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बुधवार, 13 अप्रैल 2011

जय हिंद कहिये और भ्रस्टाचार से लड़िये

ऐसा लगता है कि पूरा मुल्क जुल्म से ,मिलावटखोरी से ,काला बाजारी से ,भ्रस्टाचार से घूसखोरी से ऊबने लगा है |यहाँ तक कि जो और जिसके परिवार के लोग खुद इन कामो में लिप्त है ,वे भी इनके खिलाफ बात करते है पता नहीं गंभीरता से या केवल बात करने के लिए | पर मजेदार ये है कि जो एक सामान बाजार से गायब कर मुनाफा कमाता है उसे और उसके परिवार को दूसरा सामान पाने में दिक्कत होती है पर वह अपने को चालाक समझता है |किसी एक चीज में मिलावट करने वाला समझता है कि वो चालाक है और उसने अपने इस्तेमाल का सामान तो अलग कर लिया बाकी जहर खाकर मरे तो उसकी बला से | पर वो नहीं जनता कि उसने अपने लिए एक सामान शुद्ध निकाल लिया है ,पर उसी कि तरह अपने को चालाक समझने वालो ने बाकी सभी चीजो में मिलावट कर उसे जहरीला बना दिया है | सभी मिलावट खोर जहर खा रहे है और खिला रहे है पूरे मुल्क को केवल इसलिए कि वो कई गाड़ियाँ  रख सके ,एक बाथरूम जाने को, एक टहलने जाने को, एक ऑफिस जाने को और कुछ दिखाने को |वो बहुत बड़ी कोठी या बंगला बनवा सके या हर शहर में बनवा सके ,कि वे एक कमरे में जूते ,एक में चप्पल ,एक में कपडे और इसी तरह पता नहीं क्या क्या रख  सके |वर्ना खाना तो रोटी सब्जी दाल या मीट  मुर्गा ही होता है और इतना महंगा नहीं होता कि इतने पैसे कि जरूरत पड़े |कपडे भी आदमी कुछ ही पहनता है |
पर सभी एक दूसरे को या तो जहर खिला रहे है या  सामान बाजार से  गायब कर मुनाफा कमा रहे है |जबकि उत्पादन करने वाले किसान ने तो पसीना बहा कर खूब उत्पादन किया और पाया केवल मजदूरी फिर केवल इन तिजारत करने वालो को किसने हक़ दिया कि ये केवल शहर में किसान का पैदा सामान  लाने  के बदले सैकड़ो गुना मुनाफा कमाए ?अगर सामान यही भाव बिकना है तो वह मुनाफा किसान को क्यों नहीं मिले ?उसका खेत ,उसका बीज ,उसका पानी ,उसकी खाद ,उसकी रखवाली ,उसकी मेहनत ,उसका पसीना ,बाढ़ और सूखे में उसका नुकसान उसका  फिर ये मुनाफा इन बेईमानो का क्यों ?
लोगो को मिलावट कर जहर खिलने वाले तो उनसे भी ज्यादा देश द्रोही है जो कही  बम लगा देते है ,क्योकि उस बम से तो केवल कुछ लोग मरते है पर ये तो सारी मानवता को ,सभी नागरिको को ,पूरे देश को  धीमी मौत बाँट रहे है, हर वक्त ,हर दिन |क्या इन लोगो पर उन्ही धाराओं  में मुकदमा नहीं चलाना चाहिए जिनमे देश द्रोहियों पर चलता है?
इन्ही के साथ जो  हमारी  मेहनत की  हजारो करोड़ रूपये कि मुद्रा हर साल बेईमानो कि जेब में चली जा रही है ,यदि वो सचमुच अपने कामो में लग जाती तो एक बार बनी सड़क ,पुल या कोई भी चीज हर साल या साल में कई बार बनाने और ठीक  करने कि जरूरत नहीं पड़ती बल्कि उसी तरह जैसे हम अपना माकन या कोई चीज बनाते है तो वह जीवन भर चलता है केवल रंग रोगन करने के साथ, उसी तरह ये सभी सरकार द्वारा बनाई गयी  चीजे भी चलती और अब तक कोई गाँव और गली बिना सड़क ,बिना नाली ,बिना बिजली कि नहीं होती ,कोई गाँव बिना स्कूल का नहीं होता ,कोई पंचायत बिना चिकित्सालय के नहीं होती |कोई कारखाना बंद नहीं हुआ होता बल्कि तमाम नए बन गए होते और कोई बेरोजगार नहीं होता |अगर किसी व्यापारी का चन्द हजारो से शुरू कारोबार कुछ सालो में बहुत बड़ा और हजारो करोड़ का हो जाता है तो सरकार द्वारा शुरू  किये गए  सार्वजानिक उपक्रम  बढ़ने के स्थान पर बंद क्यों हो गए ?.जबकि उनका सञ्चालन उन लोगो द्वारा किया गया जिन्हें इस पृथ्वी पर भागवान के बाद सबसे योग्य और बुद्धिमान माना गया यानी आइ ए एस अफसर |क्या सचमुच ये योग्य होते है या अंग्रेजो द्वारा छोड़ी गयी एक  बुराई और उनकी निशानी आज भी देश को बर्बाद कर रही है और लूट रही है ?
