी की लड़ाई में कुल कितने लोग शहीद हुए ? उनमे किस किस प्रदेश और किस किस क्षेत्र के कितने थे ,,, किस किस जाति और धर्म के कितने थे ? राजाओ और जमीदारो तथा व्यापारियों में कितने थे ? उस वक्त राज का हिस्सा रहे पुलिस वालो ,फौजियों ,और अधिकरियो और कर्मचारियों में से कितने थे ?
अच्छा रहेगा देश की बहुत सी बहस आसान हो जाएगी |
पर बिना खुद सारी चीजें पढ़े और आकडे निकाले मैं तो कुछ नहीं कहूँगा क्योकि---------
मेरे बचपन में जब हम लोग छात्र राजनीती कर रहे थे दो लोगो से बात करना बड़ा मुश्किल था एक कम्युनिस्ट और दूसरे संघी | दोनों जितना रट कर आते थे वाही से शुरू कर वाही ख़त्म करते थे और तर्क कर ने पर जवाब नहीं देते थे बल्कि फिर क से शुरू कर ज्ञ पर ख़त्म कर देते | दोनों की शब्दावली देश के सामान्य लोगो से अलग थी |
समय बीता रूस बदला ,चीन बदला पर ज्यादातर कम्युनिस्ट लोगो की भाषा भारत में नहीं बदली और न उस वक्त का रटा हुआ ही बदला |और यही उनके इतने पीछे जाने का कारन बना |
पर संघियों का अजब हाल है | इनकी छ साल सरकार रही तो अपने सारे आदर्श ,चरित्र ,चहरे की बातें ,, भय भूख की बाते ,, कश्मीर ,सामान कानून की बाते ,राम मंदिर सब भूल गये | सीधे राजनीती करने वाली बीजेपी के साथ सारे संघी भी लूट तंत्र में जुट गए ,कुछ की सी डी बनी | सबसे बड़े महारथी ने तो बयान ही दे दिया था की एक मंदिर के लिए सरकार नही गँवा सकते है |और जो सज्जन कश्मीर की विजय करने निकले थे और डर के मरे तत्कालीन प्रधानमंत्री से उन्होंने सुरक्षा और एयरफोर्स का जहाज माँगा था ,,वहा पहुचे तो झंडा फहराते हुए उनसे झंडा नीचे गिर गया था और भाग आये थे उन्होंने तो उसके बाद कश्मीर जाने का नाम ही नहीं लिया |
संसद ,अक्षरधाम सहित तमाम स्थानों पर आतंकवादी हमले पर बेशरम बने रहे | कारगिल में दुश्मन घुस आया और सोते रहे | शहीदों के ताबूत तक में घूस खा गए
पर बेशर्मी तो देखिये फिर धुल झाड कर उन्ही मुद्दों पर दंगे करने में लग गए | इनसे जवाब पूछो की छ साल में क्या किया तो परमाणु विस्फोट बता देंगे ,उसकी पोल कलाम साहब ने खोल दिया ये बता कर की ये तयारी नरसिम्हा राव की थी और उन्होंने ही वाजपेयी जी से करने के बारे में कहा था |
अब उस दिन का इन्तजार है जब ये भगत सिंह , चंद्रशेखर आजाद ,सुभाषचन्द्र बोस इत्यादि को संघ का कार्यकर्ता घोषित करेंगे | सारे बड़े अन्य नेताओ को अपना आका बताएँगे | शुरुवात तो कर दिया है |
इनसे आप किसी की शादी की बात करो तो ये शोक व्यक्त करने लगेंगे और किसी की मृत्यु की बात करो तो बन्दे मातरम गाने लगेंगे |
इश्वर ,,राम जी इन्हें कुछ अक्ल दे दीजिये की मानवता जिन्दा रहेगी तभी समाज रहेगा और देश रहेगा | ये मानवता को जिन्दा रहने दे और मानव के विकास की बात करे ,उसकी परेशानियों के हल की बात करे |
ये लोग भी भारत में पैदा हुए है जहा सदियों से तरह तरह के लोग एक साथ रहते है फिर इन्हें घृणा कहा से मिली | पर दिक्कत है की ये धर्म के नाम पर भी नफ़रत करते है ,, उसके बाद जाती के आधार पर दलित और पिछड़ी जातियों से भी नफरत करते है | और नफ़रत ही बाँटते है और नफ़रत बाटने के लिए पाकिस्तान के तालिबानियों और अफ्रीका इ कबीलों की हत्यायो को भारत का दिखा कर हिन्दुओ की बता कर एम् एम् एस बाँटते है सी डी बाटते है |
इनसे कैसे बात किया जाये जब ये अपनी सुविधा से अपने ही विषय चुनते है और अपनी सहूलियत से ही जवाब देते है | न आजादी की लड़ाई में भाग न लेने का जवाब देते है न आपातकाल की माफ़ी मांगने का जवाब देते है | न पाने सत्ता के छ साल का जवाब देते है .न राम मंदिर आन्दोलन के पैसे का जवाब देते है | बस आरोप लगते है और चाहते है की भारत में कबीला युद्ध शुरू हो जाये | हिन्दुओ और गरीबो ,मजदूरों ,किसानो की समस्याओ पर कभी मुह नहीं खोलते है |
जब आक्रमण करते है तो भद्दी भाषा बोलते है और किसी सीमा तक चले जाते है | ऐसे लोगो से कैसे बात करें |
वाह से संघियों और बीजेपी वालो ? लालू सहित जितने नेताओ या किसी के खिलाफ कोई कार्यवाही किया तो सी बी आई ने अच्छा किया और जिसने जो किया बो भरा पर बीजेपी के किसी हत्या आरोपी या बड़ा अपराध करवाने वाले के खिलाफ अगर सी बी आई रिपोर्ट दे रही है तो वो दुरूपयोग है और उसके खिलाफ पहले ही पेशबंदी शुरू कर दिया | मुझे नहीं पता की क्या होने वाला है पर चोर की दाढ़ी में तिनका जरूर नजर आ रहां है |

