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सोमवार, 28 नवंबर 2011

देश का व्यापारी वर्ग मिलावट करना ,नकली सामान ,मसाले ,दूध ,दवाई बनता रहे और १०२ करोड़ लोगो को बीमार बनाता जाये और सबसे बड़ा देशद्रोह करे पर आप इसे स्वीकार करिए कुछ नहीं कहिये ,बस सहिये ,ये व्यापारी २ रुपये किलो का आलू किसान से लेकर ३० रूपये बेचे और इसी तरह सारी किसान की मेहनत ,खर्च ,रखवाली और बर्बादी का रिस्क लेकर जो भी पैदा करता है वह औने पौने में खरीद कर ये २०० /३०० गुना कीमत तक बेंचे ,ये इनका व्यापार है और व्यापार में सब जायज है स्वीकार करे क्योकि ये अपने है ,ये अपने कारखानों के उत्पादन को कई गुना मुनाफे के कीमत में बेचें आप इन्हें स्वीकार करिए ,ये व्यापार है इसलिए सब जायज है | हाँ इनकी मिलावट ,मुनाफाखोरी ,जमाखोरी ,नकली सामान का बनाना सब जायज है और समाज भक्ति तथा देश भक्ति है | ये थोड़े पैसे लगा कर कुछ ही दिनों में करोडपति ,अरबपति ,खरबपति हो जाते है और जितने बच्चे होते है उतने व्यापार तथा घर बना लेते है पर किसान के जितने बच्चे होते है उनके घर और खेत छोटे होते जाते है | ये कौन सी वयवस्था है | इन पर अंकुश लगाने का कोई कम नहीं होना चाहिए ?इनको मिलावट और नकली सामान बनाने पर देशद्रोह की धरा में इनका चालान नहीं होना चाहिए ? क्या ये तय नहीं होना चाहिए की किसी भी चीज पर अधिकतम कितना मुनाफा लिया जा सकता है और नहीं तो क्या ये मुनाफाखोरी लूट की श्रेणी में नहीं आनी चाहिए ? क्या इनके लिए प्रतियोगिता की व्यवस्था नहीं होनी चाहिए ? अब ये विचार देश के शासक भी करे ,जनता भी करे और हो सके तो ये व्यापारी भी करे !

गुरुवार, 17 नवंबर 2011

आप दुनिया में किसी भी संगठन या व्यक्ति के बारे में कुछ बी कह दीजिये ,लिख दीजिये ,गालियाँ दे दीजिये पेट भर कर ,सारे झूठी बातें कह दीजिये ,सारे तथ्यरहित यानि पूर्ण रूप से असत्य बाते कह दीजिये | कोई बात नहीं ये आप का अधिकार है और आप एक खास संगठन से सम्बंधित है तो ये आप का और आप के संगठन का पेटेंट है | पर गलती से बी जे पी या आर एस एस के बारे में या उसके किसी व्यक्ति के बारे में कुछ तथ्य और सच्चाई भी लिख दिया या कह दिया तो समझ लीजिये की बर्र्र के छत्ते में हाथ दाल दिया | समझ लीजिये की फिर आप का क्या होगा ? वैसे आप को याद होगा की ये सभी देश में कंप्यूटर आने के घोर विरोधी थे ,तथा इसे रास्त्रविरोधी काम मानते थे ,पर अब तो या तो इन्होने कोई अज्ञात विंग बना दिया है पूरे समय यही बैठने और झूठ का प्रचार करने और सत्य का प्रतिकार करने को या फिर सारे यही बैठे रहते है पता नहीं क्या करने को ? खोज का विषय है ,सुबह सुबह उठ कर किसी मैदान में पता नहीं क्या क्या करने वाले ही ये बता पाएंगे | मुझे भी गालियाँ सुने काफी दिन हो गया था | देखता हूँ इस बार कितनी गालियाँ मिलती है पहले से ज्यादा या --------------

शुक्रवार, 4 नवंबर 2011

महात्मा गाँधी की हत्या करने वालों से हाथ मिलाने वाले महात्मा गाँधी की समाधि पर क्या करने जाते है ? गाँधी जी की टोपी क्यों पहनते है ? जिन लोगो ने रास्ट्रीय दिवसों पर कभी भी तिरंगा झंडा नहीं फहराया बल्कि अपना झंडा फहराया उनके दिमागी गुलाम बन गए लोग रास्ट्रीय झंडा फहरा कर क्या दिखाना चाहते है ? क्यों ये महत्मा गाँधी को मुह चिढ़ा रहे है और क्यों झंडे का अपमान कर रहे है ? मै तो जानता हूँ पर देश जानना चाहता है | थोड़ी भी ईमानदारी है तो ये खुद ही बता दे | कौन है ये मै क्यों बताऊँ !

शनिवार, 29 अक्तूबर 2011

जब गीदड़ की मौत आती है तो वह शहर की तरफ भागता है .कहावत पुरानी है पर सन्दर्भ नया है .मै क्यों बताऊँ की किन लोगो के लिए कह रहा हूँ |

रविवार, 16 अक्तूबर 2011

                           ~  पूजीवाद नहीं, ग़रीबवाद भी वर्ना रोम जल रहा है |~   डॉ सी पी राय
                                      मैंने अपने प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री को मेल किया जिसमे उन्हें बताने की कोशिश किया की [१] देश की सारी मंहगाई अंतररास्ट्रीय कारणों से नहीं है और [२] १२० करोड़ से ज्यादा जनसँख्या वाला ये देश सेंसेक्स यानि कुछ लाख लोगों का कारोबार और ५० लाख या एक करोड़ लोगों को समृद्ध करने वाली नीतियों से नहीं चल सकता | कुछ तो है की आप के तथाकथित अर्थशास्त्री नहीं समझ पा रहे है या नहीं समझने का नाटक कर रहे है या सचमुच केवल तयशुदा फार्मूले जानते है और केवल किताबी ज्ञान तक सीमित है | तभी तो एक तरफ कुछ ही समय में कुछ लोगो के पास देश के बजट से ज्यादा टर्नओवर हो गया और अरबपतियों और करोड़पतियों की संख्या तो बढ़ गयी पर गरीबों की संख्या भी बढ़ गयी ,मंहगाई से परेशान लोगो की संख्या भी बढ़ गयी और आप के द्वारा अजमाए गए सारे दाव उलटे ही पड़ते जा रहे है | आज तक ये देश नहीं समझ पाया की ब्याज दर बढ़ा देने से मंहगाई कैसे कम होगी ?
                                                 मेरे प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री ने मेरी पूरी बातों को पता नहीं पढ़ा या नहीं या उनके अज्ञानी नौकरों ने कूड़ेदान में दाल दिया पर अभी मेरे मेल भेजे चन्द दिन भी नहीं हुए की अमरीका सहित उन तमाम यूरोपीय देशों में जिसके हम पिछलग्गू बनने में लगे हुए है आग लगने लगी ,वहा की सदैव शांत रहने वाली जनता अपनी सरकार के खिलाफ नहीं बल्कि बहुरास्ट्रीय व्यवस्था के भ्रस्ताचार ,वायदा कारोबार सहित वाल स्ट्रीट मतलब इस सेंसेक्स या यूँ कहे की कुछ बड़ों के लिए लागू होने वाली आर्थिक नीतियों के खिलाफ सड़क पर आ गयी | पता नहीं हमारी सरकार यह  देख और समझ रही है या नहीं | क्या हमारी सरकार यह समझ पायेगी की वहा की थोड़ी जनसंख्या सड़क पर आई है तो ये हाल है | अगर भारत के १० या २० करोड़ केवल सड़क पर आ गए तो क्या होगा ? जिन्हें इन नीतियों से आप अमीर बना रहे है उनका क्या होगा ? 
                                            अभी भी वक्त है जमीनी सच्चाई समझ लेने की और गरीब ,मजदूर ,किसान तथा सभी तरह के बेरोजगार को ध्यान में रख कर नीतियां बनाने की और उन्ही नीतियों में पूँजी के लिए भी आवश्यकतानुसार  जगह ढूढने की | ये तो निश्चित है की कोई देश अपनी बड़ी जनसंख्या को छोडकर कोई नीतियां बना कर सफलता की सीढियां नहीं चढ़ सकता ,कुछ कदम तो चल सकता है ,कुछ देर तक अपनी जनता को रंगीनियाँ दिखाकर भ्रम में रख सकता है ,लेकिन ज्यो ही खुमारी टूटती है ,नशा हिरन हो जाता है और वो देश यथार्थ के धरातल पर गिर पड़ता है | कुछ ऐसे ही और तेज दौड़ने वाले देशों के साथ हो रहा है और हमारे  देश के साथ होने वाला है | कभी होता है सभी के जीवन में की आसमान देखते देखते हम कब खाई के किनारे पहुँच जाते है ,गिरने ही वाले होते है या फिर भी नीचे नहीं देखा तो गिर भी पड़ते है गहरी खाई में | ऐसा देशों के साथ भी होता है | ये सच है की राजनीतिक लोग विशेषज्ञ नहीं होते पर यही तो राजनीती शास्त्र ने तय किया है की वे सचमुच जनता के प्रतिनिधि होंगे ,विशेषज्ञों से राय लेंगे और फिर अपनी बुद्धि और जमीनी हकीकत के ज्ञान से जनहित में निर्णय लेंगे | लगता है की  इस सिद्धांत में कोई छोर छूट गया है | वर्ना जब जनाधार वाले जमीनी नेता शीर्ष पद पर बैठे होते है तो न तो इतनी अफरा तफरी दिखाती है और न इतनी लाचारी | वो हर बात का कोई न कोई मजबूत हल निकाल ही लेते है |
                                                                      दुर्भाग्य से आज बात अंतररास्ट्रीय परिस्थितियों की हर वक्त होती रहती है पर खाने पीने की चीजें जो भारत के किसान ने भरपूर पैदा किया है और वो भारत में भरपूर मात्र में है तो उसपर दुनिया का असर कैसा | क्या ये बात कर हम आँखों पर पर्दा नहीं डाल रहे है ? पेट्रोल पर भी असर इसलिए है क्योकि हम देशभक्त नहीं है और अपराधिक स्तर तक पेट्रोल का दुरूपयोग करते है |कम से कम एवरेज देने वाली गाड़ियों में अकेले घूमते रहते है | यदि ऐसे इस्तेमाल का कोई नीयम बन जाये और वो नियम टूटने पर प्रतिदिन एक निश्चित राशी देनी पड़े सभी को, केवल ऐसी जिम्मेदारियों पर बैठे लोगो को छोड़ कर तो शायद पेट्रोल का उपयोग कम हो जायेगा और हम उसका रोना भी बंद कर देंगे | इसी तरह सोना अंतररास्ट्रीय मामला हो सकता है पर भारत में ही इतना गडा हुआ है की वो निकल आये तो देश कर्जमुक्त हो जाये ,ऐसा केवल कुछ मंदिरों के तहखाने खुलने और जिन लोगो पर आयकर का छापा पड़ जाता है उसी से पता चल जाता है |
                                                     जनता परेशान है रोजमर्रा की वस्तुओं की मंहगाई  से वो तो इस देश में संभव ही नहीं है एक निश्चित सीमा से ज्यादा जो समय के साथ होना चाहिए |देश परेशान है मिलावट से ,नकली दवा,नकली ढूध,और रोजमर्रा की तमाम जरूरी लेकिन नकली चीजों से | जब किसान ने खून पसीना बहा कर सभी चीजें पर्याप्त मात्रा में पैदा किया है और उसे कीमत भी बहुत कम मिली है तो फिर वो महँगी क्यों ? आगरा के खंदोली में पैदा होने वाला आलू किसान के घर से १ रूपया से ३ रूपया तक चलता है और केवल १० किलोमीटर आकर आगरा शहर में ३० रूपया किलो क्यों हो जाता है ? मै आज तक नही समझ पाया | केवल शहर तक लाने या स्टोक रख सकने के लिए व्यापारी कितना मुनाफा कमाएगा ?मेहनत किसान की ,खेत {पूँजी ] किसान की ,बीज किसान का ,खाद किसान का ,पानी किसान का ,यूरिया किसान का ,रखवाली किसान की ,अगर कोई रोग  लग जाये ,पाला पड़ जाये या किसी भी तरह फसल नष्ट  हो जाये तो रिस्क किसान का ,फिर इतने गुना मुनाफा बिचौलियों  का क्यों ? और उसके मुनाफे के लिए भारत की जनता ये मंहगाई क्यों झेले ?यही बात किसान द्वारा पैदा सभी चीजों पर लागू होती है | किसान ने तो सहज भाव से देश को भूखा नहीं रखने का वादा देश से किया था और उसने पूरा कर के दिखा दिया फिर देश में रोज करोडो लोग भूखे  क्यों सोते है या आधे पेट क्यों सोते है ?किसान खेत में खड़ा भरपूर पैदा कर देश को आत्मनिर्भर बना रहा है और उसका बेटा जवान बन कर सीमा पर खड़ा देश की रक्षा का व्रत निभा रहा है तो ये कौन लोग है जिनकी संपत्ति दिन दूनी रात चौगुनी बढ़ती जा रही है और ये ऐसा क्या काम करते है जो किसान और जवान नहीं करता है ? क्या ये जरूरी नहीं है की किसान और जवान को भी इनका गुर सरकार सिखा दे की वे भी अरबपति और कम से कम करोडपति हो जाये | इसी किसान की वोट से बनी सरकार और इन्ही जवानों के कारण सुरक्षा महसूस करने वाले सरकार में बैठे लोग इन्हें  कैसे भूल सकते है ? इनकी अनदेखी कैसे कर सकते है ? जनता को मंहगाई ,मिलावटखोरी,जमाखोरी और मुनाफाखोरी की आग में कैसे झोंक सकते है ? कैसे इस देश को जहर खाने  और सारी नकली चीजों को स्वीकार करने और मिलावट का खाना ,मिलावट की सब्जी ,मिलावट के मसाले ,नकली दूध और नकली दवा के भरोसे छोड़ सकते है ?क्या ये जरूरी नहीं की वो सामान चाहे किसान के द्वारा पैदा किया गया हो जिसका मूल्य सरकार उससे खरीदने के लिए तय करती है उसी तरह व्यापारी और उद्योगपति के द्वारा पैदा की गयी चीजों सहित सभी चीजों की अधिकतम कीमत तय करे ,यानि डॉ लोहिया द्वारा सुझाई गयी दाम बंधो नीति और मिलावट तथा नकली सामान का बनाना देशद्रोह की श्रेणी में आये | जैसे सिंगापूर में हथियार या ड्रुग रखने पर फांसी की सजा होती है |
                                                                   सरकार या तो आज नीचे झांक कर देख ले और फैसला कर ले या फिर बाद में पछताए और फिर गिर कर सुधरे पर सुधारना पड़ेगा जरूर ,बदलना पड़ेगा जरूर | नीतियां तो बदलनी पड़ेंगी और जनता के लिए बदलनी पड़ेंगी |पता नहीं ये लेख भी मेरे प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री पढेंगे या नहीं या उनके नौकर उन्हें पढ़ाएंगे या नहीं या  हमेशा की तरह सारी नीचे के आवाजें कूड़ेदान में ही दबा देंगे |
      
