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बुधवार, 24 नवंबर 2010

बिहार के चुनाव का सन्देश

 बिहार के चुनाव का सन्देश                                                                  डॉ सी पी राय
                                                                                                                   [शिक्षक एवं राजनैतिक चिन्तक ]

क्या होगा बिहार में ,एक बड़ा सवाल था राजनीति में रूचि रखने वालो के जेहन में | फैसला तों बंद हुआ इ वि एम् मशीनों में और आ भी गया ||बिहार वो प्रदेश है जिसने आन्दोलनों कि अगुवाई किया,परन्तु कुछ  सरकारों ने उसे इतना पीछे पंहुचा दिया कि वो भारत का सबसे ख़राब प्रदेश बन गया |एक ऐसा प्रदेश बन गया जिससे सबसे ज्यादा पलायन हुआ |कोई  सरकार बहुत ख़राब रही हो और उसके बाद उसके मुकाबले थोड़ी भी अच्छी सरकार आ जाये ,थोडा भी ईमानदार मुखिया आ जाये ,थोडा भी काम होता दिखलाई पड़े तों निश्चित ही वो भयानक गरमी में ठंडी हवा का झोंका महसूस होता है |कुछ ऐसा बिहार कि नितीश सरकार को लेकर भी लोग महसूस कर रहे थे  |वहा के लोग तों बताते ही है कि कुछ  विकास होता दिख रहा है ,लेकिन बाहर या दूर बैठा आदमी भी कुछ बाते तों देख ही रहा है कि ,जहा पहली सरकार में आये दिन बच्चे किसी ना किसी अपहरण के खिलाफ सड़क पर दीखते थे और तमाम भ्रस्टाचार कि कहानी सुनने को मिलती थी ,अब वो दिखाई नही पड़ती ,अब टी वी कि सुर्खियों में बिहार के वे  समाचार नही होता है |
लेकिन सवाल ये था कि जबरदस्त जातिवाद कि जकडन का शिकार बिहार क्या करवट लेगा ?पूरे देश में  लोकतंत्र  कि परिपक्वता दिख रही है |जिस तरह देश ने अयोध्या के मामले में परिपक्वता का परिचय दिया और जिस तरह कुछ प्रदेशो में काम करने वालो को  जनता ने कई बार मौका दिया है और देते जा रहे है वह चाहे किसी स्तर कि सरकार हो ,उसी तरह  बिहार कि जनता ने भी  विकास के सवाल पर निर्णय दिया  है ?खबरों से ऐसा लगता था  कि बिहार भी जातिवाद कि जकडन को छोड़ने को बेचैन था ,वो भी देश के साथ दौड़ना चाहता था  ,बिहार भी २१वी सदी कि दौड़ में शामिल होने को आतुर हो रहा था  | हवा जो दिख रही थी उसकी  सच्चाई सामने आ गयी कि बिहार का १८ साल तक का नौजवान जिसकी संख्या ५५% हो गयी है और वो महिलाएं जो गरीबी और ख़राब कानून व्यवस्था का सबसे बड़ा शिकार होती है ,इन सबने मिल कर बिहार का चेहरा बदलने ,बिहार का एजेंडा बदलने का फैसला कर लिया था और मजबूत फैसला कर लिया था  |
  इस चुनाव में फिर एक बड़ा और नया सन्देश दिया है जो देश भर के नेताओ और संगठनो कि आँख खोलने वाला है |कोई इस सन्देश को समझ पाये तों बदल जाये और अपने खास चश्मे पर ही भरोसा करे तों मिट जाये |जब ६ राज्यों का चुनाव हुआ था तब मेरा लेख छपा था कि: अब केवल विकास कि राजनीति चलेगी ,जातिवाद टूट रहा है | देश बदल रहा है तों देश का ,देश कि नयी पीढी का एजेंडा भी पैदा हुआ है | इस नयी पीढ़ी को किसी कि शक्ल ,किसी के कोरे नारे ,किसी कि जाति का नारा ,किसी का धर्म का नारा नही चाहिए ,बल्कि उसे पहले चाहिए शांति व्यवस्था ,कानून का शासन कि लोग निशचिंत होकर घर से काम पर निकले तों घर आ सके ,वे कमाए तों घर