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गुरुवार, 11 अगस्त 2016

यदि वक्त हो तो पढ़िए ---

कृष्ण को फिर से आना ही होगा|                                                                                                                                                           आज कृष्ण को फिर से आना ही होगा| अब कब आयेंगे कृष्ण ?.वो कब मानेंगे की पाप का घड़ा भर गया ?कब मानेंगे की समाज व्यवस्था को गालियों  की संख्या सौ नही करोडो से ज्यादा हो चुकी है ?कब मानेंगे की एक द्रोपदी नही बल्कि रोज कही ना कही हजारो द्रोपदियों का चीरहरण हो रहा  है ?अब कब मानेंगे की चारो तरफ केवल पाँच  भाइयों का नही बल्कि करोडो  का अधिकार छीना जा रहा है ?केवल एक अभिमन्यू नही करोडो अभिमन्यू घेर कर धोखे से मारे जा रहे है |कब मानोगे कृष्ण की जमुना का पानी फिर जहरीला  हो गया है |तुम्हारे लोग उतने आजाद नही रहे की कही भी कुञ्ज गलियों में या उन खेतो और बागो में जब चाहे भ्रमण कर सके ,उन पेड़ो पर या उसके नीचे वैसे ही जा सके जैसें तुम्हारे साथ जाते थे  |तुम्हारी प्यारी नदी जिसके जहरीली हो जाने पर तुमने काली नाग का बध किया था ,वह और ज्यादा  जहरीली हो गयी है ,आदमी क्या पशु भी उसका पानी नही पी सकते है |तुम्हारा प्यारा दूध और मक्खन,उसमे भी लोग जहर मिलाने  लगे है |तुम तों सर्वज्ञ  हो तब तों निश्चित ही तुम्हे यह सब पता ही होगा |फिर भी संकट में घिरी द्रौपदी की तरह ही मै तुम्हे आवाज लगा रहा हूँ की अब तों आओ ना कृष्ण  |तुम सब जानते हो फिर भी आर्द्र स्वर पुकारेगा तों कुछ तों कहेगा ना ,कुछ तों शिकायत करेगा ना ,कुछ तों बताएगा ना और कुछ तों रूठेगा ना |कब आ रहे हो कृष्ण ?क्या तुम देख रहे हो उन लाखो लोगो को जो किसी भी उम्र के है ,पर तुम्हे बुलाने के लिए मीलो लम्बी परिक्रमा करते है ,कभी गोवर्धन की तों कभी वृन्दाबन और कभी बरसाने की |कुछ लोग तों पूरे ब्रज की परिक्रमा कर डालते है |ऐसे भी तों है लाखो जो तुम्हे बुलाने को जमीन पे लेटे लेटे ही पूरी परिक्रमा कर डालते है मीलो की |जो चलते है छाले तों उन सबके पैरो में भी पड़ते है ,पर कभी सोचा की वह छोटा सा बच्चा ,वह कमजोर या भारी  भरकम औरत या आदमी जो ठीक से चल भी नही पाते है ,जब जब वे लेटे लेटे ही पलटी मारते हुए तुम्हे बुलाने के लिए यह मीलो लम्बी परिक्रमा करते है तों उनका बदन कितना छिलता है और कितना दुखता है ?तुमने ही तों उस महाभारत के  मैदान में अपना विराट स्वरुप दिखया था और कही दूर आती हुई तुम्हारी आवाज ने कहा था की दुनिया में जो भी है  वह तुम हो या वह सब तुममे  ही समाहित है |सब तुम ही कर रहे हो |सब तुम ही हो तों जब इन सबके शरीर घायल होते है तों तुम भी तों घायल होते होगे |वह सारा दर्द तुम भी तों महसूस करते होगे फिर भी ???और कृष्ण  जब सब तुम्ही हो और तुम्ही करते हो तों तों यह बिलकुल अबोध बच्चो का अपहरण ,हत्या ?द्रौपदियो का केवल चीरहरण ही नही बल्कि बलात्कार ?