                                                                                                                       डॉ ० सी ० पी ० राय
                                                                                                स्वतंत्र  राजनैतिक चिन्तक और स्तम्भकार  
                                                                                                  
                                                                                                     
                                                                                



शुक्रवार, 14 अक्तूबर 2011

              खुद की प्रतिमा लगवाना और उस पर फूल चढ़ाना ,ये केवल मायावती जी ही कर सकती है |                                                                                                                                                                आज मायावती जी ने ७०० करोड़ रुपये के पार्क का लोकार्पण किया | ये पार्क उस मायावती जी ने बनवाया है जो राजनीति में गरीब लोगो ,दलितों के कन्धों पर चढ़ कर आगे बढ़ी है ,उन गरीबों के जिनके पास रोटी नहीं है ,मकान नहीं है ,जिनके घर की औरतें खुले में शौच करती है उनके घर में बाथरूम नहीं है ,जिनके गांवों और मुहल्लों में स्कूल नहीं है बीमारी में इलाज के लिए कोई साधन नहीं है | ७०० करोड़ नॉएडा का और हजारों करोड़ लखनऊ का और लाखों करोड़ पता नहीं कहा कहा का इन पैसों से से गरीबों के लिए ,दलित जातियों के लिए क्या क्या बन सकता था ? विचार करे तथा विचार रखे | उनके समर्थक कह देंगे की दिल्ली में कई स्मारक है पर वहा जाकर देखिये जीवन के लिए जरूरी हरियाली है केवल और बस नाम के लिए कुछ फुट का स्मारक बना दिया गया है |लेकिन दुनिया के बादशाहों को छोड़ दीजिये तो किसी जीवित व्यक्ति ने खुद की पतिमा तो कभी नहीं लगाया | खुद का स्मारक बनवाने की कोई जीवित व्यक्ति तो सोच भी नहीं सकता है और खुद अपनी प्रतिमा पर फूल चढाने का क्या अर्थ निकला जाये ? धन्य हो सलाहकार और उत्तर प्रदेश के महान अफसर | इन सबकी महानता को सलाम |

बुधवार, 12 अक्तूबर 2011

दोस्तों महान देशभक्त और आदरणीय अन्ना जी के सलाहकार प्रशांत भूषण जी ने एक बड़ा देश भक्ति का बयान दिया है की भारत को कश्मीर के अलगाववादियों की बात मन लेनी चाहिए और कश्मीर को अपने से अलग कर देना चाहिए | इतने महान कथन के बाद भी लाखों अन्ना भक्त घरों में बैठे है ,लानत है | तुरंत घरों से निकलिए सर पर टोपी रखिये ,हाथ में झंडा लीजिये ,उस पर प्रशांत जी की फोटो लगाइए और दिल्ली पहुच जाइये | प्रशांत जी को मालाओं से लाद कर इंडिया गेट पर बैठा दीजिये और लाखो की संख्या में वाही बैठ जाइये और तब तक बैठे रहिये जब तक प्रशांत भूषण को भारत रत्न से देश की सरकार अलंकृत नहीं कर देती है या इससे भी अच्छा तो ये हो की तब तक जमे रहिये अन्ना जी समेत जब तक प्रशांत भूषण को देश का प्रधानमंत्री न बना लें आप लोग | मेरी एडवांस में बधाई आप को आप मांग के लिए और प्रशांत भूषण को इस महान कार्य के लिए | अब पता चल गया कि ;भैंस यही बधेंगी; कि कहावत का क्या मतलब है?और आगे शायद कहा गया कि ; बछड़ा मेरे बाप का ; जय हिंद |

सोमवार, 3 अक्तूबर 2011

जब हम किसी के प्रति केवल नफरत की बात करते है ,किसी को घृणा से देखते है या किसी के प्रति अपशब्दों का प्रयोग करते है तो दो बातें स्वयं स्पस्ट कर रहे होते है [१] हमारी परवरिश कैसी है और परिवार का वातावरण कैसा है [२] हम स्वयं कैसे है ? हाँ सामाजिक मुद्दों या देश काल के मुद्दों या ऐसी किसी भी बात जिससे मानवता ,समाज या देश प्रभावित होता है उस पर संतुलित ,विवेचनापूर्ण और तार्किक ,गरिमापूर्ण बहस करना हमारा अधिकार है और कर्त्तव्य भी | यह भी याद रखना चाहिए की सबसे बड़ा देश और समाज [ समाज का मतलब जाती और तथाकथित धर्म के ढकोसले वाला समाज नहीं ],मानवता ,हमारा परिवार ,माता पिता और जो भी बड़े है और जुड़े है , उसके बाद कोई संगठन या दल ,और फिर व्यक्ति आता है | जय हिंद |

शुक्रवार, 30 सितंबर 2011

क्या आगरा की टूटी सड़कें ठीक हो पाएंगी कभी ? वैसे इन सडकों का एक फायदा भी है की गरीबों को अस्पताल नहीं पहुंचना पड़ता ,उसके पहले ही गरीब की पत्नी साईकिल पर हो या रिक्शे पर इन गड्ढों के असर से उसका बच्चा कही भी पैदा हो जाता है | मानना पड़ेगा की गरीबों के राज में एक काम तो उनके लिए हुआ ही है | क्या आगरा कभी साफ पानी पिएगा ? २९ लोग सप्लाई का पानी पीकर एक बार मर चुके है और उनके परिवारों को न्याय आज तक नहीं मिला | कांग्रेस सरकार में बैराज का शिलान्यास हुआ था ,आज २५ वर्ष बीत गए, नहीं बन सका | क्या आगरा को बिजली की किल्लत से छुट्टी मिलेगी ? कुछ व्यापारियों को पता नहीं कितने करोड़ लेकर व्यवस्था सौंप दी गयी ,बड़े बड़े वादे किये गए ,पर मिला क्या ? मोटा बिल ,उत्पीडन और बिजली का हाल वही ढाक के तीन पात | पहले से भी बुरी हालत है | कहा गए बड़े बड़े वादे करने वाले ? क्या आगरा को कोई कारखाने मिलेंगे ?आगरा के युवकों को रोजगार के अवसर मिलेंगे ? अंतररास्ट्रीय हवाई अड्डा मिलेगा ? अंतररास्ट्रीय स्टेडियम मिलेगा ? हाईकोर्ट मिलेगा ?कुछ ऐसे सरकारी दफ्तर मिलेंगे की भारत की राजधानी रहे इस अंतररास्ट्रीय शहर के साथ न्याय हो सके और आगरा सर उठा कर कह सके की मै आगरा हूँ और आगरा गूंगा नहीं है ,आगरा बोलता है | जय हिंद |

शनिवार, 17 सितंबर 2011

हम जागते रहेंगे तो दुश्मन भागते रहेंगे

आज आगरा में भी छोटा सा धमाका हो गया | सीधे तौर पर तो ये आतंकवादी हमला नहीं लगता पर छोटा धमाका कर कही धोखा तो नहीं दिया जा रहा है किसी बड़े हमले के लिए ? आगरा दुनिया के लिए एक अंतरास्ट्रीय शहर है और यहाँ किया कोई भी कांड कायरों को दुनिया में चर्चित कर देगा | सरे अपराधी अपनी चर्चा को बड़े गर्व से मसूस करते है और उसकी चर्चा भी करते है | आगरा की केवल पुलिस और अन्य संस्थाओं को ही नहीं बल्कि जनता को भी जागरूक रहना होगा क्योकि हर कदम पर हम होते है पुलिस नहीं | हम बता सकते है की कहा कोई अवांछनीय व्यक्ति रह रहा है | हम सूचित कर सकते है की कहा कोई संदिग्ध सामान पड़ा है ,हम सूचित कर सकते है की कहा कोई संदिग्ध गतिविधि हो रही है | आइये केवल सरकार और पुलिस की आलोचना करने के स्थान पर खुद सचमुच भारतीय नागरिक बन जाये | हम जागते रहेंगे तो दुश्मन भागते रहेंगे | हम आतंकवादियों और देश के दुश्मनों को किसी हालत में कामयाब नहीं होने देंगे | जय हिंद |
चीन की धमकियों और बार बार किये जाने वाले अतिक्रमण पर हम क्या करें ? अगर कुछ मजबूत फैसला करे तो क्या सभी देशवासी तैयार है ?क्या मीडिया देश को देश के लिए स्वतंत्र रूप से कुछ करने देगा ? क्या सत्ता लोलुप ताकतें इसमें राजनीती नही करेंगी ? क्या तथाकथित बुद्धिजीवी इसे आलोचना से बख्श देंगे ? क्या जनता देश के लिए किसी भी क़ुरबानी के लिए तैयार है ?

शुक्रवार, 16 सितंबर 2011

महात्मा गाँधी की हत्या करने वाले और फिर उनके विचारों की हत्या करने वाले उन्ही का हथियार इस्तेमाल करने जा रहे है ,यानी अनशन |जिनके घर में कमाने वाले को मार देने के कारण खाने का संकट हो गया या वो वीभत्स दृश्य याद कर कभी निवाला गले में ठीक से उतरा ही नहीं इतने वर्षों तक ,क्या ये अनशन उनके प्रियजन को वापस लौटा पायेगा ? क्या तीन दिन का पंच तारा उपवास उनके इतने दिनों की भूख को शांत कर पायेगा ? क्या सचमुच ये प्रायश्चित है या भावी राजनीती ? बापू पूछ रहे है | जय हिंद |

बुधवार, 14 सितंबर 2011

देश के सभी देशभक्त साथियों के चिंतित होने का समय है ,क्योकि दिवालिया होने के कगार पर खड़ा अमरीका भारत के अंदरूनी मामलों पर भी बोलने लगा है और भारतीय जनता के विचारों और अधिकारों को भी प्रभावित करने की कोशिश कर रहा है | पर भारत की जनता बहुत जागरूक है वह अपना फैसला खुद करती है और हमेशा उसका फैसला सही रहा है, आगे भी फैसला खुद ही करेगी | पर अफ़सोस है की कुछ लोग अमरीका से भारत के भाग्य का फैसला करवाना चाहते है और उसकी हरकत पर बहुत खुश है | ऐसे लोगो को सद्बुद्धि आये | जय हिंद |

मंगलवार, 13 सितंबर 2011

लालकृष्ण अडवाणी जी ने पहले रथयात्रा निकाली थी तो पूरे देश में तूफ़ान आ गया था ,हजारों लोग मरे ,करोड़ों की संपत्ति लुटी ,जली और नस्ट हुयी तथा बलात्कार की घटनाएँ भी सामने आई |ये अलग बात है की रथ बिहार के थाने में ही छूट गया और उसकी याद नहीं आई | खैर याद तो फिर राम जी की भी नहीं आई सत्ता पाते ही | इस बार क्या होगा ? राम जी ही जाने | पर देश वो सब दुबारा न देखे ये दुवा हम सभी को करना चाहिए |अडवानी जी भी इस देश पर कृपा रखे और जहर न उगलें इस बार | जय हिंद |

सोमवार, 12 सितंबर 2011

दोस्तों गुजरात के बारे में सर्वोच्च न्यायलय ने कार्यवाही चलाने के लिए निचली अदालत को भेज दिया है | भा०  ज० पा० कह रही है की मोदी जीत गए | क्या सचमुच मोदी जीत गए ? वैसे क्या सचमुच गुजरात की घटनाओं में मोदी का हाथ नहीं था ?तब अटल जी ने क्यों कहा था की मोदी ने राजधर्म नहीं निभाया ? कोई वर्णन करेगा की गुजरात में मोदी ने क्या ,क्या करवाया था जब दंगे हुए थे  ?