ला सके |अब कि पीढी और जागरूक महिलाएं जिन पर घर का बोझ होता है वे चाहते है विकास और रोजगार | नितीश कुमार ने बिहार कि जनता को इस तरफ कदम बढ़ा कर ये विश्वास दिलाया  कि वे बिहार कि शक्ल बदलना चाहते है |नितीश ये विश्वास दिलाने में कामयाब रहे कि वे इमानदार है ,उनके पास दृष्टि ,सपना है और उन सपनों को जमीन पर लाने का संकल्प भी है |वे यह विश्वास दिलाने में कामयाब रहे कि उनके कुछ सिधांत है और सकारात्मक दिशा में चलने वाले सिद्धांत है |उसका परिणाम है बिहार में तीन चौथाई बहुमत का मिलना.और मोदी को बिहार में नही आने देकर तथा अति पिछडो और अति  दलितों में जो भूख जगाने का काम नीतीश ने किया वो भी उनका कारगर हथियार साबित हुआ |लालू ने तों अपने कर्मो से अपनी विश्वसनीयता और पकड़ खो ही दिया है पासवान भी पूरी तरह किसी डूबते हुए आदमी का हाथ पकड़ने कि गलती का पहली बार शिकार हुए है |
           जनता ने यह सन्देश दे दिया है कि वह केवल विकास चाहती  है ,उसका एजेंडा और वादा चाहती  है | देश और प्रदेश में शांति चाहती  | मजबूत और साफ छवि का नेता चाहती  है लेकिन साथ ही नेता को एक विनम्र नेता के रूप में देखना चाहती  है और यह भी चाहती  है कि नेता कि व्यक्तिगत छवि साफ सुथरी  दिखाई पड़े |कई प्रदेशो में ये जनता पहले भी दिखा चुकी है जहा भी नेता काम करते हुए दिखे और छवि भी ठीक हो जनता उसे बार बार मौका देना चाहती है | लालू ने रेल मंत्री के रूप में कुछ छवि बनाने कि कोशिश किया लेकिन चुनाव के मौके पर कांग्रेस को धोखा देकर फिर ये सिद्ध कर दिया कि वो क्या है और बिलकुल भी बिना किसी शिक्षा ,ज्ञान और अनुभव के जिस तरह रबड़ी देवी को नेता बना दिया और पिछले १५ सालो का उनका किया भी उनका पीछा नही छोड़ पाया |उनके सभी समझदार और संघर्ष के साथी उनका साथ छोड़ गए जिसको लालू ने गंभीरता से नही लिया | कांग्रेस ने भी केवल दिल्ली के नेताओ पर भरोसा किया |स्थानीय संगठन और नेतृत्व को ना पैदा करना उसे भारी पड़ा और ये रास्ता सभी प्रदेशो में भारी पड़ता रहेगा |यदि कांग्रेस ने प्रदेश का नेतृत्व संगठन और विधान सभा में मजबूत लोगो को दिया होता और मीरा कुमार को भावी मुख्य मंत्री घोषित कर चुनाव लड़ा होता तों यह तों नही कहा जा सकता कि सरकार बन गयी होती लेकिन परिणाम कही बहुत ज्यादा अलग होता |लेकिन कांग्रेस का जहा अनिर्णय उसके पतन का कारण होता है ,वही दूसरे दलों के बजाय कालिदास बन कर अपनों को ही काटने में समय बर्बाद करना भी उसको पतन कि तरफ ले जाता है | दूसरे प्रदेशो के नेता जो इस प्रदेश कि भाषा ,भूषा और भोजन नही जानते ,यहाँ कि संस्कृति नही जानते यहाँ कि जमीनी हकीकत नही जानते वे कभी प्रभारी होकर और कभी टिकेट बांटने वाला बन कर बंटाधार करते रहते है |इसी तरह के नेताओ के गलत आकलन के कारण उच्च नेतृत्व पर सवाल उठने लगे है |एक और बड़ी दिक्कत है कि इस दल में ५ साल सतत काम नही होता रणनीति नही बनती सब चुनाव के समय शुरू होता है |जबकि जनता त्याग करने वालो कि तरफ आकर्षित होती है पर रणनीति कि कमी और हवाई नेताओ कि भाषा बोली और चालें  सब बर्बाद कर देती है |ऐसा भी लगता है कि कांग्रेस में भी उच्च स्तर पर कुछ ऐसे लोग है जो नही चाहते