सोमवार, 30 सितंबर 2013

अगर भारत और पाकिस्तान अपनी सीमायें कुछ दिनों के लिए खोल दें की जो जहा चाहे बस जाए तो मुझे विश्वास है की पाकिस्तान से काफी लोग आयेंगे और भारत से कोई नहीं जयेगा सिवाय उन गलत लोगो के जो छुपे है और उन्हें पकडे जाने का डर है |
पहली बार किसी राजनीतक रैली में विदेशी लोगो को मंच पर बुलाया गया और उनके सामने देश के प्रधानमंत्री का अपमान किया गया | जानकी ये रैलियां आपसी राजनीती के लिए होती है और मजेदार तो ये रहा की पहले कहा गया की हमारे प्रधानमंत्री का कोई अपमान नहीं कर सकता और फिर प्रधानमंत्री को पूरा अपमानित किया गया | फेकू की याददाश्त कमजोर है की कुछ सेकेण्ड पहले कहा गया भूल जाते है या फिर वही तुरंत तुरंत पर्ची आती है जो लिख कर आ जाता है वाही फेकू  बिना सोचे समझे बोल देता है | वाह रे फेकू |
एक टी वे चैनेल अपना स्टिंग दिखा रहा है की कल की दिल्ली की रैली में [ १ ] कितने कितने रुपये में लोग आये [ २ ] ये भी दिखा रहे है की कैसे किसी को भी टोपी पहना कर और कपडे बदल कर किसी धर्म विशेस के लोगो का इंतजाम किया गया | पता नहीं इस स्टिंग को सच माने या नहीं या संघी भाई केवल मुजफ्फरनगर के स्टिंग को सच मानेंगे और इसे फर्जी कहेंगे |
लालू यादव छात्र नेता थे | जयप्रकाश जी के आन्दोलन में भाग लिया | संघर्ष से और गरीबी से राजनीती में आये और मुझे वो दिन याद है जब पहली तनख्वाह मिलने पर उन्होंने बयांन दिया था की २५०० यानि ढाई हजार रुपये जिंदगी में पहली बार देखे है ,,,पर सत्ता मिलते ही सारी वो बातें और लड़ाई भूल गए जिस पर चल कर वो मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचे | सत्ता ने निरंकुश बना दिया | विकास और वादे को भूल कर जातिगत समीकरण बनाने में लग गए | गरीब जनता और साधारण कार्यकर्ता को भूल कर अधिकारियो को और व्यापारियों को बगलगीर बना लिया | ;;;; परिणाम सामने है | न्याय ने सिद्ध किया की न्याय होता है और सी बी आई ने ही सजा दिलाया तो लगा की कोई अधिकारी और संगठन इमानदारी से तय कर ले तो किसी को भी सजा की जगह तक पहुंचा सकता है |नेताओ को समझ में आ जाना चाहिए की अधिकारी और व्यापरी कहा ले जाते है | 
आज की सजा और उससे पहले चौटाला की सजा से भैसे की तरह भ्रस्ताचार के कीचड में सने हुए राजनैतिक लोगो ,अधिकारियो ,कर्मचारियों ,और व्यापारियों को सबक मिल जाना चाहिए और आम लोगो को भी विश्वास हो जाना चाहिए जो भ्रस्ताचार के खिलाफ केवल कुढ़ते रहते है वे आगे आये अपने आसपास निगाह रखे और किसी की भी बढाती हुयी संपत्ति की सूचना सी बी आई , लोकायुक्त ,आयकर इत्यादी विभागों को दें और पकड़वाये और केस के फैसला होने  तक पीछे पड़े रहे जीत आप की होगी | पर केवल जलन के कारन ,झगड़े के कारन शिकायत न करे ,झूठी शिकायत न करें और छोटी छोटी मछलियों के बजाय बड़ी मछलियों से प्रारंभ करें | पर खुद भी गलत काम न करे ,परिवारी को न करने दे | तब न वर्ना कुछ नहीं होगा सब ऐसे ही चलता रहेगा | इक्का दुक्का की सजा से देश नहीं बदलने वाला |
वाह रे पढ़ा लिखा मीडिया ! लालू जेल गये तो बिहार के आने वाले चुनाव में जातियों का हिसाब लगा रहे है और यही आज की चर्चा का प्रमुख मुद्दा है |
पाकिस्तानियों तुम्हे ब्रिगेडियर उस्मान से लेकर ,अब्दुल हमीद और हनीफ तक ने जवाब दिया है ,तुम्हारी गोली से शहीद हुए ये लोग और तुमने मुसलमान होने के बावजूद इन लोगो को नहीं बख्शा | हमारे वायु सेना अध्यक्ष एयर मार्शल लतीफ़ ने भी तुम्हे जवाब दिया था | अपनी मिसाइलो से तुम्हे दहशत में दाल कर हमारे रास्त्रपति और वैज्ञानिक ए पी जे अब्दुल कलाम जी ने भी तुम्हे जवाब दिया है की भारत में भारत सबका है और सब भारत के है | तुम्हारी तरह नहीं की तुम्हारा देश केवल दहशतगर्दो का है |
नफ़रत बांटने वाले और आतंक की खेती करने वाले पाकिस्तानियों के लिए एक घटना ------

मैं अपने दोस्त के इलाज के लिए दिल्ली के एस्कॉर्ट गया था | अचानक माइक से आवाज आई की एक बच्चे की हालत गंभीर है और उसे ओ पॉजिटिव खून चाहिए | मैं काउंटर पर गया और अपना खून दिया | तभी दिल्ली की एक शिक्षिका मिसेस शर्मा आ गयी उनका कोई बहुत गंभीर था पर उन्होंने अपना खून तो दिया ही अपने ऐसे कई रिश्तेदारों को भी फ़ोन कर बुला लिया जिनका ओ ग्रुप का खून था | फिर दो तीन दिनों तक पास के छात्र आते रहे खून देने |
फिर एक दिन जिनका बच्चा था वे मिले ,, वे लाहौर के बड़े ट्रांसपोर्टर थे ,,, मुसलमान होने के बावजूद वे सामने जमीन पर बैठ गए और रोने लगे | मैंने उन्हें उठाया तो उन्होंने कृतज्ञता जाहिर किया और अपना कार्ड दिया की कभी लाहौर आइये | मैंने उनसे केवल एक आग्रह किया की अपने देश के आतंकवादियो को और आकाओ को मत बता दीजियेगा की हिंदुस्तान और हिन्दू लोगो के खून से आप का बच्चा बचा है | उन्होंने कहा की जनता के विचार ऐसे नहीं है बल्कि वहा के फौजी आका और आतंकवादी ताकतें केवल ये खेल करती है | अगर वहां तरक्की हुयी होती तो हम जैसे लोगो को इलाज के लिए भारत क्यों आना पड़ता ? हम लोगो को यहाँ सारी सुविधाएँ मिली | मैंने पूछा की पाकिस्तानी होने के कारन आपसे किसी ने कोई फर्क किया हो किसी मामले में ,उन्होंने कहा कत्तई नहीं ,पता ही नहीं लगा की हम अपने देश में नहीं है | उन्होंने बताया की मैं तो जब बच्चा ठीक होने लगा तो मस्जिद पूछ कर पास ही चला गाया ,जामिया नगर में तमाम मुसलमान मिले सब खुश है ,इस इलाके के एम् एल ए भी मुसलमान है , रास्त्रपति भी मुसलमान है ,हमारे पाकिस्तान में तो कोई हिन्दू नहीं बन सकता | उन्होंने ये वादा किया था की पाकिस्तान जाकर वो ये बातें वहा के लोगो को बताएँगे | पता नहीं बताया या नहीं |
इन पाकिस्तानियों को शर्म नहीं आती की उनके देश से ज्यादा मुसलमान भारत में है और देश के बड़े पदों पर है | सुधर जाओ पाकिस्तानियों वर्ना ----
कल ए बी पी न्यूज़ पर एक पाकिस्तानी पूर्व राजदूत और एक पूर्व मंत्री ऐसी बातें कर रहे थे की समझ में आ गया की इनको क्या पढाया गया है और इनका ईमान क्या है | इतनी घटिया बातें कर रहे थे की मुह कसैला हो गया और ये सामने होते तो इनके चेहरे पर मुह का कसैलापन जरूर चला गया होता | इतने बड़े पदों पर रहने वाले इतने घटिया हो सकते है कल्पना नहीं की जा सकती | क्या ऐसे लोगो से ही हमारे देश के मंत्री और अधिकारी बातें करते है ? बर्दाश्त कैसे करते है ?
संमझ में आ गया की इनका इलाज केवल इंदिरा गाँधी जी जानती थी या फिर मुलायम सिंह जी जानते है | कभी ऊपर वाला एक महीने के लिए मुझे ताकत देदे तो मैं इनका वाही इलाज करूंगा जो इनके लिए उपयुक्त है | छी ऐसे पाकिस्तानी | हमारे देश से गए लोग वहा कितने बुरे हालत में रहते होंगे |
जितने लोग भारत से पकिस्तान जाते है उससे ज्यादा वहा के केवल अपना और परिवार का इलाज करवाने आते है और उनसे कोई फर्क नहीं करता |