बुधवार, 7 सितंबर 2011

कब तक ,आखिर कब तक बम फटते रहेंगे ?

      कब तक ,आखिर कब तक बम फटते रहेंगे ? गोलियां चलती रहेंगी ? लोग बिना जाने की उसे किसने मारा और क्यों मारा ? मरते रहेंगे !बिना मुकाबला किये .बिना हिनुस्तानी दिलेरी दिखाए !बिना एक के बदले सौ दुश्मन को मारे ? आखिर कब तक पडोसी जमीन से हिंदुस्तान के लोगो का खून बहाया जाता रहेगा ? कब हम हमला कर सकेंगे आतंकवादी अड्डों पर और केवल आतंक की खेती करने वालों को ही नहीं बल्कि बाकि दुनिया को भी बता सकेंगे की अब और नहीं ,अब हम घुस घुस कर मारेंगे और आतंकवाद की खेती करने वालों को ख़त्म करने तक नहीं छोड़ेंगे | आखिर कब कोई इंदिरा गाँधी जैसा फैसला लेगा ?

शनिवार, 27 अगस्त 2011

दोस्तों मुझे मीडिया के अपने दोस्तों की बहुत चिंता हो रही है कल से फिर न्यूज़ ढूढ़नी पड़ेगी उसके लिए घूमना पड़ेगा | जाना पड़ेगा वहा जहा लाखो लोग बाढ़ में बेघर हो गए है,न रोटी है ना कपडा ना छत ,जाना पड़ेगा वहा जहा वो गरीब सिपाही शहीद हो गए ,जाना पड़ेगा वहा जहा १२ आतंकवादियों को मार कर कोई हमारा ही बेटा शहीद हो गया | पता नहीं क्या क्या जो पूरे देश में फैला है पूरे समाज में फैला है | पर ये अनशन ख़त्म होने से १० घंटे जरूर कहना चाहता हूँ की खैरनार साहब से जरूर पूछना चाहिए कि उनके अन्ना साहब के अनशन पर बताई गयी बात जिसमे उन्होंने कहा था कि देश को इसकी चिंता करने कि जरूरत नहीं है ,क्योकि वे जानते है कि इनका अनशन कैसा होता है ? यदि उन्हें कोई शक है तो अभी सुबह के १० बजे तक जाँच का समय है | देश की एक शंका ख़त्म हो जाएगी |
मै बाद में  लिखूंगा पर दोस्तों हुआ तो वाही जो संविधान कहता है और जो कई दिन पहले से मै भी कह रहा था और सरकार भी कह रही थी | बाकी बाद में------------------जय हिंद |

गुरुवार, 25 अगस्त 2011

  दोस्तों मै अक्सर गंभीर विषयों पर लिखता हूँ और बात करता हूँ तो उसमे किसी की कोई रूचि नहीं होती और समाज गंभीर विषयों के स्थान पर सिनेमाई और दुग्दुगी छाप बातों में ज्यादा रूचि लेता है | पर कोई हल्की बात लिख दीजिये  देखिये भाग लेने और चर्चा करने वालो की लाइन लग जाती है|मैंने जब रामदेव यादव के बारे लिखा तब भी बहुत लोगो ने भावनाओ में बह कर कुतर्क के साथ गलियां दिया और मुझे समाजद्रोही तथा देशद्रोही कहा | पर रामदेव की कुछ असलियत सामने आ गयी बाकी आ जाएगी | आज उन गाली देने वालो को अन्ना गिरोह से पूछना चाहिए की भ्रस्ताचार का सबसे बड़ा सूरमा उनके मंच पर क्यों नहीं है | पर उस वक्त मुझे गाली देने वाले और रामदेव के लड़ने वाले भी उन्हें भूल गए इतनी जल्दी |
अब मैंने  कहा की सभी लोग खुद भ्रस्ताचार ख़त्म करने की कसम खा ले तो देश से भ्रस्ताचार खत्म हो जायेगा और देश को संविधान के साथ रहना चाहिए,उसी के दायरे में इलाज ढूढ़ना चाहिए | मेरा मकसद सिर्फ ये है की कुछ ताकतें जो हिटलर को अपना आदर्श मानती है और अपने संगठन से किसी हिटलर को देश पर तानाशाह बना कर बैठना चाहती है पर अभी तक सफल नहीं हो पा रही है | देश उनकी साजिश से बचे | फिर कुछ तरह के लोगो ने मुझे गाली काफी गालियाँ दिया और जो भी कह सकते थे ,कहा और कह रहे है |
 दोस्तों खासतौर पर मुझे गाली देने वालो कुछ दिन बाद मै आप से पूछूंगा जैसे रामदेव के बारे में पूछ रहा हूँ और भ्रस्ताचार सम्बन्धी उन मुद्दों पर भी पूछूँगा जो मैंने उठायें है | जय हिंद |
 


मंगलवार, 23 अगस्त 2011

 दोस्तों ये दृश्य कई जगह देखने को मिल रहा है की थोड़ी देर पहले घूस ले रहे ,भ्रस्ताचार कर रहे,जमाखोरी,कालाबाजारी ,मुनाफाखोरी ,मिलावटखोरी और अन्य सारे बुरे काम कर लोग निकल कर अन्ना के और भ्रस्टाचार विरोधी नारे लगा रहे है,फोटो खिंचा रहे है और फिर जाकर वही करना शुरू कर दे रहे है | क्या करे ऐसे आन्दोलन का ? क्या इसी में घुस कर नारे लगायें ?
ईश्वर अन्ना साहब को स्वस्थ रखे ताकि कुछ लोग जो उन को लेकर घिनौनी राजनीती कर रहे है और जिन्हीने सीधे आदमी को मोहरा बना लिया  ,वे अपने कुत्सित इरादों में सफल न हो पाए | अन्ना साहब खुद लोगो को भ्रस्ताचार छोड़ते और उससे लड़ते देख सकें |जनता ,कर्मचारी ,व्यापारी ,अधिकारी ,नेता ,शिक्षक ,डॉo सहित सभी को |जय हिंद

सोमवार, 8 अगस्त 2011

क्या ये हो सकता है ?

दोस्तों १- यदि वायदा कारोबार आज रात से सरकार बंद कर दे तो सुबह होते ही सभी चीजों के दाम २०% से ४०% तक कम हो जायेंगे |२- यदि ये आदेश जारी हो जाये की किसान के खेत से जिस भाव आया है या जिस लागत पर कारखाने में बना है उससे कितना ज्यादा भाव पर बिक सकता है यानि हर सामान का दाम और मुनाफा निर्धारित होने का कड़ा कानून बनाना चाहिए |३ - सभी सामानों का रेट प्रकाशित होना चाहिए | ४ मुनाफाखोरी,जमाखोरी,कड़े दंड वाले अपराध होने चाहिए और मिलावटखोरी तथा नकली दावा या कोई सामान बनाना देशद्रोह की श्रेणी में आना चाहिए |५ - जिस भी किसी चीज का निर्माण हो सड़क ,पुल या कोई भी बिल्डिंग उसकी उम्र तय होनी चाहिए मानकों के अनुसार ,यदि उसके पहले ख़राब हो जाये तो बनाए वाला उस उम्र तक बनाने को जिम्मेदार हो तथा उसे और उस काम में शामिल अधिकारी हो ,अभियंता हो या कोई भी हो वे सभी दंड के भागीदार हो |६- सरकारी दफ्तरों की संख्या घटाई जाये | ७ - ऐसी व्यवस्थाएं बने की जनता को दफ्तरों में जाने की जरूरत न पड़े और यदि सरकारी शुल्क जमा करना हो तो आप स्वयं जमा कर रसीद रख ले यह पर्याप्त हो | ७- मकानों के नक़्शे सही है या नहीं इसके लिए आप का आर्किटेक्ट और आप जिम्मेदार हो |८-एक निश्चित समय पर बढ़ने वाली चीजो का समय १० से २० साल तक बढाया जाये तथा उसका शुल्क जमा कर आप रसीद रख लें यही पर्याप्त हो|९- हथियार का लाइसेंस या पासपोर्ट पाना आप का अधिकार हो | १०- जब सचमुच आप गलत पाए जाये तथा सिद्ध हो जाये तभी आप को किसी दफ्तर जाना हो या निश्चित दंड की धनराशी जमा कर आप सरकारी लोगो की शक्ल देखने और शोषण से बच जाये|यदि ऐसा हो जाये तो भारत की जनता कितनी सुखी हो जाये ?और सरकारी दफ्तरों तथा कर्मचारियों की फ़ौज भी घट जाये |११- जैसे लोग फ्लैट या छोटे घर में रहते है वैसे ही प्रधानमंत्री ,राट्रपति ,उप राष्ट्रपति इत्यादि को छोड़ कर बाकि सभी नेता हो या अधिकारी सबके पद के अनुसार एक ही परिसर में जिले से दिल्ली तक लोगो को फ्लैट और घर मिले | ऐसे बहुत से तरीके हो सकते है सुधार के ,सरलीकरण के ,जनतंत्रीकरण के |
क्या विचार है दोस्तों ?क्या कोई सुझाव आप अच्छा लगा और भी आप लोगो के विचार हो सकते है |विचार शुरू होता है तो कभी पूरा भी होता है |












रविवार, 7 अगस्त 2011

                                       जब अन्ना देश पर राज करेंगे                                                                                                                                                                                      अन्ना हजारे और उनके लोगो का कहना है की पूरा देश उनके साथ है | वे लोग जो भी आदेश देश को दे रहे है वो देश के १२० करोड़ लोगो की सहमति से दे रहे है | मै सोचता हूँ की इतने बड़े जन समर्थन के साथ यदि अन्ना देश का चुनाव लड़ ले तो सभी की जमानत जब्त हो जाएगी | पूरे ५४३ संसद अन्ना के होंगे ,सभी विधानसभाओं के सारे विधायक अन्ना के होंगे | सारी सरकारें ही नहीं बल्कि इन सब के वोट से राष्ट्रपति ,उप राष्ट्रपति सभी अन्ना के होंगे | फिर क्यों अनशन करना ? क्यों कभी लोकपाल ,कभी किसी और चीज का सवाल उठाना ? 
दिल्ली के रामलीला मैदान में बैठ कर पूरा संविधान बदल देगे अन्ना जी और अपनी और अपने साथियों की विद्वानता से नया संविधान ,नयी व्यवस्था ,सब कुछ बदल देंगे अन्ना | पूरा देश सभी बुराइयाँ छोड़ देगा अन्ना की आभा से प्रभावित होकर | कोई न घूस लेगा न देगा | आदर्श व्यवस्था कायम हो जाएगी देश में | किरण बेदी के नेतृत्व में पुलिस जन सेवक बन जाएगी | प्रशांत के कारण देश के सारे मुक़दमे ख़त्म हो जायेंगे अदालतों  की जरूरत ख़त्म हो जाएगी | जिस दिन अन्ना चुनाव जीतेंगे उसी दिन दुनिया के सभी देश जहाजों में भर भर कर सारा कला धन भारत भेज देंगे ,दिक्कत ये होगी की रखे कहा ? बड़े बड़े मैदानों में टेंट लगाने पड़ेंगे पर अगर खुले में भी छोड़ दिया जाये तो कोई उस दौलत को छूएगा भी नहीं | देश में भी जिसके पास भी एक भी रूपया कला धन होगा वो कही भी हो किसी के घर में या मंदिर में सब देश को समर्पित कर देंगे | कही कुछ भी बुरा नहीं होगा ,बस आदर्श ही आदर्श | 
अन्ना को छोटी छोटी लड़ाइयाँ छोड़ कर बस इस दिशा में कदम बढ़ा देना चाहिए १२० करोड़ लोग पूरी तरह अन्ना के साथ है | अन्ना को पूरे देश पर एक क्षत्र साम्राज्य के लिए और दुनिया की एक मात्र आदर्श व्यवस्था  बनाने के लिए अग्रिम बधाई | सचमुच हम और हमारी आने वाली पीढियां कितनी खुशनसीब है की आने वाले समय में अन्ना के नेतृत्व में हमारा देश चलेगा |
              