कि बिहार और उत्तर प्रदेश में कांग्रेस मजबूत हो और राहुल या सोनिया इतने मजबूत हो जाये कि उन पर निर्भरता ख़त्म हो जाये |दूसरी दिक्कत ये है कि जो जमीनी नेता होते है उन्हें आसमानी नेता किनारे रख कर अपमानित करते रहते है और सम्मान देने के बजाय उन्हें चपरासियों से मिलने और अपनी बात कहने का सन्देश दे देते है ,वही नेता जब अलग दल बना कर मजबूत हो जाते है तों सबसे बड़े लोग उनको सम्मान देने लगते है | खैर कांग्रेस को भारी झटका लगा है और इसकी धमक उत्तर प्रदेश में भी दिखाई पड़ेगी |
        इस चुनाव परिणाम का असर उत्तर प्रदेश कि राजनीति पर भी जरूर पड़ेगा क्योकि अगर बिहार ने करवट लिया है तों उत्तर प्रदेश उससे और ज्यादा ही करवट लेगा |ऐसे स्थिति में ये देखना दिलचस्प होगा कि बहुत फूहड़ परिवारवाद ही नही बल्कि सम्पूर्ण परिवारवाद का शिकार लोगो को ,जंगल राज चलाने वाले लोगो को ,अपहरण को दल का मुख्य व्यवसाय बनाए वाले लोगो को ,हर जगह हस समय केवल लूट करने वाले लोगो को ,विकास का पैसा व्यक्तिगत सनक पर खर्च करने वाले लोगो ,खुद भ्रस्टाचार कि प्रतिमूर्ति बन गए लोगो ,कोई सपना नही ,कोई सिद्धांत नही ,कोई संकल्प नही केवल जाति और धर्म के नाम पर वर्षो से राजनीति कि फसल काटते और भूखी नंगी स्थिति से खरबपति  बनते लोगो को उत्तर प्रदेश कि जनता क्या जवाब देती है ? और जनता के सामने विकल्प क्या आता है ?क्या कोई विकल्प ,कोई विकास का नया मॉडल नया एजेंडा ,सरकार चलाने का नया फार्मूला यहाँ कि जनता को दे पायेगा या जो दे सकते है वे आपस में लड़ने ,गणेश परिक्रमा करने और एक दूसरे का गिरेबान पकड़ने में ही खर्च हो जायेंगे |केवल चापलूसी और किसी चमत्कार का इंतजार करते रह जायेंगे या रोज मर्रा कि जिन्दगी में संघर्ष को हथियार बना कर लड़ेंगे और उत्तर प्रदेश को भी नए सूरज का दर्शन करवाएंगे |यह सवाल खड़ा है मुह बाये हुए और नितीश के रूप में उत्तर भारत में एक बड़े लेकिन विनम्र और संकल्प तथा स्वीकार्यता वाले नेता का जन्म हो चुका है ,इस पर गहराई से निगाह रख कर भी रणनीति बनानी होगी जो बढाना चाहता है ,जो लड़ना चाहता ,और जो आगे आना चाहता है | नही तों क्या कुए और खाई में से एक को चुनने कि मजबूरी फिर से केवल भ्रस्टाचार कि प्रतिमूर्ति को जनता इसलिए मौका दे देगी कि उसके राज में अपराध उद्द्योग नही है और काम से काम एक खिड़की खुली है हर गली कूचा  तथा परिवार तथा रिश्तेदार का हर चमचा तक मुख्यमंत्री बन कर लूट  तों नही रहा है |ये तों आने वाला समय बताएगा कि देश कि जिम्मेदारी लेने वाले और देश के नेता कहलाने वाले अपने घर के पूरे नेता है कि नही |पर बिहार ने राजनीति का नया एजेंडा भी तय कर दिया ,नयी शक्ल भी दिखा दी है और नया स्वरुप भी दिखा दिया है  | भारत का लोकतंत्र नयी करवट ले रहा है इसमें अब किसी को कोई शक नही होना चाहिए और इसमे भी कोई शक नही होना चाहिए कि झोपड़ी से निकल कर और बिना किसी पूर्वज के नाम के भी नेता बना जा सकता है संघर्ष से संकल्पों से और कितना भी आगे बढ़ा जा सकता है और कितनी भी बार आगे आया जा सकता है | इशारो को अगर समझो --------------|       डॉ सी पी राय
