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सोमवार, 30 सितंबर 2013

अगर भारत और पाकिस्तान अपनी सीमायें कुछ दिनों के लिए खोल दें की जो जहा चाहे बस जाए तो मुझे विश्वास है की पाकिस्तान से काफी लोग आयेंगे और भारत से कोई नहीं जयेगा सिवाय उन गलत लोगो के जो छुपे है और उन्हें पकडे जाने का डर है |
पहली बार किसी राजनीतक रैली में विदेशी लोगो को मंच पर बुलाया गया और उनके सामने देश के प्रधानमंत्री का अपमान किया गया | जानकी ये रैलियां आपसी राजनीती के लिए होती है और मजेदार तो ये रहा की पहले कहा गया की हमारे प्रधानमंत्री का कोई अपमान नहीं कर सकता और फिर प्रधानमंत्री को पूरा अपमानित किया गया | फेकू की याददाश्त कमजोर है की कुछ सेकेण्ड पहले कहा गया भूल जाते है या फिर वही तुरंत तुरंत पर्ची आती है जो लिख कर आ जाता है वाही फेकू  बिना सोचे समझे बोल देता है | वाह रे फेकू |
एक टी वे चैनेल अपना स्टिंग दिखा रहा है की कल की दिल्ली की रैली में [ १ ] कितने कितने रुपये में लोग आये [ २ ] ये भी दिखा रहे है की कैसे किसी को भी टोपी पहना कर और कपडे बदल कर किसी धर्म विशेस के लोगो का इंतजाम किया गया | पता नहीं इस स्टिंग को सच माने या नहीं या संघी भाई केवल मुजफ्फरनगर के स्टिंग को सच मानेंगे और इसे फर्जी कहेंगे |
लालू यादव छात्र नेता थे | जयप्रकाश जी के आन्दोलन में भाग लिया | संघर्ष से और गरीबी से राजनीती में आये और मुझे वो दिन याद है जब पहली तनख्वाह मिलने पर उन्होंने बयांन दिया था की २५०० यानि ढाई हजार रुपये जिंदगी में पहली बार देखे है ,,,पर सत्ता मिलते ही सारी वो बातें और लड़ाई भूल गए जिस पर चल कर वो मुख्यमंत्री के पद तक पहुंचे | सत्ता ने निरंकुश बना दिया | विकास और वादे को भूल कर जातिगत समीकरण बनाने में लग गए | गरीब जनता और साधारण कार्यकर्ता को भूल कर अधिकारियो को और व्यापारियों को बगलगीर बना लिया | ;;;; परिणाम सामने है | न्याय ने सिद्ध किया की न्याय होता है और सी बी आई ने ही सजा दिलाया तो लगा की कोई अधिकारी और संगठन इमानदारी से तय कर ले तो किसी को भी सजा की जगह तक पहुंचा सकता है |नेताओ को समझ में आ जाना चाहिए की अधिकारी और व्यापरी कहा ले जाते है | 
आज की सजा और उससे पहले चौटाला की सजा से भैसे की तरह भ्रस्ताचार के कीचड में सने हुए राजनैतिक लोगो ,अधिकारियो ,कर्मचारियों ,और व्यापारियों को सबक मिल जाना चाहिए और आम लोगो को भी विश्वास हो जाना चाहिए जो भ्रस्ताचार के खिलाफ केवल कुढ़ते रहते है वे आगे आये अपने आसपास निगाह रखे और किसी की भी बढाती हुयी संपत्ति की सूचना सी बी आई , लोकायुक्त ,आयकर इत्यादी विभागों को दें और पकड़वाये और केस के फैसला होने  तक पीछे पड़े रहे जीत आप की होगी | पर केवल जलन के कारन ,झगड़े के कारन शिकायत न करे ,झूठी शिकायत न करें और छोटी छोटी मछलियों के बजाय बड़ी मछलियों से प्रारंभ करें | पर खुद भी गलत काम न करे ,परिवारी को न करने दे | तब न वर्ना कुछ नहीं होगा सब ऐसे ही चलता रहेगा | इक्का दुक्का की सजा से देश नहीं बदलने वाला |
वाह रे पढ़ा लिखा मीडिया ! लालू जेल गये तो बिहार के आने वाले चुनाव में जातियों का हिसाब लगा रहे है और यही आज की चर्चा का प्रमुख मुद्दा है |
पाकिस्तानियों तुम्हे ब्रिगेडियर उस्मान से लेकर ,अब्दुल हमीद और हनीफ तक ने जवाब दिया है ,तुम्हारी गोली से शहीद हुए ये लोग और तुमने मुसलमान होने के बावजूद इन लोगो को नहीं बख्शा | हमारे वायु सेना अध्यक्ष एयर मार्शल लतीफ़ ने भी तुम्हे जवाब दिया था | अपनी मिसाइलो से तुम्हे दहशत में दाल कर हमारे रास्त्रपति और वैज्ञानिक ए पी जे अब्दुल कलाम जी ने भी तुम्हे जवाब दिया है की भारत में भारत सबका है और सब भारत के है | तुम्हारी तरह नहीं की तुम्हारा देश केवल दहशतगर्दो का है |
नफ़रत बांटने वाले और आतंक की खेती करने वाले पाकिस्तानियों के लिए एक घटना ------

मैं अपने दोस्त के इलाज के लिए दिल्ली के एस्कॉर्ट गया था | अचानक माइक से आवाज आई की एक बच्चे की हालत गंभीर है और उसे ओ पॉजिटिव खून चाहिए | मैं काउंटर पर गया और अपना खून दिया | तभी दिल्ली की एक शिक्षिका मिसेस शर्मा आ गयी उनका कोई बहुत गंभीर था पर उन्होंने अपना खून तो दिया ही अपने ऐसे कई रिश्तेदारों को भी फ़ोन कर बुला लिया जिनका ओ ग्रुप का खून था | फिर दो तीन दिनों तक पास के छात्र आते रहे खून देने |
फिर एक दिन जिनका बच्चा था वे मिले ,, वे लाहौर के बड़े ट्रांसपोर्टर थे ,,, मुसलमान होने के बावजूद वे सामने जमीन पर बैठ गए और रोने लगे | मैंने उन्हें उठाया तो उन्होंने कृतज्ञता जाहिर किया और अपना कार्ड दिया की कभी लाहौर आइये | मैंने उनसे केवल एक आग्रह किया की अपने देश के आतंकवादियो को और आकाओ को मत बता दीजियेगा की हिंदुस्तान और हिन्दू लोगो के खून से आप का बच्चा बचा है | उन्होंने कहा की जनता के विचार ऐसे नहीं है बल्कि वहा के फौजी आका और आतंकवादी ताकतें केवल ये खेल करती है | अगर वहां तरक्की हुयी होती तो हम जैसे लोगो को इलाज के लिए भारत क्यों आना पड़ता ? हम लोगो को यहाँ सारी सुविधाएँ मिली | मैंने पूछा की पाकिस्तानी होने के कारन आपसे किसी ने कोई फर्क किया हो किसी मामले में ,उन्होंने कहा कत्तई नहीं ,पता ही नहीं लगा की हम अपने देश में नहीं है | उन्होंने बताया की मैं तो जब बच्चा ठीक होने लगा तो मस्जिद पूछ कर पास ही चला गाया ,जामिया नगर में तमाम मुसलमान मिले सब खुश है ,इस इलाके के एम् एल ए भी मुसलमान है , रास्त्रपति भी मुसलमान है ,हमारे पाकिस्तान में तो कोई हिन्दू नहीं बन सकता | उन्होंने ये वादा किया था की पाकिस्तान जाकर वो ये बातें वहा के लोगो को बताएँगे | पता नहीं बताया या नहीं |
इन पाकिस्तानियों को शर्म नहीं आती की उनके देश से ज्यादा मुसलमान भारत में है और देश के बड़े पदों पर है | सुधर जाओ पाकिस्तानियों वर्ना ----
कल ए बी पी न्यूज़ पर एक पाकिस्तानी पूर्व राजदूत और एक पूर्व मंत्री ऐसी बातें कर रहे थे की समझ में आ गया की इनको क्या पढाया गया है और इनका ईमान क्या है | इतनी घटिया बातें कर रहे थे की मुह कसैला हो गया और ये सामने होते तो इनके चेहरे पर मुह का कसैलापन जरूर चला गया होता | इतने बड़े पदों पर रहने वाले इतने घटिया हो सकते है कल्पना नहीं की जा सकती | क्या ऐसे लोगो से ही हमारे देश के मंत्री और अधिकारी बातें करते है ? बर्दाश्त कैसे करते है ?
संमझ में आ गया की इनका इलाज केवल इंदिरा गाँधी जी जानती थी या फिर मुलायम सिंह जी जानते है | कभी ऊपर वाला एक महीने के लिए मुझे ताकत देदे तो मैं इनका वाही इलाज करूंगा जो इनके लिए उपयुक्त है | छी ऐसे पाकिस्तानी | हमारे देश से गए लोग वहा कितने बुरे हालत में रहते होंगे |
जितने लोग भारत से पकिस्तान जाते है उससे ज्यादा वहा के केवल अपना और परिवार का इलाज करवाने आते है और उनसे कोई फर्क नहीं करता |

