रविवार, 26 जुलाई 2026

क्या अंधभक्तो की आंख खुलेगी

आइये #अंधभक्त गणों जरा याद करते है कि #आरएसएस और #भाजपा द्वारा चलाया गया भागे हुए ड्राइवर अन्ना का आंदोलन किस लिए हुआ था ? 

1- लोकपाल के लिए ! वो कहा है और क्या कर रहा है ? 
2- भ्र्ष्टाचार मुक्त भारत के लिए ? वो तो इस सरकार में कई गुना बढ़ गया है ! 

फिर देखते है कि नरेंद्र मोदी और मोहन भागवत की नेकरधारी फौज ने क्या क्या वादे किए थे और क्या हुआ ?
1- विदेश से काला धन 100 दिन में आने वाला था 
पर वो तो स्विस बैंकों और मॉरीशस जैसी जगहों पर कई गुना बढ़ गया है ।
2- हर भारतीय के खाते में 15 लाख मिलने वाले थे 
पर हर भारतीय कई गए कर्जदार हो गया है ।
3- 100 दिन में महंगाई कम होने वाली थी ।
पर वो तो बेतहाशा बढ़ गयी है ।
4- 100 दिन में सारे भृष्टाचारी जेल जाने वाले थे और फ़ास्ट ट्रैक कोर्ट में फैसला होना था ।
पर भृष्टाचारी तो बढ़ गए है और पूरी सरकार उसमे लिप्त है ।
5- 100 शहर स्मार्ट सिटी बनने वाले थे ।
पर हर बारिश बता देती है कि सारे शहर नरक बने हुए है ।
6- 2022 तक किसानों की आय दुगुनी होने वाली थी 
पर रोज कितने किसान आत्महत्या कर रहे है 
7-हर साल 2 करोड़ रोजगार मिलने वाले थे 
पर 45 साल की सबसे बड़ी बेरोजगारी है 
8- पाकिस्तान से एक सर के बदले 100 सिर आने वाले थे 
पर कितने आये आप को पता होगा 
9- चीन को लाल आंख दिखाने वाले थे 
पर चीन लद्दाख और अरुणाचल में कब्जा करता जा रहा है और मुह से चीन का च भी नही निकला उल्टे उसे क्लीन चिट दे दिया कि न कोई आया है और न कोई घुसा है 
फिर चीन से वार्ता किस बात के लिए हो रही है ?
10 - पेट्रोल 30 रुपये लीटर देने का वादा था 
पर पेट्रोल 100 के पार चला गया है 
11- डॉलर जब 60 से 65 तक था तो उसके मुकाबले रुपया गिरने पर देश की इज्जत गिरती थी 
डॉलर के मुकाबले रुपया 100 के करीब पहुच गया 
12 - देश पर कर्जा होने की चिंता थी 
पर 2014 में देश पर जो कर्जा केवल 54 लाख करोड़ था वो आरएसएस की सरकार में 230 लाख करोड़ हो गया 
ये पैसा कहा गया 

ऐसे सैकड़ो वादे देश से किये गए थे पर हुआ क्या 
मिली नितांत असफल अयोग्य और दिवालिया सरकार 
देश की अर्थव्यवस्था बर्बाद हो गयी 
देश की विदेश नीति बर्बाद हो गयी 
देश की सुरक्षा नीति बर्बाद हो गयी 
देश की शिक्षा नीति बैबद हो गयी 
देश का भाईचारा बर्बाद हो गया 
देश का विकास बर्बाद हो गया 
देश की वैज्ञानिक सोच बर्बाद हो गयी 

अभी ताज़ा ताज़ा 

आप के पेट्रोल में 20℅ एथिनॉल मिलाया जा रहा है जिससे गाड़ी का एवरेज कम हो गया और गाड़िया खराब हो रही है ।

इस सरकार के समय मे कुल 152 पेपर लीक हुए है जिससे 7.5 करोड़ नौजवान प्रभावित हुआ है ।

शिक्षा का बजट कम कर दिया गया है ।
इतना कम की उसके बराबर पैसा नीट की तैयारी करने वाले छात्र एक साल में तैयारी में खर्च कर देते है ।
फौज में हजारों जगह खाली है पर 4 साल वाली अग्निवीर नौकरी देकर फौज को बर्बाद किया जा रहा है जिसके खिलाफ सभी जर्नल है ।
दो पूंजीपतियों को देश की सारी संपदा और जनता के पैसे से बने पोर्ट एयरपोर्ट स्टेशन इत्यादि दिये गए है और पूरा देश दी पूंजीपतियों के नाम किया जा रहा है 
क्योकि इनके आदर्श गोलवलकर ने लिखा था कि देश की सारी पूंजी एक दो पूंजीपतियों को से दो और जनता को इतना बदहाल बना दो को सिर्फ खाना मिल जाने को वो सरकार का एहसान माने 
तो वही किया जा रहा है और 80 करोड़ से ज्यादा लोगो को 5 किलो अनाज देकर एहसान से दबाया जा रहा है और उन्हें निकम्मा और निठल्ला बनाया जा रहा है ताकि वो कोई काम करने लायक ही नही बचे और 5 किलो की आस में सरकार के गुलाम बन रहे है ।