                                                                                           राजनैतिक चिन्तक और समीक्षक
                                                                                            शिक्षक, डॉ बी आर ए वि वि आगरा
                                                                                         १३/१ एच आई जी संजय प्लेस आगरा
                                                                                         cprai१९५५@ याहू.co .in



                                                               

सोमवार, 15 नवंबर 2010

क्या सचमुच संघ आतंकवादी और समाजद्रोही लोगो से भरा है ? 2

दोस्तों आप में से कोई भी मेरे उठाये पश्नो का जवाब नहीं दे रहा है | केवल अपनी शाखा में सुना ही बोले जा रहे है | आँखे खोलिए ,दुनिया बहुत आगे जा रही है |१.क्या संघ का और हिटलर का सोच एक ही नहीं है की हम सर्वश्रेष्ठ है और सब पर हमारा राज होना चाहिए ? 2 क्या संघ का निशान और हिटलर का निशान स्वस्तिक नहीं है ? ३ क्या हिटलर और संघ दोनों की टोपी काली नहीं है जबकि भारत का शुभ निशान ॐ है और सर पर काला कपडा रखना अच्छा नहीं माना जाता | ४ क्या संघ के लोग गाय के चमड़े की बेल्ट और जूते नहीं पहनते ? कैसे पता लगता है की ओ गाय के चमड़े की नहीं है | इसके आलावा ५ क्या संघ ने १९४२ क्व आन्दोलन में मुखबिरी नहीं किया था ? ६ क्या आपातकाल में सारे संघियों ने सरकार का समर्थन कर माफ़ी नहीं माँगा था ? ७ क्या देश में प्रतिबंधित गोडसे की पुस्तक केवल संघ नहीं बेचता और केवल उसी के द्वारा नहीं छापी जाती है ? ८ क्या भा जा पा की सरकार बनने के बाद शाखाये १०% नहीं रह गयी है ? ९ क्या जब तक भा जा पा सरकार रही तब तक संघ और उसके सारे चेलो ने राम मंदिर पर मौन धारण नहीं कर लिया था ? १० क्या उस सरकार में संघ के सारे प्रचारक दलाली और जमीनों पर कब्ज़ा कर बड़े आदमी नहीं हो गए है ११ क्या संघ का एक संगठन मंत्री औरत के साथ सी डी में भारत ने नहीं देखा १२ क्या सबसे बड़े आतंकवादी को संघ के मंत्री काबुल छोड़ कर नहीं आये ? क्या भा जा पा का अध्यक्ष घूस लेते टी वी पर नहीं देखा गया १३ .क्या उस सरकार में सभी विभागों में जबदस्त घोटाले नहीं पाए गए ? १४ क्या ये सच नहीं की जो अपने राम का ही नहीं हुआ उसी को धोखा दे दिया और किसका होगा ? १५ क्या ये सच नहीं है की संघ पर केवल एक खास मराठा जाति का ही वर्चस्व है [कृपया बाकि लोग इस बात पर ध्यान से मनन कर ले ,यदि मै गलत कह रहा हूँ ] १६ क्या संघ से जुड़े ८०% से जायदा लोग व्यापारी नहीं है १७ क्या वे जमाखोरी ,मुनाफाखोरी और मिलावट का काम नहीं कर रहे है ? १९ क्या उनमे से किसी ने भी दो तरह का माल रखा है हिन्दू को असली और बाकि को मिलावटी २० क्या आगरा के गजट में एक पूर्व नेता की मुखबिरी पर स्वतंत्रता सेनानियों को जेल भेजे जाने की बात लिखी है ? २१ क्या मारीशस ,फिजी ,गुयाना ,टोबैको त्रिनिदाद ,न्यूजीलेंड सहित कई देशो में भारतीय लोग राष्ट्रपति या पधानमंत्री नहीं है ,क्या सिंगापूर जैसे तमाम देशी में भारतीय रास्रपति. मंत्री सहित बड़े पदों पर नहीं है ?के १९५० और ६० के बाद गए लोग भी अमरीका जैसे बड़े देश में गवर्नर और संसद तथा और महत्वपूर्ण पद पर नहीं है .