रविवार, 29 सितंबर 2013

एक पार्टी के एक नेता अपनी आदत के मुताबिक अपनी पार्टी के अन्य सभी नेताओ को निपटाने में लग गए है | पहले कदम के रूप में उनके पैसे द्वारा लाये गए लोग अपने ही नेताओ को हूट कर उन्हें ये बता रहे है की वे लोग कुछ नहीं है | हूट होने के बाद बाकि नेता मंच पर जाना बंद कर देंगे और तय हो जायेगा की मूछ हो तो बस हिटलर जैसी | आगे बढ़ कर माला पहनाने वाले भी अब शर्मिंदा है | पर रँगे सियार का रंग जल्दी ही उतरेगा | जय गांधीवाद ,जय लोकतंत्र ,जय हिन्द |
आज फिर फेंकू ने फेंका और थोड़ी देर बाद ही अमरीका से मीडिया वालो ने ही जिनका नाम लेकर फेकू ने फेका था फेकू की पोल खोल दिया | वाह रे फेकू |
क्या मेरे देश को भी लोग उन देशो में शामिल करना चाहते है जहा इस कदर नफरत और बदले की भावना घर कर गयी है की कबीले और बस्तियां एक दूसरे पर हमला कर एक दूसरे को जलाते और मारते रहते है | वहा की तस्वीरे छपती है तो इन्सान नहीं बल्कि हड्डियों के ढांचे दिखाते है और कही से खाना बंटने आता है तो टूट पड़ते है |
जहा शांति नहीं रहती वहा केवल विनाश होता है |
इसलिए नफ़रत बाटने के बजाय अपने अपने वो कार्यक्रम बताये सभी, की गरीबी ,बेकारी ,बीमारी सहित सभी समस्यायों से कैसे लड़ेंगे |
देश में नफ़रत बांटने और दंगे करने के लिए पाकिस्तानी वीडियो इस्तेमाल करने वाले खुद को हिन्दू का ठेकेदार और देशभक्त कह रहे है |
देश में महत्मा गाँधी ,सुभाषचंद्र बोस ,डॉ लोहिया ,जयप्रकाश ,चौ चरण सिंह ,सहित तमाम बड़े नेता हुए जो अपने समय में जनता के दिलो पर राज कर रहे थे पर किसी के मंच पर दूसरे नेता हूट नहीं किये गए ,सभी को जनता सुनती थी |
पर अब तो किसी को आगे बढाने वाले भी उस मंच पर नहीं बोल पाते | पुरानी कहावत है की गलत जानवर पालोगे तो पहले आप को ही कटेगा |
नागपुर और गुजरात से हर जगह भेजे जा रहे कुछ हजारो लोग ये खेल कर रहे है | हिटलर के समय भी ऐसा ही होता था | शायद उनको बढाने वाले लेकिन राजनैतिक कार्यकर्ता ,मीडिया और पूंजीवादियो को अब दिखने लगना चाहिए की हिटलर का उद्भव हो रहा है और हिटलर के आने का क्या मतलब होता है ?? जीवन नरक हो जाता है लोकतंत्र ख़त्म हो जाता है और चारो तरफ खून और तबाही ही तबाही दिखती है |
देश में विपक्ष की एक पार्टी थी जिसका नाम बीजेपी था ,,वो भंग कर दी गयी क्या ?? दिख नहीं रही है ,केवल कोई दिख रहा है |
मीडिया और नेकर ने मिल कर कुछ समय पहले एक को रास्ट्रपिता महात्मा गाँधी से बड़ा बनाने की कोशिश किया था और चन्द दिनों के लिए कामयाब भी हो गए थे ,उन्ही के साथ कुछ और लोग गढे और देश ने सबको देख लिया ,,,,, आजकल यही दोनों पूरी ताकत से भारत में एक हिटलर गढ़ने में लगे है | देखते है कहा तक और कितने दिन चलता है | 

शुक्रवार, 27 सितंबर 2013

शायद हंसी आये --- लोगो का विरोध ऐसे होता है ---नेता और सरकार नालायक है ,,, सरकार ,विधायक और सांसद सो रहे है जनता के लिए सड़क नहीं है इन्हें क्या ये तो जहाज से चालते हैं | ---
-- सड़क बनने लगी तो -- पहला विरोध -- सरकार और नेताओ को जनता की चिंता नहीं लोगो की जमीन छीनी जा रही है ---- फिर -- लोगो को सही मुवावजा नहीं दिया जा रहा है ------ फिर -- ठेका गलत आदमी को दिया गया ------ सड़क सही नहीं बन रही है ----- क्रमशः -- हाहा हाहा हाहा ,,
पार्टियों के द्वारा प्रचार और जनसंपर्क बंद हो और सरकार द्वारा बनाये गए एक मंच पर उस क्षेत्र के सभी प्रत्याशी आये और जनता को अपने विचार और कार्यक्रम बताये जिसे टी वी चैनेल लाइव प्रसारित करे | जनता समझदार है उस पर छोड़ दीजिये की किसे वोट देगी | सब खर्चे ख़त्म ,बांटने इत्यादि की कहानी ख़त्म ,| कैसा है ये विचार ??
देश में एक अभियान चलना चाहिए की सभी अपनी ५ साल के अंतराल की और नौकरी ,व्यापर ,चुनाव के पहले और बाद की संपत्ति घोषित करे | फिर एक प्रदेश की संस्थाए दूसरे प्रदेश के लोगो की जाँच करें | देश को पता लगना चाहिए को चोर और बेईमान कौन है ?? इसमें शिक्षक ,वकील ,डॉक्टर ,एन जी ओ इत्यादि सभी आने चाहिए ,देश में कोई नहीं छूटना चाहिये |
ये देश की संसद और सभी विधानसभाओ की जिम्मेदारी है की खुद जाँच कर बताये की कितने सांसदों और विधायको पर सचमुच अपराध करने के कारन मुकदमे है और कितने लोग पर आन्दोलनों के मुकदमे है ?? यदि ऐसा नहीं किया जाता है तो लोकतंत्र के दुश्मनों को लोकतंत्र पर अघात करने का अधकार बना रहेगा |
पहले राजनीतिक दलों के सभा सम्मेलनों के बाद उनके महापुरुषों और फिर भारत की या हिंदुस्तान की जय होती थी ,भगत सिंह का नारा भी लगाते थे सचमुच के नौजवान ,,इन्कलाब जिंदाबाद ,,| अब तो नारे भी शेयर मार्किट जैसे हो गए
हमारे १२ लोग जिसमे एक लेफ्टिनेंट कर्नल भी है आज बिना लड़ें ही शहीद हो गए | लड़ कर हुए होते तो १२० या १२०० दुश्मनों को मार कर हुए होते | आज रात को नीद नहीं आएगी अगर ये नहीं पता लगा रात तक की १२० दुशमनो को मार दिया | एक बार निपट क्यों नै लेते | बिना लड़ें क्यों मरे |लड़ाई में भी लोग शहीद होते हैं ,हथियार खर्च होते है ,पैसा खर्च होता है तो वो तो वैसे भी खर्च होता है
हमारी गलती मैं ये भी मानता हूँ की हमें उस कश्मीर पर लगातार बात करना चाहिए था जो कश्मीर ने कब्ज़ा किया है ,,,, हमें तिब्बत ,,और १९६२ में हमसे छीनी हुयी जमीन के मुद्दे पर लगातार दुनिया के सामने डेट रहना चाहिए था | तो हमारे सामने शायद दूसरी स्थितियां होती |
मुलायम सिंह जी जब रक्षामंत्री थे तो दो बाते हुयी थी -१- वो सीमा पर गए थे ,गोली चली उन्होंने सेनाध्यक्ष से पूछा क्या हो रहा है ? बताया गया की पडोसी ऐसे ही चाहे जब गोली चलाते रहते है | मुलायम सिंह जी ने तुरंत जवाब देने को कहा तो कहा गया की आप यहाँ से जाये तब देंगे तो मुलायम सिंह ने कहा की एक सैनिक और रक्षामंत्री की जान की कीमत एक है इसलिए अभी जवाब दो और ये सन्देश दुश्मन को भी मिला |
--२ - मुलायम सिंह ने आतंकवादी कैम्पों पर हमले का आदेश दे दिया था पर प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति तैयार नहीं हुयी इसलिए नहीं हो पाया क्योकि उस समिति के बिना हमला नहीं हो सकता है |
ये भी तथ्य है की जब तक मुलायम सिंह रक्षामंत्री रहे देश में कोई आतंकवादी हमला नहीं हुआ |
बिना ये सब जाने कुछ लोग मुलायम सिंह की अलोचना करते है |
मुलायम सिंह कहते नहीं वक्त आने पर करते है | बाकि फैसला आप सभी का की केवल जुबानदराजी करने से देश मजबूत होगा |
एक जानकारी कुछ लोग सधार लें की सैनिको के शहीद होने पर उनका पार्थिव शरीर उसके घर जायेगा ,ये फैसला भी मुलायम सिंह जी ने ही किया था | नेताजी सबसे लोकप्रीय रक्षामंत्री हुए जिनका पूरी सेना बहुत सम्मान करती थी और फिर इस परंपरा को बड़े समाजवादी नेता जोर्ज फर्नांडीस साहब ने आगे बढाया |
खुशखबरी -- लोकतंत्र को मजबूत करने का एक और कदम ------

अब जनता ये नहीं कह सकती की उसे कुए और खाई में से एक को वोट देने की मजबूरी है |अब जनता गलत होने पर सभी प्रत्याशियों को रिजेक्ट कर सकती है | अब शिकायत मत करियेगा की सब तो दागी ही है राजनीती में किसे चुने | अब आप सभी को नकार सकते है | वैसे तो हर क्षेत्र में कुछ अच्छे लोग भी चुनाव लड़ते है पर आप गाड़ियाँ ,चुनाव चिन्ह ,जाति ,गोत्र ,धर्म इत्यादि देख कर वोट डालते है ,किसका प्रचार ज्यादा आकर्षक है देख कर वोट डालते है और अपने ही पड़ोस के किसी अच्छे डाक्टर को ,शिक्षक को ,समाजसेवी को ,कृषक को वकील को या ऐसे हर आदमी को नकार देते है जो होता इमानदार और ज्ञानी है पर उसमे आप को आकर्षण नहीं दिखता और आप उन लोगो की तरफ देखते भी नहीं है | फिर शिकायत कैसी ?? लीजिये आप को शिकायत दूर करने का एक मजबूत हथियार मिल गया |बधाई | लोकतंत्र जिंदाबाद -फासीवाद मुर्दाबाद |
देशहित में ,समाजहित में या कोई और बहुत अच्छी बात कहता हूँ तो कोई संघी लाइक तक करने की कोशिश नहीं करता है पर ज्यो ही किसी आतंकवादी या फासीवादी के खिलाफ लिखता हूँ ये एकजुट होकर मेरे ऊपर टूट पड़ते है |
१९४७ से २०१३ आ गया देश को आज तक एक जवाब का इन्तजार है की आजादी की लड़ाई में हिन्दू महासभा और संघ के लोगो ने चाहे भगत सिंह और उनकी सेना रही हो ,चाहे सुभाषचंद्र बोस और उनकी सेना रही हो या दुनिया के सर्व स्वीकार महत्मा गाँधी किसी के साथ भी और इनसे अलग भी लड़ाई क्यों नहीं लड़ा उल्टे अंग्रेजो की मुखबिरी क्यों कर रहे थे ??
महात्मा गाँधी की हत्या क्यों किया ? और अब उनका नाम क्यों जप रहे है ? ये नया सवाल है ??
आपातकाल में संघ से जुड़े ९८ % लोगो ने इंदिरा गाँधी जी का समर्थन करते हुए और आपातकाल को महान पर्व बताते हुए महीने दो महीने में माफ़ी मांग लिया था |क्या उन्हें आपातकाल के लिए मिलने वाली पेंशन ,जो मुलायम सिंह यादव ने शुरू किया और अखलेश यादव भी दे रहे है ,लेना चाहिए ?