बहुत कुछ है कहने को 
पर 
आखिरी बात 
आरएसएस और भाजपा 2 एम पी वाली पार्टी थी परंतु भगवान राम के नाम पर दंगे करवा कर यहाँ तक पहुची 
परन्तु अपने भ्र्ष्टाचार से भगवान राम को भी नही बख्शा 
1-जब राम मंदिर आंदोलन चल रहा था तो 1600 करोड़ रुपया इकट्ठा हुए था वो कहा गया पता ही नही चला ।
उस समय भी लोगो ने सोने चांदी की शिलाएं और खड़ाऊं भेंट किया था वो पता नही कौन खा गया ।
2- राम मंदिर आंदोलन में जब अयोध्या में गोली चली थी तो केवल 16 जाने गयी थी जबकि वो भी बुरा हुआ था और वो जाने नही जानी चाहिए थी 
परन्तु इन लोगो के द्वारा इमारत तोड़ने और उसके बाद किये गए दंगे में 2000 से ज्यादा जाने गयी थी ।लाखो करोड़ की संपत्ति नष्ट हुई थी , दुनिया के दूसरे देशों में मंदिर टूटे थे और देश की साख खराब हुई थी तथा देश की एक बड़ी आबादी का दिल टूटा था ।

-- उस वक्त की सरकार ने भी कहा था कि या तो दोनो पक्ष आपस मे बात कर मामला सुलझा ले या फिर अदालत पर छोड़ दे 
तब आरएसएस, भाजपा और हिन्दू परिषद ने कहा था कि न बात करेंगे ,न अदालत जाएंगे ये आस्था का मामला है इसे जबरदस्ती लेंगे ।
3- जब चंद्रशेखर जी प्रधानमंत्री थे तो उन्होंने दोनो पक्षो को साथ बैठा कर मामला सुलझा दिया था जिसपर मुस्लिम पक्ष ने हस्ताक्षर कर दिया पर हिन्दू परिषद ये कह कर बाहर निकला कि अभी आपस मे राय करके आते है परंतु वापस ही नही आया क्योकि इरादा राम मंदिर नही केवल राजनीति था ।
वर्ना तभी राम मंदिर बन गया होता और उन्हें दंगा करने का मौका नही मिला होता ।।

4- जब दंगो और झूठ के फैलाव के बाद इनकी सरकार बन गयी तब यही आरएसएस भाजपा और हिन्दू परिषद कहने लगे कि सबको अदालत का फैसला मानना चाहिए 
और 
मंदिर इन लोगो के कारण नही बल्कि अदालत के फैसले के कारण बना ।

5- मंदिर बनाने में लिए जमीन की खरीद शुरू हुई तो जो जमीन 15 मिनट पहले 2 करोड़ की किसी ने ख़रीदी वही 15 मिंनट बाद 18.5 करोड़ की खरीदी गई 
जो जमीन 3 करोड़ की खरीदी गयो वही जमीन कुछ ही समय मे 22 करोड़ की खरीदी गई 
मंदिर से 6 किलोमीटर दूर पता नही किस काम के लिए इसी तरह बहुत महंगी जमीन 100 करोड़ की खरीदी गई 
जब अंदर बनने लगा तो उसका काम देख रहे इंजीनियर वर्मा ने आरोप लगाया कि 40 से 50 % तक कमीशन लिया जा रहा है ।
अबु धाबी जो बहुत महंगा है वहाँ विशाल मंदिर 800 करोड़ में बन गया परन्तु राम मंदिर 2000 करोड़ से ज्यादा में बना ।

6- मंदिर में अकाउंट का काम देखने वाले ने 2021 में ही आरोप लगाया कि रोज 5 लाख की चोरी हो रही है तो उसे हटा दिया गया 

मंदिर में कुंभ के समय रोज करोड़ो का चढ़ावा आया 
हजारों लोगों ने सोने और चांदी की ईंट और पता नही क्या क्या दिया 
पर 
इन लोगो ने #भगवान_राम को भी नही बख्शा और उनके लिए आंदोलन के पैसे , मंदिर के लिए जमीन की खरीद के पैसे , निर्माण के पैसे और भगवान के चढ़ावे के हजारों करोड़ रुपये चुरा लिये ।
इतनी बड़ी रकम किसी व्यक्ति के बस की बात नही है । ये स्पष्ट होना है कि ये हजारों करोड़ आरएसएस को मिला या भाजपा को मिला ।
क्या इनके पंचतारा होटल नुमा बड़े बड़े दफ्तर इसी पैसे से बने है  

पूरे देश के करोड़ो रामभक्तों की आस्था को हिला कर रख दिया इन लोगो ने 
भगवान राम की शक्ति को भी चुनौती दिया है इन लोगो ने ।

बहुत कम लिखा है 
क्या इतना सब पढ़ और जानकर भी कोई अंधभक्त रह सकता है अभी भी 
या 
ये सब जानकर आरएसएस भाजपा देश से खत्म हो जानी चाहिए हमेशा के लिए ?
सवाल ये है ।