रविवार, 29 सितंबर 2013

एक पार्टी के एक नेता अपनी आदत के मुताबिक अपनी पार्टी के अन्य सभी नेताओ को निपटाने में लग गए है | पहले कदम के रूप में उनके पैसे द्वारा लाये गए लोग अपने ही नेताओ को हूट कर उन्हें ये बता रहे है की वे लोग कुछ नहीं है | हूट होने के बाद बाकि नेता मंच पर जाना बंद कर देंगे और तय हो जायेगा की मूछ हो तो बस हिटलर जैसी | आगे बढ़ कर माला पहनाने वाले भी अब शर्मिंदा है | पर रँगे सियार का रंग जल्दी ही उतरेगा | जय गांधीवाद ,जय लोकतंत्र ,जय हिन्द |
आज फिर फेंकू ने फेंका और थोड़ी देर बाद ही अमरीका से मीडिया वालो ने ही जिनका नाम लेकर फेकू ने फेका था फेकू की पोल खोल दिया | वाह रे फेकू |
क्या मेरे देश को भी लोग उन देशो में शामिल करना चाहते है जहा इस कदर नफरत और बदले की भावना घर कर गयी है की कबीले और बस्तियां एक दूसरे पर हमला कर एक दूसरे को जलाते और मारते रहते है | वहा की तस्वीरे छपती है तो इन्सान नहीं बल्कि हड्डियों के ढांचे दिखाते है और कही से खाना बंटने आता है तो टूट पड़ते है |
जहा शांति नहीं रहती वहा केवल विनाश होता है |
इसलिए नफ़रत बाटने के बजाय अपने अपने वो कार्यक्रम बताये सभी, की गरीबी ,बेकारी ,बीमारी सहित सभी समस्यायों से कैसे लड़ेंगे |
देश में नफ़रत बांटने और दंगे करने के लिए पाकिस्तानी वीडियो इस्तेमाल करने वाले खुद को हिन्दू का ठेकेदार और देशभक्त कह रहे है |
देश में महत्मा गाँधी ,सुभाषचंद्र बोस ,डॉ लोहिया ,जयप्रकाश ,चौ चरण सिंह ,सहित तमाम बड़े नेता हुए जो अपने समय में जनता के दिलो पर राज कर रहे थे पर किसी के मंच पर दूसरे नेता हूट नहीं किये गए ,सभी को जनता सुनती थी |
पर अब तो किसी को आगे बढाने वाले भी उस मंच पर नहीं बोल पाते | पुरानी कहावत है की गलत जानवर पालोगे तो पहले आप को ही कटेगा |
नागपुर और गुजरात से हर जगह भेजे जा रहे कुछ हजारो लोग ये खेल कर रहे है | हिटलर के समय भी ऐसा ही होता था | शायद उनको बढाने वाले लेकिन राजनैतिक कार्यकर्ता ,मीडिया और पूंजीवादियो को अब दिखने लगना चाहिए की हिटलर का उद्भव हो रहा है और हिटलर के आने का क्या मतलब होता है ?? जीवन नरक हो जाता है लोकतंत्र ख़त्म हो जाता है और चारो तरफ खून और तबाही ही तबाही दिखती है |
देश में विपक्ष की एक पार्टी थी जिसका नाम बीजेपी था ,,वो भंग कर दी गयी क्या ?? दिख नहीं रही है ,केवल कोई दिख रहा है |
मीडिया और नेकर ने मिल कर कुछ समय पहले एक को रास्ट्रपिता महात्मा गाँधी से बड़ा बनाने की कोशिश किया था और चन्द दिनों के लिए कामयाब भी हो गए थे ,उन्ही के साथ कुछ और लोग गढे और देश ने सबको देख लिया ,,,,, आजकल यही दोनों पूरी ताकत से भारत में एक हिटलर गढ़ने में लगे है | देखते है कहा तक और कितने दिन चलता है | 