अपने पड़ोस में रहने वाले किसी भी छोटी से छोटी हैसियत वाले सरकारी कर्मचारी को देखते रहिये उसकी पुरानी हैसियत और दिन दूनी रत चौगुनी बढ़ती हैसियत |किसी ठेकेदार को और उसकी हैसियत को देखते रहिये ,किसी इंजीनियर को देख लीजिये |किसी डॉ0 को देख लीजिये यहाँ तक कि आज के ६० % से अधिक शिक्षको को देख लीजिये जो जमीर औए शिक्षा दोनों बेचने को दिन रात बेचैन है |तब नेताओ को भी  देखिये जिनके पास खाने को नहीं था आज वे किसी घर वाले के मरने पर और परिवार कि किसी शादी पर करोडो खर्च कर रहे है ,टूटी साईकिल नहीं थी और अब गाडियों का बेडा चलता है ,झोपड़ी नहीं थी और अब महलों कि संख्या उन्हें भी याद नहीं है |
घूसखोरी तो हम सभी के रक्त का  हिस्सा बन गयी है ,मांगने वाला इस अधिकार से मांगता है कि उसकी तनख्वाह तो उसके पिता उसके लिए छोड़ गए थे और अब वह जो मांग रहा है यही उसका मेहनताना है और उसका अधिकार है |केवल गलत काम या गलत तरीके से काम में विश्वास करने वाले भी बेहिचक इस तरह घूस पेश करते है जैसे किसी प्यासे को पानी पिला रहे हो |बात लम्बी करना चाहे तो पूरी रामायण लिख कर भी बात पूरी नहीं होगी |वैसे मै बहुत साल पहले से मानता था कि इसका अंत आएगा और लोगो को इस देश द्रोह और समाज द्रोह कि सजा मिलेगी |आज एक मंत्री जेल में है एक सचिव सहित कई आई ए एस अफसर जेल  में है ,फ़ौज के लेफ्टिनेंट जनरल रैक के अफसर को पहली बार तीन साल कि सजा मिली है |नीरा यादव और अशोक चतुर्वेदी[ व्यापारी] को सजा हुई ,अभी जमानत मिल गयी  है |गाजियाबाद में जजों के खिलाफ मुकदमा चल रहा है पर अभी ठेकेदार ,इंजीनियर ,करोडो कमाने वाले और रोज देश को पीछे ले जाने वाले तथा हर समय जनता का शोषण करने वाले कर्मचारियों का नंबर अभी नहीं आया ,अभी दिन रात भ्रस्टाचार करने वाले और करवाने वाले मूल और सारी बुराइयों की जड़  प्राणी व्यापारियों का जेल जाने और सजा पाने का नंबर नहीं आया ,अभी मुनाफाखोरी और मिलावटखोरी करने वालो को फांसी या आजीवन सजा पाने का नंबर नहीं आया ,अभी शिक्षा ,सुरक्षा और स्वस्थ्य को हजम कर जाने वालो को पूरी सजा मिलने कि शुरुवात  नहीं हुई |कब होगा ये सब ?विश्वास तो है कि अब जल्दी ही होगा|
पर क्या हम सब भी कुछ कर सकते है, देश को बचाने के लिए अपनी लुटती हुई पूँजी को बचाने के लिए ,हर समय हर जगह लोगो को जुल्म से बचाने के लिए ,हर समय हर जगह लोगो को घूसखोरी से बचाने के लिए ?क्या हम सब सह कर तथा इस सब के खिलाफ आवाज नहीं उठा कर खुद भी इन सारी बुराइयों के लिए उतना ही जिम्मेदार नहीं है ?एक बार दिल पर हाथ रख कर पूछना जरूर चाहिए |शायद हम सभी शर्मिंदगी महसूस करे
          मै एक तरीका बताना चाहता हूँ जिससे कोई कानून नहीं टूटेगा ,कोई रास्ता नहीं रुकेगा और इन सब चीजो के खिलाफ ऐसा युद्ध शुरू हो जायेगा जिसमे कोई हिंसा नहीं होगी और धीरे धीरे सभी गाँधीवादी तरीके से लड़ना सीख जायेंगे |जिसके खिलाफ आप लड़ेंगे वो अगर दफ्तर छोड़ कर भाग जायेगा तो उस पर कार्यवाही होगी या तुरंत बिना घूस के काम करेगा |यह तरीका सभी जगह चलेगा सड़क से लेकर जो भी बन रहा है उस पर उसकी उम्र लिखी जाये और ख़राब होने पर उसे बनवाने वाले अधिकारी ,इंजीनयर और ठेकेदार को दुबारा अपने पैसे से बनवाना पड़े और कुछ सजा भी मिले ,बस होने लगेगा कमाल |सभी तरह के मामलों में ऐसे ही नियम  तय हो सकते  है |
       हम  क्या करे ?बस देश भक्ति का वही नारा जो नेताजी सुभास चन्द्र बोस ने लगाया था वही जोर से लगाना सीख जाइये |जय हिंद कहिये  और भ्रस्टाचार से लड़िये |  ये देश भक्ति का ज्वार सब काम अपने आप कर देगा |जब जहा कूछ भी गलत हो आप ये नारा लगाने लगिए ,कुछ और लोग इकट्ठे हो जायेंगे उन्हें बात और मकसद बताइए वे भी आप के साथ शामिल हो जायेंगे |चूं कि आप केवल देश का नारा लगा रहे है अतः आप के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता |कर के देखिये धीरे धीरे पूरे देश में जय हिंद का नारा गूजने लगेगा और आप जीतने लगेंगे और भ्रस्टाचार हारने लगेगा |बस बना लीजिये जय हिंद ग्रुप और प्रचार कर डालिए फिर देखिये इसका वही असर होगा जो नेताजी सुभास चन्द्र बोस के नारे से हुआ था |जय हिंद |