मंगलवार, 23 दिसंबर 2025

मंडलीय सम्मेलन

#जिंदगी_के_झरोखे_से 

#1991_मंडलीय_सम्मेलन_और_14_लाख_की_थैली 

बात 1991 के चुनाव के बाद की है पता नही वो घटना अभी तक मैने लिखा या नही जब रात भर चुनाव परिणाम देखने के बाद मैं सुबह ही मुलायम सिंह यादव जी के घर पहुचा था और इतने बुरे परिणाम से वो बेचैन थे ,जबकी पहले ही दिल्ली से लौटते हुये शिवपाल जी कर घर पर उन्हे मैं ऐसे परिणाम की आशंका जाता चुका था प्रदेश का चुनाव देखने के कारण पर सारे अधिकारी और इंटेलीजेंस एजेंसियां उन्हे 125 से 150 तक की रिपोर्ट दे रही थी ।
केवल 29 एम एल ए और चंद्रशेखर जी समेत केवल 4 एम पी सीट सत्ता मे रहते उनको विचलित कर गई थी ।
मिलते ही बोले कि अयोध्या के कारण ये तो सारी जनता नाराज हो गई है इत्यादि । मैने कहा कि छोटा हूँ पर एक बात कहना चाहता हूँ कि अब हमे इसी स्टैंड पर कायम रहना चाहिये । आप ने कुछ बुरा नही किया बल्की मुख्यमंत्री होने के कारण संविधान की रक्षा किया है और उस पर आप को गर्व होना चाहिये । ये ठीक है की संघ अभी जहरीला प्रचार कर कामयाब हो गया पर कल जब लोग समझेंगे की देश तो संविधान और कानून से ही चल सकता है न कि दंगो से तो यही प्रदेश आप को फिर वापस लाएगा ,और हम दोनो चाय पीने बैठ गये और उसी समय ये भी तय हुआ की मात्र 7 दिन मे चुनाव लड़े विधनसभा के 425 और लोक सभा के 85 लोगो की बैठक बुला लिया जाये (इसका किस्सा अलग से ) ।कल्याण सिंह की सरकार बन गई थी ।
पर सरकार जाने के बाद बडा संकट था और पार्टी चलाने मे दिक्कत हो रही थी क्योकि इस मुख्यमंत्री काल मे मुलायम सिंह जी ने पैसे के बारे मे सोचा ही नही था और जहा तक मुझे पता है सिर्फ एक मामले मे ओम प्रकाश चौटाला ने कुछ दिया था जो दिल्ली से टी सीरीज कैसेट के डिब्बो मे ले जाया गया था और जो आया भी वो चुनाव मे खर्च हो गया था । दो बार तो त्योहार के मौके पर भी हम दफ्तर के स्टाफ को तन्ख्वाह नही दे पाये तब मैने तपन दादा को कुछ रुपए दिये की वो जगजीवन और शरमा इत्यादि बराबर बराबर बांट ले और त्योहार मना ले ,तपन अब बुजर्ग हो गये है पर है और जगजीवन तो आज बहुत रईस भी है और एम एल सी भी । इसी तरह मुलायम सिंह जी के घर का फ़ोन कट गया और कई दिन बाद जुड़ा तब एक दिन मैने महामंत्री के रूप मे लोगो का आह्वान कर दिया की जितना मन हो चाहे 5/10 रुपया ही सही मुलायम सिंह यादव जी को मनी ऑर्डर करे ।जो भी पहुचा मैने पूछा नही ।
2 महीने बाद ही मुलायम सिंह यादव जी एक सामाजिक कार्यक्रम के लिये आगरा आये और जैसा की हमेशा होता था कि अन्त मे प्रेस से मुलाकात मेरे निवास पर होती थी । उस दिन भी हुयी ।
प्रेस के बाद इटावा जाना था तो बोले की आप भी चलिये रास्ते मे बात करते चलेंगे और आज ही ट्रेन पकड़ कर लखनऊ जाना है तो आप उसके बाद वापस आ जाईयेगा ,ऐसा अक्सर ही होता था उस दौर मे । मुझे ऐसा याद आता है कि उस दिन देश के जाने माने कवि और हमारे सांसद उदय प्रताप जी भी साथ थे जिन्होने बाद मे मुझसे शिकायत किया था कि रास्ते भर आप दोनो ही बात करते रहे और मैं तो महज श्रोता बना रहा ।
हम लोग इटावा सिचाई विभाग के डाक बंगला पहुचे जहा शायद मुलायम सिंह यादव जी के आने की खबर नही दी गई थी तो जिस सुईट मे ये रुकते थे पुलिस के किसी डी आई जी को आवंटित हो गया था । मैने वहा के व्यवस्थापक को हड़काया कि आवंटन किसी का हो पर जब प्रोटोकोल मे बडा व्यक्ति आ जाता है तो वो आवंटन अपने आप निरस्त हो जाता है ।खैर डरते डरते की साहब मेरे खिलाफ कुछ न हो जाये उसने कमरा खोल दिया ।मुलायम सिंह जी अंदर गये और बस बाथरूम होकर बाहर आ गये कि अच्छा मौसम है ,बाहर पार्क के चबूतरे पर बैठते है जबकी जून आखिर या जुलाई का आरम्भ था और तेज गर्मी थी ।
खैर हम लोग वही बैठ गये । मुलायम सिंह यादव जी का मानना था को कम से कम एक साल चुपचाप आराम किया जाये और राजनीतिक गतिविधिया बंद रखा जाये क्योकि अभी कही भी निकलने पर जनता का गुस्सा झेलना पड़ सकता है ।