क्या लन्दन में भी बाद के गए लोग मेयर और संसद सहित बड़े पदों पर नहीं है ? क्या आस्ट्रेलिया में भारत से पढ़ने गयी एक लड़की मेयर नहीं बनी ? क्या क्या पूछू ? कुंए से बाहर निकल कर भी दुनिया है और संघ के आदिमकालीन सोच वाली बातो से आगे भी बाते है ,इतिहास के तथ्य है | अगर पुरानी दुनिया और लड़ाइयो में ही रहना है तो १- राम ठाकुर थे और उनकी बीबी को ब्राहम्ण रावण उठा ले गया था ,फिर राम ने उसकी लंका जला दिया ,आप लोगो की सोच के हिसाब से पहले इन दोनों जातियों को पुराना हिसाब चुकता करना चाहिए २- उसके बाद महाभारत में कौन किसकी लड़की को ले भगा ,किसने किसको धोखा दिया ,किसने किसको मारा ये जाति और धर्म तथा गोत्र के हिसाब से याद रख कर लड़ाई जरी रहनी चाहिए | ३- उसके बाद भी इन्द्र ने अहिल्या से बलात्कार किया पता लगाना चाहिए की दोनों की जाति क्या थी और धर्म क्या था ? ४ उसके बाद का इतिहास भी इन्ही हिसाब से देखना चाहिए की गाली देने और गोली मारने की गुंजाईश कहा कहा है ? ५ कौरव पांडव ,कृष्ण और कर्ण जैसो का मामला भी छान बीन का है ? कट्टर पर तथा कथित नकली हिन्दुओ { क्योकि असली हिन्दू कट्टर नहीं होता और केवल अपनी नहीं बोलता है बल्कि आदिकाल से शास्त्रार्थ करता रहा है और नागपुर के ताले में दिमाग रख कर जो वहा रटा दिया केवल वाही नहीं बल्कि उसके बजाय खुली आँखों से दुनिया देखता है और आगे बढ़ता है अगर ऐसा नहीं होता तो आज दुनिया में भारत का डंका नहीं बज रहा होता |और मजदूर बन कर गए लोग राज नहीं कर रहे होते ] .इसलिए कृपया पहले दिमाग को खोले दुनिया को देखे खुले दिमाग से ये पढ़े और फिर थोडा ठन्डे मन से सोचे और तब जरूर कुछ कहे | आप भी भारत के नागरिक है ,आप सोच से पीछे रह जायेंगे तो भारत का ही १०० करोडवा हिसा पीछे रह जायेगा ,इसका मुझे दुःख होगा |कुछ लोगो ने बड़ी कड़वी टिपणी किया है ,पर मै भारत के किसी नागरिक को व्यक्तिगत दुशमन नहीं मानता कट्टर संघियों की तरह इसलिए व्यक्तिगत नाम लेकर कुछ नहीं लिख रहा हूँ ,और हां मेरे दोस्त मै ज्यादा नहीं जनता बस लिखने की कोशिश ही कर रहा हूँ और आभारी हूँ प्रवक्ता की वह मुझ जैसे साधारण लोगो को भी जगह देता है | विश्वास है की आप में से जो कट्टर संघी है वो गाँधी और दीनदयाल उपाध्याय की तरह की मेरी हत्या की साजिश नहीं करेंगे ,और मेरे उठाये सवालो का लाभ उठा कर कुए के मेढक के स्थान पर पढ़ा लिखा और दुनिया में प्रथम स्थान पर जाने वाले भारत का नागरिक और सही मायने में सच्चा हिन्दू और उससे भी बढ़ कर इन्सान बनेंगे | फिर भी कुछ समझ में नहीं आ पाए तो अज्ञानता के कारण,और आप को कोई मेरी बातो से दुःख पहुंचे तो मै केवल खेद व्यक्त कर सकता हूँ | क्योकि नए बन रहे अतंकवादियो के घृणित हाथो से मरना मुझे अच्छा नहीं लगेगा | मेरा अभियान जरी रहेगा | जय हिंद ,जय हिंद ,जय हिंद

शनिवार, 13 नवंबर 2010

