समाज हो या सरकार, आगे तभी बढ़ सकते हैं, जब उनके पास सपने हों, वे सिद्धांतों कि कसौटी पर कसे हुए हो और उन सपनों को यथार्थ में बदलने का संकल्प हो| आजकल सपने रहे नहीं, सिद्धांतों से लगता है किसी का मतलब नहीं, फिर संकल्प कहाँ होगा ? चारों तरफ विश्वास का संकट दिखाई पड़ रहा है| ऐसे में आइये एक अभियान छेड़ें और लोगों को बताएं कि सपने बोलते हैं, सिद्धांत तौलते हैं और संकल्प राह खोलते हैं| हम झुकेंगे नहीं, रुकेंगे नहीं और कहेंगे, विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊँचा रहे हमारा|
बुधवार, 9 दिसंबर 2015
राजनीतिक याददाश्त
बुधवार, 2 दिसंबर 2015
क्या मिला है किसी भी देश के चरमपंथियों को आजतक
क्या मिला है किसी भी देश के चरमपंथियों को आजतक कुछ बेगुनाहो की हत्या कर के और देशो को युद्धों से ही क्या हासिल।हुआ है तबाही के सिवाय ।इतिहास और अनुभव तो यही बताता है की कुछ भी हासिल नहीं हुआ है तो फिर ये सब क्यों जारी है लगातार ।
बहुत हो गया अब बंद होना चाहिए शैतानियत का ये तमाशा ,मौत का खेल और खून की ये होली ।
शुक्रवार, 6 नवंबर 2015
भारत का लोकतंत्र
इसलिए बस जरूरी ये है की हर वक्त सिद्धांतो ,,पर खास कर ,भारत के इतिहास और अस्मिता से जोड़ कर इन्हें कठघरे में खड़ा किया जाये | तब ये बौखालायेंगे और और बड़ी गलतियाँ करेंगे तथा लोकतंत्र पर हमला करने की कोशिश करेंगे और वही अवसर लोकतान्त्रिक शक्तियों के खड़े होने का होगा |
देखे कौन कौन क्या करता है ?? ये भी मेरा राजनीती शास्त्र के विद्यार्थी के रूप में व्यक्तिगत बयांन है |
फर्जी आंकड़े और हवाबाजी
इनका राज जानना है की ये हर प्रधान मंत्री ,मुख्यमंत्री और मंत्री को कब्जे में कैसे ले लेते है और फिर हारने के दिन तक नहीं निकलने देते है ।
हारने के बाद पहचांनते ही नहीं है ।
आप इनसे जायज काम भी बिना घूस दिए नहीं करवा सकते । आप दे दो तो कानून और नियम की दूसरी व्याख्या और न दो तो बिलकुल उलट व्याख्या ।
या फिर इनका बड़ा नुक्सान करने की ताकत हो आप में ।
देश की आज़ादी इन्ही के लिए आई और राजा खत्म हो गए पर लोकतन्त्र में ये नए उनसे ज्यादा आततायी और मजबूत तथा उनसे ज्यादा बुराइयो से युक्त राजा पैदा हो गए है और भारत इनके जुल्मो से और भरस्टाचार से कराहने लगा है ।
नेहरू जी ने सबसे बड़ा पाप इनको 1947 में 15 अगस्त को ज्यो का त्यों स्वीकार कर के किया था और वो आज़ादी के बाद की सबसे बड़ी भूल थी जिसका खामियाज़ा देश पता नहीं कब तक भुगतेगा ।
पता नहीं कब कोई पैदा होगा इंदिरा गांधी की तरह जिसने राजाओ की हैसियत को खत्म किया था और बो इन राजाओ को खत्म करेगा ।
राजनैतिक आकाओ की अपने प्रति हींन भावना तथा इन लोगो के प्रति कॉम्लेक्स कब ख़त्म होगा ।
पर आज डेढ़ साल से अधिक हो गया और साहेब भूल ही नहीं गए बल्कि इदेश के लिए जिंदगी देने वाले लोग महीनो से जंतर मंतर पर बैठे है चाहे मौसम कैसा भी हो और सरकार के पास इनके लिए समय नहीं है |
कितना शर्मनाक है की देश के लिए ]बहादुरी से लड़ने वालो पर घूसखोर कायरो से लाठियां चलवाई गयी |
अपने सैनिको की इज्जत न करने वाली सरकार को धिक्कार है |