बुधवार, 25 सितंबर 2013

हिंदुस्तान एक बहु भाषी ,बहु जातीय ,बहु धर्म और बहु परमपरा का देश है जहा मील मील पर भाषा ,बोली ,पानी और परमपरा बदल जाती हैं ,, फिर भी ये देश एक है | सह अस्तित्व इसका अपना मजबूत गुण है | कोई इसे जो चाहे नाम दे मकसद बस इतना है की नफ़रत के लिए यहाँ कोई स्थान नहीं है ,सैकड़ो साल अंग्रेजो ने राज किया वो कुछ नहीं मिटा सके ,सैकड़ो साल मुगलों ने राज किया वे भी कुछ ख़त्म नहीं कर सके क्योकि देश का चरित्र है ये | और इस चरित्र को किसी के प्रमाण पत्र की जरूरत नहीं है | वैसे ये सेकुलरिस्म क्या होता है ???
अच्छा पूरा देश याद कर के बताये की क्या आप लोगो ने कभी संघ और बीजेपी वालो के मुह से रास्ट्रपिता बापू का नाम सुना था ?? अचानक ये गाना क्यों गा रहे गालियाँ तो बहुत सुना है उनके लिए | अभी इनके दफ्तर में छापा मार दीजिये गाँधी जी के खिलाफ ,पटेल जी के खिलाफ आप को बहुत सारा साहित्य मिल जायेगा | चक्कर क्या है ?? क्या माजरा है इस करवट के पीछे |
रास्ट्रपिता महत्मा गाँधी की हत्या के बाद संघ ने गोडसे के मिन्नत किया था कि तुम तो जा ही रहे हो कम से कम संघ को बचा लो और तब गोडसे ने अपना संघ से नाता अस्वीकार किया था | ऐसा ये कभी भी कर सकते है |
नेता गलियां तो बहुत सुनते है पर एक तथ्य ये भी है की देश में सभी दलों के प्रधानमंत्री ,रक्षामंत्री ,गृहमंत्री और विदेशमंत्री रह चुके है और इन सभी को देश के तमाम सीक्रेट पता होते है पर आज तक किसी भी नेता ने कुछ भी कही नहीं बताया और कभी देश से गद्दारी नहीं किया |
जब भी ऐसे काम किया है ,अधिकारियो ने ही किया है |
पुराने हिटलर की आत्मा बहुत खुश है की भारत में उसके मानने वाले पक्के है | उसने कहा था की झूठ सौ बार बोलो तो सच हो जाता है उसके भारतीय समर्थको ने बखूबी इस्तेमाल करना सीख लिया है |हिटलर को पक्का भरोसा है की मौका लगते ही गैस चैंबर वगैरह का इस्तेमाल भी पूरा होगा | हिटलर वहा भी खुश ,हिटलर यहाँ भी खुश |
वैसे मैं संघियों और भाजपाइयों के एक गुण का कायल हो गया हूँ | पूरे देश में कही भी इनकी बात में ,घटनाओ के वर्णन में या व्यक्तियों के बारे में चर्चा में कामा ,फुलस्टॉप का भी फर्क नहीं मिलेगा | कैसे पूरे देश में एक जैसा रटा देते है इन्हें ??
सामान्य आदमी में तो एक से तीसरे तक पहुंचते पहुंचते ये सब बदल जाता है | ऐसा कई नौकरियों के पाशिक्षण में भी सिद्ध हो चूका है |
रैली में पैसे के साथ बुरका भी मिलेगा । लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए फेंकू का नया फार्मूला । बड़ी दिक्कत है की फेकू जो भी फेंकता है सबकी पोल खुल जाती है । मेरे पास पैसे नहीं है इसलिए रैली भी नहीं और नकली वसूली भी नहीं ।
रैली में पैसे के साथ बुरका भी मिलेगा । लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए फेंकू का नया फार्मूला । बड़ी दिक्कत है की फेकू जो भी फेंकता है सबकी पोल खुल जाती है । मेरे पास पैसे नहीं है इसलिए रैली भी नहीं और नकली वसूली भी नहीं ।
कुतर्क और अज्ञान से बहस नहीं हो सकती और कुछ संगठन केवल कुतर्क और अज्ञान का ही प्रशिक्षण देते है |
क्या सजा मिल जाने के बाद भी किसी को चुनाव लड़ने या पद पर बने रहने का अधिकार हों चाहिए | बशर्ते की ऊपर वाली अदालत उनकी अपील स्वीकार करे और साथ में सजा को मुल्तवी [ सस्पेंड ] भी न कर दे | मैं तो सहमत नहीं हूँ |
मेरा जबसे मैं सोचने समझाने लायक हुआ तभी से मानना है की १९४७ की रात को १२ बजे के बाद की सबसे बड़ी गलती थी पूरी व्यवस्था और व्यवस्था में बैठे लोगो को ज्यो का त्यों स्वीकार कर लेना | यदि ऐसा नहीं हुआ होता बल्कि जिन लोगो ने आजादी की लड़ाई में सब कुछ या कुछ खोया था उनमे से लोगो को व्यवस्था में लगा दिया गया होता तो देश इतना बर्बाद नहीं हुआ होता और न इतनी जल्दी इतना भ्रस्ताचार बढ़ा होता और न पुलिस ही अंग्रेजो वाली होती |
मेरा जबसे मैं सोचने समझाने लायक हुआ तभी से मानना है की १९४७ की रात को १२ बजे के बाद की सबसे बड़ी गलती थी पूरी व्यवस्था और व्यवस्था में बैठे लोगो को ज्यो का त्यों स्वीकार कर लेना | यदि ऐसा नहीं हुआ होता बल्कि जिन लोगो ने आजादी की लड़ाई में सब कुछ या कुछ खोया था उनमे से लोगो को व्यवस्था में लगा दिया गया होता तो देश इतना बर्बाद नहीं हुआ होता और न इतनी जल्दी इतना भ्रस्ताचार बढ़ा होता और न पुलिस ही अंग्रेजो वाली होती |
पहले अघोसित परमपरा थी की चाहे जूनियर को बनाना पड़े पर कुछ ख़ास तरह के लोग सेनाध्यक्ष नहीं बनाये जाते थे | लगता है की ये सत्ता में बैठे लोगो से छुपा लिया गया |
आप मुझे राज दो मैं देश को स्वर्ग बना दूंगा और आप सभी को स्वर्गवासी | बस देश के सामने इतना सा मुद्दा है |
कुछ लोग केवल ख़त्म करने की बात करते है | क्या सचमुच अब इतनी ताकत पा गए है की जो चाहेंगे वो सब ख़त्म कर देंगे | हिटलर भी यही सोचता था पर क्या कौन खत्म हुआ ???????????
कुछ लोग अपने किसी जानने वाले रामलाल के लिए जयश्री राम बोलते है क्या ??? क्योकि असली राम को तो ये लोग जानते ही नहीं है और उनका कोई गुण ,कोई शिक्षा इन लोगो में दिखलाई ही नहीं पड़ती |
मैं भी चिंतन कर रहा हूँ और हर चितानशील व्यक्ति को चिंतन करना चाहिए की अचानक गाँधी जी और पटेल जी की तरफ संघ की करवट का राज क्या है ?? कोई गहरी साजिश निकलेगी | अटल जी को अलग दिखने के लिए एक सम्मलेन में बीजेपी ने कुछ शब्द जोड़े थे पर उस सम्मेलन के बाद फिर अपने रंग में आ गयी थी यहाँ तक की अटल जी को भी किनारे कर दिया होता पर उनकी स्वीकार्यता और ब्राह्मण हों उन्हें बचा गया |
मैंने आगरा की आर्काइव लाइब्रेरी से कुछ कागज निकले थे अटल बिहारी वाजपेयी की आजादी के समाय की भूमिका के बारे में पर कभी सार्वजानिक नहीं किया क्योकि वो कुछ बदले बदले से दिख रहे थे पर अहंकार का प्रतिमूर्ति ,जिसकी आँखों में हिंसा झांकती हो और जिसका इतिहास खून से भरा हो उसके बारे में तो कलम अंतिम सांस तक देश को आगाह करेगी की जागते रहो ,देखो हिटलर शक्ल बदल कर प्यारे हिंदुस्तान को बर्बाद न कर दे |
इनके गुरु गोलवलकर की ये पुस्तक जरूर पढ़िए जो इन लोगो की गीता है और जो संघ की आधार सोच है -- तब बताइयेगा की मैं फासीवाद के बारे में गलत लिखता हूँ क्या ,,मैं हिटलर की चर्चा गलत करता हूँ क्या ?? ----
http://koenraadelst.bharatvani.org/articles/fascism/golwalkar.html
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इनके गुरु गोलवलकर की ये पुस्तक जरूर पढ़िए जो इन लोगो की गीता है और जो संघ की आधार सोच है -- तब बताइयेगा की मैं फासीवाद के बारे में गलत लिखता हूँ क्या ,,मैं हिटलर की चर्चा गलत करता हूँ क्या ?? ----
http://koenraadelst.bharatvani.org/articles/fascism/golwalkar.html
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वन मैंन ,वन पार्टी राज की आहट सुनाई पड़ी क्या ?? बड़ी मुश्किल से लोकतंत्र मिला है जिसपर हमें गर्व है की हम सब राजा है | मैं जो कह रहा था धीरे धीरे सामने आ रहा है | भारतीय को केवल रोटी ,कपड़ा मकान नहीं चाहिए बल्कि साथ में चाहिए उन्मुक्त हंसी | तानाशाही में ये उन्मुक्त हँसी छीन जाती है और तानाशाही वाले देशो का हाल तथा फौजी शासन वाले देशो का हाल सबके सामने है |