मंगलवार, 19 जुलाई 2011

आगरा बोलता है

मेरा शहर है आगरा | आगरा मेरा क्यों सारे प्रेम में विश्वास करने वालो शहर कहा जाता है ,चाहे आगरा वालो के दिल में कोई प्यार हो या नहीं हो | आगरा में है ताजमहल इससे आगरा का नाम अंतररास्ट्रीय क्षितिज पर भी जाना जाता है | पता नहीं ताजमहल बनवाना शाहजहाँ की कोई सनक थी या सचमुच मुमताज से उसका प्यार इतना गहरा था | कुछ लोग कहते है की यदि मुमताज से इतना प्यार था तो और कई पत्नियाँ क्यों थी ? मुमताज की मृत्यु के तुरंत बाद शाहजहाँ ने तुरंत उसकी छोटी बहन से निकाह क्यों कर लिया ?खैर ये सवाल ऐतिहासिक बहस के सवाल है ,इससे आगरा के लोगो को और ताजमहल को प्रेम का प्रतीक मान चुके लोगो को कुछ भी लेना देना नहीं है | उन्हें तो सिर्फ प्यार जताने का बहाना चाहिए वो सच्चा हो या बनावटी | पूरी दुनिया से जो भी भारत आता है, वो कोई आम आदमी हो या रास्त्रपति ,प्रधानमंत्री या राजा वो ताजमहल देखने जरूर आता है | ताजमहल का अभूतपूर्व सौन्दर्य और स्थापत्य कला देखने या प्रेम की प्रेरणा लेने | आगरा गौरव से सर उठा कर कहता है ताजमहल उसका है पर कही मन के अन्दर से एक टीस भी सर उठा कर उसे कचोटने लगाती है और वो सोचने लगता है की ताजमहल उसे दिया क्या ? ताजमहल उसे दिया ज्यादा है या छीना ज्यादा है |
आगरा में बहुत से उद्योग थे | यहाँ का ढलाई का कारोबार पूरे देश में ही नहीं पूरी दुनिया में अपना लोहा मनवा चूका था | लाखों के पास रोजगार था इस व्यवसाय के कारण पर ताजमहल की तथकथित तौर पर खूबसूरती बचने के लिए सारे कारखाने बंद कर दिए गए | अचानक एक झटके से आगरा बेरोजगार हो गया आगरा को चौबीस घंटे बिजली देने वाला बिजलीघर भी बंद हो गया  | बजाज स्कूटर का कारखाना लगाने वाला था पर नेताओं ने लगाने नहीं दिया | उषा पंखे का कारखाना भी तथकथित मजदूर आन्दोलन की भेंट चढ़ गया | वादा किया गया था की आगरा को इलेक्ट्रोनिक शहर बनाया जायेगा | अब यहाँ सोफ्टवेयर पार्क बनेगा ,एस इ जेड 
यानि स्पेशल इकनोमिक ज़ोन बनेगा | यदि ऐसा होता तो नॉएडा और गुडगाँव की तरह आज आगरा भी नौकरियों का शहर होता ,सचमुच अंतर रास्ट्रीय शहर बन बन गया होता | पर इस जिम्मेदारी को निभाने की जिन पर जिम्मेदारी थी वे सभी अपनी जिम्मेदारी से मुहं मोड़े रहे | इस शहर की पता नहीं सहनशीलता या तटस्थता का और केवल अपने मतलब में डूबे रहने का स्वाभाव ,जागते रहने का आभाव की जो भी सम्बंधित अफसर आये वे भी आये एक थैला लेकर और लौटे कई ट्रक भर कर और जिन नेताओं को जनता ने चुना उन सबकी गरीबी ही दूर नहीं हो गयी बल्कि पीढ़ियों का इंतजाम हो गया वो चाहे किसी भी दल को हो किसी भी विचारधारा के हो पर मेरा आगरा गरीब ही  रह गया | 
मेरा आगरा लगातार छला गया और लगातार छला जा रहा है | पर आगरा बहुत सहनशील है और इसकी सहनशीलता का कोई कितना भी इम्तहान ले ले आगरा अपना इम्तहान देता रहेगा ,आगरा अंगड़ाई नहीं लेगा | ये जाना बूझा सच है की जो अपनी लड़ाई अपने पूरे मन से लड़ता वही अपना हक़ हासिल करता है और जो लडेगा नहीं वो कुछ पायेगा नहीं ,इच्छित या अनिच्छित | जब तक राजा लड़ते थे और उनके लिए उनकी जनता भी लड़ती थी तब तक राजा जीतते थे राजा ही हारते थे | जब जनता ने लड़ाई अपने हाथ में ले लिया ,जहा भी अपने हाथ में ले लिया वहा जनता जीती यह दुनिया का इतिहास है | पर मेरा आगरा लड़ाई झगड़े में विश्वास नहीं करता ,हा थोडा बहुत करता है ,अफवाहों की लड़ाई में ,जातियों की लड़ाई में ,धर्म की लड़ाई में भी, कभी कभी सड़क पर छोटी बातो  की लड़ाई में | पर मेरा आगरा अन्दर बहुत दुखियो भी है .पर ये अपना दुःख दिखने में विश्वास नहीं करता है ना |
लोग यहाँ आते है ये सोच कर की एक अंतर रास्ट्रीय शहर में जा रहे है पर आकर देखते है गन्दगी ,विकास का आभाव ,गन्दा पानी ,गन्दी जमुना ,हर जगह दलाली करने वाले रोजगार के समुचित अवसर नहीं होने के कारण धोखा देने वाले ,एक का सामान सौ में बेचने की कोशिश करने वाले या नक़ली सामान बेचने वाले | पर सच मानिये मेरा आगरा सचमुच ऐसा नहीं करना चाहता मजबूरी में कर बैठता है | \
मेरा आगरा बोलता है तो खूब बोलता है ,कोई सुने या नहीं सुने, कोई बुरा मने या अच्छा पर ;भैये ,गुरु इत्यादि ऊंची आवाज में आप को हर जगह सुनने को मिल जाएगी | पानी नहीं देगा प्रशासन तो अपना जेट पम्प लगाव लेते है ,बिजली नहीं आती तो अपना जेनरेटर खरीद लेते है ,सुरक्षा के लिए कानूनी ना सही गैर कानूनी हथियार रख लेते है ,चौकीदार रख लेते है और दीवारे तथा दरवाजे बहुत ऊंचा बना लेते है | देखा है कोई इतना सहनशील शहर ?मेरे शहर की मिसाल तो पूरी दुनिया में नहीं मिलेगी |पर मेरा आगरा जब चीखेगा नहीं ,जब तक सड़क पर फैसलाकुन लड़ाई के लिए उतरेगा नहीं क्या उसे इसी तरह छला जाता रहेगा सभी द्वारा ?क्या मेरे आगरा को उसका दर्जा और उसका हक़ नहीं मिलेगा | आज नॉएडा और गुडगाँव करीब करीब स्लम बन गए है | आगरा से नॉएडा जोड़ने वाली सड़क किसी भी दिन चल पड़ेगी और जीतनी देर में लोग दिल्ली में एक जगह से दूसरी जगह पहुंचते है उतनी देर में आगरा पहुचेंगे | नया रेल ट्रैक तैयार हो रहा है दो घंटे से कम समय में लोग दिल्ली से आगरा पहुचेंगे | क्या ऐसा नहीं हो सकता की बिल्डरों को जमीन देने के स्थान पर प्राधिकरण पहले एस इ जेड को जमीन दे और बिना किसी बाधा के सारे विभाग कम कर दे तथा दुनिया के उन तमाम संस्थानों को सन्देश भेजे की आइये आगरा और स्थानों से ज्यादा सुविधा देने को तैयार है ,आइये कोई परेशान नहीं करेगा ,कोई घूस नहीं मागेगा ,कोई चौथ नहीं मागेगा ,कोई नेता आप के विकास और रोजगार के  कम में आड़े नहीं आयेगा |क्या ऐसा हो सकता है ? जब दूसरे प्रदेशो के अलग अलग दल के नेता आपसी विवाद भुला कर देश के प्रधानमंत्री और दूसरे मंत्रियों के पास जा सकते है अपने प्रदेश और क्षेत्र के विकास के लिए तो आगरा और आगरा परिक्षेत्र के नेता ,संपादक ,लेखक ,शिक्षक ,सामाजिक कार्यकर्त्ता और सभी क्षेत्रों के लोग मिल कर ये प्रयास क्यों नहीं कर सकते ? अपने स्वार्थ को पीछे रख कर ये सभी कुछ समय क्यों नहीं निकल सकता मेरे आगरा के सार्थक विकास के लिए | केवल अपना पेट तो सड़क का कुत्ता भी भर लेता है | कुछ तो फर्क होना चाहिए उसमे और हममे |
क्या आगरा उठ खड़ा होने को तैयार है | क्या आगरा साफ़ पानी कभी पिएगा ? क्या आगरा बेईमानी पूर्ण बिजली व्यवस्था से और इसकी आंख मिचौली से कभी मुक्ति पायेगा ?क्या आगरा अंतर रास्ट्रीय हवाई अड्डा पायेगा ? क्या आगरा में एस इ जेड स्थापित कर आगरा का नाम सचमुच अंतर रास्ट्रीय शहरों की तर्ज पर विकसित हो पायेगा ? क्या आगरा अधिकारीयों की केवल चापलूसी करने से ऊपर उठ कर उनसे वो काम करवा पायेगा जो उसका काम है ? क्या नेताओं के लिए केवल वोट डालने के स्थान पर सही चुनाव कर उनसे हिसाब मांग पायेगा ? क्या आगरा लड़ना सीख पायेगा अपने हकों के लिए अपने भविष्य के लिए अपनी आने वाली पीढ़ियों के भविष्य के लिए ? 
दोस्तों मेरे आगरा के बहुत से  सवाल है पर मेरा आगरा कब बोलेगा ?क्या सचमुच आगरा बोलता है और नहीं बोलता तो अब कब बोलेगा ? आइये मेरे आगरा को मिल कर जगाये ,इसे कुम्भकर्णी नीद से जगाएं और आगरा को महान आगरा बनाये | आगरा का नाम सचमुच अंतर रास्ट्रीय क्षितिज पर चमकाएं | आइये दोस्तों इस ब्लॉग को आगरा का ब्लॉग बनायें और आगरा के जो भी लोग जहा भी रहते है उनको इससे जोड़े | मै भी जोडूं आप सब भी जोड़े और जो जहा है ,जिस भी हैसियत में है उसे आगरा के लिए कुछ जो वो कर सकता है करने के लिए मनाएं | आइये आगरा के लिए चिंता करने वालो की एक फ़ौज बनाये और इसकी चिंता भी करे और चिंतन भी | खुद भी खड़े हो और लोगो को भी खड़े होने को मजबूर करे |
      आइये जोर से आवाज लगाइए और बोलिए की " आगरा बोलता है" 