मैने कहा की मैं इस बात से सहमत नही हूँ और वही मैने बीजेपी तथा आरएसएस के गढ आगरा से ही तत्काल कार्यक्रम शुरु करने को आमंत्रित किया । वो सहमत नही थे पर मेरे जोर देने पर मान गये की प्रदेश कार्यकारिणी और वरिष्ठ नेताओ की बैठक कर इसपर बिचार हो जाये तो मैने कहा की देर क्यो हो तत्काल बुला लिया जाये और शायद एक हफ्ते बाद ही वो बैठक बुला ली गई लोहिया ट्रस्ट के हाल मे ।वहां मैने सबसे पहले अपनी बात रखा और तर्क की क्यो तत्काल बाहर निकल कर सक्रिय हुआ जाये और आगरा से ही क्यो । तब कुछ लोगो ने कहा की आगरा मे पार्टी नही है और पार्टी का कोर वोटर नही है कार्यक्रम फ़ेल हो सकता है तब मैने आश्वस्त किया कि आगरा मंडल का कार्यकर्ता सम्मेलन रखा जाये और बाकी सब मुझ पर छोड दिया जाये और उसी मे मैने प्रस्ताव रख दिया कि पार्टी चलाने के लिये 5 से 10 लाख तक की थैली भेंट करने की कोशिश भी की जाये और कार्यक्रम तय हो गया सम्भवतः अगस्त की कोई तारीख तय हुयी ,हम लोग मई अन्त मे चुनाव हारे थे ।
मैं वापस आगरा आया और सबसे पहले कागज पर योजना और अनुमानित बजट तथा अपना कार्यक्रम बनाया और दूसरे दिन ही आगरा का सर्किट हाउस तथा सूर सदन हाल बुक कर दिया तथा बाहर पार्किंग मे लगाने के लिये पंडाल और बैठने का इन्तजाम की भीड ज्यादा हो तो अव्यवस्था न हो और अपने एक दोस्त के बात कर गैलरी से बाहर के पंडाल तक देश के किसी भी कार्यक्रम मे पहली बार क्लोस सर्किट टीवी का इस्तेमाल की व्यव्स्था भी । शाम को आगरा मे जो थोडी बहुत पार्टी थी जनता दल टूटने के बाद जिसमे अधिकतर मेरे द्वारा जोड़े गये 8/10 लडके थे उनकी मीटिंग किया और सबको काम अभी से बता दिया । अपने एक दोस्त के होटल मे आने वाले लोगो के लिये 5000 पैकेट खाना बनाने की बात तय कर दिया ।
आगरा के अन्य नेताओ से कह दिया की मुलायम सिंह के आगरा आने से लेकर जाने तक ठहरना , पूरे सम्मेलन का खाना, शहर भर मे स्वागत द्वार और स्वागत , वाल राइटिंग, गाडियाँ इत्यादि सब मेरी जिम्मेदारी और बाकी लोग थैली के लिये धन एकत्र करे ।
इसके बाद मैं मंडल भर के सभी जिलो के दौरे पर निकल गया सभी जिला अध्यक्षो को बता कर और तब तक मंडल बटा नही था अलीगढ़ भी इसी मे था । सभी जिलो मे मैं सम्मेलन और थैली के लिये माहौल बनाने मे कामयाब रहा ।
सम्मेलन से दो दिन पहले से पूरे महात्मा गांधी मार्ग पर वाल राइटिंग मैने खुद भी किया ,खम्भो पर चढ़ चढ़ कर झंडे और बैनर मैने खुद भी बाधे ताकी कार्यकर्ताओ मे उत्साह रहे क्योकि वो धन का नही जन का जमाना था और राजनीती के ये सब काम कार्यकर्ता ही करते थे और हम जैसे लोग तो छात्र राजनीति से ही करते आ रहे थे ।
कार्यक्रम के एक दिन पहले कई दिनो से आता मुलायम सिंह जी का फ़ोन फिर आया कि अभी भी कार्यक्रम रद्द कर दीजिये फेल जो जायेगा और मैने कहा की आप ट्रेन पकड़ लो रात को सुबह मैं स्टेशन पर मिलूंगा ।
उस दिन सुबह 4 बजे मैने कार्यक्रम स्थल की व्यवस्थाये देखा और खुद मंच के पीछे का बडा बैनर टंगवाया और फिर स्टेशन रवाना हो गया । मुलायम सिंह जी और साथ मे आज़म खान साहब आये थे । अपनी योजना के अनुसार पहले स्टेशन के सामने किले के गेट पर अम्बेडकर मैदान मे बाबा साहेब अम्बेडकर की मूर्ति पर इन लोगो से माल्यार्पण करवाया और फिर सर्किट हाऊस पहुचा कर ये कह कर घर आ गया कि आप लोग तैयार हो जाइये और लोगो से मिलिये 10 बजे  निकलेंगे हम लोग ।
घर आया थोडी देर लेटा पर नीद कहा तो उठ कर नहा धोकर तैयार हो गया और 9,45 पर फिर सर्किट हाऊस पहुच गया ।
हम लोग बड़े काफिले के साथ वहाँ से निकले और महत्मा गांधी तथा अन्य महापुरुषो की मूर्तियो पर माल्यार्पण करते हुये काफिला महात्मा गांधी मार्ग पर निकला जिसपर समाज के सभी समाजो तथा धर्मो की तरफ से अलग अलग चौराहो पर स्वागत द्वार पर स्वागत हुआ तथा दो स्थानो पर मुलायम सिंह जी को सिक्को से तौला भी गया और जब हम लोग कार्यक्रम स्थल पर पहुचे तो बाहर ही बडा हुजूम था । अंदर गये तो एक एक सीट पर किसी तरह अटक कर दो दो लोग बैठे थे और सारी सीढियां ही नही बल्की मंच के सामने का खाली स्थान भी भरा था और मंच पर भी तिल रखने को जगह नही थी क्योकि सारे पूर्व और वर्तमान सांसद , विधायक , सभी प्रमुख पदाधिकारी तथा अध्यक्ष इत्यादि मंच पर आ गये थे और मेरे तथा पड़ोस मे रहने वालो के बच्चे भी जबकी मेरे प्रोफेसर पिता तथा पत्नी इत्यादि भी नीचे कार्यकर्ताओ मे बैठे थे ।
दो बात का जरूर उल्लेख करना चाहूँगा कि  मैने अपने कार्यकर्ताओ से कहा था कि जिसकी जहा जिम्मेदारी है वही रहेगा यहा तक की मुलायम सिंह भी सामने आ जाये तो नही हिलना है और बाद मे मैं सबको मिलवाउंगा और साथ फोटो भी करवाउंगा , दूसरा मैने ऐसी व्यव्स्था किया था कि पानी के लिये बस इशारा करिए आप तक पहुच जायेगा और खाने के समय भी सब अपनी जगह ही रहे वही अधिक से अधिक 15 मिनट मे सबको खाना और पानी मिल जायेगा और वही हुआ भी किसी कार्यक्रता ने अपना काम नही छोडा और सारा वितरण मेरी योजना अनुसार ही हो गया ।
