रविवार, 25 मई 2025

ज़िंदगी_के_झरोखे_से

#ज़िंदगी_के_झरोखे_से
आज ये फ़ोटो एक साथी से मिली जब मैं 2014 मे  आज़मगढ़ में मुलायम सिंह यादव जी के लिए सुबह से रात १ बजे तक शहर की बस्तियों से लेकर गावो तक रोज़ २०/२५ छोटी से बड़ी तब सभाए और रणनीतिक बैठके कर रहा था उसी में एक ये सभा जो बसपा के उम्मीदवार के गढ़ में हुई थी और काफ़ी कुछ निर्णायक साबित हुई थी । विशाल सभा थी यह जिसमें काफ़ी मंत्री भी मौजूद थे । मुझे चूँकि आगे की सभाओं में भी जाना था तो अपने फ़ैसलाकुन भाषण के बाद मैं चल दिया पर आश्चर्य तब हुआ जब बड़ी संख्या में लोग मेरे साथ चल दिए और हाथ जोड़कर सबको मुश्किल से लौटा पाया मैं की और बड़े नेता बोलेंगे उन्हें  सुनकर जाइएगा । 
आज़मगढ़ में मेरे लोगों ने भी पूरा प्यार दिया और बाक़ी भी जहा जहा चला गया सबने मेरी इज्जत रखा । वरना अपने घरों पर पहले लगे झंडे कौन बदलता है गाँव में और दूसरी पार्टी का होते हुए भी न जाने कितने गाँवो ने मेरी वजह से मेरी पार्टी को वोट दिया । 
पर सब बेकार 
क्योंकि धृतराष्ट्र को और कुछ कहा दिखा था महाभारत में ?

जिन्दगी_के_झरोखे_से

#जिन्दगी_के_झरोखे_से

 4/5 नवम्बर 1992 को जब #मुलायम_सिंह यादव समाजवादी पार्टी के लखनऊ के बेगम हजरत महल पार्क मे आयोजित स्थापना सम्मेलन मे पार्टी के राश्ट्रीय अध्यक्ष चुन लिए गए उस वक्त की पहली माला और पहली फोटो ।
इस सम्मेलन मे काफी महत्वपुर्ण जिम्मेदारियां  थी मेरे ऊपर इसलिए मंच पर सिर्फ 4 बार ही आ पाया । पहला उद्घाटन के समय , दूसरा जनेश्वर जी के प्रस्ताव पर बोलने के लिए और तीसरा अध्यक्ष के चुनाव के वक्त और चौथा समापन भाषण और राष्ट्रगान के समय ।।
उस सम्मेलन मे समाजवाद पर मैने जल्दी जल्दी मे एक छोटी सी पुस्तिका लिख कर छपवा दिया था जिसकी कीमत संभवतः 4 या 8 आना ही थी शायद और वो करीब करीब सारी किताब लोगो ने खरीद लिया था । 
आसाम ,तमिलनाडू, केरल ,आन्ध्र प्रदेश ,कर्नाटक,
महारास्ट्र गुजरात ,उड़ीसा ,बिहार ,मध्य प्रदेश, राजस्थान , हरियाणा ,दिल्ली और उत्तर प्रदेश से लोग आये थे उस सम्मेलन मे जिसमे मुलायम सिंह यादव सहित तीन पूर्व मुख्यमंत्री थे और बहुत बड़े बड़े नाम वाले नेता शामिल हुये थे ।
पर हम उन्हे सब को सम्हाल कर रख नही पाये या हमारी छोटी और थोडी ही दूर तक की सोच उन्हे नही रख पायी वैसे परिवार के एक आदमी का खराब व्यवहार और अहंकार भी इसका एक कारण मान सकते है ।