पूर्व संघचालक के सी सुदर्शन ने सोनिया गाँधी को देश का गद्दार और इंदिरा गाँधी तथा राजीव गाँधी कि हत्याओ का षड्यंत्रकारी कहा है | क्या भारत कि जनता ये मानने को तैयार है | फेस बुक के जागरूक लोगो और देश भक्त लोगो तथा उन लोगो से जो  कोई गन्दा चश्मा नही लगाये है को मै इस बहस के लिए आमंत्रित करता हूँ | इनके बारे में ज्यादा जानने के लिए मेरा लेख पढ़े कि ये संघ को क्या हो गया है | मै जनता हूँ कि यहाँ बहुत से लोग मेरी दोस्ती तोड़ देंगे ,मै ये भी जनता हूँ इससे मेरे जीवन को भी खतरा हो सकता है पर भारत कि लड़ाई जारी रहेगी |कृपया जागने का अहसास कराये |

ये रास्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को क्या हो गया है

ये रास्ट्रीय स्वयंसेवक संघ को क्या हो गया है | ये ज्ञान ,शील ,संस्कार और शुचिता कि बात करता था | एक  बार इसके लोगो कि सरकार क्या बनी ,सब धुल गया | कोई ऐसी बुराई नही थी जिसमे इसके प्रमुख लोग लिप्त नही पाये गए हो | देश को सब याद है | अपने आदर्शो कि वो  हालत देख कर जो कार्यकर्ता मचल कर उस पाले में गिर सकता था वो भी जा गिरा और जो नही गिर पाया उसने शाखाओ से किनारा कर लिया | पहले बहुत जगहों पर शाखाये दिखती थी चाहे सुबह घूमने के शौकीन लोग ही क्यों ना उसमे भी खड़े हो जाते हो ,लेकिन उन्होंने भी जब असलियत देखा कि सत्ता से दूर बैठ कर आलोचना करना और तरह के नारे देना एक बात होती है ,सत्ता से दूर बैठ कर चेहरा साफ रखना एक बात होती है पर ये लोग उन लोगो से लाख गुना बुरे साबित हुए जो ५० साल से सत्ता में है और ओ भी सत्ता चंद दिन देखते ही ,तों उन लोगो ने भी किनारा कर लिया और आज शाखाओ कि कि संख्या १/१० भी नही रह गयी है | शायद  जो तिलस्मी था संघ का ओ कही दरक रहा है | बहुत कोशिश कर के भी पुनः जोड़ नही पा रहे है लोगो को | उधर अयोध्या के फैसले ने दंगा फ़ैलाने और उस बहाने खुद को पुनः फ़ैलाने का एक अवसर भी हाथ से छीन लिया |
 दो बयान दोनों संघ का नया चेहरा दिखाते हुए | जैसे संघ अन्य संगठनो कि तरह जगह जगह धरने पर बैठा ,ये अलग बात है कि भा ज पा ,बजरंग दल इत्यादि सारे संगठनो के शामिल होने के बावजूद धरना पूरी तरह फ्लॉप रहा ,कही भी सैकड़ो से आगे संख्या नही बढ़ पाई | बंद मुट्ठी थी संघ कि खुल गयी | कही ना कही विश्वास ,विश्वसनीयता ,लक्ष्य के प्रति भ्रम ,रास्ते के प्रति भ्रम ,जैसे तमाम कारणों ने संघ को गिरफ्त में ले लिया है | बहुत से लोगो कि तरह एक बार बनी सरकार ने जो भटकाव पैदा किया ,जो चेहरे पर रंग पोता उसे छुड़ाने का कोई रास्ता नही दिख रहा है | एक खास मराठा कौम को सर्व्श्रेस्थ मान कर और हिटलर को आदर्श मान कर उसी के लक्ष्य और रास्ते को स्वीकार कर बना संगठन कुछ ही वर्षो में नीति ,नीयत और नेतृत्व सभी दृष्टीयो से भटकाव का शिकार दिख रहा है | वहा चूँकि बहस और तर्क कि कोई गुंजाईश ही नही है इसीलिए कभी किसी और ने ये पूछा ही नही कि संघ का सारा असली नेतृत्व केवल एक खास मराठा जाती के पास क्यों ? रज्जू भैया का चेहरा कुछ दिन सामने रखा गया कि कोई ये सवाल ना कर दे परन्तु ताकत उनके पास नही थी |
