शुक्रवार, 7 अगस्त 2015

मैं राम और कृष्ण को अवतार और काव्य पुरुष दोनों मानता रहा हूँ और मानता रहा हूँ की वो दोनों सबके है और कण कण में है ।

पर संघ और बीजेपी ने बताया की वो केवल उनके है और कुछ वर्ग मीटर जमीन तक सीमित है ।

तो

कुछ जातियां बता रही है की वो तो केवल उनकी जाति के है । खबरदार जो किसी ने अपना कहा ।

बहुत भ्रम फ़ैल गया भाई । इस पर भी या तो कोई आयोग बने या फिर उन्हें ही दे दिया जाये उनका पेटेंट कर के ।

क्या विचार है ?????
जिस दिन मोदी ने संसद की सीढ़ियों पर सर झुकाया था मैंने कहा था की ये जिन के सामने सर झुकाते रहे जो उनके साथ किया वही संसद के साथ करेंगे ।
भक्त से लेकर मीडिया भक्त तक अलाप रहे है की जो कभी नहीं हुआ वो हो गया एक समझौते में ।

या तो नए है या अज्ञानी नादान है ।

लालड़ेंगा और लोंगवाल शब्द सुना ही नहीं होगा ।ऐसे कई समझौते इतिहास में हुए है और उन लोगो से जिनसे संभव नहीं दीखता था और वहां जहा जीवन दूभर था ।

सोचा दुन्नो का थोड़ा ज्ञान बढ़ा ही दे ।

हो सके की भोंपू बंद हो जाये । पर संघी भोंपू तो बस एक सुर में लगातार बजना जानता है जब तक नागपुर से ट्रैक न बदला जाये ।

समाज का असली चरित्र -------

समाज का असली चरित्र ----------

आप के बहुत ख़ास अपनी जाति के सम्मलेन या किसी आयोजन में लाखो खर्च कर देते है ।

किसी धार्मिक आयोजन या स्थल के लिए 25 लाख से करोडो तक दे देते है ।

पर ---आप के लिए और आप की तकलीफ के लिए वो गरीब बन जाते है या खुद परेशानी में पड़ जाते है ।

सड़क पर कोई इंसान मर रहा हो तो बगल से निकल जाते है पर जाती धर्म या गाय सुवर के लिए मारने मरने पर उतारू हो जाते है ।

पार्टी में लाखो की दारु बहा देते है और लाखो का खाना फेंक देते पर प्यासे को एक बोतल पानी देने के बजाय दुत्कार देते है और भूखे को भगा देते है ।
धर्म स्थल पर केवल फूल चढाने पर लाखो खर्च कर देते है पर मंदिर के बाहर हाथ फैलाये खड़े लोगो को अपशब्द कहते है ।

रेस्टोरेन्ट में वेटर को सैकड़ो टिप देते है पर मोची से चार आने के लिए लड़ते है ।

क्या क्या लिखूं ? पोथी लिखना पड़ेगा ।

ऐसी ही कुछ बाते जानकारी में आई और कुछ बातो से प्रभावित हुआ और संबंधो का मोल इसी कसौटी पर जाना तो लिख दिया ।

दोस्तियां झूठ और फरेब का पुलंदा है बस अभिनय देखो और अभिनय करो ।
पता नहीं भारतीय राजनीती का क्या दुर्भाग्य है की भारी जन समर्थन प्राप्त हर नायक और बड़ा बनने या युगांतकारी परिवर्तन करने का अवसर खो देता है अल्प दृष्टि और छोटे सोच के लोगों के चक्कर में ।

पता नहीं जनता के साथ ये छल कब तक होता रहेगा और कार्यकर्ताओ के साथ भी ।