जिन्दगी_के_झरोखे_से

#जिन्दगी_के_झरोखे_से

#जनता_दल के नेता और #प्रधानमंत्री पद के उम्मीदवार #विश्वनाथ_प्रताप_सिंह से उस दौर मे मुलाकाते भी खूब होती थी और कई सभाओ मे साथ रहने और भाषण देने का मौका मिला ।
पहली फोटो जनता दल की अलीगढ की सभा का जिसमे विश्वनाथ प्रताप सिंह के साथ चौ #अजीत_सिंह  #रामविलास_पासवान और हमारा भाषण भी हुआ ,दूसरी मे विश्वनाथ प्रताप सिंह के घर मे उनसे आगे के मुद्दो पर चर्चा करते हुये और ऐसे ही इटावा , मथुरा ,फतेहपुर और इलाहबाद तथा दिल्ली के वोट क्लब पर भी रैलियो मे साथ होने का मौका मिला । 
कुछ चित्र यहा ।

जिन्दगी_के_झरोखे_से

#जिन्दगी_के_झरोखे_से

पहले #हरियाणा के #मुख्यमंत्री और फिर #देश के #उप_प्रधानमंत्री चौ #देवीलाल का भी मुझे बहुत स्नेह प्राप्त था ,उनके हरियाणा भवन या राष्ट्रपति भवन के गेट नम्बर ३६ के अंदर उनके घर जाना होता था तो घर के पीछे के लॉन में मिलते थे बातें पूछते और कुछ खिला कर ही जाने देते ।
उप प्रधान-मंत्री के रूप मे उन्होने मेरे घर का कार्यक्रम बनाया , जनता दल क्या पूर्ण विपक्ष का एक सबसे बडा स्तम्भ और धुरी बन गए थे उस वक्त वो और देश के सारे नेता उनकी तरफ देखने लगे थे, वही प्रेरणा थे , वही फैसलाकुन होते थे और उन्ही की सहयता पर सब आश्रित हो गए थे ।
वो तो मुझे 1989 का चुनाव भी लड़वाना चाहते थे और संसदीय बोर्ड के अध्यक्ष के नाते उनका फैसला आखिरी होता और बोर्ड के सदस्यो मे से बहुमत मेरे पक्ष मे था ।
पर हरियाणा भवन मे बोर्ड की बैठक मे  मुलायम सिंह यादव जी ने ये कह दिया की मैं देश मे प्रचार करूँगा तो सी पी राय मेरा चुनाव देखेंगे और जब मैं मुख्यमंत्री हो जाऊंगा तो फिर एम एल ए और एम पी क्या होता है उनका ऐसा स्थान हो जायेगा । बोर्ड की बैठक से आकर पहले जॉर्ज फर्नांडीज साहब ने कहा की जब होने वाला सी एम आप को अपना चुनाव इंचार्ज बनाना चाहता है तो चुनाव मत लडो उसका काम देखो ।फिर विश्वनाथ प्रताप सिंह और अन्य भी निकल कर यही बोले ।
एक दिन सुबह 4 बजे अशोका होटल दिल्ली मे भी कुछ ऐसा ही हुआ और फिर दिल्ली एयरपोर्ट के वी आई पी लाऊन्ज मे ।
वो सब किस्से फिर कभी ।
मैं मुलायम सिंह यादव जी के पूरे चुनाव मे जान की बाजी लगाकर जुटा रहा कि एक दिन वो बहुत गुस्से मे बोले की यहा से इलाहबाद जनेश्वर जी के यहा चले जाओ वर्ना आप की यहा हड्डियां भी नही मिलेंगी भट्टे मे झोंक दिये जावोगे जैसा दुस्साहस आप कर रहे हो ।
मेरा जवाब क्या था वो जाने देते है 
पर मैं रिजल्ट तक वही डटा रहा ।
बल्की मुलायम सिंह यादव जी अपने क्षेत्र के दौरे मे मुझे साथ रखते और अपने से पहले मेरा भाषण करवाते थे ।जो क्रम 1993 के बद तक के चुनावो मे भी चलता रहा की उनकी सभावो मे उनसे पहले मेरा भाषण होने लगा सब जगह ।
और बाद मे या आज तक क्या हुआ वो लिखने की जरूरत इसलिए नही की सब जानते है ।