गुरुवार, 30 जून 2011

                                       [ लोकतंत्र में पार्टी बड़ी या सरकार  ]               डॉ ० सी ० पी ० राय                                                                                              [स्वतंत्र राजनैतिक चिन्तक एवं स्तंभकार]                      भारतीय लोकतंत्र में तरह तरह की बहसें चल रही है | इस समय  एक बहस की बहुत जरूरत है कि लोकतंत्र में पार्टी बड़ी है या सरकार ? सरकार पर पार्टी का अंकुश होना चाहिए ,पार्टी को सरकार के लिए नकेल कि तरह काम करना चाहिए ? क्योकि चुनाव पार्टी लड़ती है और फिर अपने में से कुछ लोगो को सरकार चलाने कि जिम्मेदारी देती है | पर जवाब तो पार्टी को ही देना पड़ता है ,अगले चुनाव में जनता के सामने फिर पार्टी को ही जाना होता है | पार्टी लगातार जनता से जुडी होती है जबकि  सरकार अपने दायित्वों के कारण दूर हो जाती है | जनता का रुझान कब क्या है ये पार्टी ज्यादा जानती है जबकि अधिकारियों पर आश्रित सरकार उससे बहुत दूर होती है | या फिर सरकार का पिछलग्गू यानि धकेल संगठन केवल होना चाहिए पार्टी को | पार्टी को सरकार को निर्देश देने का हक़ है या सरकार को पार्टी को निर्देश देने का हक़ है |
                                         कुछ समाजवादी लेखको ने लिखा है कि पंडित जवाहर लाल नेहरू नहीं चाहते थे कि डॉ लोहिया जो उनके बहुत अच्छे दोस्त भी थे और आजादी कि लड़ाई वाली कांग्रेस में विदेश विभाग के प्रभारी भी थे ,जयप्रकाश नारायण जो आजादी से पहले बड़े समय तक कांग्रेस के महामन्त्री रहे थे और आचार्य नरेन्द्र देव जैसे चिन्तक और नेता आजादी के बाद बनने वाली सरकार से दूर रहे | नेहरू जी बहुत बड़े इन्सान और बड़े नेता थे ,वे बड़े दिल वाले व्यक्ति थे ,वे सभी को शामिल कर देश चलाना चाहते थे | पर बात बनी नहीं क्योकि डॉ लोहिया चाहते थे कि पंडित जी खुद प्रधानमंत्री नहीं बल्कि पार्टी के अध्यक्ष बने रहे  और लोकतंत्र की  मजबूती के लिए पार्टी को निर्देशित करे | इस स्थिति में लोहिया जी भी नेहरू जी के साथ सरकार में नहीं बल्कि पार्टी में काम करना चाहते थे | बात टूट गयी और दोनों के रस्ते अलग हो गए | पर लोहिया जी ने जो  बात कहा था वह बहस तो कभी चली ही नहीं | उस पर चर्चा हो ही नहीं पाई | 
                                            ये अलग बात है कि केरल कि सरकार को सोशलिस्ट पार्टी के संगठन के आदेश पर इसलिए जाना पड़ा क्योकि थानू पिल्लै कि सरकार ने जनता पर गोली चलवा दिया था | ये आजादी कि लड़ाई से निकले नेताओ के आदर्श थे कि अपनी ही सरकार और अपनी ही पुलिस जिस जनता के वोट से चुनी गयी और जिस जनता से तनख्वाह पाती है उनपर लाठी गोली न चलवाए | उसके बाद जब ज्योति बासु को तीसरी ताकतों ने प्रधानमंत्री चुन  दिया तब यह देखने को मिला कि पार्टी ने आदेश दे दिया तो ज्योति बासु जैसे बड़े नेता ने भारत के प्रधानमंत्री जैसा बड़ा पद छोड़ दिया | इसके आलावा शायद कोई मौका नहीं दीखता कि पार्टी सरकार के ऊपर दिखे | वर्त्तमान में जरूर पार्टी सत्ता से बड़ी दिखलाई पड़ती है तो राजनीति शास्त्र और लोकतंत्र के प्रति अज्ञानी लोग इसे लोकतंत्र का सच्चा स्वरुप नहीं बल्कि कठपुतली और न जाने क्या क्या विशेषण से नवाजते है | क्या ये उचित है कि सरकारों को पूजीपतियों कि जमात ,दलाल या कोई और ताकतें संचालित करे ? क्या ये उचित है कि कुछ संगठन जो अपने को केवल गैर सरकारी और सांस्कृतिक संगठन कहते है और जिन लोगो को जनता का विश्वास नहीं हासिल होता है वे सरकार को कठपुतली कि तरह नचायें ? ये बहस बहुत गंभीर है और इसे बुद्धि के उपयोग से और अध्ययन से चलाने कि जरूरत है |
                                                सरकार चलाने वाले अगर खुद मालिक हो जायेंगे या दोनों शक्तियां किसी एक आदमी में समाहित हो जाएँगी तो तानशाह बन जाने का डर ही नहीं बना रहेगा बल्कि ऐसा तमाम देश में हो चुका है | इसीलिए कई खम्भों पर खड़ा किया जाता है लोकतंत्र कि बुनियाद को | फिर भी देखा गया है कि ये खम्भे भी इतिहास में मुख्य शक्ति के तानाशाह बन जाने पर अपने कर्तव्यों पर खरे उतरने में नाकामयाब साबित हुए है | फ़ौज को भी इसीलिए टुकड़ो टुकड़ो में रखा जाता है कि उसका हथियार कभी देशवासियों कि तरफ न मुड़ जाये और उन्ही देशो में फ़ौज सिर्फ अपने कम तक सीमित रहती है  | लेकिन जहा सरकार पर पार्टी के वर्चस्व कि व्यवस्था होती है वहा सरकार का तानाशाह बनना मुश्किल होता है और जनता के प्रति जवाबदेह और हर वक्त जनता से जुडी पार्टी उसे उन रास्तो पर चलने को मजबूर करती रहती है जो जनता को पसंद है या जो जनता के लिए जरूरी वो करने को मजबूर करती रहती है सरकार को | उचित तो यह भी होता है लोकतंत्र में कि जब भी सरकार कोई जन विरोधी कार्य करती नजर आये तो चाहे उसी पार्टी कि सरकार क्यों न हो पार्टी सरकार के खिलाफ जनता के साथ खड़ी नजर आये चाहे आन्दोलन ही क्यों न करना पड़े |
                                                 देश फिर एक ऐसी जगह खड़ा है जहा ये बहस बहुत जरूरी है कि लोकतंत्र उसमे भाग लेने वाले ,उसके लिए सैद्धांतिक आधार पर जनता के सामने जाने वाले दलों के द्वारा चलाया जायेगा या मौका पाकर सरकार में बैठ गए उसी दल के महज कुछ लोगो द्वारा या दोनों के द्वारा अपने अपने दायरे और जिम्मेदारियों के परिपेक्ष में |यह एक राजनीति शास्त्र कि बहस है | यह लोकतंत्र कि मजबूती कि बहस है | यह जनता के प्रति जवाबदेही कि बहस है | इस बहस में वे ही लोग शामिल हो सकते है जिन्हें राजनीति शास्त्र के सिद्धांतों और लोकतंत्र कि परिकल्पनाओं का ज्ञान हो | इसमें वे ही लोग शामिल हो सकते है जिन्हें खुले दिल दिमाग से सोचने कि आदत हो | बहस शुरू हुयी है अब जारी रहेगी जब तक कोई फैसलाकुन निष्कर्ष नहीं निकलता | देश के भविष्य ,लोकतंत्र के भविष्य और लोकतंत्र की संस्थाओं के भविष्य पर लगातार पैनी निगाह रखने वालों की निश्चित ही दिलचस्पी इस बहस में भी होगी और इस बहस के परिणाम में भी और वे भी इस बहस पर निगाह जरूर रखेंगे जो राजनीति में रूचि रखते है |


रविवार, 26 जून 2011

आज कई दिनों की चुप्पी के बाद गैंग से सलाह करने के बाद रामदेव यादव बोले पर बोले क्या खूब चीखे खूब गुस्साए | ये कैसा योगी ? रामदेव के अनुसार १- ३०००० लोगो के बीच उनकी हत्या की आशंका थी मीडिया भी था वहा फिर भी | लगता है की रामदेव ने भारत को कोई और देश समझ लिया | २- रामदेव यादव को आपातकाल लगा दिख रहा है, पर ये बहुत बहादुर है की फिर भी जो चाहे खूब झूठ बोल ले रहा है ये अलग बात है की पत्रकारों का जवाब देने को तैयार नहीं हुआ | ३- ये कायर की मौत नहीं मरना चाहता था ,उनके अनुसार उनके सामने बच्चो को घसीट कर मारा जा रहा था ,महलाओ के साथ बलात्कार का प्रयास किया जा रहा था ,इससे बड़ी कायरता और कायर की मौत क्या हो सकती है ? की कोई अपने समर्थन में आये लोगो को छोड़ कर भाग जाये | 
                            उन सवालो का जवाब आज भी नहीं दिया की १ - औरत का वेश का भेष धारण कर भगा क्यों २- पीटने वालो के सामने खुद को क्यों नहीं खड़ा कर दिया जानकी जिन नेताओ को ये गली दे रहा है वो अपने समर्थको को छोड़ कर भागते नहीं बल्कि खुद सामने खड़े हो जाते है २- ६ दिन में ही तथाकथित योगी मरणासन्न कैसे हो गया ? उसके दो महीने तक भूखे रहने के दावे का क्या हुआ ? ३ - दुनिया को अंग्रेजी इलाज छोड़कर अपना इलाज स्वीकार करने का उपदेश देने वाला रामदेव यादव खुद अंग्रेजी और बड़े अस्पताल में क्यों भारती हुआ ? अपने इलाज से खुद को ठीक करने की जिद क्यों नहीं किया | ४ - रामदेव की कितनी कम्पनियाँ है और किस किस चीज की है और उनमे कितना पैसा है ? पत्रकारों के इस सवाल पर अपनी पत्रकार वार्ता ख़त्म कर भाग क्यों जाता है ? 
                               रामदेव यादव अब तमाम सवालों के घेरे में आ गए है ,जिनका जवाब उनके पास नहीं है | अब वो जितना ज्यादा बोलेगा और बौखालायेगा उतने सवाल उठते जायेंगे | पहले भी लाखो लोग हुए है जो सरकारों के खिलाफ बोलते रहे सस्ते प्रचार की बाते करते रहे ,कम्पूटर इत्यादी का विरोध करते रहे ,पर जब उन लोगो को खुद सरकार में शामिल होने का मौका मिला तो वे सभी सारे भ्रस्ताचार का रिकार्ड तोड़ते दिखलाई पड़े और जो बड़ी बड़ी बातें करते थे सब भूल गए और निहायत अयोग्य साबित हुए | सत्ता से बाहर रह कर कुछ भी बोलना और सत्ता में होने हकीकत जान कर कारवाही करना अलग बात होती है | रामदेव यादव को भी अमर सिंह वाली बीमारी लग गयी है की उनके बिना दुनिया नहीं चलती और अगर किसी दिन मीडिया में नहीं आये तो बीमार पद जाना | जब मीडिया समाचारों के आभाव में ऐसे लोगो को कुछ ज्यादा जगह दे देता है तो सत्ता से भी बड़ा नशा चढाने लगता है ; पुरानी कहावत है की अधजल गगरी छलकत जाये |