मंगलवार, 24 सितंबर 2013

एक संगठन जिसने आजादी की लड़ाई में गद्दारी किया था काफी दिनों से देश में फासीवाद लाना चाहता है | क्या अब वो फ़ौज को भड़का कर अपना मकसद हासिल करना चाहता है ?? पर भारत की महान सेना अपना कर्त्तव्य जानती है और अपने को उसी तक सीमित रखती है | इन्हें सेना की तरफ से सही वक्त पर सही जवाब मिलेगा |
नेता गालियाँ तो बहुत सुनते है पर एक तथ्य ये भी है की देश में सभी दलों के प्रधानमंत्री ,रक्षामंत्री ,गृहमंत्री और विदेशमंत्री रह चुके है और इन सभी को देश के तमाम सीक्रेट पता होते है पर आज तक किसी भी नेता ने कुछ भी कही नहीं बताया और कभी देश से गद्दारी नहीं किया |
जब भी ऐसे काम किया है ,अधिकारियो ने ही किया है |
1974 में जयप्रकाश जी ने कहा था की पुलिस और सेना को सत्ता बदल देना चाहिए और इसी बात को आधार बना कर इंदिरा जी ने आपातकाल लगा दिया था देश में | भारत की महान सेना जो किसी राजनीती में नहीं पड़ती और जब तक किसी आपदा के लिए बुलाया नहीं जाये केवल देश की सीमा की तरफ ही देखती है | क्या ऐसी महान सेना को किसी राजनीतिक मंच से राजनीति में घसीटना उचित है ???
वैसे मैं संघियों और भाजपाइयों के एक गुण का कायल हो गया हूँ | पूरे देश में कही भी इनकी बात में ,घटनाओ के वर्णन में या व्यक्तियों के बारे में चर्चा में कामा ,फुलस्टॉप का भी फर्क नहीं मिलेगा | कैसे पूरे देश में एक जैसा रटा देते है इन्हें ??
सामान्य आदमी में तो एक से तीसरे तक पहुंचते पहुंचते ये सब बदल जाता है | ऐसा कई नौकरियों के पाशिक्षण में भी सिद्ध हो चूका है |
पुराने हिटलर की आत्मा बहुत खुश है की भारत में उसके मानने वाले पक्के है | उसने कहा था की झूठ सौ बार बोलो तो सच हो जाता है उसके भारतीय समर्थको ने बखूबी इस्तेमाल करना सीख लिया है |हिटलर को पक्का भरोसा है की मौका लगते ही गैस चैंबर वगैरह का इस्तेमाल भी पूरा होगा | हिटलर वहा भी खुश ,हिटलर यहाँ भी खुश |
अगर फेकू में हिम्मत हो तो दिल्ली के रामलीला मैदान में एक रैली हो जाये और उसमे फेकू का और मेरे मुख्यमंत्री का मुकाबला हो जाये ज्ञान का भी और भाषण का भी । वैसे तो मैं ही काफी हूँ फेकू के लिए । पर देख लीजियेगा फेकू तैयार ही नहीं होगा ।
ओबामा की नकल करता है इसलिए कह दिया की ऐसा वहां होता है ।
रैली में पैसे के साथ बुरका भी मिलेगा । लोकतंत्र को मजबूत करने के लिए फेंकू का नया फार्मूला । बड़ी दिक्कत है की फेकू जो भी फेंकता है सबकी पोल खुल जाती है । मेरे पास पैसे नहीं है इसलिए रैली भी नहीं और नकली वसूली भी नहीं ।

सोमवार, 23 सितंबर 2013

कितनी तरह की बीमारियाँ होने लगी है और कैसे कैसे नाम हैं उनके पता ही नहीं था ।
पापियों ,सारे बुरे काम करने वालो से इश्वर भी डरता है और अच्छो से जल्दी मिलना चाहता है ।

रविवार, 22 सितंबर 2013

विदेश में भारत के ही नागरिक और उत्तर प्रदेश के मंत्री मो आज़म खान को रोके जाने पर कुछ लोग कोई और भाषा बोल रहे थे और अपने साथियों को छोड़ कर किसी लड़की का सलवार सूट पहन कर भागने की कोशिश करने वाले रामदेव को रोकने के मामले में कुछ दूसरी भाषा बोल रहे है ।
ये क्या हो गया है लोगो को ? पुलिस सद्व्यवहार सप्ताह मनाती है , हिंदुस्तान हिंदी सप्ताह मनाता है , दुनिया ने विश्व शांति दिवस मनाना शुरू किया है ,ऐसे ही पता नहीं क्या क्या ??
पर पिता दिवस ,,,,माता दिवस ,,, बेटा दिवस ,,, बेटी दिवस ,,,????? अब ये रिश्ते भी दिवस के दिखावे तक सीमित हो जायेंगे ????????
मौतों और बरबादी से देश को और मानवता को क्या मिला ???

बुधवार, 18 सितंबर 2013

कल से दिल्ली की तरफ । क्या करूँ ५० दिन से ज्यादा हो गया तो गंगाराम अस्पताल की शरण में जा रहा हूँ । जिम्मेदारियां हैं वरना जीवन का कोई मतलब नहीं है । एक समय आता है कुछ लोगो के जीवन में की जीवन बेमतलब हो जाता है और आप अनुपयोगी और अपराधी भी हो जाते है सभी के लिए । आप नितांत अकेले हो जाते है और केवल दिन और पल गिनते है ।

मंगलवार, 17 सितंबर 2013

कल कही हिंदुस्तानियत का क़त्ल हुआ और हिंदुस्तान को उसका बहुत दुःख है । आइये हिंदुस्तान और हिंदुस्तानियत को हम सब मिल कर बचाएं । मन सचमुच बहुत दुखी है ।
देश के एक नेता को किसने बता दिया की उनके चीखने से लोग प्रभावित होते है । दूसरा सेल्समैन वाली भाषा किसी ने रटा दिया । कोई उनका ऐसा शुभचिंतक नहीं है जो उन्हें सच बता सके और सुधार सके की वो देश के नेता की तरह बोलें ?????????????
१९९२ में मैंने एक भाषण में बोल दिया की ये देश सबका है । सबकी क़ुरबानी से और योगदान से बना है । तथाकथित हिंदुवादियो के सबसे बड़े पदाधिकारी ने बयान दे दिया की मैं किसी दूसरे धर्म के आदमी को अपना बाप बना लूँ और मुझे कहना पड़ा की मुझे अपने पिता पर विश्वास भी है और गर्व भी आप अपना देखो ।
जो लोग नहीं जानते की फासीवाद क्या होता है अब मेरी इन लगातार डाली गयी तीन पोस्ट से जान लें की क्या होता है ?/
फासीवाद का मतलब आप असहमत है या कोई अन्य विचार रखते है तो देश छोड़ दे या दुनिया ही छोड़ दें । यही फासीवाद होता है और इसी की आहट से मैं लगातार सभी को आगाह कर रहा हूँ ।
अपने आदर्शो को दुत्कार कर जिन्हें गोली मारी और जिन्हें गाली दिया अचानक उन महापुरुषों को अपना आदर्श क्यों बताने लगे तथाकथित हिंदूवादी ?? ये सवाल क्या पूछ लिया चार गालियां देकर फरमान सुना दिया मुझे की मैं अपना धर्म बदल लूँ । क्या मैंने कोई गलत सवाल पूछ लिया या फिर दुखती रग पर पांव पड़ गया मेरा ?? जवाब जरूर मिले ।
तथाकथित हिंदूवादी ताकतों ने कभी ये संकल्प क्यों नहीं लिया की कोई हिन्दू औरत शरीर नहीं बेचेगी और कोई हिन्दू बच्चा भीख नहीं मांगेगा ।
इस पर भाई लोगो में मुझे आदेश दिया है की मैं धर्म बदल लूँ ।
क्या सचमुच मैंने कोई धर्म विरोधी बात कर दिया ?????????
जवाब जरूर मिलना चाहिए ।
इंसानियत में बिलकुल यकीन नहीं करने वाले एक आदमी के कारण देश से घोटालो ,भ्रस्ताचार और महगाई की चर्चा ही गायब हो गयी । वैसे भी ये चर्चा करने पर तीन उँगलियाँ खुद की तरफ इशारा करने लगती है ।
भारत में एक महिला ने बाल खोल दिए तो भारत महाभारत में तब्दील हो गया । समय आज भी वही है एक बहन बेटी ने मुह खोलने की हिम्मत किया तो एक नकली अध्यात्मिक सत्ता भरभरा कर गिर गयी और लगातार गिरती जा रही है । बाल खोलना मुह खोलना ही होता है ,प्रतिरोध करना ही होता है हर जुल्म के खिलाफ ,हर गैरबराबरी के खिलाफ । जब भी किसी अनीति के खिलाफ हमारी बहन बेटी उठ खड़ी होगी तो महाभारत जरूर होगी ये उन्हें समझाना चाहिए । वैसे सभी की जिम्मेदारी है हर अनीति के खिलाफ उठ खड़े होने की ।

सोमवार, 16 सितंबर 2013

सामान्य ज्ञान के आज के दो सवाल --- देखें कितने लोग जवाब जानते है --------

-  १ ---भगवांन राम के मंदिर के नाम पर दंगे करवा कर सरकार किसने बनाया था ????
--२ ---गली से लेकर दिल्ली तक सरकार बन जाने के बाद किसने कहा था की ---- हम एक मंदिर के लिए सरकार नहीं गँवा सकते है ????