शुक्रवार, 27 सितंबर 2013

शायद हंसी आये --- लोगो का विरोध ऐसे होता है ---नेता और सरकार नालायक है ,,, सरकार ,विधायक और सांसद सो रहे है जनता के लिए सड़क नहीं है इन्हें क्या ये तो जहाज से चालते हैं | ---
-- सड़क बनने लगी तो -- पहला विरोध -- सरकार और नेताओ को जनता की चिंता नहीं लोगो की जमीन छीनी जा रही है ---- फिर -- लोगो को सही मुवावजा नहीं दिया जा रहा है ------ फिर -- ठेका गलत आदमी को दिया गया ------ सड़क सही नहीं बन रही है ----- क्रमशः -- हाहा हाहा हाहा ,,
पार्टियों के द्वारा प्रचार और जनसंपर्क बंद हो और सरकार द्वारा बनाये गए एक मंच पर उस क्षेत्र के सभी प्रत्याशी आये और जनता को अपने विचार और कार्यक्रम बताये जिसे टी वी चैनेल लाइव प्रसारित करे | जनता समझदार है उस पर छोड़ दीजिये की किसे वोट देगी | सब खर्चे ख़त्म ,बांटने इत्यादि की कहानी ख़त्म ,| कैसा है ये विचार ??
देश में एक अभियान चलना चाहिए की सभी अपनी ५ साल के अंतराल की और नौकरी ,व्यापर ,चुनाव के पहले और बाद की संपत्ति घोषित करे | फिर एक प्रदेश की संस्थाए दूसरे प्रदेश के लोगो की जाँच करें | देश को पता लगना चाहिए को चोर और बेईमान कौन है ?? इसमें शिक्षक ,वकील ,डॉक्टर ,एन जी ओ इत्यादि सभी आने चाहिए ,देश में कोई नहीं छूटना चाहिये |
ये देश की संसद और सभी विधानसभाओ की जिम्मेदारी है की खुद जाँच कर बताये की कितने सांसदों और विधायको पर सचमुच अपराध करने के कारन मुकदमे है और कितने लोग पर आन्दोलनों के मुकदमे है ?? यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो लोकतंत्र के दुश्मनों को लोकतंत्र पर अघात करने का अधकार बना रहेगा |
पहले राजनीतिक दलों के सभा सम्मेलनों के बाद उनके महापुरुषों और फिर भारत की या हिंदुस्तान की जय होती थी ,भगत सिंह का नारा भी लगाते थे सचमुच के नौजवान ,,इन्कलाब जिंदाबाद ,,| अब तो नारे भी शेयर मार्किट जैसे हो गए
हमारे १२ लोग जिसमे एक लेफ्टिनेंट कर्नल भी है आज बिना लड़ें ही शहीद हो गए | लड़ कर हुए होते तो १२० या १२०० दुश्मनों को मार कर हुए होते | आज रात को नीद नहीं आएगी अगर ये नहीं पता लगा रात तक की १२० दुशमनो को मार दिया | एक बार निपट क्यों नै लेते | बिना लड़ें क्यों मरे |लड़ाई में भी लोग शहीद होते हैं ,हथियार खर्च होते है ,पैसा खर्च होता है तो वो तो वैसे भी खर्च होता है
हमारी गलती मैं ये भी मानता हूँ की हमें उस कश्मीर पर लगातार बात करना चाहिए था जो कश्मीर ने कब्ज़ा किया है ,,,, हमें तिब्बत ,,और १९६२ में हमसे छीनी हुयी जमीन के मुद्दे पर लगातार दुनिया के सामने डेट रहना चाहिए था | तो हमारे सामने शायद दूसरी स्थितियां होती |
मुलायम सिंह जी जब रक्षामंत्री थे तो दो बाते हुयी थी -१- वो सीमा पर गए थे ,गोली चली उन्होंने सेनाध्यक्ष से पूछा क्या हो रहा है ? बताया गया की पडोसी ऐसे ही चाहे जब गोली चलाते रहते है | मुलायम सिंह जी ने तुरंत जवाब देने को कहा तो कहा गया की आप यहाँ से जाये तब देंगे तो मुलायम सिंह ने कहा की एक सैनिक और रक्षामंत्री की जान की कीमत एक है इसलिए अभी जवाब दो और ये सन्देश दुश्मन को भी मिला |
--२ - मुलायम सिंह ने आतंकवादी कैम्पों पर हमले का आदेश दे दिया था पर प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति तैयार नहीं हुयी इसलिए नहीं हो पाया क्योकि उस समिति के बिना हमला नहीं हो सकता है |
ये भी तथ्य है की जब तक मुलायम सिंह रक्षामंत्री रहे देश में कोई आतंकवादी हमला नहीं हुआ |
बिना ये सब जाने कुछ लोग मुलायम सिंह की अलोचना करते है |
मुलायम सिंह कहते नहीं वक्त आने पर करते है | बाकि फैसला आप सभी का की केवल जुबानदराजी करने से देश मजबूत होगा |
एक जानकारी कुछ लोग सधार लें की सैनिको के शहीद होने पर उनका पार्थिव शरीर उसके घर जायेगा ,ये फैसला भी मुलायम सिंह जी ने ही किया था | नेताजी सबसे लोकप्रीय रक्षामंत्री हुए जिनका पूरी सेना बहुत सम्मान करती थी और फिर इस परंपरा को बड़े समाजवादी नेता जोर्ज फर्नांडीस साहब ने आगे बढाया |
खुशखबरी -- लोकतंत्र को मजबूत करने का एक और कदम ------

अब जनता ये नहीं कह सकती की उसे कुए और खाई में से एक को वोट देने की मजबूरी है |अब जनता गलत होने पर सभी प्रत्याशियों को रिजेक्ट कर सकती है | अब शिकायत मत करियेगा की सब तो दागी ही है राजनीती में किसे चुने | अब आप सभी को नकार सकते है | वैसे तो हर क्षेत्र में कुछ अच्छे लोग भी चुनाव लड़ते है पर आप गाड़ियाँ ,चुनाव चिन्ह ,जाति ,गोत्र ,धर्म इत्यादि देख कर वोट डालते है ,किसका प्रचार ज्यादा आकर्षक है देख कर वोट डालते है और अपने ही पड़ोस के किसी अच्छे डाक्टर को ,शिक्षक को ,समाजसेवी को ,कृषक को वकील को या ऐसे हर आदमी को नकार देते है जो होता इमानदार और ज्ञानी है पर उसमे आप को आकर्षण नहीं दिखता और आप उन लोगो की तरफ देखते भी नहीं है | फिर शिकायत कैसी ?? लीजिये आप को शिकायत दूर करने का एक मजबूत हथियार मिल गया |बधाई | लोकतंत्र जिंदाबाद -फासीवाद मुर्दाबाद |
देशहित में ,समाजहित में या कोई और बहुत अच्छी बात कहता हूँ तो कोई संघी लाइक तक करने की कोशिश नहीं करता है पर ज्यो ही किसी आतंकवादी या फासीवादी के खिलाफ लिखता हूँ ये एकजुट होकर मेरे ऊपर टूट पड़ते है |
१९४७ से २०१३ आ गया देश को आज तक एक जवाब का इन्तजार है की आजादी की लड़ाई में हिन्दू महासभा और संघ के लोगो ने चाहे भगत सिंह और उनकी सेना रही हो ,चाहे सुभाषचंद्र बोस और उनकी सेना रही हो या दुनिया के सर्व स्वीकार महत्मा गाँधी किसी के साथ भी और इनसे अलग भी लड़ाई क्यों नहीं लड़ा उल्टे अंग्रेजो की मुखबिरी क्यों कर रहे थे ??
महात्मा गाँधी की हत्या क्यों किया ? और अब उनका नाम क्यों जप रहे है ? ये नया सवाल है ??
आपातकाल में संघ से जुड़े ९८ % लोगो ने इंदिरा गाँधी जी का समर्थन करते हुए और आपातकाल को महान पर्व बताते हुए महीने दो महीने में माफ़ी मांग लिया था |क्या उन्हें आपातकाल के लिए मिलने वाली पेंशन ,जो मुलायम सिंह यादव ने शुरू किया और अखलेश यादव भी दे रहे है ,लेना चाहिए ?

