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सोमवार, 21 सितंबर 2015

कृपया महान नेता जी सुभाषचंद्र बोष को बदनाम मत करिये और उनको कायर तो किसी हालात में मत सिद्ध करिये ।

जो व्यक्ति इतनी बड़ी ब्रितानिया सरकार से नहीं डरा बल्कि बिना साधनो के फ़ौज खड़ी कर दी और इतने राष्ट्रों को साथ खड़ा कर लिया तथा भारत की भूमि पर झंडा फहरा दिया , जो भारतीयो के दिलो पर राज करता था ।

अगर वो जीवित होते तो छुपते नहीं बल्कि देश के किसी कोने से भी आवाज लगा देते की मैं यहाँ हूँ तो करोडो देशवासी उधर ही दौड़ पड़ते और पूरा देश उन्हें सर पर उठा लेता ।

और किस देश की आज़ादी के बाद आज़ादी के लिए लड़ने वालो को युद्ध अपराधी कह कर किसी देश को सौपा गया है कि ये मुद्दा जेरे बहस हो ।

बल्कि मेरा विश्वास है की तत्कालीन सभी नेता भी उनकी अगवानी में खड़े हो गए होते क्योकि वो आदर्शो का युग था और संघर्ष का साथ खून के रिश्तों से भी पक्का और मजबूत होता है ।

इसलिए मेरी विनती है की अपने को नेताजी का कहने वाले या उनको बिलकुल नहीं जानने वालो दोनों लोग ही मेरी जिंदगी के पहले आदर्श और नेता को बदनाम न करे और कायर सिद्ध न करे ।

देश ,समाज और जनता को इतिहास और आदिकाल के मुद्दों पर उलझा कर रखो और उन्ही पर विवाद चलाते रहो ताकि वर्तमान पर चर्चा न हो और भविष्य की चिंता न हो और आप जो चाहे निर्द्वंद करते रहे।

किसी हालात में भूख ,गरीबी ,अशिक्षा ,बेकारी और बीमारी सहित किसान ,मजदूर और बेरोजगार नौजवान पर बात न हो ।

बल्कि इनका गुस्सा न फुट पड़े इसलिए इन सभी को इतिहास में अपने अपने गौरव तलाशने को मजबूर करते रहो और आपस में बांटते रहो

पर कब तक ? कभी तो ये सभी समझ जायेंगे इस चाल को और मिलकर खड़े हो जायेंगे सरोकारों पर सरकारो को सोचने और करने के लिए ।

बुधवार, 2 सितंबर 2015

मैं वर्षो से कह रहा हूँ की राष्ट्रीय स्वयं सेवक संघ भारत के संविधान को नहीं मानता तथा लोकतंत्र को नहीं मानता बल्कि हिटलर के शासन को आदर्श मान वही स्थापित करना चाहता है ।

आज फिर सिद्ध हो गया ।

वर्तमान केंद्र सरकार देश की जनता के भावनात्मक वोट से बनी है और सरकार की जवाबदेही केवल भारत और इसकी जनता के प्रति है ।

ये संघ के प्रति जवाबदेही देश का देश के स्वतन्त्रता संग्राम का जिसमे संघ ने गद्दारी किया था तथा भारत के संविधान का और भारत की महान जनता का अपमान है ।

क्या सोचता है भारत ?

कृपया संघी जवाब नहीं दे ।

मंगलवार, 1 सितंबर 2015

आर एस एस पूरी तरह मौका पाते ही अपने भविष्य की रणनीति पर लग गया है ।

जहा बाकी दल कुछ लोगो या जातियो के चक्कर में पड़े है संघ लोकतंत्र के हर खम्भे में अपने लोगों को भेजने ने लगा है ।

1977 में मीडिया में अपने लोगो को घुसाया तो आज पूरा मिडिया संघी हो गया ।

राज्यपाल से कुलपति तक और शिक्षा नीति निर्धारक  से शिक्षक तक बनाया तो वहां पौधशाला तैयार हो गयी ।

सरकार बनाते ही सभी मंत्रियो को जबरन ओ एस डी से लेकर ए पी एस तक संघ के स्वयं सेवक थमा दिए गए तो इतिहास ,संस्कृति और साहित्य से लेकर शिक्षा और फ़िल्म तक संघी बैठाये जा रहे है ।

अब नयी बात पता लगी -

संघ ने कोचिंग खोल दिया है संकल्प के नाम से जहा आई ए एस से लेकर हर तरह के नौकरशाह तैयार किये जा रहे है ,जज तैयार किये जा रहे है ।

और

शारीरिक मेहनत के साथ तैयारी करवा कर संघी फ़ौज की तीनो शाखाओ और पुलिस में जहा संभव है भेजे जा रहे है ।

वाकी नेता और दल केवल देश बचाने का भाषण दे रहे है और फासीवाद अपनी जडे ज़माने में पूरी ताकत से लगा है।

मैं तो लोकतंत्र का चौकिदार हूँ इसलिए आवाज लगा दे रहा हूँ की जागते रहो ।

जागो या मत जागो आप की मर्जी ।