जिंदगी_के_झरोखे_से

#जिंदगी_के_झरोखे_से

1991/ 1992 की बात है, हम बुरी तरह हार गए थे जिसके बारे में मैंने पहले ही इशारा कर दिया  ।1991 के चुनाव मे मै प्रदेश कार्यालय मे बैठता था और चुनाव का काम भी देख रहा था ,बीच मे प्रचार के लिए या अन्य कामो के लिए भी चला जाता था । 
इसी मे ऐसा भी हुआ की सुब्रमण्यम स्वामी चंद्रशेखर जी की सरकार के मह्त्वपूर्ण मंत्री थे ।(ये किस्सा बाद मे लिखूंगा ) ।
सत्ता मे मुझसे कभी न मिले मुलायम सिंह यादव को सत्ता के आखिरी महीने मे मैं याद आ गया और मैं पार्टी का प्रदेश महामंत्री और प्रवक्ता बना दिया गया और ओर प्रदेश के चुनाव के काम लायक भी समझा गया ।चुनाव की हार के बाद आगरा मंडल का विशेस रूप से प्रभारी भी बना दिया गया पर जिम्मेदारी हर जगह पहुचने और अच्छा मीडिया कवरेज करवाने की होती थी दिल्ली मे ,प्रदेश मे और देश मे कही भी मद्रास से देहरादूण तक और  मुलायम सिंह यादव जी के साथ पूरे प्रदेश और देश के बहुत से प्रदेश के दौरे पर भी रहना होता  था और दिल्ली मे भी प्रेस के अलावा कुछ और काम सम्हालता था ।
मुलायम सिंह जी को जब दिल्ली आना होता था तो मुझे पहले ही दिल्ली पहुच कर यू पी भवन मे रुक कर कुछ इन्तजाम करने होते थे जिसमे पहले सम्राट होटल और फिर बाद मे अशोका होटल का सुईट बुक करना , एन एस जी जो चन्द्रशेखर जी ने पी एम पद से हटने से पहले दे दिया था ( क्यो और कैसे ये जाने देते है )  को खबर करना , उस समय सरकारी गाडी नही मिलती थी इसलिए आर के पुरम के सरदार जी से तीन अच्छी टैक्सी के बारे मे बोलना और जहाज के समय एयरपोर्ट जाकर उन्हे लाना और फिर जब तक दिल्ली मे हो साथ रहना ,लोगो से मिलवाना तथा वापसी पर एयरपोर्ट छोड़ने के बाद वापस घर जाना ।
डिटेल मे सब लिखना विश्वास भंग की श्रेणी मे आता है इसलिए वो मेरे बाद छपने वाली आत्मकथा या अनटोल्ड  स्टोरीस ऑफ इंडियन पोलटिक्स के लिए छोड़ता हूँ ।
ये किस्सा तब का है जब सम्राट छोड दिया था और अशोका होटल मे मुलायम सिंह जी रुकने लगे थे । दो कमरे वाला सुईट होता था जिसमे बाहरी ड्राइंग रूम में मे मैं बैठता था और दूसरे कमरे मे वो और एक अन्य साथी भी जो मुलायम सिंह के दिखाने को बड़े विश्वासपात्र थे जिसका कारण मैं आज तक नही समझ पाया ।कम उम्र के थे बंगाली थे । पर बहुत ही पावरफुल थे ।मेरे सामने ही मुलायम सिंह का उनको दिन भर मे कई बार फ़ोन आता था चाहे सत्ता रही हो या उसके बाद और वो अंदर जाकर बात करते थे । 
वो भी हमेशा होते थे दिल्ली आने पर साथ ही और अंदर होते थे 90% सिवाय जब खाना खाना या चाय पीना होता था तब हम सब साथ बाहर के कमरे मे बैठते थे । 
वो सज्जन कितने पावर फुल थे की दिल्ली के 