बुधवार, 25 सितंबर 2013

हिंदुस्तान एक बहु भाषी ,बहु जातीय ,बहु धर्म और बहु परमपरा का देश है जहा मील मील पर भाषा ,बोली ,पानी और परमपरा बदल जाती हैं ,, फिर भी ये देश एक है | सह अस्तित्व इसका अपना मजबूत गुण है | कोई इसे जो चाहे नाम दे मकसद बस इतना है की नफ़रत के लिए यहाँ कोई स्थान नहीं है ,सैकड़ो साल अंग्रेजो ने राज किया वो कुछ नहीं मिटा सके ,सैकड़ो साल मुगलों ने राज किया वे भी कुछ ख़त्म नहीं कर सके क्योकि देश का चरित्र है ये | और इस चरित्र को किसी के प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है | वैसे ये सेकुलरिस्म क्या होता है ???
अच्छा पूरा देश याद कर के बताये की क्या आप लोगो ने कभी संघ और बीजेपी वालो के मुह से रास्ट्रपिता बापू का नाम सुना था ?? अचानक ये गाना क्यों गा रहे गालियाँ तो बहुत सुना है उनके लिए | अभी इनके दफ्तर में छापा मार दीजिये गाँधी जी के खिलाफ ,पटेल जी के खिलाफ आप को बहुत सारा साहित्य मिल जायेगा | चक्कर क्या है ?? क्या माजरा है इस करवट के पीछे |
रास्ट्रपिता महत्मा गाँधी की हत्या के बाद संघ ने गोडसे के मिन्नत किया था कि तुम तो जा ही रहे हो कम से कम संघ को बचा लो और तब गोडसे ने अपना संघ से नाता अस्वीकार किया था | ऐसा ये कभी भी कर सकते है |
नेता गलियां तो बहुत सुनते है पर एक तथ्य ये भी है की देश में सभी दलों के प्रधानमंत्री ,रक्षामंत्री ,गृहमंत्री और विदेशमंत्री रह चुके है और इन सभी को देश के तमाम सीक्रेट पता होते है पर आज तक किसी भी नेता ने कुछ भी कही नहीं बताया और कभी देश से गद्दारी नहीं किया |
जब भी ऐसे काम किया है ,अधिकारियो ने ही किया है |
पुराने हिटलर की आत्मा बहुत खुश है की भारत में उसके मानने वाले पक्के है | उसने कहा था की झूठ सौ बार बोलो तो सच हो जाता है उसके भारतीय समर्थको ने बखूबी इस्तेमाल करना सीख लिया है |हिटलर को पक्का भरोसा है की मौका लगते ही गैस चैंबर वगैरह का इस्तेमाल भी पूरा होगा | हिटलर वहा भी खुश ,हिटलर यहाँ भी खुश |
वैसे मैं संघियों और भाजपाइयों के एक गुण का कायल हो गया हूँ | पूरे देश में कही भी इनकी बात में ,घटनाओ के वर्णन में या व्यक्तियों के बारे में चर्चा में कामा ,फुलस्टॉप का भी फर्क नहीं मिलेगा | कैसे पूरे देश में एक जैसा रटा देते है इन्हें ??
सामान्य आदमी में तो एक से तीसरे तक पहुंचते पहुंचते ये सब बदल जाता है | ऐसा कई नौकरियों के पाशिक्षण में भी सिद्ध हो चूका है |
रैली में पैसे के साथ बुरका भी मिलेगा । लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए फेंकू का नया फार्मूला । बड़ी दिक्कत है की फेकू जो भी फेंकता है सबकी पोल खुल जाती है । मेरे पास पैसे नहीं है इसलिए रैली भी नहीं और नकली वसूली भी नहीं ।
रैली में पैसे के साथ बुरका भी मिलेगा । लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए फेंकू का नया फार्मूला । बड़ी दिक्कत है की फेकू जो भी फेंकता है सबकी पोल खुल जाती है । मेरे पास पैसे नहीं है इसलिए रैली भी नहीं और नकली वसूली भी नहीं ।
कुतर्क और अज्ञान से बहस नहीं हो सकती और कुछ संगठन केवल कुतर्क और अज्ञान का ही प्रशिक्षण देते है |
क्या सजा मिल जाने के बाद भी किसी को चुनाव लड़ने या पद पर बने रहने का अधिकार हों चाहिए | बशर्ते की ऊपर वाली अदालत उनकी अपील स्वीकार करे और साथ में सजा को मुल्तवी [ सस्पेंड ] भी न कर दे | मैं तो सहमत नहीं हूँ |
मेरा जबसे मैं सोचने समझाने लायक हुआ तभी से मानना है की १९४७ की रात को १२ बजे के बाद की सबसे बड़ी गलती थी पूरी व्यवस्था और व्यवस्था में बैठे लोगो को ज्यो का त्यों स्वीकार कर लेना | यदि ऐसा नहीं हुआ होता बल्कि जिन लोगो ने आजादी की लड़ाई में सब कुछ या कुछ खोया था उनमे से लोगो को व्यवस्था में लगा दिया गया होता तो देश इतना बर्बाद नहीं हुआ होता और न इतनी जल्दी इतना भ्रस्ताचार बढ़ा होता और न पुलिस ही अंग्रेजो वाली होती |
मेरा जबसे मैं सोचने समझाने लायक हुआ तभी से मानना है की १९४७ की रात को १२ बजे के बाद की सबसे बड़ी गलती थी पूरी व्यवस्था और व्यवस्था में बैठे लोगो को ज्यो का त्यों स्वीकार कर लेना | यदि ऐसा नहीं हुआ होता बल्कि जिन लोगो ने आजादी की लड़ाई में सब कुछ या कुछ खोया था उनमे से लोगो को व्यवस्था में लगा दिया गया होता तो देश इतना बर्बाद नहीं हुआ होता और न इतनी जल्दी इतना भ्रस्ताचार बढ़ा होता और न पुलिस ही अंग्रेजो वाली होती |
पहले अघोसित परमपरा थी की चाहे जूनियर को बनाना पड़े पर कुछ ख़ास तरह के लोग सेनाध्यक्ष नहीं बनाये जाते थे | लगता है की ये सत्ता में बैठे लोगो से छुपा लिया गया |
आप मुझे राज दो मैं देश को स्वर्ग बना दूंगा और आप सभी को स्वर्गवासी | बस देश के सामने इतना सा मुद्दा है |
कुछ लोग केवल ख़त्म करने की बात करते है | क्या सचमुच अब इतनी ताकत पा गए है की जो चाहेंगे वो सब ख़त्म कर देंगे | हिटलर भी यही सोचता था पर क्या कौन खत्म हुआ ???????????
कुछ लोग अपने किसी जानने वाले रामलाल के लिए जयश्री राम बोलते है क्या ??? क्योकि असली राम को तो ये लोग जानते ही नहीं है और उनका कोई गुण ,कोई शिक्षा इन लोगो में दिखलाई ही नहीं पड़ती |
मैं भी चिंतन कर रहा हूँ और हर चितानशील व्यक्ति को चिंतन करना चाहिए की अचानक गाँधी जी और पटेल जी की तरफ संघ की करवट का राज क्या है ?? कोई गहरी साजिश निकलेगी | अटल जी को अलग दिखने के लिए एक सम्मलेन में बीजेपी ने कुछ शब्द जोड़े थे पर उस सम्मेलन के बाद फिर अपने रंग में आ गयी थी यहाँ तक की अटल जी को भी किनारे कर दिया होता पर उनकी स्वीकार्यता और ब्राह्मण हों उन्हें बचा गया |
मैंने आगरा की आर्काइव लाइब्रेरी से कुछ कागज निकले थे अटल बिहारी वाजपेयी की आजादी के समाय की भूमिका के बारे में पर कभी सार्वजानिक नहीं किया क्योकि वो कुछ बदले बदले से दिख रहे थे पर अहंकार का प्रतिमूर्ति ,जिसकी आँखों में हिंसा झांकती हो और जिसका इतिहास खून से भरा हो उसके बारे में तो कलम अंतिम सांस तक देश को आगाह करेगी की जागते रहो ,देखो हिटलर शक्ल बदल कर प्यारे हिंदुस्तान को बर्बाद न कर दे |
इनके गुरु गोलवलकर की ये पुस्तक जरूर पढ़िए जो इन लोगो की गीता है और जो संघ की आधार सोच है -- तब बताइयेगा की मैं फासीवाद के बारे में गलत लिखता हूँ क्या ,,मैं हिटलर की चर्चा गलत करता हूँ क्या ?? ----
http://koenraadelst.bharatvani.org/articles/fascism/golwalkar.html
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इनके गुरु गोलवलकर की ये पुस्तक जरूर पढ़िए जो इन लोगो की गीता है और जो संघ की आधार सोच है -- तब बताइयेगा की मैं फासीवाद के बारे में गलत लिखता हूँ क्या ,,मैं हिटलर की चर्चा गलत करता हूँ क्या ?? ----
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वन मैंन ,वन पार्टी राज की आहट सुनाई पड़ी क्या ?? बड़ी मुश्किल से लोकतंत्र मिला है जिसपर हमें गर्व है की हम सब राजा है | मैं जो कह रहा था धीरे धीरे सामने आ रहा है | भारतीय को केवल रोटी ,कपड़ा मकान नहीं चाहिए बल्कि साथ में चाहिए उन्मुक्त हंसी | तानाशाही में ये उन्मुक्त हँसी छीन जाती है और तानाशाही वाले देशो का हाल तथा फौजी शासन वाले देशो का हाल सबके सामने है |