मुलायम सिंह जी चाहते थे की अपने स्वागत भाषण और राजनैतिक भाषण के बाद कार्यक्रम का संचालन मैं ही करू पर मेरी ये कमी है की कोई जिम्मेदारी लेने के बाद उसके हर पहलू पर निगाह रखना तथा समय पर व्यवस्थित रूप से चीजो करवा लेना मेरी बेचैनी मे शामिल रहता है इसलिए भाषण के बाद और पूरे कार्यक्रम का ब्योरा देने के बाद मैने पूर्व सिचाई मंत्री बाबू राम यादव से संचालन का आग्रह किया और फिर बाकी सब व्यवस्थित करने मे लग गया जिसका जिक्र ही अखबारो ने किया की सी पी राय मंच पर रहने के बजाय लगातार भाग दौड करते रहे ,करता भी क्यो नही कोई बडी और प्रशिक्षित तथा संपन्न पार्टी तो थी नही ,साधन विहीन ,कमजोर पार्टी थी और आगरा मे सब नये नौजवान थे मेरे जोड़े हुये तो लगता था कही परेशान न हो जाये ।
हा दो दिन पहले लगातार 2/3 घंटे बैठ कर मैने राजनीतिक प्रस्ताव , आर्थिक प्रस्ताव इत्यादि लिख कर प्रिंट करने भेज दिया था और फ़ाईल और कार्यक्रम के पहले वाली रात कई लोग फाइल बनाने मे लगे रहे मेरे घर के बाहर बनी झोपड़ी मे बैठ कर जिसमे कुछ लोग बाद मे बहुत महत्वपूर्ण हो गये और मेरे प्रोफेसर पिता रात को उन सभी को बना बना कर ट्रे भर भर चाय पिलाते रहे और साथ बैठ काम भी करवाते रहे और घर के अंदर मेरी पत्नी और बच्चे भी क्योकि 5000 फाइल बननी थी ।
कार्यक्रम के प्रारंभिक औपचारिकताओ के बाद थैली भेंट होनी शुरु हुयी । वादा किया था कि 10 लाख की कोशिश होगी पर 5 तो होगा ही और भेट किया सब लोगो ने मिल कर 14 लाख जिसके लिये मैने पहले खरीदी अटैची जिसकी दुकान पास ही थी वापस भेज कर बडी अटैची मंगवाया और मथुरा के पंडित राधेश्याम शर्मा ने 50 ग्राम सोना भेट किया ।
दिनभर तमाम नेताओ का भाषण हुआ और अन्त मे मुलायम सिंह जी का नम्बर आया ।वो बहुत भावुक हो गये थे ऐसे स्वागत और कार्यक्रम से तो बोले कि मैं पहले भी कई बार आगरा आया हूँ , चौ चरण सिंह के साथ भी आया जब तीन विधायक थे तो कार्यक्रम रतन मुनी जैन इंटर कालेज मे हुआ था । मैं कल तक सी पी राय से कहता रहा की कैन्सिल कर दीजिये पर इनका आत्मविश्वास था और बोले की बस आप आ जाइये और आज सर्किट हाऊस से यहा तक हर चौराहे पर स्वागत हुआ । यहा भी इतनी भीड हो गई है को अंदर ,बाहर गैलरी और उसके बाहर का पंडाल भरा है और पहली बार मै ये देख रहा हूँ की बाहर वाले लोग भी सब लोग बाहर लगे टीवी पर सब कुछ देख और सुन रहे है । सी पी राय ने उतने अच्छे सब प्रस्ताव लिखे है और बहुत अच्छा सारा इन्तजाम किया है और अनुशासन के साथ सारा इन्तजाम ।
मेरी निगाह मे  यह कार्यकम भीड से ,प्रस्ताव से अनुशासन से , व्यव्स्था से और राजनीती के लिये सर्वश्रेष्ठ कार्यक्रम है और इसका श्रेय केवल सी पी राय को जाता है ।मैने सोचा था 5 लाख नही तो कुछ तो मिलेगा ही पार्टी चलाने को पर यहा तो 5 क्या 14 लाख रुपया और सोना भी मिला है । सी पी राय ने ये कैसे सम्भव किया इनसे बाद मे पूछूंगा पर पार्टी आज से फिर चल गयी और इसके लिये सी पी राय को याद रखा जायेगा ।
नेता के सामने भीड हो और सब अच्छा हो तो जोश तो आ ही जाता है ।जबरदस्त भाषण दिया मुलायम सिंह जी ने और उनके पहले आज़म खान साहब ने भी । काफी बडी संख्या मे नेता लोग बोले ।
सम्मेलन के बाद मैने सूर सदन के बाहर पोर्च से सार्वजनिक सभा को संबोधित करने का इन्तजाम पहले से ही कर रखा था तो मुलायम सिंह को पोर्च पर ले गया । ये बात उनको पहले से नही बताया था ।शाम करीब 5 बज रहा था एम जी रोड पर भीड का समय था और सभा के कारण बडा जाम लग गया ।
सभा के बाद मेरे निवास पर प्रेस से वार्ता और भोजन था । अपने निवास पर मैने कार्यकर्ताओ से उनको मिलवाया ।मुलायम सिंह जी गदगद थे और मेरे सभी कार्यकर्ता भी पर जब स्टेशन उनको छोड़ने गया अपने निवास से तब तक मेरे गले की आवाज मेरा साथ छोड चुकी थी पर तसल्ली इतनी थी की पार्टी को मैने फिर से रफ्तार दे दिया था धन से भी और आत्मविश्वास से भी और खासकर मुलायम सिंह जी का आत्मविश्वास लौट आया था जो बहुत जरूरी था और फिर हम लोग निकल लिये पूरे प्रदेश मे ।
मैने तो बस इमानदारी से अपना कर्तव्य निभाया था ।
कुछ छूट गया होगा तो वो आत्मकथा मे मिलेगा ।