हिंदुवादियो ने अपने आदर्शो और अपने नेताओ का नाम लेना बंद क्यों कर दिया ?? क्या वे बिकाऊ और वोट दिलवाऊ नहीं लगते उन्हें ?? हेगडेवार से देवरस तक और मुखर्जी से वाजपेयी तक ।
आखिर उनके नाम के पीछे क्यों भाग रहे है जिनमे से एक की इन्होने हत्या किया था और उन्हें बहुत गलियां ही नहीं दिया था बल्कि उनकी हत्या को जायज बताने वाली किताबे यही छापते और बेचते है यानी रास्ट्रपिता महत्मा गाँधी जी ।
और जिन्हें इन लोगो ने बहुत गलियां दिया था जब उन्होंने गाँधी जी की हत्या होने पर संघ पर प्रतिबन्ध लगा दिया था और पूरे देश के संघियों को जेल भेज दिया था ,,यानि सरदार पटेल जी ।
नेता जी , नेहरु जी ,लोहिया जी और जयप्रकाश के नाम कब तक जपना शुरू करेंगे उसका इन्तजार है ।
पर इन्होने मान तो लिया की इनकी विचारधारा और कार्यक्रम बनाने वाले बस यूँ ही थे ।
कोई हिन्दू औरत शरीर न बेचे ,,कोई हिन्दू बच्चा बिना पढ़े न रहे और भीख न मांगे ,,कोई हिन्दू कन्या भ्रूण हत्या न करे ,,कोई हिन्दू मिलावट की दावा या अन्य चीजो से न मरे ,कोई हिन्दू दावा बिना न मरे ,,,, ये सब कभी भी तथकथित हिंदुवादियो के कार्यक्रम में कभी नहीं रहा । इस बारे में इनमे से कोई नहीं बोला ।
क्या ये हिन्दू नहीं है ???????????????????????????????????????????????????????????????????????????????///////??                                                                                                                                                                अच्छा दोस्तों क्या शरीर बेचने से भी बुरा कोई काम है दुनिया में ? क्या फुटपाथ पर बच्चे पैदा करने और छोटे छोटे बच्चो के चौराहों पर भीख मांगने से भी बुरा कुछ हो सकता है ??
क्या ये हिन्दू नहीं है ??
हैं---------- ????????--------------------------------------
तो अपने प्रचार पर हजारो करोड़ खर्च करने वाले ,,, दंगे पर बड़ा पैसा खर्च करने वाले ,,और खुद को हिन्दुओ का ठेकेदार कहने वालो के मुह से कभी आप ने सुना की वो कुछ दिनों तक अफवाह पर और दंगे पर पैसा नहीं खर्च करेंगे बल्कि उस पैसे से और जमाखोरी ,,, मिलावाटखोरी ,,और मुनाफाखोरी से कमाए पैसे से ऐसी व्यवस्था करेंगे की अब कोई हिन्दू औरत शरीर नहीं बेचेगी ,,,,अब कोई हिन्दू बच्चा भीख नहीं मांगेगा ,,, अब कोई औरत फुटपाथ बच्चा नहीं पैदा करेगी ॥।
अगर कभी किसी ने सुना हो तो जरूर बताना ।
एक बार एक जगह बहुमत की सरकार आई दंगे करवाने और करोडो की संपत्ति नष्ट करवाने के बाद ,लोगो को मरवाने के बाद तो एक सविधान की शपथ लेकर उसे तोडा ,एक बेजान सी इमारत तोड़ी तो दुनिया के तमाम देशो में न जाने कितनी इमारते तुड़वा दिया जहा वो इक्का दुक्का थी ,देश का दिल तोड़ दिया और दुनिया की निगाह में हमारा सभ्य होने का गुरूर तोड़ दिया ।

दूसरी जगह बनी तो एक बडे  समाज से हत्याओ का खेल सत्ता द्वारा खेला गया , सत्ता प्रमुख अट्टहास लगता रहा और मौतों पर अफ़सोस के बजाय मुस्कराता रहा । एक बड़ा समाज मुस्कराना और स्वतंत्रता से जीना ही भूल गया ।

अल्पमत की एक सरकार बनी तो दुश्मन घर में घुस आया सरकार सोती रही और गरीब घर से आये हुए सैनिको ने जान देकर कारगिल नाम का घर बचाया । एक बड़े आतंकवादी को कंधार पहुँचाने गए देश के बड़े मंत्री और वो भी फ़ौज के जहाज में उनका मनोबल तोड़ने को और खाली हाथ नहीं गए सैकड़ो करोड़ रुपये लेकर गए उन्हें देने को ताकि वो देश में उस पैसो से आतंकवाद फैला सकें [ वकौल जसवंत सिंह उनके रक्षामंत्री जो कंधार गए थे ]

दुशमन संसद में घुस गया और उन्हें पता ही नहीं था सोते रहे ,फिर गरीब या किसान के बेटे जवानों ने अपनी जान देकर देश की इज्जत ,सत्ता ,और सार्वभौमिकता के प्रतीक की रक्षा किया ।

ढेर सारे होटल और सरकारी क्षेत्र की कम्पनियाँ औने पौने में बेच खाया ।

जो सैनिक शहीद हुए थे उनके कफन और ताबूत में भी पैसा खा गए ।

उनके रक्षामंत्री के घर में घूस की डील करते हुए देश ने देखा ।

उनके रास्ट्रीय अध्यक्ष को देश ने घूस खाते हुए टी वी पर पकड़ा ।

इनके लोग सवाल पूछने में घूस खाते पाए गए ।
 
और क्या बचा रह गया करने को ??

कही अगर बहुमत आ गया तो क्या होगा ,शायद भोली भाली जनता को कल्पना भी नहीं है ।

इसके लिए बहुत कुछ बताना होगा देश को और काली टोपी के रहस्य से लेकर हिटलर के कारनामो तक की कहानी बतानी होगी ।

बहुत से लोग जिनके नाम में ज्यादातर आर और आई लगा होता है ,उन्होंने मुझे बड़ा ज्ञान दिया की जब मैं एक्स पार्टी या एक्स नेता के खिलाफ बोलता हूँ तो घोर हिन्दू विरोधी कार्य करता हूँ । क्या वास्तव में मैं हिन्दू विरोधी हूँ ?? या वे हिन्दू विरोधी है जो हिन्दुओ को नकली सामान यहाँ तक की दवाइयां भी बेचते है ,मैं हिन्दू विरोधी हूँ या जो जमाखोरी ,कर रहे है ,हिन्दू किसानो को भी लूट रहे है और मुनाफाखोरी कर सभी हिन्दुओ को भी लूट रहे है । मैं हिन्दू विरोधी हूँ या जिन्होंने फ़ौज के सिपाहियों के ताबूत और कफ़न में भी दलाली खाई वे हिन्दू विरोधी है । मैं हिन्दू विरोधी हूँ या जो खुद अपने समाज की बेटी के बाप से शादी में सौदेबाजी करते है वे हिन्दू विरोधी भी है और समाज विरोधी भी । मैं हिन्दू विरोधी हूँ या जो गर्भ में ही हिन्दू बेटियों की हत्या कर आगे के लिए समाज का रास्ता रोक रहे है वे हिन्दू विरोधी है ??????
जिस तरह मैं जब किसी फासीवादी पार्टी के खिलाफ या किसी फासीवादी व्यक्ति के खिलाफ लिखते या बोलते ही हिन्दू विरोधी हो जाता हूँ वैसे ही दोस्तों मेरा साथ नहीं देने वाले या विरोध करने वाले हिंदुस्तान विरोधी है और हिंदुस्तान विरोधी होने के कारण हिन्दू विरोधी भी है ,हिंदुस्तानियत विरोधी भी है और इंसानियत विरोधी भी है । जो आर मेरा विरोध करते है ,वे समाज विरोधी है और जो दोस्त बन कर गलियां देते है वे संस्कार विरोधी है या उनके परिवारों में गलिया देकर ही बात करने का प्रचलन है  क्या कर सकता हूँ ।
कृपा होगी की आप सभी खुद अन्फ्रेंड हो जाये क्योकि मैं जिससे दोस्ती करता हूँ उसे ठुकराता नहीं ।

रविवार, 15 सितंबर 2013

मेरे वाल पर कुछ लोगो ने पता नहीं कहा के और किसके भाषण का जिक्र किया है । मैंने तो आज कोई भाषण नहीं दिया और अपने मुख्यमंत्री के मानवतावादी दौरे को देखा और मानव के प्रति उनके समर्पण के वक्तव्य को सुना । इसके अलावा भी आज कुछ हुआ है क्या ???
मेरी समझ में नहीं आता की कुछ खास विचारधारा के लोग मेरी पोस्ट में घुस कर अपने घर की लड़ाई और रावण और कंस क्यों ढूँढ़ते है ?? मैंने तो कही किसी पार्टी और व्यक्ति का नाम नहीं लिखा ।
मैं कुछ अपने बारे में भी लिखता हूँ तो वे गुर्राने लगते है ।
अब क्या करूँ फेसबुक छोड़ दूँ या सोचना और लिखना बंद कर दूँ । अपने देश और समाज की चिंता करना बंद कर दूँ या आने वाली पीढ़ियों के प्रति इन्ही लोगो की तरह अपना दायित्व भूल जाऊं ??