मंगलवार, 24 सितंबर 2013

एक संगठन जिसने आजादी की लड़ाई में गद्दारी किया था काफी दिनों से देश में फासीवाद लाना चाहता है | क्या अब वो फ़ौज को भड़का कर अपना मकसद हासिल करना चाहता है ?? पर भारत की महान सेना अपना कर्त्तव्य जानती है और अपने को उसी तक सीमित रखती है | इन्हें सेना की तरफ से सही वक्त पर सही जवाब मिलेगा |
नेता गालियाँ तो बहुत सुनते है पर एक तथ्य ये भी है की देश में सभी दलों के प्रधानमंत्री ,रक्षामंत्री ,गृहमंत्री और विदेशमंत्री रह चुके है और इन सभी को देश के तमाम सीक्रेट पता होते है पर आज तक किसी भी नेता ने कुछ भी कही नहीं बताया और कभी देश से गद्दारी नहीं किया |
जब भी ऐसे काम किया है ,अधिकारियो ने ही किया है |
1974 में जयप्रकाश जी ने कहा था की पुलिस और सेना को सत्ता बदल देना चाहिए और इसी बात को आधार बना कर इंदिरा जी ने आपातकाल लगा दिया था देश में | भारत की महान सेना जो किसी राजनीती में नहीं पड़ती और जब तक किसी आपदा के लिए बुलाया नहीं जाये केवल देश की सीमा की तरफ ही देखती है | क्या ऐसी महान सेना को किसी राजनीतिक मंच से राजनीति में घसीटना उचित है ???
वैसे मैं संघियों और भाजपाइयों के एक गुण का कायल हो गया हूँ | पूरे देश में कही भी इनकी बात में ,घटनाओ के वर्णन में या व्यक्तियों के बारे में चर्चा में कामा ,फुलस्टॉप का भी फर्क नहीं मिलेगा | कैसे पूरे देश में एक जैसा रटा देते है इन्हें ??
सामान्य आदमी में तो एक से तीसरे तक पहुंचते पहुंचते ये सब बदल जाता है | ऐसा कई नौकरियों के पाशिक्षण में भी सिद्ध हो चूका है |
पुराने हिटलर की आत्मा बहुत खुश है की भारत में उसके मानने वाले पक्के है | उसने कहा था की झूठ सौ बार बोलो तो सच हो जाता है उसके भारतीय समर्थको ने बखूबी इस्तेमाल करना सीख लिया है |हिटलर को पक्का भरोसा है की मौका लगते ही गैस चैंबर वगैरह का इस्तेमाल भी पूरा होगा | हिटलर वहा भी खुश ,हिटलर यहाँ भी खुश |
अगर फेकू में हिम्मत हो तो दिल्ली के रामलीला मैदान में एक रैली हो जाये और उसमे फेकू का और मेरे मुख्यमंत्री का मुकाबला हो जाये ज्ञान का भी और भाषण का भी । वैसे तो मैं ही काफी हूँ फेकू के लिए । पर देख लीजियेगा फेकू तैयार ही नहीं होगा ।
ओबामा की नकल करता है इसलिए कह दिया की ऐसा वहां होता है ।
रैली में पैसे के साथ बुरका भी मिलेगा । लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए फेंकू का नया फार्मूला । बड़ी दिक्कत है की फेकू जो भी फेंकता है सबकी पोल खुल जाती है । मेरे पास पैसे नहीं है इसलिए रैली भी नहीं और नकली वसूली भी नहीं ।

सोमवार, 23 सितंबर 2013

कितनी तरह की बीमारियाँ होने लगी है और कैसे कैसे नाम हैं उनके पता ही नहीं था ।
पापियों ,सारे बुरे काम करने वालो से इश्वर भी डरता है और अच्छो से जल्दी मिलना चाहता है ।

रविवार, 22 सितंबर 2013

विदेश में भारत के ही नागरिक और उत्तर प्रदेश के मंत्री मो आज़म खान को रोके जाने पर कुछ लोग कोई और भाषा बोल रहे थे और अपने साथियों को छोड़ कर किसी लड़की का सलवार सूट पहन कर भागने की कोशिश करने वाले रामदेव को रोकने के मामले में कुछ दूसरी भाषा बोल रहे है ।
ये क्या हो गया है लोगो को ? पुलिस सद्व्यवहार सप्ताह मनाती है , हिंदुस्तान हिंदी सप्ताह मनाता है , दुनिया ने विश्व शांति दिवस मनाना शुरू किया है ,ऐसे ही पता नहीं क्या क्या ??
पर पिता दिवस ,,,,माता दिवस ,,, बेटा दिवस ,,, बेटी दिवस ,,,????? अब ये रिश्ते भी दिवस के दिखावे तक सीमित हो जायेंगे ????????
मौतों और बरबादी से देश को और मानवता को क्या मिला ???

