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मंगलवार, 17 अप्रैल 2012

अखिलेश जी को मायावती के बनाये पार्कों के बारे में कुछ इस तरह के निर्णय लेने चाहिए ---१- ये सभी पार्क ऊतर प्रदेश की जनता की जमीन पर और जनता के पैसों से बने है अतः जहा मुख्यमंत्री पत्थरों के रूप में पर्स लटकाए खड़ी है वहा वर्तमान मुख्यमंत्री नहीं पर सभी पूर्व मुख्यमंत्रियों की मूर्तियाँ लगवाने का अधिकार उनके परिवारों और दलों को दे देना चाहिए और उन सभी के लिए वरिष्ठता के क्रम में स्थान निर्धारित कर देना चाहिए । २-- जहा काशीराम की मूर्ती लगी है उस हर जगह पर सभी दलों के अब तक के अध्यक्षों की मूर्तियों के लिए स्थान वरिष्ठता के क्रम में निर्धारित कर उनके परिवारों और दलों को अधिकार दे देना चाहिए । ३-- जहा जहा अन्य महापुरुषों की मूर्तियाँ लगी है वहा उत्तर प्रदेश के सभी महापुरुषों और उत्तर प्रदेश में रहने वाले सभी समाजों और धर्मों के महापुरुषों के लिए स्थान तय करते हुए उन महापुरुषों को मानाने वालों को लगाने का अधिकार दे देना चाहिए । ४-- महात्मा गाँधी की बड़ी और साथ ही नेताजी सुभाष चन्द्र बोष ,भगत सिंह ,चंद्रशेखर आजाद ,रामप्रसाद बिस्मिल ,अशफाक उल्ला खान इत्यादि की मूर्तियाँ सरकार को अपने खर्चे पर लगा देना चाहिए । ५-- इसके बाद बची हजारों एकड़ जमीन और वहा बने भवनों में विश्वविद्धालय ,मेडिकल कॉलेज ,हॉस्पिटल ,खेल विश्वविधालय . कृषि शोध विश्वविद्धालय ,जनता लाइब्रेरी ,महिला अस्पताल ,और फुटपाथ पर सोने वालो को आसरा इत्यादि बनवा देना चाहिए । पर ये सारे फैसले तुरंत लेकर जमीन निर्धारित कर उसकी दीवारें बनवा देना चाहिए जिससे जिन लोगो को अपनों की मूर्तियाँ लगवानी हो वो लगवा सके जैसे बिजली पासी ,झलकारी बाई महर्षि बाल्मीकी इत्यादि इत्यादि और अन्य जो जिन वर्गों के लिए हो । हा जो लोग भी मूर्तियाँ लगवाएं वे उनके स्थापना के समय अखिलेश जी और मुलायम सिंह जी को जरूर बुलाएँ । जहा तक लोहिया पार्क का सवाल है तो वो तो सचमुच ही केवल पार्क है जहा हजारों लोग रोज टहलने और स्वास्थ्य लाभ करने आते है । इस पार्क में तो केवल कुछ फुट में डॉ लोहिया जो स्वतंत्रता सेनानी थे ,जो चिन्तक थे ,जिन्होंने गरीबों को जगाया ,जिन्होंने सरकार में शामिल होना कबूल नहीं किया ,जिन्होंने जाती तोड़ो अभियान के लिए जीवन लगाया ,जिन्होंने सत्ता के विकेंद्रीकरण का पहला चिंतन दिया चौखंभा राज की अवधारणा द्वारा ,जिन्होंने पहली बार पिछड़ें मांगें सौ में साठ की अवधारणा दिया जिसमे दलित पिछड़े और सभी समाज की औरतों को न्याय देने की बात किया उनकी एक बहुत साधारण मूर्ति लगी है ।इस पार्क को बनवाने में हजारो करोड़ का घूस भी नहीं खाया गया है और शहंशाह बनने और दिखने की सनक भी नहीं दिखती । जब लगने लगेंगी सभी समाज के महापुरुषों की मूर्तियाँ तब मायावती का विरोध और देश में आग लग जाने का भाषण सुनने का इंतजार रहेगा मुझे भी और उत्तर प्रदेश की जनता को भी । जब इन जमीनों का उपयोग होने लगेगा आम आदमी की खुशहाली के लिए ,उनके बच्चों की पढाई के लिए या सभियो के इलाज के लिए तब क्या कह कर विरोध करेंगी विकास से और जनता से दुशमनी रखने वाली मायावती ये देखना और सुनना दिलचस्प रहेगा । जय हिंद ।