कैलाश हिल्स जैसी जगह जगह जहा बहुत ही बड़े लोग रहते है उन्होने 3 या 4मंजिल की बहुत ही भव्य कोठी बना ली थी और सत्ता के दौरान उत्तर प्रदेश के काफी सुरक्षा कर्मी उनके यहा ड्यूटी करते थे खैर उनको पद भी दिया गया था जिसका दर्जा संभवतः चीफ सेक्रेटरी के बराबर कर दिया गया था । और काफी संपन्न होने के बाद एक दिन अचानक कैलाश हाइट्स की कोठी बेच कर वो सम्भवतः न्यूजीलैंड चले गए परिवार के साथ या कही और पता नही पर सुना यही था ।
उनपर विस्तार से बाद मे लिखूंगा ।
अभी बस एक घटना तक सीमित करता हूँ ।
एक दिन की बात है मुलायम सिंह यादव जी अशोका होटल मे रुके थे और हा इन दोनो होटलो के सारे बिल पर हस्ताक्षर मुझे करने होते थे किसी के बिहाफ पर जो देश के बहुत बड़े सेठ है ।
उस दिन मुलायम सिंह से कोई बहुत ही खास मिलने आने वाला था ।सारे फ़ोन पहले मैं ही उठाता था इसलिए उन्होने मुझसे कहा की फला मिलने आयेंगे उनको सीधे बाहर से मेरे वाले कमरे मे पहुचा दीजियेगा और फिर चाहे जिसका फ़ोन आये मना कर दीजियेगा की मैं कही जरूरी काम से गया हूँ और कह गया हूँ की शाम को आऊँगा । मैने पूछा भी की अगर फला फला का फ़ोन आया तो ? 
तो बोले की कहा न की किसी का भी तो किसी का भी ।
कुछ समय हुआ और पहले चौ हरमोहन सिंह का फ़ोन आया ,फिर उदय प्रताप सिंह का , फिर ईशदत्त यादव का और इसी तरह अन्त मे राम गोपाल यादव का ।
मैने सबको वही जवाब दे दिया । पर चूँकि दिल्ली मे भी मैं हर जगह साथ जाता था तो लगता है इन लोगो को शक हो गया और ये लोग एक ही जगह बैठे थे ।एक साथ अशोका होटल आ गये । मेरी साइड का दरवाज खुला रहता था तो सब अंदर आ गए और मुझे काटो तो खून नही क्योकी मैं झूठ नही बोलता पर यहा नेता के आदेश का पालन कर रहा था । इन लोगो को तो होटल से बाहर ही पता लग गया था की मुलायम सिंह अंदर ही है क्योकी ब्लैक कैट कमांडो और गाडी बाहर पोर्च मे मौजूद थी । इन सबकी आंखो से लगता था की मुझे भस्म कर देगे । मैने अंदर जाकर बता दिया की ये लोग मना करने पर आ गए है ।
थोडी देर मे जो आये थे दूसरे कमरे के दरवाजे से सीधे बाहर निकल गए तो मैं फिर अंदर गया और मैने कहा की एक आप के भाई है और बाकी भी सब सांसद अब ये सब मुझे दुश्मन मांन लेंगे तो मुलायम सिंह बोले की चिंता मत करो ये सब मेरी वजह से है ।
आगे लिखने की जरूरत नही की राम गोपाल सहित सभी ने मेरे बारे मे क्या विचार बनाया होगा और फिर क्या किया होगा 
पर अफसोस की मुलायम सिंह ने कभी ये साफ नही किया की उन्होने मना किया था और न कभी रामगोपाल के प्रकोप से कभी बचाया जो पीठ पीछे ही होता रहा घातक तरीके से ,बल्की उनका नाम लेकर ही मेरा अहित करते रहे की उससे बात करो की क्यो नाराज है ।
जैसे मैं बच्चा हूँ या मन्द बुद्धि हूँ ।
यह नीचे की फोटो नैनीताल मे आयोजित प्रदेश कार्यकारिणी की बैठक के समय की है ।
इसपर भी लिखूंगा ।