बुधवार, 18 सितंबर 2013

कल से दिल्ली की तरफ । क्या करूँ ५० दिन से ज्यादा हो गया तो गंगाराम अस्पताल की शरण में जा रहा हूँ । जिम्मेदारियां हैं वरना जीवन का कोई मतलब नहीं है । एक समय आता है कुछ लोगो के जीवन में की जीवन बेमतलब हो जाता है और आप अनुपयोगी और अपराधी भी हो जाते है सभी के लिए । आप नितांत अकेले हो जाते है और केवल दिन और पल गिनते है ।

मंगलवार, 17 सितंबर 2013

कल कही हिंदुस्तानियत का क़त्ल हुआ और हिंदुस्तान को उसका बहुत दुःख है । आइये हिंदुस्तान और हिंदुस्तानियत को हम सब मिल कर बचाएं । मन सचमुच बहुत दुखी है ।
देश के एक नेता को किसने बता दिया की उनके चीखने से लोग प्रभावित होते है । दूसरा सेल्समैन वाली भाषा किसी ने रटा दिया । कोई उनका ऐसा शुभचिंतक नहीं है जो उन्हें सच बता सके और सुधार सके की वो देश के नेता की तरह बोलें ?????????????
१९९२ में मैंने एक भाषण में बोल दिया की ये देश सबका है । सबकी क़ुरबानी से और योगदान से बना है । तथाकथित हिंदुवादियो के सबसे बड़े पदाधिकारी ने बयान दे दिया की मैं किसी दूसरे धर्म के आदमी को अपना बाप बना लूँ और मुझे कहना पड़ा की मुझे अपने पिता पर विश्वास भी है और गर्व भी आप अपना देखो ।
जो लोग नहीं जानते की फासीवाद क्या होता है अब मेरी इन लगातार डाली गयी तीन पोस्ट से जान लें की क्या होता है ?/
फासीवाद का मतलब आप असहमत है या कोई अन्य विचार रखते है तो देश छोड़ दे या दुनिया ही छोड़ दें । यही फासीवाद होता है और इसी की आहट से मैं लगातार सभी को आगाह कर रहा हूँ ।
अपने आदर्शो को दुत्कार कर जिन्हें गोली मारी और जिन्हें गाली दिया अचानक उन महापुरुषों को अपना आदर्श क्यों बताने लगे तथाकथित हिंदूवादी ?? ये सवाल क्या पूछ लिया चार गालियां देकर फरमान सुना दिया मुझे की मैं अपना धर्म बदल लूँ । क्या मैंने कोई गलत सवाल पूछ लिया या फिर दुखती रग पर पांव पड़ गया मेरा ?? जवाब जरूर मिले ।
तथाकथित हिंदूवादी ताकतों ने कभी ये संकल्प क्यों नहीं लिया की कोई हिन्दू औरत शरीर नहीं बेचेगी और कोई हिन्दू बच्चा भीख नहीं मांगेगा ।
इस पर भाई लोगो में मुझे आदेश दिया है की मैं धर्म बदल लूँ ।
क्या सचमुच मैंने कोई धर्म विरोधी बात कर दिया ?????????
जवाब जरूर मिलना चाहिए ।
इंसानियत में बिलकुल यकीन नहीं करने वाले एक आदमी के कारण देश से घोटालो ,भ्रस्ताचार और महगाई की चर्चा ही गायब हो गयी । वैसे भी ये चर्चा करने पर तीन उँगलियाँ खुद की तरफ इशारा करने लगती है ।
भारत में एक महिला ने बाल खोल दिए तो भारत महाभारत में तब्दील हो गया । समय आज भी वही है एक बहन बेटी ने मुह खोलने की हिम्मत किया तो एक नकली अध्यात्मिक सत्ता भरभरा कर गिर गयी और लगातार गिरती जा रही है । बाल खोलना मुह खोलना ही होता है ,प्रतिरोध करना ही होता है हर जुल्म के खिलाफ ,हर गैरबराबरी के खिलाफ । जब भी किसी अनीति के खिलाफ हमारी बहन बेटी उठ खड़ी होगी तो महाभारत जरूर होगी ये उन्हें समझाना चाहिए । वैसे सभी की जिम्मेदारी है हर अनीति के खिलाफ उठ खड़े होने की ।

सोमवार, 16 सितंबर 2013

सामान्य ज्ञान के आज के दो सवाल --- देखें कितने लोग जवाब जानते है --------

-  १ ---भगवांन राम के मंदिर के नाम पर दंगे करवा कर सरकार किसने बनाया था ????
--२ ---गली से लेकर दिल्ली तक सरकार बन जाने के बाद किसने कहा था की ---- हम एक मंदिर के लिए सरकार नहीं गँवा सकते है ????