शनिवार, 18 जून 2011

ना संसद ना संविधान अब अन्ना विधान

                                                 ना संसद ना संविधान से अब देश चलेगा अन्ना के विधान से और देश में केवल नकारात्मक बात करने वाले और भोजपुरी में कहे तो गलचौरी करने वाले इस विधान के लागू होने से पहले तक ताली बजायेंगें ,लेख लिखेंगे ,फेसबुक सहित सभी ऐसे स्थानों पर नयी आजादी की कहानियां लिखेंगे | ऐसा लगेगा कि महात्मा गाँधी ,सुभाष चन्द्र बोस,तिलक ,भगत सिंह ,आजाद सभी ये लोग ही है | सीमाओ पर कुर्बानियां इन्होने या इनके परिवारों ने ही दिया है और अब जीत का जश्न मना रहे है | इनकी बातो से ऐसा भी लगता है कि भारत के लिए कुर्बानियां देने वाले आजादी कि लड़ाई लड़ने वाले निहायत नासमझ थे | ऐसा भी लगता है कि संविधान सभा में जो लोग बैठे थे वे देशद्रोही ,बिना पढ़े लिखे ,और गैर जिम्मेदार लोग थे | बाबा साहब आंबेडकर से लेकर डॉ राजेंद्र प्रसाद हो या एच एन कुंजरू तक सभी को इस सूरमाओ से राय लिए बिना संविधान कि रचना नहीं करना चाहिए था |
                                                इस वक्त देश में जिस तरह कि बहसे चलाई जा रही है उससे दो बाते प्रचारित करने कि पूरी कोशिश कुछ लोगो द्वारा कि जा रही है १ - ६३ सालो में इस देश में कुछ हुआ ही नहीं ,देश बर्बाद हो गया और बहुत पिछड़ गया | २ - भारत में केवल भ्स्ताचार होता है ,काला धन का कारोबार होता है और कुछ होता ही नहीं है | ये लोग ये बताना चाहते है कि भारत ना तो विज्ञानं में आगे बढ़ा ,ना शिक्षा में ,ना चिकित्सा में ,ना शक्ति में और किसी भी क्षेत्र में नहीं  | इन्हें भारतियों के मिलने वाले नोबल पुरष्कारों से नफरत है ,इन्हें भारत कि एकता से नफरत है ,इन्हें ६५ ,७१ ,कारगिल कि जीत से नफरत है ,इन्हें असमान में छोड़े जा रहे केवल अपने नहीं दुनिया के दूसरे देशो के भी उपग्रहों कि सफलता से नफ़रत है | इन्हें दुनिया के चंद प्रगतिशील देशो में भारत के शामिल हो जाने से नफरत है | इन्हें दुनिया कि पहली या दूसरी ताकत बनते हुए भारत से नफरत है |तभी तो आत्मविश्वाश से लबरेज होते भारत में विश्वाश का बड़ा संकट खड़ा करने का प्रयास बड़े सोचे समझे तरीके से किया जा रहा है | किसी देश के जीवन में ६० साल ६० सेकण्ड के बराबर होता है और दुनिया के तथाकथित बड़े और विकसित देशो के मुकाबले हमारे महान भारत ने ज्यादा तेजी से तरक्की भी किया ,अपनी कमियों पर विजय भी पाया और जहा जो कमजोरियां दिखी उनको दूर भी किया | जहा दूसरे  एक बोली ,एक भाषा ,एक धर्म वाले देशो को भी एक साथ रखने में कामयाबी  नहीं  मिल पा रही है और गृहयुद्ध तथा आतंकवाद और विभिन्न समस्याओ के शिकार है और फ़ौज तथा तानाशाही से भी काबू में नहीं कर पा रहे है वहीँ तमाम भाषाओ,बोलियों ,संस्कृतियों ,जातियों और धर्मो वाले इस देश कि मजबूत एकता और दुनिया का सिद्ध हो चूका सबसे मजबूत लोकतंत्र कुछ लोगो को चुभ रहा है | कुछ तथाकथित बुद्धिजीवी भी पता नहीं कैसे बिना इतिहास और वर्तमान कि समीक्षा किये इस अभियान में शामिल हो जाते है तो जो अभी तक नासमझ है या देश और नागरिकता का अर्थ ही नहीं समझना चाहते है उनको क्या कहा जाये ?जनसंख्या १२० करोड़ से ज्यादा है पर नागरिक कितने है ?यह बहस का विषय है | जब जो धर्म अपने उपदेशो के द्वारा समाज को सही दिशा और त्याग कि शिक्षा देता था वही अनाप शनाप धन दौलत और तमाम बुराइयों का शिकार दिखलाई पड़ रहा है तो उस चर्च और राजा के सौ साल से ज्यादा चले युद्ध कि याद आ ही जाती है | किसी ने लिखा था कि ; बादशाहों से फकीरों का बड़ा था मर्तबा ,जब तक सियासत से उनका कोई मतलब ना था ;| 
                                                                  देश के चिंतनशील और जिम्मेदार लोग समझ ही नहीं पा रहे है कि ज्यो ही अमरीका के राष्ट्रपति ओबामा भारत आये और संसद को संबोधित कर भारत को महान स्वीकार किया तथा हर भारतीय सीना चौड़ा कर चलने लगा ,दुनिया के लोग भारत में आकर पैसा लगाने को तैयार होने लगे ,देश के विरुद्ध सोचने वाले और षड़यंत्र करने वाले ठिठक कर खड़े हो गए ,अचानक ऐसा क्या हुआ कि उस स्थित को भारत के लिए प्रयोग होने से पहले ही भारतं को बुरा रास्त्र घोषित करने कि मुहीम देश के अंदर से ही शुरू हो गयी | इतिहास इसकी समीक्षा करेगा जरूर और वे ताकतें  बेनकाब भी होगी | आजादी कि लड़ाई में भी तो इस देश कि बहुत सी ताकतें  या तो फिरंगियों के साथ सीधे सीधे खड़ी थी या स्वतंत्रता सेनानियों के खिलाफ मुखबिरी कर रही थी | कुछ वैसी ही ताकतें आज भी देश के खिलाफ खड़ी है | इनकी संख्या हजारों या लाखों में होती है और ये १२० करोड़ से ज्यादा के देश को आदेशित करना और तानाशाही पूर्ण तरीके संचालित करना चाहते है | 
                                            इस बात से किसे एतराज है कि देश से बुराइयाँ मिटनी चाहिए ,भ्रस्ताचार ख़त्म होना चाहिए ,काला धन  का कारोबार बंद होना चाहिए इत्यादि | बहुत सी बाते है जिनपर देश में चिता भी है और चिन्तन भी | यदि चिंतन नहीं होता तो सूचना का अधिकार बना ही नहीं होता | जो भी हजारो करोड़ कला धन वापस आया है वो आया ही नहीं होता | सत्ता में भागीदार लोग जेल में गए ही नहीं होते और जेल जाने वाले यदि कोई और भी उनके कामो में शामिल है तो अब तक मुह खोल चुके होते | कम से कम पूर्व की सरकारों की तरह ये सरकार जिन पर भ्स्ताचार प्रमाणित हो जा रहा है उन्हें बचा नहीं रही है बल्कि कानून को मजबूती से काम करने को प्रोत्साहित कर रही है | किसी का पैसा खो जाता है या चोरी हो जाता है तो हमारी अपनी व्यवस्था हमें तुरंत नहीं दिलवा पाती है बल्कि कानूनी प्रक्रिया पूरी होने पर वो काफी दिन में मिल पाता है | यहाँ तो काला धन उन देशो में है जिनकी अर्थव्यवस्था ही उसी पर निर्भर है | अन्तेर्रस्त्रीय कानूनों के अंतर्गत प्रावधानों से ही वह वापस आयेगा और उसमे लगने वाला समय लगेगा  या फिर इतनी हिम्मत हो कि हमारी सेनाएं उन देशो पर हमला कर धन वापस ले आये | अगर मनमोहन सिंह और सोनिया गाँधी इमानदार नहीं है तो किसी के इमानदार होने की कल्पना ही नहीं की जा सकती है |
                                                   देश को भ्रमित करने वालो का कहना है की ८० % लोग चोर है इन्हें छोड़ कर, चुनाव में जनता पैसे और शराब लेकर वोट देती है इन्हें छोड़ कर ,सारे लोग काला धन रखते है इन्हें छोड़ कर ,संसद और विधान सभाओ में अयोग्य लोग है और कोई भी कानून बनाना नहीं जनता है इन्हें छोड़ कर | देश में कोई भी देश के बारे ने नहीं सोचता और न देश भक्त है इन्हें छोड़ कर | ये देश चलने का जो तरीका चाहते है उसमे देश की राजधानी हो या प्रदेश की ,जिला मुख्यालय हो या कोई और इनका कहना है की जहा भी कुछ लोग इकट्ठे हो जाये और ये ऐलान कर दे की वही देश के मालिक या प्रतिनिधि है तो उस वक्त वे जो भी आदेश देते जाये वही संविधान और कानून मान लिया जाये तथा उनके आदेशो का पालन तुरंत हो वर्ना वे जो चाहेंगे करेंगे |इस अन्ना विधान में फ़ौज के दफ्तर में इकट्ठे लोग फ़ौज की नीति और युद्ध की योजना तैयार करेंगे ,जो साईकिल नहीं चलाना जानते वे एयर फ़ोर्स को कौन सा जहाज खरीदना चाहिए या कौन सी मिसाइल लेनी चाहिए ये बताएँगे | जिन्होंने तालाब नहीं देखा वे नेवी की नीति तैयार करंगे | १० डकैत या चोर मिल कर पुलिस को कानून बताएँगे | जब भी कुछ लोग किसी अदालत में इकट्ठे हो  जायेंगे वो निचली अदालत हो या सर्वोच्च न्यायलय उनसे पूछ कर ही फैसले होंगे | जब भी कोई भीड़ अखबार के या टी वी के दफ्तर को घेर लेगी वह तय करेगी की अख़बार में क्या छपे या टी वी में क्या दिखाया जाये | इसी तरह भीड़ या यूँ कहे कि कुछ लोगो कि भीड़ देश कि नयी व्यवस्था चलाएगी | यदि लाखो लोगो कि क़ुरबानी से आजाद हुए और बड़ी कुरबानियों से कायम रहते हुए तरक्की करते देश को ऐसे ही चलना है तो इन मुट्ठी भर लोगो तथा इन के चंद समर्थको को ये व्यवस्था मुबारक | पर ऐसा लगता  नहीं है कि महान हिंदुस्तान इतना कमजोर हो गया है कि कुछ लोगो कि साजिश कामयाब हो पायेगी ,वे उसी गति को प्राप्त होंगे जिसको आजादी कि लड़ाई में गद्दारी कर प्राप्त हुए थे | ये देश १२० करोड़ कि इच्छा और उनके द्वारा बनाये संविधान से चलेगा न कि किसी और विधान से |
                                                    
                                                                                                                               
                                                                                                                  डॉ सी पी राय
                                                                                                 
                                                                                              स्वतंत्र राजनैतिक चिन्तक और स्तंभकार





                                                   

 


शुक्रवार, 17 जून 2011

दोस्तों मै चाहता हूँ कि सरकार मुझसे तथा आप में से भी जो लोग राय देना चाहे उन सभी से लोकपाल , भ्स्ताचार, कालाधन तथा अन्य जो भी विषय है जिनसे देश कि जनता दुखी है पर सरकार बात करे ! क्योकि नागरिक के रूप में वे जिनसे सरकार बात कर रही और हम आप सब बराबर है | लोकपाल ,बाबा ,स्वामी ,धर्मस्थल ,एन जी ओ ,सभी व्यापारियों कि जांचा करने को भी एक सुपर लोकपाल कि जरूरत है | हमारे इस विचार के लिए सरकार हमसे बात करे ,हम लोगो को भी समिति में शामिल करे वरना क्या हम लोगो को भी दिल्ली में अनशन पर बैठने  को मजबूर होना पड़ेगा ? पर हम सब भारत के आम आदमी है इसलिए हमारे पास उतना तामझाम नहीं है और न इतना पैसा है ,न संघ या किसी संगठन का समर्थन है तो क्या मीडिया और सभी लोग ,सत्ता और विपक्ष में बैठे लोग हम लोगो पर ध्यान देंगे ? कही ऐसा तो नहीं होगा कि चमक दमक और बड़े घरानों तथा बड़े लोगो या संगठनो का हाथ नहीं होने के कारन मेरा और आप का भी हाल निगमानंद जैसा हो जाये और दिल्ली में हम ;लावारिश मौत मर जाये ? यदि ऐसा हुआ तो हमारे बच्चे तो लावारिश हो जायेंगे ! आप दोस्तों से दो सवाल है १ - क्या मै जिन लोगो के बारे में लिखा है उनकी जाँच करने को भी एक सुपर लोकपाल होना चाहिए जिसका चुनाव सीधे देश के १२० करोड़ लोग करे ? २- क्या आप दिल्ली में अनशन के लिये मेरा साथ देने को तैयार है ? क्या यदि सरकार न सुने तो हमें सर्वोच्च अदालत से अपना अधिकार मांगना चाहिए कि हम भी अन्ना से समान जागरूक नागरिक है इसलिए हमें भी समिति में शामिल किया जाये ? दोस्तों यदि आप लोगो का नैतिक और वास्तविक समर्थन मुझे मिला तो आप लोगो कि राय देश कि सरकार के पास पहुँचाने के लिए मै दिल्ली में अनशन पर बैठूँगा | अन्ना और रामदेव के लिए इतने लोगो ने साथ दिया तो उनसे भी आगे कि मांग के लिए मुझ साधारण आदमी के साथ कितने लोग आते है ? वर्ना वह शेर सही साबित हो जायेगा   ;सब लोग ही समझे बूझे है ,सब लोग ही देखे भाले है .बिगड़े का बहनोई कोई नहीं धनवान के लाखो साले है |

साईं बाबा के अपने कमरे से करोडो का सोना करोडो की चाँदी करोडो के हीरे जवाहरात

साईं बाबा के अपने कमरे से करोडो का सोना करोडो की चाँदी करोडो के हीरे जवाहरात और इतना रूपया जो पांच जीपों में भरकर बैंक गया मिला  | दोस्तों जो समाज से कहते है भगवन में ध्यान लगाओ बाकि सब मिटटी है फिर उन्ही को इतनी मिटटी अपने कमरे में इकट्ठा करने की क्या जरूरत पद गयी ? या ये दोहरे चरित्र और दो मुह ,दो जबान का मामला है ? क्या इन स्वामियों इनके मंदिरों और सभी धर्मस्थलो के लिए भी कोई लोकपाल बनाया जाये ? क्या इन्हें नंबर दो का पैसा देने वाले सारे व्यापारियों के लिए भी कोई लोकपाल बनाया जाये ? क्या इनका मुद्दा भी अन्ना और रामदेव जैसे लोग उठाएंगे ? क्या सरकार इनके मानने वालो के वोट की परवाह नहीं करते हुए इन स्थानों पर जमा काले धन को निकालने का भी कोई अभियान चलाएगी ? दोस्तों एक बार फिर बाबाओ के बारे में उनकी असलियत के बारे में सोचना जरूर| १- लोगो को २०० साल की जिंदगी देने का दावा करने वाला ५ दिन में ही अस्पताल चला गया और खुद अपने दावो के विपरीत आयुर्वेद का नहीं बल्कि अंग्रेजी दवाओ का इलाज करवा रहा है | क्या इससे बड़े बाबा मनमोहन सिंह नहीं जिन्होंने अपने गंभीर इलाज के लिए विदेश जाने और बड़े प्राईवेट अस्पताल में भारती होने से इंकार कर एम्स में इलाज करवाया | २ - अब ये जो अपनी भभूत से लोगो की जन बचाने का दावा करते थे अपनी जिंदगी के लिए साधारण मनुष्यों पर आश्रित हो गए और चले भी गए | जाने के बाद ये भी सामने आ गया की आम लोगो की तरह इन लोगो को भी धन दौलत की कितनी भूख है ? क्या ये दौलत इन्होने सरकारी विभागों के सामने प्रकट किया था ? क्या आयकर और अन्य कर दिया था ? यदि नहीं दिया तो इन लोगो को किस श्रेणी में रखा जाये ? क्या इन्हें भी हम उन्ही शब्दों से संबोधित कर सकते है जिससे अन्य लोगो को करते है ? आइये ईमानदारी से इस बहस में भाग लीजिये ,देखते है कितने लोग जागरूक है तथा हिस्सा लेते है ? ये भी देखना है की अन्ना की टीम इस विषय पर कुछ बोलती है या नहीं ? जय हिंद |