ये सारी मिलावट ,जमाखोरी ,अन्याय ,जुल्म ,शोषण ,गैर बराबरी क्या यह सब तुम्ही करते हो ?नही तों तुम्हे अब  इन सब कृत्यों पर  क्रोध नही आता ?क्या तुम्हारा न्याय का संकल्प कुछ कमजोर हुआ है या तुमने उस युग में इतनी मेहनत कर दी की इस कलयुग में लम्बे विश्राम का फैसला कर रखा है |जरा एक बार देखो तों अपने ही विराट स्वरुप के इन हिस्सों को भी | अगर कही ऊपर रहते हो तों एक बार झांक कर देखो अगर नीचे रहते हो तों उठ कर देखो और अगर हर जगह रहते हो तों जाग कर देखो आँखें खोल कर देखो तुम्हारा भारत बिना तुम्हारे चाहे और रचे ही महाभारत में तब्दील हो चुका है |देखो हर घर  में महाभारत ,हर गाँव में महाभारत ,हर जाति  और धर्म में महाभारत |पहले एक महाभारत हुई था तों सब ख़त्म  हो गया था और युधिस्ठिर रोये थे की ऐसा राज्य लेकर क्या करूंगा ,तुम भी जरूर अन्दर अन्दर बहुत रोये होगे ,क्योकि चारो तरफ कटे फटे ,टुकड़े टुकड़े मरे और घायल तुम्ही तों पड़े थे |पर अब तुम्हारे भारत में चारो तरफ महाभारत हो रही है ,की चाहे कितने भी मर जाये पर राज हमारा हो ,चाहे कितने  भी मर जाये नकली दवाई  से लेकर तमाम तरह की चीजे खा  पी कर पर सारी दौलत हमारी हो |कितना बदल गया ना तुम्हारा भारत कृष्ण ?क्या तुम आओगे या आज के कंसो  ,आज के दुर्योधनो से तुम  भी डरने लगे हो ?कुछ तों बोलो कृष्ण !तुमने कहा था की मनुष्य केवल चोला बदलता रहता है और बदल कर फिर पृथ्वी पर जन्म लेता है |देखो जरा गौर से देखो कही तुम्हारी सबसे ज्यादा प्रिय राधा भी तों कही किसी रूप जन्म लेकर किसी मुसीबत में तों नही है ,कही उसके साथ कुछ बुरा तों नही हो रहा है |तुम्हारी जोगन मीरा ,तुम्हारा दोस्त जिसे उस युग में तुमने सब दे दिया था ,इस युग में किस हालत में है |देखो वह द्रोणाचार्य ,कृपाचार्य अपनी भूमिकाये बदल तों नही चुके |अर्जुन रक्षा के स्थान पर कुछ और तों नही कर रहे ?भीम की ताकत कही लोगो की मुसीबत तों नही बन गयी है ?उस युग में जूए में सब हर जाने वाले राजपाट और पत्नी तक वो युधिस्ठिर कही तुम्हारे भारत की पीठ में छुरा तों नही घोंप रहे है ?तुम्हे तों सब याद होगा कृष्ण क्योकि जब सब तुम्ही से आते है और सब तुम्ही में विलीन हो जाते है तों तुम तों हर समय सबको देखते ही रहते होगे कृष्ण ?कुछ तों बोलो कृष्ण ,एक बार फिर वही विराट स्वरुप  दिखाओ और बताओ की अब क्या होने वाला है ?ये सब जो हो रहा है ,इसका क्या मतलब है ?व्याख्या  तों करो कृष्ण !तुम्हारा गीता का उपदेश बहुत पुराना पड़ चुका है |वह अब भारत को दिशा नही दिखा पा रहा है कृष्ण |देखो सभी तुम्हारे तुमसे रूठ जायेंगे और तुम भी कैसे हो गए हो ?उस समय तों छोटी छोटी बातो पर प्रकट हो जाते थे कही भी ,किसी की भी मदद करने को किसी को भी उबारने  को |तों अब क्या हो गया है? कोई नाराजगी है तों वह बताओ ना !