कुछ लोग जब देश की आजादी के लिए लड़ रहे है थे तो कुछ ऐसे भी थे जो या तो घरो में बैठे थे या फिर स्वतंत्रता सेनानियों के खिलाफ अंग्रेजो से मिले हुए थे । उन्ही के अनुयायी ये सब कर रहे है ।
दोस्तों जरा याद करो की आप में से कुछ लोगो ने मुझे कितनी गलियां दिया था जब मैंने अन्ना के आन्दोलन के पीछे लग रहे पैसे और संगठन की बात किया था । आप लोगो ने मेरी बात स्वीकार करने के बजाय गलियां दिया । आज देख लीजिये जर्नल वी के सिंह ,और रामदेव यादव किसके साथ हैं ?? बाकी की असलियत भी सामने आ जाएगी ।
मंगल ग्रह और चाँद तो बहुत दूर है कोई आसपास ऐसा टापू नहीं है जहा २० /  २५ करोड़ लोग बसाये जा सके ?? शायद ऐसा समय कभी आ जाये । आसपास के देशो के जो दोस्त है प्लीस इतनी मदद तो कर दीजियेगा की चार पांच साल के लिए अगर जरूरत हुयी अपने देश में शरण दिलवा दीजियेगा । फिर हम जैसे लोग वापस अपने देश चले जायेंगे । फासीवाद जब जहा भी आता है तो पहले जिनके खिलाफ नफ़रत फैला कर आता है उनका कत्लेआम करता है ,फिर साहित्यकारों ,पत्रकारों ,कवियों और उन तमाम लोगो का करता है जो अपने विचार रखते है और बोलने को हिम्मत दिखाते है ।
ऐसे लोगो से लड़ने के लिए मरने के बजाय ज़िंदा रह कर काम करना पड़ता है । वैसे फासीवाद खुद अपनी मौत मरता है और उसके हथियार बने लोग उसे ख़ुदकुशी करने को मजबूर कर देते है ।
कांग्रेसियो सावधान आपके महत्मा गाँधी और सरदार पटेल को कोई चुरा रहा है । वैसे उन लोगो को आप लोग अपना मानते भी हो या कही फालतू सामान के स्टोर में डाल कर भूल गए । तो जान लो ये फालतू सामान नहीं है बल्कि अग्नि ५ से भी ज्यादा ताकतवर हथियार है । आप को मिटा देने को काफी है । हो सके तो बचा लो वर्ना हम तो उनकी रक्षा करने की कोशिश करेंगे ही । कुछ समझे या नहीं ??????
दोस्तों क्या ख्याल है ? मैं फेंक नहीं रहा हूँ --                                                                                                                                                                       मैं जब केवल १० / १२ साल का था ,बहुत गरीब घर में पैदा हुआ था इसलिए फीस देने के लिए मेरे पिता के पास पैसे नहीं थे । लेकिन जब पूरे जिले में केवल कुछ सौ अखबार आते थे तो एक मेरे घर में भी आता था । मैं बहुत ज्ञानी था और मुझे पता था की चीन से युद्ध हो रहा है । सेनाये जा रही थे पर अपने पिता से छुप कर मैं फौजियों का स्वागत करने गया था । डर था की पिता मारेंगे ।तभी से फौजियों से मेरा रिश्ता है ।

शनिवार, 14 सितंबर 2013

मैं तो बहुत हतप्रभ हूँ और आश्चर्यचकित भी की लोग कितने बेशर्म,खुदगर्ज ,अहसानफरामोश हो गए है की आपका  किया हुआ सब भूल कर आप के खिलाफ हर तरह का हर वक्त षड़यंत्र करते रहते है ,आप को ख़त्म करने और अपमानित करने का प्रयास करते है और सफल नहीं हो पाते है तो फिर बेशर्मी और ढिठाई के साथ आप के सामने आ खड़े भी होते है । इतने भोले बन कर बात करते है की आप कुछ कह भी नहीं पाते है और सह भी नहीं पाते है । किस मिटटी के बने है ये लोग और कैसा खून है इनका ,कैसा जमीर है इन लोगो का । समझ नहीं आता की ऐसो से क्या व्यवहार किया जाये ।

शुक्रवार, 13 सितंबर 2013

आज दो फैसले हुए ---एक में सन्देश की अब बहन ,बेटी के साथ जोर जबरदस्ती किया तो जान से जाओगे ।
दूसरे में बताया गया ----विरोध करोगे या विरोधी विचार रखोगे तो जान से जाओगे और बहुत लोग जाओगे ।
आ गया हिटलर उसी लोकतान्त्रिक तरीके से बिलकुल वैसे ही दबे पाँव मैदान में आ गया अपना वही करीब ७० साल पुराने एजेंडे के साथ ।
एक का स्वागत और दूसरे से दहशत ।

सोमवार, 9 सितंबर 2013

बहुत से घर के चिराग बुझ गए और नहीं जलेगा चूल्हा पता नहीं कब तक
                                   
                                                   तो

कुछ कोठिया हैं जहा पकवान बन रहे होंगे ख़ुशी के और जाम टकरा रहे होंगे

उन्हें पकवान में कुछ लोगो की पथराई हुयी आखो की उदासी नहीं दिखती होगी

और जाम में पता नहीं जाम ही दिखता है या इंसानों का लहू भी दिखता है

क्या ये लोग सचमुच ऊपर वाले के पैदा किये हुए इंसान ही हैं ? मुझे तो शक है

          अगर ये इंसान है ------- तो फिर ------ शैतान क्या होता है   ?


मेरी आत्मा ,मेरा वजूद ,मेरी शिक्षा ,मेरे शिव ,मेरे राम ,मेरे कृष्ण जवाब चाहते है
मन दुखी है इसलिए कुछ नहीं कहूँगा कुछ दिनों तक ।बस इसके सिवाय ---

ईश्वर अपनो के दुश्मनों को सद्बुद्धि दे या उन सभी को वापस बुला ले ।

रविवार, 8 सितंबर 2013

किसी को बुरा लगे तो क्षमा चाहता हूँ   --------------------------                                                                                                                                                                                                                                          दोस्तों बचपन में एक गाना सुना था।  याद नहीं आ रहे है उसके बोल ---------                                                             
आजकल याद करता हूँ तो लगता है कुछ ऐसा होना चाहिए ------

जिन्दाबाद -जिन्दाबाद -- दलाआआल जिन्दाबाद ;;; छिनाआआल  जिन्दाबाद।

आगे की पंक्तियां याद नही आ रही है ; किसी को याद हो तो पूरा कर दे ।

कोई विशेष कारण नहीं है आज --- बस यूँ ही लिख दिया ।
मन बहुत दुखी है । ऐसा लगता है हमने अपनों को खो दिया है ।
पता नहीं लोग शराफत की भाषा क्यों नहीं समझते है ।
पता नहीं कुछ लोग विकास को हथियार बनाने के स्थान पर दंगो और नफ़रत को क्यों हथियार बनाते है ।
किसी महान आदमी ने कहा था -------------------------------------

१--- आसपास सब मीठा बोलने और केवल हाँ में हाँ मिलाने वाले बैठे है या मित्रवत शत्रुओ  ने आप को घेर रखा है तो आप की बरबादी होना निश्चित है ।

२----प्रशासक , डाक्टर, वकील ,सलाहकार ,सेनापति और सैनिक,चालक इत्यादि -परिवार ,जाति ,धर्म ,शक्ल और पसंदगी  ,नापसंदगी देख कर नहीं बल्कि योग्यता देख कर चयनित किये जाते है । वर्ना ईश्वर ही आप की रक्षा कर सकता है ।

३ ----जैसे शिक्षा देने के लिए खुद अपने बच्चे को भी कई बार अपना मन रोता है फिर भी कड़ी सजा दी जाती है ताकि उसका भविष्य ख़राब न हो ,वैसे ही राजकाज में भी कड़े फैसले और कड़ी सजा देना जरूरी होता है ताकि बाकि पूरा समाज या देश शांति और सुख से जीवन व्यतीत करे ।

और भी बहुत कुछ अगर मैं खुद सीखना चाहूँ ।
दंगे फैलाने वाले तो देशद्रोही है ही लेकिन अफवाहें उड़ाने वाले ,फर्जी फोटो और फर्जी वीडियो शेयर करने वाले भी देश के, समाज के और मानवता के बहुत बड़े दुश्मन है । दुर्भाग्य है की एक संगठन अपने को रास्ट्रवादी कहता है पर सारे काम घृणा के और रास्त्रद्रोह के करता है । देख लीजिये उन लोगो के करनामे यहाँ भी ,वे लोग शांति के लिए कुछ लिखने और प्रयास करने के स्थान पर नफ़रत बाँट रहे है ।
क्या फेसबुक में ऐसा कोई सिस्टम नहीं है ये ऐसे लोग अपने आप ही ब्लोक हो जाया करें ।

शनिवार, 7 सितंबर 2013

दंगे करने और करवाने वालो की कोई जाती और धर्म नहीं होता । ऐसे लोगो का क्या इलाज है मैं जानता हूँ । मुख्यमंत्री जी की शराफत को ये लोग उनकी कमजोरी न समझे । उससे बड़ी बात ये है की ९९. ९९९९९९९ % लोग दंगे ,नफ़रत , और बद अमनी के खिलाफ है तो वे मिल कर इन लोगो के इरादों को नाकाम क्यों नहीं करते है ? दोस्तों दंगो में इन गुंडों और समाजविरोधी लोगो का कुछ नहीं बिगड़ता है । सब कुछ हमारा, आप का बरबाद होता है । इसलिए आइये संकल्प करे और उसके लिए पुरुसार्थ भी करे ,उठ खड़े हो की कोई दंगा नहीं होने देंगे । जय हिन्द ।
मैंने आज किसी से लाल किले के तस्वीर बनवाया और दीवार पर उसे लगा कर उसके सामने खड़े होकर भाषण दिया । सचमुच बहुत मज़ा आया । प्रधानमत्री बनने की दिशा में एक मजबूत कदम तो मानेंगे न आप लोग । जय हिन्द ।

शुक्रवार, 6 सितंबर 2013

अच्छा दोस्तों जो लोग माँ की कोख को लजाते हुए नहीं लजाते है क्या वो माँ की कोख से ही पैदा होते है ? कही ऐसा तो नहीं की कही और से प्रकट हुए हो ?
मैंने कई प्रदेश के कई शहरों में बहुत लोगो से पूछा तो सभी लोगो ने मुझे प्रधानमंत्री के लिए सबसे ज्यादा उपयुक्त बताया । अब मैं परेशांन हूँ की क्या करूँ । इस २६ जनवरी को देश के प्रधानमंत्री से भाषण प्रतियोगिता कर लूं क्या ? और एलान कर दूं की देश केवल दो जगह ध्यान देगा । एक दिल्ली और एक आगरा में मेरी तरफ । कहने में क्या जाता है ।
आज का सवाल रास्त्रवाद क्या है ? क्या इसमें और देशभक्ति में कोई अंतर है ?
क्या उन लोगो को ईश्वर ने ही बनाया है जो खुद को ईश्वर मान बैठे है और ईश्वर की तरह ही व्यवहार कर रहे है ?
-१- अच्छा सज्जन जी मैं किसी को बताऊंगा नहीं पर अब तो सच सच कान में बतादो की दिल्ली में सिक्खों को मारने का प्लान कहां और किसने बनाया था ??? सच मैं नहीं बताऊंगा किसी को ।