विशेष : तब विपक्ष में अखबार एक कार्यक्रम का डेढ़ पेज तक कवरेज देते थे ।

शुक्रवार, 10 अक्टूबर 2025

धरतीपुत्र

मुलायम सिंह यादव के बारे मे कहा से बात शुरु करे ? उनकी जिन्दगी के इतने छोर है और सब उलझे हुये ।एक नितांत गरीब घर मे और अभाव मे पैदा होकर 1967 मे विधायक बन जाना और 1977 की सरकार मे सहकारिता मंत्री से चला सफर 1989 मे मुख्यमंत्री बनकर रुकता नही है बल्कि बार बार सरकार बनाता है और एक समय ऐसा आता है जब 39 सांसद होते है पार्टी के तथा बंगाल बिहार महाराष्ट्र उत्तराखंड और मध्यप्रदेश मे भी विधायक हो जाते है और लगता था की पार्टी राश्ट्रीय स्तर पर पहुच जायेगी ।फिर एक समय आता है जब पूर्व प्रधानमंत्री देवगौड़ा जी ,मुख्यमंत्री नितीश कुमार ,लालू यादव और अजीत सिंह सहित कई लोग उन्हे नेता मान लेते है और समाजवादी पार्टी के नाम और झंडे की भी स्वीकार कर लेते है ।ऐसा हो गया होता तो देश मे एक नया विकल्प बन गया होता पर कुछ लोगो ने साज़िशन फ़ेल कर दिया ।
वो गरीबी और परेशानी से निकले तो गरीब का दर्द नही भूले ।पहली सरकार मे किसानो को तकलीफ दे रही चुंगी माफ कर दिया तो डा लोहिया का अनुसरण करते हुये गरीब और गाव की महिलाओ के शौचालय का मुद्दा प्रमुखता से उठाया ।दवा पढाई मुफ्ती होगी रोटी कपडा सस्ती होगी का डा लोहिया का मन्त्र उन्हे याद रहा ।समाजवादियो की मांग थी की रोजगार दो या बेरोजगारी भत्ता दो तो उन्होने वक्त आने पर 12 हजार भत्ता ही नही दिया बल्कि गरीब कन्याओ को 30 हजार कन्याधन भी दिया ।उन्होने ग्रामिण क्षेत्रो को स्कूल कालेज बनाने को सरकारी प्रोत्साहन दिया तो किसान की फसल सुरक्षित रहे इसके लिये कोल्ड स्टोरेज को भी प्रोत्साहित किया ।चिकत्सा के क्षेत्र मे बडा काम किया तो अपने समय मे नौकरिया भी खूब निकाला ।
जितने अदर से मुलायम थे निर्णय लेने मे उतने ही कठोर थे ।वो अयोध्या मे कानून व्यव्स्था का सवाल हो या सीमा पर पाकिस्तान के खिलाफ कार्यवाही वो विचलित नही हुये । उन्होने ने वैचारिक विरोध को दुश्मनी नही माना और विरोधियो का भी सम्मान किया था उनके भी सभी जायज काम किया ।
मुलायम सिंह मे अहंकार रंच मात्र नही था और सभी से जुडे रहना , अपनो को सहेज कर रखना तथा गैरो को अपना बना लेना उनकी विशेषता थी इसीलिये उन्होने गरीब से निकल कर उस उंचाई को छुवा ।
राजनीतिक तौर पर वो किसी के साथ जो भी व्यव्हार करते थे पर सामजिक सम्मान का ध्यान रखते थे ।
जब उनका पद छीन लिया गया उसके बाद वो अदर से टूट गये थे पर फिर सम्हल कर अपने बेटे और अपनी बनायी पार्टी का साथ दिया पर कही न कही पार्टी और परिवार मे टूटन से वो दुखी थे और क्यो न होते जब एक समय सभी ने उनका साथ छोड दिया था ।
धरतीपुत्र बिरले ही होते है और दिल से जुड़ कर रिश्ते निभाने वालो का राजनीति मे अभाव है ऐसे मे मुलायम सिंह यादव का चले जाना उनके बिना स्वार्थ जुडे हुये लोगो के लिये एक सदमे के समान है ।