मै दो बयानों का जिक्र कर रहा था | एक बयान सर संघचालक का कि संघ तों आतंकवादी नही है कुछ संघ से जुड़े लोग हो सकते है पर अब ओ संघ के साथ नही है | इसमें उन आरोपों को अपने आप स्वीकार कर लिया है संघचालक ने  कि सघ आतंकवाद के रास्ते पर चल पड़ा है | इस बयान को किसी खास चश्मे से नही बल्कि स्वतंत्र तरीके से जो भी देखेगा और चिंतन करेगा ओ समझ जायेगा कि शुचिता कि बात करने वाले ,बार बार दंगे कराने वाले और एक बार भारत का दिल तोड़ने वाले ,आजादी कि लड़ाई में मुखबिरी करने वाले और जिस आपातकाल कि सबसे ज्यादा चर्चा करते है ,उसमे अपनों को दगा देकर एक लाख से ज्यादा कि संख्या में माफ़ी मांग कर और सत्ता का समर्थन कर जेल से निकाल आने वाले ,और जिस महात्मा गाँधी को दुनिया दरश मान रही है ,उस आजादी के नायक कि हत्या करने वाले अब भारत को उन देशो में शुमार कर देने का प्रयास कर रहे है जो हर वक्त मौत ,दंगे और अनिश्चितता के मुहाने पर खड़े रहते है | ये अलग बात है कि यह बात खुल जाने के बाद  इनका शक्ल दिखाना भी मुश्किल हो जायेगा | अभी आये अदालती फैसले के समय इनके देश को दंगे कि आग में झोकने  तमाम प्रयासों को जिस तरह भारत ने ठुकराया और ये बता दिया कि भारत बदल रहा है |इसका लोकतंत्र मजबूत होकर उभर रहा है | भारत कि नयी पीढ़ी ने लक्ष्य तय कर लिया है और उस लक्ष्य में किसी भी भटकाव और दंगे कि कोई गुंजाईश नही है | अगर उसके बाद भी ये संगठन अभी अपने तरीको से ही चलना चाहता है तों भारत में उन लक्ष्यों और तरीको के लिए कोई जगह नही है |
दूसरा बयान दिया पूर्व संघचालक ने कि सोनिया गाँधी जिन्होंने अपने परिवार और सिन्दूर कि क़ुरबानी देखी ओ गद्दार है ,उन्होंने हत्याओ कि साजिश कि और ओ सोनिया गाँधी जिन्होंने भारत जैसे बड़े देश को का प्रधानमंत्री का पद दो बार ठुकरा दिया ओ और पता नही क्या क्या है  | भारत कि जनता सब जानती है ,सब देखती है | उसने देखा है कि जिसे भगवान कहा उसी राम को सत्ता के लिए धोखा किसने दिया | भारत कि जनता ने सुना है ओ बयान कि एक मंदिर के लिए सत्ता को नही गवा सकते | भारत कि जनता ने देखा है कि जब तक सरकार थी संघ से लेकर तथा कथित साधू संत और सभी हिंदूवादी संगठन कही खो गए थे या मिट्टी के मोल अपने तथा कथित आश्रम के लिए जमीने कब्ज़ा रहे थे या वो  सब कर रहे थे जो भारत कि जनता ने सी डी में देखा | संघ पहले सत्ता में घुसा और अब बहुत ही फूहड़ तरीके से सड़क के किनारे ही नही आ गया बल्कि फूहड़ भाषा और विचार के साथ आ गया | संघ कि सदस्यता कि सूची अगर जारी कर दी जाये तों भारत में सामने कुछ और सत्य अ जायेंगे | एक अभियान चला कर देखना चाहिए कि इस देश में जमा खोरी कौन  लोग करते है जिससे समान कम पड़ जाता है ,और फिर मुनाफाखोरी कौन लोग करते है | मिलावट कर जनता के जीवन से खिलवाड़ कौन करते है | जरा गौर से देखिये और फिर पहचानिए कि ये किस संगठन से जुड़े है | वह रे ज्ञान ,शील ,शुचिता ,संस्कार और पता नही क्या क्या | आप धन्य भी है और धान्य भी है पर दुनिया के साथ दौड़ाने वाले भारत को आप मंजूर नही है ,आप के षड़यंत्र मंजूर नही है ,किसी और गाँधी या आप के ही दीन दयाल उपाध्याय कि हत्या मंजूर नही है ,दंगे मंजूर नही है ,ये शुचिता मंजूर नही हैऊ ये भाषा मंजूर नही है ,ये अनर्गल आरोप मंजूर नही है ,हिटलर के सिद्धांत मंजूर नही है | बौखालने के बजाय चिंतन करने और भारत कि मुख्य धारा में रहने के बारे में सोचे तों शायद ....और प्रारंभ सोनिया गाँधी से माफ़ी मांग कर और इतना घिनौना आरोप लगाने के लिए भारत से माफ़ी मांग कर करना चाहिए |