देखो सब अधीर है तुम्हारे लिए की तुम कब आओगे ,कब उबारोगे भारत को इन ना ख़त्म होने वाली महाभारतो से |तब तों एक दो मौको पर ही झूठ और छल का सहारा लिया गया था ,अब तों केवल झूठ और छल से ही सब हो रहा है |ऐसा लगता है कि तुम्हारे   बारे में  नई दृष्टि से देखने तथा नए ढंग  से सोचने की जरूरत  है . क्योकि  कृष्ण तुम्हारा  मतलब तों था की  वो जो सदैव दूसरो का था ,दूसरो के लिए था .जिसकी जन्म देने वाली माँ पीछे छूट गयी  और पालने वाली बाजी मार  ले गई  ,जिसके दोस्त की चर्चा कही बहुत ज्यादा हुई  और भाई पीछे छूट गया था ,जिसकी पत्नी या पत्नियों को उनकी दोस्त राधा  से बड़ी जलन हुई थी  और हो सकता है आज भी हो रही हो ,जो एक साथ सोलह हजार को अपना लेने की क्षमता  रखता था  ,जो सत्ता को चुनौती देने की क्षमता   रखता था  और जिसने उस युग में एक युद्ध छेड़ दिया था  की जो खा नही सकता उस भगवान को क्यों खिलाते हो ,शायद सूघ भी नही सकता ,इसलिए लाओ मै खा सकता  हूँ मुझे खिलाओ और उन सब को खिलाओ जिन्हें भूख लगती है .केवल चुनौती ही नही दिया था  वरन जब मुसीबत आई थी तों सभी की रक्षा में आगे आकर खड़ा हो गया था यह तुम्ही तों थे कृष्ण  | .मै सोचता हूँ की इन्द्र के प्रकोप से बचाने के लिए तुमने  कैसे अपनी छोटी सी उंगली पर इतना बड़ा पहाड़ उठाया होगा ,तुम्हारी  उंगली दुखी तों जरूर होगी और शायद आज भी दुख रही है कही इसोलिये तों नही तुम नही  आ रहे हो की उंगली पर पट्टी बांध कर बैठे हो  .लेकिन ऐसा लगता है की  उस पहाड़ के उठाने से ज्यादा तुम्हारे  नाम पर किये जा रहे पापो के बोझ से तुम्हारा  सर और पूरा शरीर दुख रहा है .कितना पैदल  चले थे तुम  कृष्ण ,नाप दिया पूरब से पश्छिम तक भारत को ओर दो छोरो को जोड़ दिया ,परिचय करा दिया इतने बड़े हिस्से का एक दूसरे से.कभी सोचता हूँ की यदि जूआ नही होता रहा होता तों क्या होता ,यदि द्रौपदी की साड़ी  भरी सभा में नही खींची गई होती तों क्या होता ,इतिहास कौन सी करवट लेता.भारत ,महाभारत होता या फिर भी भारत में तब भी  महाभारत होता ,सवाल बड़ा है जवाब आसान नही है .लेकिन कृष्ण तुम  आज मंदिरों में  फूल मालाओ ,भारी भारी  कपड़ो और बड़े बड़े मुकुटों के नीचे दब कर कराह रहे हो ऐसा लगता है कभी कभी | .कृष्ण तुम्हारा मतलब ही था  बड़े दिल वाला ,दूसरो को अपनाने वाला ,हर अन्याय से संघर्ष करने वाला आज अपने अस्तित्व के लिए कही तुम्ही  जूझ रहे हो कृष्ण |तुम्हे इस  संघर्ष से निकलना ही होगा और आकर फिर से कहना ही  होगा ;रे दुर्योधन मै जाता हूँ ,तुझको संकल्प सुनाता हूँ ,याचना नही अब रण होगा .जीवन जय या की मरण होगा ;तुम्ही बताओ की   कैसे तुम्हारी  दुखती उंगली का दर्द घटे ,कैसे तुम्हारे  सर और शरीर का बोझ हटे और सम्पूर्ण कलाओं का मालिक कृष्ण ,संघर्ष और न्याय का प्रतीक कृष्ण स्वतंत्र होकर फिर हमारे  सामने हो |विराट स्वरुप दिखाता हुआ ,आज के सन्दर्भ में गीता का ज्ञान देता  हुआ ,और इस सभी  तरह की महाभारतों से निकाल कर फिर से भारत को भारत बनता हुआ |अब तों आ रहे हो ना कृष्ण ,कृष्ण तुम आओ ना ,देखो सुनो मीरा कही अब भी गा रही है  और मीरा क्या उसके स्वर में स्वर मिला कर सब गा रहे है :मेरे तों गिरधर गोपाल दूजो ना कोय :