रविवार, 28 सितंबर 2025

जिंदगी के झरोखे से वो बच्चा

#जिंदगी_के_झरोखे_से

आज कुछ झलकियाँ जानी, देखी या भोगी हुई   -  वो बच्चा 

1-वो भी बच्चा था , तब गाँव मे रहता था और गाँव मे आप किसी भी जाती मे और किसी भी स्तर के परिवार मे पैदा हुये हो गाय भैस को अन्य बच्चो के साथ चराने या तालाब मे नहलाने ले जाना एक काम होता ही था जैसे खेत के काम मे हाथ बताना, अगर घूरा उठ रहा है तो ,अगर गन्ना पेरा जा रहा हो या पानी के लिए रहट चल रही हो तो बैलो के पीछे पीछे घंटो चलना ,गुड बनते वक्त आग मे ईधन झोंकना , दवाई के समय खलिहान मे बैलो को हाँकना , कटाई पर चाहे छोटा बोझा ही लेकर आना ,मक्के की बाल छीलना , चारा काटना, खेत की रखवाली के लिए कुछ देर मचान पर बैठना , गाय बैल भैस को दाना पानी देना इत्यादि सब मे लगना ही होता था ।शायद फिल्मो वाले गाँव के जमीन वाले किसानो के परिवार भी कही होते होंगे ही । ये बच्चा भी सब करता था ।  उसको भी खेलना अच्छा लगता था और खेलते वक्त गाँव मे बच्चो मे जाति की रेखा नही थी । लाखन पाती , पेड पर चढ़ दूसरे को छू लेना , गिट्टी फोड ,गिल्ली डंडा ,कुश्ती और कबड्डी ही खेल थे गाँव के ।
उस दिन शाम को दो टीम बन कर कबड्डी हो रही थी खलिहान मे और खेल खत्म होते होते सूरज डूबने लगा था । सब बच्चे साथ साथ लौटे और वह बच्चा भी लौटा । और बच्चो के पिता किसान थे पर उस बच्चे के पिता अध्यापक थे । उन्होने जोर से चीक कर पूछा कहा थे ? बच्चे ने जवाब दिया -खलिहान मे सब फला फला थे और आज कबड्डी थी ,अभी खत्म हुई ।उसके पिता ने कहा की अब तो अन्धेरा होने को है पहले क्यो नही लौटे ? इस पर वह बच्चा चुप हो गया क्योकी इसका कोई जवाब उसके पास नही था । फिर सवाल आया कि बोलते क्यो नही ? फिर भी जवाब नही था ।
बस पास मे रखी लाठी पिता के हाथ मे थी और उस बच्चे के शरीर पर अनगिनत निशान छोड कर ही लाठी वापस अपने स्थान पर गई । निशान भी ऐसे की रात को सोते वक्त चारपाई भी सजा दे रही थी ।
बाकी किसी भी बच्चे के घर से कोई चीख सुनाई नही पड़ी ।  हो सकता है उन बच्चो को घर के अंदर ले जाकर सजा मिली हो ।
2-वो बच्चा शहर आ गया था अपने पिता के साथ । गाँव से आया था और गाँव मे सर पर चुटिया रखना शायद कोई धार्मिक मजबूरी थी या परम्परा थी या पंडीत जी द्वारा पैदा किसी अन्धविश्वास की उपज थी ।
शहर मे स्कूल के बच्चे उस बच्चे पर हंसते और उसका मजाक ही नही उडाते बल्की जब तक पीछे से चुटिया खींच देते थे ।
बाल कटवाने का दिन आया ।घर के पास ही नाई था । पिता वहाँ बैठा कर और काटने का पैसा देकर घर चले गए ।बाल काटने का नम्बर आया तो काटते हुये नाई ने पूछा की चुटिया छोड़ना है या काटना है ? वो बच्चा मौन रहा और मौन को सहमती मांन नाई ने चुटिया भी काट दिया ।बच्चा अंदर से खुश कि अब स्कूल मे कोई तंग नही करेगा । 
घर पहुचा और मासूमियत से बता दिया की चुटिया नाई ने काट दिया लेकिन अच्छा ही हुआ क्योकी स्कूल मे उसके साथ ये सब होता है ।
बात पूरी हुई भी नही की पिता के हाथ मे डंडा था और उस बच्चे शरीर पर निशान ही निशान और उसकी चीखे ।
3-वो बच्चा अपने छोटे भाई को बहुत प्यार करता था और हर उसको लेकर खेलना और गोद मे लेकर घुमाना उसे अच्छा लगता था । पिता के पास साइकिल थी जिसमे उस जमाने मे आगे हैंडिल मे कंडीया लगी होती थी ।छोटा भाई इतना छोटा था की उस कंडीया मे बैठ जाता था और वो बच्चा मुहल्ले मे छोटे भाई को उस कन्डिया मे बैठा कर घूमाता था ।एक दिन शाम को भी घर पास उसे घुमा रहा था कि कन्डिया किसी तरह हैंडिल से गिर गई और छोटे भाई को चोट लग गई ।वो बच्चा घबरा गया और साईकिल घर के बाहर खड़ा कर छोटे भाई को लेकर परेशान हाल इधर उधर दौडने लगा उसके घाव को हाथ से दबा कर की खून रुक जाये पर कब तक ? घर तो जाना ही था ।
घर मे जब पिता को पता लगा ये तो फिर पिता की मार और बच्चे के शरीर पर निशान लेकिन इस बार एक निशान शरींर पर नही बल्की मन पर भी लगा और  बहुत गहरा लगा जो कभी खत्म ही नही हुआ जब पिता ने उस छोटे से बच्चे से कहा की हाँ तुम मार देना चाहते हो छोटे को ताकी गाँव की जमीन जायदाद सब तुम्हारी हो जाये ।
वो बच्चा एक कोने मे रोता रहा लगातार और बार बार ।
4-उस बच्चे को उसके पिता शायद बहुत चाहते थे और चाहते थे कि जो वो नही बन पाये वो बच्चा बन जाये और खुद की इच्छा उसपर थोपने के चक्कर मे शायद कुछ ज्यादा कर जाते थे -
जैसे उस बच्चे को सिखाया की राम की स्पेलिंग आर ए एम होती है और साथ ही की आर ए एम ए रामा होता है पर क्यो होता है और कैसे बनता है शब्द बस यह ही नही बता पाये पिता ।अक्सर पूछ लेते राम की स्पेलिंग बताओ तो वो बच्चा बता देता आर ए एम तो उसे पक्का करने को तुरंत घुडक देते थे वो पिता की आर ए एम होता है ? और बच्चा घबरा जाता और आर ए एम ए बोल देता और फिर बच्चे के शरीर को मजबूत करने का अवसर नही गंवाते वो पिता और इस राम और रामा ने उस पिता को 50 से ज्यादा ही मौके दिये बच्चे के शरीर को मजबूत बनाने के ।
इसी तरह यदि वो बच्चा गडित कर रहा होता तो सवाल होता की अंग्रेजी कब पढ़ोगे और अंग्रेजी पढता तो गडित कौन पढेगा जैसे सवाल सभी विषयो पर होता और बच्चा लगातार शारीरिक रूप से मजबूत होता रहा  ।
5-ऐसा नही की हमेशा पिता ने उस बच्चे के शरीर को मजबूत करने का ही काम किया बल्की एक बार थोडा बडा हुआ था वो बच्चा और बच्चो के साथ साथ देखा देखी मे एक गलती कर बैठा ।इस बार पिता ने डंडा नही उठाया बल्की अपनी आंखे गीली कर लिया कुछ कह कर और इस बार उस बच्चे को ये सजा कही ज्यादा भारी पड़ी और फिर दुबारा इस बच्चे ने वो गलती कभी नही किया ।
6-एक बार बच्चे को कुछ पैसे की जरूरत पड़ गई और पिता से ही मांगना था । पिता अब डंडे से नही शब्दो से मारने लगे थे । बोले की जब जरूरत हो तो पिताजी ? 
बस उस दिन से उस बच्चे ने कभी ना मुह खोला और ना हाथ फैलाया ,यहाँ तक की जूता टूट जाने पर कुछ दिनो तक नंगे पैर गया स्कूल ।
फिर वो बच्चा बडा हो गया और जब भी उसके पिता देख रहे होते तो वो उपन्यास पढने लगता और जब वो नही देखते तो कोर्स पढने लगता क्योकी अब उस बच्चे के शरीर को मजबूती की जरूरत नही थी और पिता भी अब थक चुके थे ।