-२- मोदी जी आप भी अब तो बोल ही दो क्या क्या हथकंडे अजमाए थे लोगो को मरवाने के लिए ? और चुनाव में बहुत जगह डर मारे लोग वोट नहीं डालते है तो आप कैसे मैनेज करते हो उनका वोट डालना ? आप की बात भी किसी को नहीं बताऊंगा । कसम से ।


- ३- बहन जी बता तो दो की हजारो करोड़ कहा रखा है ,, रखवाली करनी हो तो ।
देखूं अपने आगरा के लिए जो चाहता हूँ कब तक कर पता हूँ----------------------------------------------------------मैं जहा पैदा हुआ था वहा की मिटटी का कर्ज चुकाने की कोशिश में गाँव तक जाने वाली सड़क बनवा दिया है ,जिस स्कूल में पढ़ा था वहा तक और बाकि गाँव की सड़क बनने वाली है । १९६५ के बाद चकबंदी नहीं होने के कारण मुख्य मार्ग से गाँव तक प्रस्तावित नयी चौड़ी सड़क नहीं बन पाई और मेरे जैसे साधारण आदमी के खेत भी छोटे बड़े ९५ टुकड़ो में बचे है इसलिए चकबंदी का आदेश करवा दिया है और अब शिवपाल जी की सख्ती से शायद जल्दी हो जाएगी तो सारे खेत एक जगह आ जायेंगे ,अच्छा लगेगा । बिजली तो १९७९ में ही मेरे घर में एक मांगलिक कार्यक्रम के कारण विशेष रूप से आ गयी थी । अब गाँव और उससे जुड़े अन्य बिरादरी के टोलों के लिए पानी की टंकियां लगवाना शेष रह गया है ।
 मुझे ये प्रेरणा मेरे फुफेरे भाई और पूर्व पुलिस महानिदेशक विभूति नारायण राय के कार्यो से मिली, जिन्होंने ऐसा काम किया है जो बड़े बड़े राजनेताओ ने नहीं किया है । मैं तो उनके मुकाबले ५ % भी नहीं कर पाया हूँ । उन्होंने तो गजब कर दिया है की आसपास के गाँव के सभी बच्चे कम्पूटर साक्षर हो गए है ,, नाटक करने दूर दूर तक जाते है ,नाट्य अकादमी में चयनित होते है ,,तरह तरह की आधुनिक खेती की शिक्षा से लेकर इतनी बड़ी लाइब्रेरी जिससे आस पास के इलाके के रोज इतने लोग किताबे ले जाते है जितने आगरा विश्वविद्यालय में भी नहीं लेते है । शोध करने वाले छात्र वहां कई दिनों तक रुक कर पढ़ते है तो बड़े बड़े साहित्यकार भी । राज्यपाल से लेकर तमाम बड़े लोग वहां जाते रहते है । शायद वो देश के आई ए एस आई पी एस सहित सभी नौकरियों में एकमात्र है जिन्होंने अपने गाँव के लिए और आसपास के इलाके के लिए इतना काम भी किया है और बड़े पैमाने पर लोगो को या तो नौकरी दिया या नौकरी योग्य बनाया है । इन पांच सालो में महत्मा गाँधी अंतररास्ट्रीय हिंदी विश्व विद्यालय वर्धा को भी जो ऊँचाइयाँ उन्होंने दिया है उसकी कल्पना नहीं की जा सकती है । देखते है वह से मुक्त होने के बाद सरकार उनसे और कोई काम लेती है या फिर गाँव का अभियान ही और गति पकड़ता है ।
अगर सभी लोग जो जनप्रतिनिधि है ,अधिकारी है ,व्यापारी है या कुछ भी प्रभावशाली है सभी केवल अपने गाँव और मुहल्लों तथा आसपास के लिए अपना इमानदार योगदान देने लगे तो देश में बहुत कुछ बदल सकता है पर ९९.९९ % लोग केवल अपने लिए जी रहे है ।
अब जहा मेरे जीवन करीब ५० साल बीता है उसके लिए भी लगा हूँ की कोई बड़ी लकीर खींच सकूँ पर मैं तो केवल प्रयास कर सकता हूँ ,फैसला तो सरकार और तंत्र को करना है । यूँ तो जब जनेश्वर मिश्र जी देश के संचार मंत्री बने थे तो पहला इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम आगरा के लिए मैंने ही स्वीकृत करवाया था । जब वो रेल मंत्री बने तो रेलों के स्टॉप तय करवाए । नेता जी की १०८९ की सरकार में आर बी एस कालेज को १० लाख रूपया दिलवाया तो देवी लाल जी और नेताजी से प्रेस क्लब के लिए भी दान दिलवाया और प्रेस क्लब के लिए मेरे योगदान को उस वक्त उसके लिए प्रयास कर रहे वो ४ / ५ लोग तो जानते ही है । करीब १५०० हैण्डपंप लगवाये १९९३ की सरकार में ।
पर ये सब कुछ नहीं है । अब मैंने जो दो प्रस्ताव दिए है और जिनके लिए प्रयास कर रहा हूँ  -१- जमुना नदी की ताजमहल के पुर्व में एक किलोमीटर से लेकर कैलास तक डिसिल्टिंग करवाना जिससे जमुना नहीं करीब ८ फुट गहरी हो जाएगी और एक स्वाभाविक झील बन जाएगी तथा उससे वाटर लेबल भी बढेगा शहर का तथा पानी क्वालिटी भी । --२-- मैंने प्रस्ताव दिया है की अगर टूंडला मार्ग -- अगरा फतेहाबाद मार्ग -- आगरा से नए बनने वाले आगरा लखनऊ मार्ग और टूंडला स्टेशन की रेलवे लाइन के बीच के हिस्से को विशेष आर्थिक परिक्षेत्र ,नए इंस्टीट्युशनल एरिया ,नए शहर और कार्यालयों और नये बाजार के रूप में विकसित किया जाये । इसमें इनर रिंग रोड भी आ जायेगा , नॉएडा का एक्सप्रेसवे भी इसी से जुडा होगा तथा टूंडला का रेलवे स्टेशन भी इसका हिस्सा होगा । अगर ये योजना लागू होती है और प्रदूषण रहित उद्योग लगते है तमाम सॉफ्टवेयर कम्पनियाँ यहाँ आ जाती है तो सीधे सीधे करीब तीन लाख लोगो को रोजगार मिलेगा । वैसे निर्माण इत्यादि तथा अन्य सेवाओ को जोड़ लें तो १० से १५ लाख को रोजगार मिलेगा ,पूरा आगरा ही नहीं बल्कि आसपास के कई जिले बदलेंगे । जब ये विकास होगा तो टूरिस्म भी बढेगा , हवाई जहाज की यात्रायें भी बढ़ेगी तो हवाई अड्डा बनाना भी मजबूरी बन जायेगा और अन्य बहुत सा काम करना भी ।
माननीय मुख्यमंत्री जी सिद्धांततः इससे सहमत हुए थे पर इस पर फैसला लेने के लिए जिन लोगो की एक बैठक होना आवश्यक है जिसमे अपना ब्लूप्रिंट रखने के लिए मैं भी रहूँ वो अभी तक नहीं हो पाई है । जिस दिन ये बैठक हो जाएगी मैं मानता हूँ की आगरा के बदलाव की नीव रख जाएगी मुख्यमंत्री अखिलेश यादव जी द्वारा । बस इस बैठक में नया नेता न हो क्योकि वो अपने अपने इलाके के मामले में उलझा कर इसे होने नहीं देंगे जैसा बजाज स्कूटर कारखाने के मामले में हुआ ,जिस आगरा के बेराज के मामले में हुआ हाँ बाकी आगरा के विकास में सचमुच रूचि रखने वाले जरूर योगदान दे ।
मैंने ये सब इसलिए लिख दिया की आगरा के सचमुच जागरूक और चिंतित लोग इस योजना के लिए दबाव समूह का काम करे ,उससे मझे मदद मिलेगी । इश्वर मुझे अपनी इस योजना को लागू करने की ताकत दे क्योकि मैं एम् पी ,एम् एल ए ,अधिकारी नहीं हूँ बस इस साधारण सा आगरा का नागरिक हूँ । आप सभी का सहयोग और दुवाएं चाहिए । जय हिन्द ।

गुरुवार, 5 सितंबर 2013

उत्तर प्रदेश के बाद आंध्र प्रदेश,आँध्रप्रदेश के बाद कर्नाटक और कर्नाटक के बाद झारखण्ड में भी झंडा गाड आये मुख्यमंत्री अखिलेश यादव । आगे आगे देखिये होता है क्या ।
१५ अगस्त को जो प्रधानमंत्री को भाषण प्रतियोगिता की चुनौती देकर देश को चुनौती भी दे रहे थे और दुनिया के सामने शर्मिंदा भी कर रहे थे । व्याकुल होकर प्रधानमंत्री की कुर्सी की तरफ लपक रहे है लगातार;; आज कह रहे है की प्रधानमंत्री बनने के बारे नहीं सोचना चाहिए । उन्होंने कहा काम के बारे में सोचना चाहिए । सच है उनके काम को दुनिया ने देखा है और अब बंजारा ने भी बताया है । देश समझ रहा है । जय हिन्द । 

बुधवार, 4 सितंबर 2013

बंजारा जी कही बहुत ज्यादा लोग आसाकाम को भी भगवान मानते थे ,पर आसाकाम का हश्र देखा आप ने । जब तक पोल नहीं खुली थी भी भगवान होने का भ्रम पाल बैठे थे । लोगो के सामने सच्चाई आई तो परिणाम देख ही रहे है आप । फिर अब इन्तजार किस बात की ??
बंजारा जी अगर अब आप को अपने पापो पर अफ़सोस हो और फासीवादी को भगवान मानने के अभिशाप से मुक्त हो गए हो तो जेल से निकल कर पूरे देश को सारी सच्चाइयां बताइए और देश को फासीवाद के चंगुल में जाने से बचाइए । आपने जिस अशोक की लाट की शपथ लिया था उसकी मर्यादा बचाइए और मन से सलूट करते हुए बोलिए ; जय हिन्द ।