शनिवार, 11 जून 2011

तथाकथित योगी कहते थे की योग करो और निरोगी रहो और योग करने वाला महीनो बिना खाए पीये केवल सूर्य की रोशनी और योग के सहारे जिन्दा रह सकता है | भारत में योगी नहीं कहलाने वाले बहुत से लोग हुए है संघर्ष के इतिहास में भी और आज भी है समाज के लिए रोजमर्रा संघर्ष करने वाले जो बहुत दिनों तक भूखे प्यासे रहे पर अस्पताल जाने की नौबत नहीं आई | कुछ दिन पहले ८० साल के करीब के अन्ना भी कई दिन अनशन पर रहे पर अपने पैरों पर चल कर गए | लेकिन ४७ साल का ये कैसा योगी जो बड़े बड़े दावे करता है पर ५ दिन में ही मौत की कगार पर पहुँच गया | दोस्तों सभी संकीर्णता और लगाव से ऊपर उठ कर सचमुच एक  बार सोच कर देखे की तथाकथित योगी की असलियत और उसके योग की असलियत क्या है ?ये भी सोचे की उस दिन प्रेस कांफ्रेंस में ज्यो ही पत्रकारों ने इनकी कंपनियों के बारे और पासपोर्ट के बारे में पूछना शुरू किया ये प्रेस कांफ्रेस छोड़ कर भाग क्यों खड़े हुए ? वह सवाल तो अभी तक अनुत्तरित है की पुलिस देख कर कूद कर औरत के वेश में भागे क्यों ? फिर प्रेस से भागना और अब योग की ताकत नहीं दिखा पाना ? आखिर सच क्या है ? दोस्तों ये कोई राजनीती का सवाल नहीं है बल्कि एक नागरिक का स्वाभाविक चिंतन है | उम्मीद है की सभी लोग दिल पर हाथ रख कर एक बार दिमाग से सोचेंगे जरूर | जय हिंद |

सोमवार, 6 जून 2011

कुछ घंटे पहले क्रन्तिकारी भाषण से लोगो को उत्तेजित करने वाला और जान की कोई कीमत नही है ये देश के लिए जाये तो जाये कहने वाला तथा सभी के साथ १२० करोड़ लोगो की लड़ाई की बात करने वाला रामदेव यादव औरत का भेष धारण कर भागा क्यों ? ये तो शिखंडी से भी गया गुजरा निकला | शिखंडी तो युद्ध भूमि में डटा रहा अपने लोगो के लिए पर ये तो कायरों की तरह भाग निकला | रामदेव यादव ने खुद अपनी हरिद्वार की प्रेस कांफ्रेंस में दो बाते कहा जिस पर देश जवाब चाहता है १- उसने कहा की छोटे छोटे बच्चो को उसके सामने घसीट कर मारा जा रहा था ,सवाल ये है की यह देख कर उसका पुर्सत्व मर गया की वह मुह छिपा कर भाग गया जबकि कमजोर से कमजोर आदमी ऐसे मौके पर औरतो और बच्चो की ढाल बन कर खुद पिट लेता है लेकिन उनकी रक्षा करता है ,रामदेव ने ऐसा क्यों नहीं किया  | जो लोग इसके झूठे कार्यक्रम के लिए इसलिए इकट्ठे हो गए की शायद यहाँ बिना पैसे लिए ये योग सिखाएगा चाहे अपने स्वार्थ में ही सही उन्हें छोड़ कर ये भागा क्यों ? भागने के लिए इसने किस बहन बेटी के कपडे उतरवा कर पहने और उसे क्या पहनाया तथा वो कहा है ?खुद औरत बच्चो की ढाल बनने के स्थान पर इसने औरतो को ढाल क्यों बनाया ? जिस तरह ये पुलिस  को देख कर ऊंचे मंच से कूदा, देश जानना चाहता है की क्या पुलिस  को देख कर भागना इसकी पुँरानी आदत है ,आखिर इसने क्या किया है पूर्व में की पुलिस  को देख कर इसे भागना पड़ता था ? २ - इसने बयान दिया की यदि तीन दिन धरना चल जाता तो केंद्र की सरकार गिर जाती | इस बात का क्या मतलब है ? किन लोगो के साथ और आगे की क्या साजिश थी यह भी जनता जानना चाहती है |जनता यह भी जानना चाहती है की तीन दिन में इसने क्या क्या छुपाया ? यह भी जानना चाहती है कुछ घंटे पहले तक सरकार और प्रधानमंत्री की तारीफ करने और उनकी शान में ताली बजवाने के पीछे इसका क्या मकसद था ? जनता यह भी जानना चाहती है बार बार मंच से पीछे जाकर ये क्या खेल रच रहा था ? जनता यह भी जानना चाहती है की रामदेव जिन लाखो या करोडो लोगो को अपना शिष्य बताता है देश और विदेश में उनमे से कितनो को भ्रस्टाचार न करने ,घूस न लेने और न देने के लिए प्रतिबद्ध कर चूका है | अपने तथाकथित शिष्यों का कितना पैसा विदेश से देश में मंगा चूका है ? खुद को विदेश में तथाकथित तौर पर मिलने वाला मॉल विदेश में ही है या देश में वापस ले आया है ?
      पर सबसे पहले ये बता दे की शिखड़ी का भेस धारण कर भागा क्यों ?भारत तो बहादुरों का देश है क्या अब ये कायरो के पीछे चलेगा ? एक कायर खुद अपने मुह से खुद को महात्मा गाँधी तथा शिवाजी के बराबर रखेगा क्या ये देश इस बात को बर्दाश्त करेगा ?कोई कुछ हजार अपने व्यवसाय पर पलने वालो के परिवारों को तथा इसकी बातो में आ गए भोले भाले लोगो को इकठ्ठा कर महान हिंदुस्तान को ललकारेगा और देश ये बर्दाश्त करेगा ?क्या केवल रामदेव का मानवाधिकार है ? क्या दिल्ली में रहने वाले लोगो का कोई मौलिक अधकार और मानवाधिकार नहीं है ? क्या देश इसी तरह चलेगा की कुछ हजार लोग कही भी इकट्ठे हो जाये और तुरंत अपना मनचाहा  करवाने को मजबूर करे ? क्या यदि ऐसे  ही कुछ हजार लोग रामदेव के आश्रम को घेर कर तुरंत सब जानना चाहे  तो वह अपने और अपने लोगो के हिसाब तथा अपनी तमाम संपत्ति  का हिसाब तुरंत देने को तैयार है ? इसका समर्थन करने वाले भा जा पा,संघ ,नितीश कुमार ,मायावती नरेन्द्र मोदी सहित वे तमाम लोग अब इसी तरह की व्यवस्था चाहते है की कभी भी कुछ हजार लोग उनकी राजधानियों को घेर कर या जिला मुख्यालयों को घेर कर तुरंत मनचाहा आदेश और काम करवाए ? यदि ये सभी लोग अब से यही व्यवस्था चाहते है तो अपने अपने दलों  और सरकारों का प्रस्ताव पास कर भारत सरकार को भेज दे की अब संविधान में परिवर्तन कर ऐसी व्यवस्था बने जहा कोई विधान सभा और लोक सभा न हो ,कोई प्रशासनिक व्यवस्था न हो बल्कि जहा जिसकी लाठी उसकी भैंस की व्यवस्था देश में लागू की जाये | क्या महान भारत यही व्यवस्था चाहता है ?फिर वही सवाल पूरा देश जानना चाहता है की कायर सेनापति औरतो और बच्चो को ढाल बना कर शिखंडी बन कर भागा क्यों ?


सोमवार, 2 मई 2011

"ओसामा के मानने वाले इतने और उसे दफ़नाने वाला कोई नहीं ,बेचारा !

                                                                                                                                                           
                                                      ओसामा मारा गया ,ओसामा मारा गया ,ये समाचार क्या उछला पूरीं दुनिया में लोग ख़ुशी से उछल पड़े | कुछ छुपे हुए लोगो के चेहरे पर मुर्दनी छा गयी ,उनके खैरख्वाह और पालने वालों के चेहरे भी काले पड़ गए |था ही  यह बड़ा समाचार दोनों तरफ के लोगो के लिए |जिसने दुनिया को हर वक्त दहशत में जीने को मजबूर कर रखा था | जिसने, खुद को दुनिया का राजा समझने वाले अमरीका को उसी के साधनों का इस्तेमाल कर एक बार तो परास्त कर ही दिया था, वो ओसामा अपने आका,अपने पालने वाले पाकिस्तान की आई एस आई और फ़ौज  के द्वारा बनाये गए सबसे सुरक्षित इलाके के सबसे सुरक्षित घर में ही मारा गया | बहुत दिनों से घर में सबसे बड़े आतंकवादी को पालते हुए पाकिस्तान ,अमरीका से उसे और दूसरे आतंकवादियों को मारने के लिए अरबों डालर लेता रहा और उसी पैसे से ओसामा सहित सभी आतंकवादियों को पालता भी रहा| पाकिस्तान का यह चेहरा जिसके बारे में भारत लगातार दुनिया को तथा अमरीका को बता रहा था और उसे सहायता देने का विरोध कर रहा था दुनिया के सामने बहुत स्पस्ट रूप से आ गया |ये मुद्दा तो दुनिया और दुनिया में ही मौजूद अमरीका सहित सभी उसके दोस्त शायद बाद में तय कर सके |अगर उन्हें केवल भारत को तरक्की से रोकने की नाकाम  कोशिश के लिए पाकिस्तान को हथियार नहीं बनाना है तो वह कोई सही निर्णय ले सकेंगे |                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                                 दुनिया कें सबसे बड़े वांटेड ,सबसे बड़े इनामी ,सबसे बड़े आतंकवादी का उस वक्त का चेहरा[ अगर किसी कैमरेमें कैद हो ]पूरी दुनिया देखना चाहती है, जब मौत उसके सामने थी और वो लाचार था और ये जान गया था कि अब उसके हाथ में कुछ नहीं है और अब वह मरने ही वाला है |मै भी देखना चाहता हूँ की किसी को भी और कितनो को भी बिना किसी कारण क्रूरता से मौत बाटने वाला और बूढ़े औरत और बच्चे की मौत पर अट्टहास करने वाला अपने मौत पर हँसा या नहीं |मौत उसके चहरे पर खौफ बन कर नाच रही थी या वह अपनी मौत पर भी अट्टहास कर रहा था ,या सद्दाम की तरह शांत चहरे से मौत को स्वीकार कर रहा था |यदि यह चेहरा सारी दुनिया सहित ओसामा के साथियों को भी देखने को मिल जाये तो बहुत भला हो जायेगा पूरी इंसानियत का | इंसानों को तसल्ली तो मिलेगी ही ,यह भी देखने को मिलेगा की मौत की दहशत का फर्क क्या होता है, जब आम आदमी मरता है बिना किसी कारण के ,बिना किसी दुश्मनी के |जब कोई बच्चा स्कूल जा रहा होता है ,या जब कोई बूढ़ा बच्चे की उंगली पकडे चल रहा होता है या जब कोई माँ बच्चे की दवा खरीद रही होती है या जब कोई अपने परिवार के साथ एक दिन इस आशा से निकला होता है बाजार या सिनेमा, कि रोज रोज कि भाग दौड़ से अलग आज थोडा ख़ुशी हासिल करेगा और ये आतंकवादी कभी बम फोड़ कर या कभी ए के ४७ से गोलियां दाग कर इन सभी मासूमों को मौत कि नीद सुला देते है |कभी ये तालिबान किसी औरत को गोलियों से भून देते है, कभी केवल पढ़ने के कारण ,कभी केवल संगीत सुनने के कारण किसी को कोड़े मार कर किसी को पत्थर मार कर मौत कि नीद सुलाते रहे है |उन सारे मरे हुए लोगो के परिजन और शुभचिंतक ये देखने को बेक़रार है कि मौत और मौत में क्या फर्क होता है |जब आम इन्सान मरता है या मौत देखता है तो बहुत रोता है| क्या ये मौत के सौदागर भी रोते है ,क्या उनके चेहरों पर ,उनकी आँखों में भी दहशत दिखती है ?अगर इंसानों जैसी दहशत इस शैतान कि आँखों में भी दिख गयी तो हो सकता है कि बड़ी तादात में शैतान उस दहशत को देख कर रास्ता बदल ले या अपनी मादों में छुप कर अपने अंत का इंतजार करे | दोनों ही हालत में भला तो इंसानियत का ही होगा |
तो राष्ट्रपति ओबामा ने अमरीका के अहंकार कि भाषा बोल ही दिया कि हम जो भी चाहे कर सकते है |जब २६/११ हुआ था क्या तब क्या कर रहे थे ? तब क्या नहीं चाहा था अपने देश कि सुरक्षा ?पर बोला तो सच ही है कि अमरीका जो भी चाहे वो कर सकता है | वह जब चाहे  तब किसी देश पर हमला कर सकता है ,जब चाहे किसी देश को खतरनाक हथियार रखने वाला सिद्ध कर सकता है ,जब चाहे किसी को भी सत्ता से बेदखल कर सकता है ,जब चाहे भारत जैसे देश के खिलाफ जो अपने ऊपर हुए आक्रमण का केवल जवाब दे रहा था सातवाँ बेडा भेज सकता है |जो किसी देश के मंत्री की डर के मारे नंगा कर तलाशी ले सकता है ,जो केवल इसलिए हर इन्सान को आतंकवादी समझ सकता है कि उसका नाम कुछ मुसलमान जैसा है |हा अमरीका कुछ भी कर सकता है |जो पाकिस्तान आतंकवाद कि खेती करता है उसको इस खेती के लिए पर्याप्त पैसा और हथियार देने का काम केवल अमरीका ही कर सकता है |पर इस काम के लिए तो अमरीका के वो लोग तो बधाई के पात्र है ही जिन्होंने पाकिस्तान में होते हुए भी ओसामा को मार गिराया, अपनी सरकार कि अपनी जनता में विश्वसनीयता कायम करने के लिए ही सही | साथ ही डरपोक अमरीकियों ने ये भी ऐलान कर दिया है दुनिया के सामने कि अब कुछ भी हो सकता है |ये कुछ भी, अमरीका और उसके दोस्तों के यहाँ भी होगा या उन्हें छोड़ कर बाकी सारी दुनिया में होगा| अमरीका के पैसे और हथियार कि मदद से और पाकिस्तान के सम्पूर्ण प्रयासों से होगा ये दुनिया को आने वाले समय में बहुत ध्यान और दिलचस्पी के साथ देखना होगा और उसके लिए एक संयुक्त रणनीति भी बनानी होगी|
                         ओसामा के मानने वाले इतने और उसे दफ़नाने वाला कोई नहीं ,बेचारा! कितना बदकिस्मत निकला | पूरी दुनिया पर आतंक का राज कायम करने का सपना देखने वाले को दो गज जमीन भी नहीं नसीब हुई ,बेचारा !ओसामा | बताया गया कि उसे पाताल में भेज दिया गया जहा हिन्दू मान्यताओं के अनुसार नाग रहते है | आदमी के वेश में पैदा हुए एक नाग को नागलोक ही पहुंचा दिया अमरीका ने |पर अब क्या होगा ?केवल अपना अहम् संतुस्ट कर क्या अमरीका इस तथाकथित आतंकवाद विरोधी लड़ाई को छोड़ कर केवल अपने घर और अपने लोगो कि रक्षा तक सीमित हो जायेगा? क्या वो अब अफगानिस्तान ,इराक और आतंकवाद कि राजधानी पाकिस्तान को छोड़ कर घर वापस चला जायेगा ?बड़ा सवाल है ये सचमुच आतंकवाद का शिकार और लक्ष्य रहे देशो के चिंतन में |
                                                                                                                     डॉ सी. पी. राय[पूर्व राज्यमंत्री ]
                                                                                                                      स्वतंत्र राजनैतिक चिन्तक 
                                                                                                                            