शुक्रवार, 26 सितंबर 2025

जब मुलायम सिंह रक्षामंत्री थे

मुलायम सिंह जी जब रक्षामंत्री थे तो दो बाते हुयी थी -१- वो सीमा पर गए थे ,गोली चली उन्होंने सेनाध्यक्ष से पूछा क्या हो रहा है ? बताया गया की पडोसी ऐसे ही चाहे जब गोली चलाते रहते है | मुलायम सिंह जी ने तुरंत जवाब देने को कहा तो कहा गया की आप यहाँ से जाये तब देंगे तो मुलायम सिंह ने कहा की एक सैनिक और रक्षामंत्री की जान की कीमत एक है इसलिए अभी जवाब दो और ये सन्देश दुश्मन को भी मिला | 
--२ - मुलायम सिंह ने आतंकवादी कैम्पों पर हमले का आदेश दे दिया था पर प्रधानमंत्री की अध्यक्षता वाली समिति तैयार नहीं हुयी इसलिए नहीं हो पाया क्योकि उस समिति के बिना हमला नहीं हो सकता है | 
ये भी तथ्य है की जब तक मुलायम सिंह रक्षामंत्री रहे देश में कोई आतंकवादी हमला नहीं हुआ | 
बिना ये सब जाने कुछ लोग मुलायम सिंह की अलोचना करते है | 
करने वाले कहते नहीं वक्त आने पर करते है | बाकि फैसला आप सभी का की केवल जुबानदराजी करने से देश मजबूत होगा |