हिंदुवादियो ने अपने आदर्शो और अपने नेताओ का नाम लेना बंद क्यों कर दिया ?? क्या वे बिकाऊ और वोट दिलवाऊ नहीं लगते उन्हें ?? हेगडेवार से देवरस तक और मुखर्जी से वाजपेयी तक ।
आखिर उनके नाम के पीछे क्यों भाग रहे है जिनमे से एक की इन्होने हत्या किया था और उन्हें बहुत गलियां ही नहीं दिया था बल्कि उनकी हत्या को जायज बताने वाली किताबे यही छापते और बेचते है यानी रास्ट्रपिता महत्मा गाँधी जी ।
और जिन्हें इन लोगो ने बहुत गलियां दिया था जब उन्होंने गाँधी जी की हत्या होने पर संघ पर प्रतिबन्ध लगा दिया था और पूरे देश के संघियों को जेल भेज दिया था ,,यानि सरदार पटेल जी ।
नेता जी , नेहरु जी ,लोहिया जी और जयप्रकाश के नाम कब तक जपना शुरू करेंगे उसका इन्तजार है ।
पर इन्होने मान तो लिया की इनकी विचारधारा और कार्यक्रम बनाने वाले बस यूँ ही थे ।
कोई हिन्दू औरत शरीर न बेचे ,,कोई हिन्दू बच्चा बिना पढ़े न रहे और भीख न मांगे ,,कोई हिन्दू कन्या भ्रूण हत्या न करे ,,कोई हिन्दू मिलावट की दावा या अन्य चीजो से न मरे ,कोई हिन्दू दावा बिना न मरे ,,,, ये सब कभी भी तथकथित हिंदुवादियो के कार्यक्रम में कभी नहीं रहा । इस बारे में इनमे से कोई नहीं बोला ।
क्या ये हिन्दू नहीं है ???????????????????????????????????????????????????????????????????????????????///////??                                                                                                                                                                अच्छा दोस्तों क्या शरीर बेचने से भी बुरा कोई काम है दुनिया में ? क्या फुटपाथ पर बच्चे पैदा करने और छोटे छोटे बच्चो के चौराहों पर भीख मांगने से भी बुरा कुछ हो सकता है ??
क्या ये हिन्दू नहीं है ??
हैं---------- ????????--------------------------------------
तो अपने प्रचार पर हजारो करोड़ खर्च करने वाले ,,, दंगे पर बड़ा पैसा खर्च करने वाले ,,और खुद को हिन्दुओ का ठेकेदार कहने वालो के मुह से कभी आप ने सुना की वो कुछ दिनों तक अफवाह पर और दंगे पर पैसा नहीं खर्च करेंगे बल्कि उस पैसे से और जमाखोरी ,,, मिलावाटखोरी ,,और मुनाफाखोरी से कमाए पैसे से ऐसी व्यवस्था करेंगे की अब कोई हिन्दू औरत शरीर नहीं बेचेगी ,,,,अब कोई हिन्दू बच्चा भीख नहीं मांगेगा ,,, अब कोई औरत फुटपाथ बच्चा नहीं पैदा करेगी ॥।
अगर कभी किसी ने सुना हो तो जरूर बताना ।
एक बार एक जगह बहुमत की सरकार आई दंगे करवाने और करोडो की संपत्ति नष्ट करवाने के बाद ,लोगो को मरवाने के बाद तो एक सविधान की शपथ लेकर उसे तोडा ,एक बेजान सी इमारत तोड़ी तो दुनिया के तमाम देशो में न जाने कितनी इमारते तुड़वा दिया जहा वो इक्का दुक्का थी ,देश का दिल तोड़ दिया और दुनिया की निगाह में हमारा सभ्य होने का गुरूर तोड़ दिया ।

दूसरी जगह बनी तो एक बडे  समाज से हत्याओ का खेल सत्ता द्वारा खेला गया , सत्ता प्रमुख अट्टहास लगता रहा और मौतों पर अफ़सोस के बजाय मुस्कराता रहा । एक बड़ा समाज मुस्कराना और स्वतंत्रता से जीना ही भूल गया ।

अल्पमत की एक सरकार बनी तो दुश्मन घर में घुस आया सरकार सोती रही और गरीब घर से आये हुए सैनिको ने जान देकर कारगिल नाम का घर बचाया । एक बड़े आतंकवादी को कंधार पहुँचाने गए देश के बड़े मंत्री और वो भी फ़ौज के जहाज में उनका मनोबल तोड़ने को और खाली हाथ नहीं गए सैकड़ो करोड़ रुपये लेकर गए उन्हें देने को ताकि वो देश में उस पैसो से आतंकवाद फैला सकें [ वकौल जसवंत सिंह उनके रक्षामंत्री जो कंधार गए थे ]

दुशमन संसद में घुस गया और उन्हें पता ही नहीं था सोते रहे ,फिर गरीब या किसान के बेटे जवानों ने अपनी जान देकर देश की इज्जत ,सत्ता ,और सार्वभौमिकता के प्रतीक की रक्षा किया ।

ढेर सारे होटल और सरकारी क्षेत्र की कम्पनियाँ औने पौने में बेच खाया ।

जो सैनिक शहीद हुए थे उनके कफन और ताबूत में भी पैसा खा गए ।

उनके रक्षामंत्री के घर में घूस की डील करते हुए देश ने देखा ।

उनके रास्ट्रीय अध्यक्ष को देश ने घूस खाते हुए टी वी पर पकड़ा ।

इनके लोग सवाल पूछने में घूस खाते पाए गए ।
 
और क्या बचा रह गया करने को ??

कही अगर बहुमत आ गया तो क्या होगा ,शायद भोली भाली जनता को कल्पना भी नहीं है ।

इसके लिए बहुत कुछ बताना होगा देश को और काली टोपी के रहस्य से लेकर हिटलर के कारनामो तक की कहानी बतानी होगी ।

बहुत से लोग जिनके नाम में ज्यादातर आर और आई लगा होता है ,उन्होंने मुझे बड़ा ज्ञान दिया की जब मैं एक्स पार्टी या एक्स नेता के खिलाफ बोलता हूँ तो घोर हिन्दू विरोधी कार्य करता हूँ । क्या वास्तव में मैं हिन्दू विरोधी हूँ ?? या वे हिन्दू विरोधी है जो हिन्दुओ को नकली सामान यहाँ तक की दवाइयां भी बेचते है ,मैं हिन्दू विरोधी हूँ या जो जमाखोरी ,कर रहे है ,हिन्दू किसानो को भी लूट रहे है और मुनाफाखोरी कर सभी हिन्दुओ को भी लूट रहे है । मैं हिन्दू विरोधी हूँ या जिन्होंने फ़ौज के सिपाहियों के ताबूत और कफ़न में भी दलाली खाई वे हिन्दू विरोधी है । मैं हिन्दू विरोधी हूँ या जो खुद अपने समाज की बेटी के बाप से शादी में सौदेबाजी करते है वे हिन्दू विरोधी भी है और समाज विरोधी भी । मैं हिन्दू विरोधी हूँ या जो गर्भ में ही हिन्दू बेटियों की हत्या कर आगे के लिए समाज का रास्ता रोक रहे है वे हिन्दू विरोधी है ??????
जिस तरह मैं जब किसी फासीवादी पार्टी के खिलाफ या किसी फासीवादी व्यक्ति के खिलाफ लिखते या बोलते ही हिन्दू विरोधी हो जाता हूँ वैसे ही दोस्तों मेरा साथ नहीं देने वाले या विरोध करने वाले हिंदुस्तान विरोधी है और हिंदुस्तान विरोधी होने के कारण हिन्दू विरोधी भी है ,हिंदुस्तानियत विरोधी भी है और इंसानियत विरोधी भी है । जो आर मेरा विरोध करते है ,वे समाज विरोधी है और जो दोस्त बन कर गलियां देते है वे संस्कार विरोधी है या उनके परिवारों में गलिया देकर ही बात करने का प्रचलन है  क्या कर सकता हूँ ।
कृपा होगी की आप सभी खुद अन्फ्रेंड हो जाये क्योकि मैं जिससे दोस्ती करता हूँ उसे ठुकराता नहीं ।

रविवार, 15 सितंबर 2013

मेरे वाल पर कुछ लोगो ने पता नहीं कहा के और किसके भाषण का जिक्र किया है । मैंने तो आज कोई भाषण नहीं दिया और अपने मुख्यमंत्री के मानवतावादी दौरे को देखा और मानव के प्रति उनके समर्पण के वक्तव्य को सुना । इसके अलावा भी आज कुछ हुआ है क्या ???