बुधवार, 13 अप्रैल 2011

जय हिंद कहिये और भ्रस्टाचार से लड़िये

ऐसा लगता है कि पूरा मुल्क जुल्म से ,मिलावटखोरी से ,काला बाजारी से ,भ्रस्टाचार से घूसखोरी से ऊबने लगा है |यहाँ तक कि जो और जिसके परिवार के लोग खुद इन कामो में लिप्त है ,वे भी इनके खिलाफ बात करते है पता नहीं गंभीरता से या केवल बात करने के लिए | पर मजेदार ये है कि जो एक सामान बाजार से गायब कर मुनाफा कमाता है उसे और उसके परिवार को दूसरा सामान पाने में दिक्कत होती है पर वह अपने को चालाक समझता है |किसी एक चीज में मिलावट करने वाला समझता है कि वो चालाक है और उसने अपने इस्तेमाल का सामान तो अलग कर लिया बाकी जहर खाकर मरे तो उसकी बला से | पर वो नहीं जनता कि उसने अपने लिए एक सामान शुद्ध निकाल लिया है ,पर उसी कि तरह अपने को चालाक समझने वालो ने बाकी सभी चीजो में मिलावट कर उसे जहरीला बना दिया है | सभी मिलावट खोर जहर खा रहे है और खिला रहे है पूरे मुल्क को केवल इसलिए कि वो कई गाड़ियाँ  रख सके ,एक बाथरूम जाने को, एक टहलने जाने को, एक ऑफिस जाने को और कुछ दिखाने को |वो बहुत बड़ी कोठी या बंगला बनवा सके या हर शहर में बनवा सके ,कि वे एक कमरे में जूते ,एक में चप्पल ,एक में कपडे और इसी तरह पता नहीं क्या क्या रख  सके |वर्ना खाना तो रोटी सब्जी दाल या मीट  मुर्गा ही होता है और इतना महंगा नहीं होता कि इतने पैसे कि जरूरत पड़े |कपडे भी आदमी कुछ ही पहनता है |
पर सभी एक दूसरे को या तो जहर खिला रहे है या  सामान बाजार से  गायब कर मुनाफा कमा रहे है |जबकि उत्पादन करने वाले किसान ने तो पसीना बहा कर खूब उत्पादन किया और पाया केवल मजदूरी फिर केवल इन तिजारत करने वालो को किसने हक़ दिया कि ये केवल शहर में किसान का पैदा सामान  लाने  के बदले सैकड़ो गुना मुनाफा कमाए ?अगर सामान यही भाव बिकना है तो वह मुनाफा किसान को क्यों नहीं मिले ?उसका खेत ,उसका बीज ,उसका पानी ,उसकी खाद ,उसकी रखवाली ,उसकी मेहनत ,उसका पसीना ,बाढ़ और सूखे में उसका नुकसान उसका  फिर ये मुनाफा इन बेईमानो का क्यों ?
लोगो को मिलावट कर जहर खिलने वाले तो उनसे भी ज्यादा देश द्रोही है जो कही  बम लगा देते है ,क्योकि उस बम से तो केवल कुछ लोग मरते है पर ये तो सारी मानवता को ,सभी नागरिको को ,पूरे देश को  धीमी मौत बाँट रहे है, हर वक्त ,हर दिन |क्या इन लोगो पर उन्ही धाराओं  में मुकदमा नहीं चलाना चाहिए जिनमे देश द्रोहियों पर चलता है?
इन्ही के साथ जो  हमारी  मेहनत की  हजारो करोड़ रूपये कि मुद्रा हर साल बेईमानो कि जेब में चली जा रही है ,यदि वो सचमुच अपने कामो में लग जाती तो एक बार बनी सड़क ,पुल या कोई भी चीज हर साल या साल में कई बार बनाने और ठीक  करने कि जरूरत नहीं पड़ती बल्कि उसी तरह जैसे हम अपना माकन या कोई चीज बनाते है तो वह जीवन भर चलता है केवल रंग रोगन करने के साथ, उसी तरह ये सभी सरकार द्वारा बनाई गयी  चीजे भी चलती और अब तक कोई गाँव और गली बिना सड़क ,बिना नाली ,बिना बिजली कि नहीं होती ,कोई गाँव बिना स्कूल का नहीं होता ,कोई पंचायत बिना चिकित्सालय के नहीं होती |कोई कारखाना बंद नहीं हुआ होता बल्कि तमाम नए बन गए होते और कोई बेरोजगार नहीं होता |अगर किसी व्यापारी का चन्द हजारो से शुरू कारोबार कुछ सालो में बहुत बड़ा और हजारो करोड़ का हो जाता है तो सरकार द्वारा शुरू  किये गए  सार्वजानिक उपक्रम  बढ़ने के स्थान पर बंद क्यों हो गए ?.जबकि उनका सञ्चालन उन लोगो द्वारा किया गया जिन्हें इस पृथ्वी पर भागवान के बाद सबसे योग्य और बुद्धिमान माना गया यानी आइ ए एस अफसर |क्या सचमुच ये योग्य होते है या अंग्रेजो द्वारा छोड़ी गयी एक  बुराई और उनकी निशानी आज भी देश को बर्बाद कर रही है और लूट रही है ?
अपने पड़ोस में रहने वाले किसी भी छोटी से छोटी हैसियत वाले सरकारी कर्मचारी को देखते रहिये उसकी पुरानी हैसियत और दिन दूनी रत चौगुनी बढ़ती हैसियत |किसी ठेकेदार को और उसकी हैसियत को देखते रहिये ,किसी इंजीनियर को देख लीजिये |किसी डॉ0 को देख लीजिये यहाँ तक कि आज के ६० % से अधिक शिक्षको को देख लीजिये जो जमीर औए शिक्षा दोनों बेचने को दिन रात बेचैन है |तब नेताओ को भी  देखिये जिनके पास खाने को नहीं था आज वे किसी घर वाले के मरने पर और परिवार कि किसी शादी पर करोडो खर्च कर रहे है ,टूटी साईकिल नहीं थी और अब गाडियों का बेडा चलता है ,झोपड़ी नहीं थी और अब महलों कि संख्या उन्हें भी याद नहीं है |
घूसखोरी तो हम सभी के रक्त का  हिस्सा बन गयी है ,मांगने वाला इस अधिकार से मांगता है कि उसकी तनख्वाह तो उसके पिता उसके लिए छोड़ गए थे और अब वह जो मांग रहा है यही उसका मेहनताना है और उसका अधिकार है |केवल गलत काम या गलत तरीके से काम में विश्वास करने वाले भी बेहिचक इस तरह घूस पेश करते है जैसे किसी प्यासे को पानी पिला रहे हो |बात लम्बी करना चाहे तो पूरी रामायण लिख कर भी बात पूरी नहीं होगी |वैसे मै बहुत साल पहले से मानता था कि इसका अंत आएगा और लोगो को इस देश द्रोह और समाज द्रोह कि सजा मिलेगी |आज एक मंत्री जेल में है एक सचिव सहित कई आई ए एस अफसर जेल  में है ,फ़ौज के लेफ्टिनेंट जनरल रैक के अफसर को पहली बार तीन साल कि सजा मिली है |नीरा यादव और अशोक चतुर्वेदी[ व्यापारी] को सजा हुई ,अभी जमानत मिल गयी  है |गाजियाबाद में जजों के खिलाफ मुकदमा चल रहा है पर अभी ठेकेदार ,इंजीनियर ,करोडो कमाने वाले और रोज देश को पीछे ले जाने वाले तथा हर समय जनता का शोषण करने वाले कर्मचारियों का नंबर अभी नहीं आया ,अभी दिन रात भ्रस्टाचार करने वाले और करवाने वाले मूल और सारी बुराइयों की जड़  प्राणी व्यापारियों का जेल जाने और सजा पाने का नंबर नहीं आया ,अभी मुनाफाखोरी और मिलावटखोरी करने वालो को फांसी या आजीवन सजा पाने का नंबर नहीं आया ,अभी शिक्षा ,सुरक्षा और स्वस्थ्य को हजम कर जाने वालो को पूरी सजा मिलने कि शुरुवात  नहीं हुई |कब होगा ये सब ?विश्वास तो है कि अब जल्दी ही होगा|
पर क्या हम सब भी कुछ कर सकते है, देश को बचाने के लिए अपनी लुटती हुई पूँजी को बचाने के लिए ,हर समय हर जगह लोगो को जुल्म से बचाने के लिए ,हर समय हर जगह लोगो को घूसखोरी से बचाने के लिए ?क्या हम सब सह कर तथा इस सब के खिलाफ आवाज नहीं उठा कर खुद भी इन सारी बुराइयों के लिए उतना ही जिम्मेदार नहीं है ?एक बार दिल पर हाथ रख कर पूछना जरूर चाहिए |शायद हम सभी शर्मिंदगी महसूस करे
          मै एक तरीका बताना चाहता हूँ जिससे कोई कानून नहीं टूटेगा ,कोई रास्ता नहीं रुकेगा और इन सब चीजो के खिलाफ ऐसा युद्ध शुरू हो जायेगा जिसमे कोई हिंसा नहीं होगी और धीरे धीरे सभी गाँधीवादी तरीके से लड़ना सीख जायेंगे |जिसके खिलाफ आप लड़ेंगे वो अगर दफ्तर छोड़ कर भाग जायेगा तो उस पर कार्यवाही होगी या तुरंत बिना घूस के काम करेगा |यह तरीका सभी जगह चलेगा सड़क से लेकर जो भी बन रहा है उस पर उसकी उम्र लिखी जाये और ख़राब होने पर उसे बनवाने वाले अधिकारी ,इंजीनयर और ठेकेदार को दुबारा अपने पैसे से बनवाना पड़े और कुछ सजा भी मिले ,बस होने लगेगा कमाल |सभी तरह के मामलों में ऐसे ही नियम  तय हो सकते  है |
       हम  क्या करे ?बस देश भक्ति का वही नारा जो नेताजी सुभास चन्द्र बोस ने लगाया था वही जोर से लगाना सीख जाइये |जय हिंद कहिये  और भ्रस्टाचार से लड़िये |  ये देश भक्ति का ज्वार सब काम अपने आप कर देगा |जब जहा कूछ भी गलत हो आप ये नारा लगाने लगिए ,कुछ और लोग इकट्ठे हो जायेंगे उन्हें बात और मकसद बताइए वे भी आप के साथ शामिल हो जायेंगे |चूं कि आप केवल देश का नारा लगा रहे है अतः आप के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता |कर के देखिये धीरे धीरे पूरे देश में जय हिंद का नारा गूजने लगेगा और आप जीतने लगेंगे और भ्रस्टाचार हारने लगेगा |बस बना लीजिये जय हिंद ग्रुप और प्रचार कर डालिए फिर देखिये इसका वही असर होगा जो नेताजी सुभास चन्द्र बोस के नारे से हुआ था |जय हिंद |