मंगलवार, 3 सितंबर 2013

                             आ गयी इनकी भी आ गयी; असली कहानी और चरित्र जानिए                                                                                                                                                                               देश के नए व्याकुल भारत यानी मोदी जी के हर गुनाह के राजदार बंजारा जी  पूर्व पुलिस महानिदेशक गुजरात  , जिनसे अपना काम निकाल कर [ लोगो को मरवाना और आतंकित करवाना ] ने आज देश  भर को बता दिया की मोदी तो काम निकाल कर कूड़ेदान में डाल कर भूल जाते है । कोई अपने और अपने अन्य साथियों के मोदी जी पर कर्ज की बात भी उन्होंने कहते हुए आई पी एस की नौकरी से ही इस्तीफ़ा दे दिया ।
क्या उनकी बातें देश की और उनके लिए काम करने वाले अन्य लोगो की ऑंखें खोलेंगी ?? पता नहीं । देखते है ,ईश्वर  ऐसे लोगो से देश को और लोगो को भी बचाए ।
बंजारा ने क्रन्तिकारी शाह जी का भी पूरा ब्यौरा दिया है जो उत्तर प्रदेश को चुनौती देने आये है की उत्तर प्रदेश में है कोई जो उनका और उनके बॉस का मुकाबला कर सके ।
उन्हें चरखा दाव के बारे में अभी तक नहीं पता है न । बहुत जल्दी पता चल जायेगा ।
वैसे दोस्तों मेरा काम ही गली खाना है ,१- हल्ला बोल के खिलाफ बोला - गाली खायी ;; २-- दलाल के खिलाफ बोल गाली खायी ;; ३ -- दिल्ली में क्रांति कर रहे छोकरो [ झाड़ू वाले ] के खिलाफ बोल गाली खाया ;; एक फौजी ड्राईवर के भविष्य के बारे में कहा -गाली खाया ;; ४ -- अब मोदी वाले गलिया  दे रहे है । ------------------------
पर दोस्तों हर बार मेरी बात सही निकली है ---- ये भी ध्यान रखियेगा और बाद में पछ्ताइयेगा और फिर हमसे मुह भी छुपाइयेगा । आप सभी को मेरी शुभकामनायें । जय हिन्द ।

सोमवार, 2 सितंबर 2013

समाज परिवर्तन ,रास्त्र परिवर्तन और युग परिवर्तन के रास्ते में बहुत सी घटनाएं अपना योगदान देती है । क्या आसाकाम का सांस्कृतिक कार्यक्रम भी ऐसी ही एक घटना साबित होगा ? और ये भगवान के बिचौलियों से समाज को मुक्ति मिलेगी ?

रविवार, 1 सितंबर 2013

अभी अभी एक अखबार में पढ़ा की राजनाथ सिंह जी चेहरे पढ़ने का ज्ञान पा गए है । और लोगो ने भी अख़बार का समाचार पढ़ लिया होगा तो उनके घर के बाहर लाइन लग जाएगी कल से । वैसे अगर ऐसा है तो राजनाथ सिंह जी मेरे कुछ सवाल है कि चीन के राष्ट्रपति का चेहरा पढ़ कर बताइए की वो कब कब क्या करने वाले है ? पकिस्तान के सेनाध्यक्ष और प्रधानमंत्री का चेहरा क्या बताता है की अब वो क्या करने वाले है ? बंगला देश की सेना क्या करने वाली है ? अमरीका का राष्ट्रपति कहा कहा और कब कब हमला करने वाला है ?
प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह के मन में क्या है ? वित्त मंत्री क्या करने वाले है ? राहुल गाँधी कब बोलेंगे ? वरुण गाँधी अगला जहरीला वाक्य कब बोलेंगे ? नरेन्द्र मोदी आप के बारे में क्या सोच रहे है और शीशा देख कर बताइए की नरेन्द्र मोदी के लिए आप का क्या गेमप्लान है ? सुषमा स्वराज आप और मोदी के बारे में क्या सोच रही है ? अडवानी जी क्या सोच रहे है ? संघ के लोगो का चेहरा देख कर बताइए की अब दंगे की क्या साजिश है और कब कब कहा से कैसे शुरू होगा ? भटकल को देख बताइए की उसके साथी कौन् कौन है और क्या क्या करने वाले है ? 
अच्छा सेठो का चेहरा पढ़ कर बताइए की कहा कहा जमाखोरी की है ? मिलावटखोर कहा कहा क्या के मिलावट कर रहे है ? बिचौलिए किस किस चीज में कितना कितना मुनाफा कम रहे है ? किस किस अधिकारी और नेता का कितना कितना पैसा कहा रखा है ?चेहरा पढ़िए उनका जो महगाई बढा रहे है और रूपया घटा रहे है । उनका भी जो देश का बेडा गर्क कर रहे है ।
आदरणीय राजनाथ सिंह जी अगर चेहरा ही पढना है तो उस बलात्कार पीड़ित लड़की का पढ़िए और बताइए उस पर क्या बीत रही है और उस जैसी सभी बेटियों का पढ़िए । चेहरा पढना है तो गुजरात में मारे  गए लोगो के परिवारों का पढ़िए की उन पर क्या बीती है । चेहरा पढना है तो उन सभी परिवारों का पढ़िए जिन्होंने अपने बच्चे या सुहाग या राखी खोयी है आतंकवाद में या देश की सीमा पर । चेहरा पढना है तो उन औरतो का पढ़िए जो शरीर बेचने को मजबूर है । चेहरा पढना है तो उन किसानो का पढ़िए जो आत्महत्या करने की सोच रहे है और उन्हें बचाने की सोचिये । चेहरा पढना है तो उन सभी बच्चों का पढ़िए जो सुबह सुबह निकल पड़ते है चौराहों चौराहों पर भीख मांगने के लिए । चेहरा पढना है तो उन सभी का पढ़िए जो फुटपाथ पर रहने और वही बच्चे पैदा करने को मजबूर है । चेहरा पढ़िए उन सभी का जो कई कई दिनों तक भूखे सो जाते है । चेहरा पढ़ना है उस अजन्मी बच्ची का पढ़िए जो पैदा होने से पहले ही मार दी जाती है और गुजरात में माँ का पेट चीर कर तलवार पर उछाली गयी थी ।
राजनाथ सिंह जी अपने चेहरा पढ़ने के हुनर का इस्तेमाल कर किसी को अपराध से बरी करने का अपराध तो मत करिए । जिसे दुनिया ने देखा है और जो आज भी लोगो के पास मौजूद है वीडिओ के रूप में उसे मत झुठ्लाइये । कर्नल जाफरी की मौत को दुर्घटना मत बताइए । सभी जातियों और धर्मो के लोगो की मौत का मजाक मत उड़ाइए । चौराहों पर जलाये लोगो को कार एक्सीडेंट मत बताइए । प्लीस राजनाथ सिंह जी अपने चेहरा पढ़ने के हुनर का इस्तेमाल इस देश के लिए ,समाज के लिए ,मानवता के लिए ,इंसानियत के लिए और  अछाइयो के लिए करिए ।  देश के विनाश का रास्ता बनाने के लिए नहीं ,देश को फासीवाद में झोंकने के लिए नहीं ,ये भारत है जर्मनी नहीं है इसलिए यहाँ कोई हिटलर पैदा करने के लिए नहीं । हाँ चेहरा पढ़िए भारत माँ को जिसे हिंदुस्तान भी कहते है और जिसके लिए सभी जाती ,सभी समाज और सभी धर्म के लोगो ने कुर्बानियां भी दिया और आगे बढाने में पूरा योगदान भी दिया वो माँ का चेहरा मैं पढ़ रहा हूँ और वो बहुत दुखी है और उसका चेहरा कह रहा है की मुझे बांटो मत ,मुझे काटो मत । पहले काट़ा था तो बहुत दर्द हुआ था और घाव आज तक नहीं भरा । अब फिर बाँटोगे और काटोगे तो मैं बहुत रोउंगी और फिर बचूंगी ही नहीं ।
मैं समझता हूँ राजनाथ सिंह जी आप का देश प्रेम ,इंसानियत प्रेम जाग गया होगा और अब आप चेहरा पढ़ कर किसी अपराधी को बरी  करने की भीख नहीं मांगेंगे । जय हिन्द ।

एक बहुत दुखद समाचार है --- देश भर आसाकाम को भगवान मान कर उससे मिलने वाले परिवारों में शक की दीवारें खड़ी हो गयी है और झगड़े शुरू हो गए है ।
आज दो बाते पता लगी --१--उत्तर प्रदेश की बीजेपी सचमुच नेताविहीन हो गयी है और गुजरात ने तय किया है की उत्तर प्रदेश में बीजेपी के सभी नेता नालायक है इसलिए अभी उन्होंने एक दंगे और हत्याओ के अनुभवी जिसपर केस भी है उसे भेजा है उत्तर प्रदेश बीजेपी को हांकने के लिए । सुपर बॉस तो बाद में प्रकट होंगे अपने सारे हथियार और फ़ौज लेकर ।
--२--- गुजरात से आये अनुभवी शाह ने आज खुद बता दिया की उनकी गुजरात में जीत का राज क्या है जब उन्होंने खुद ये बयांन दिया की अधिकारियो और कर्मचारियों को डरा कर चुनाव जीता जा सकता है । उत्तर प्रदेश में ऐसा नहीं होता गुजराती बाबू  ,बल्कि यहाँ की महान जनता खुद फैसला करती है जिसने आप लोगो को बनवास दे दिया है अनंतकाल के लिए । अब सब समझ में आ गया और उत्तर प्रदेश की जनता उनके इस वक्तव्य को याद रखेगी ।
मान गया राजनाथ सिंह जी ,आप का गेम अच्छा है और सही चल रहा है । पढ़ा था की ललकार कर और सामने से मारने के स्थान पर मिलकर मारना ज्यादा आसान होता है । बहुत से लोग दूसरी रणनीति का इस्तेमाल करते है । नहीं नहीं मैं आप को कुछ नहीं कह रहा हूँ ।