मंगलवार, 8 अक्टूबर 2024

1993 क्या चुनाव , टिकेट पर जद्दोजहद और घटनाएं ।

#ज़िंदगी_के_झरोखे_से 


वो  आये बैठे और बोले की कितने राय रहते है इस क्षेत्र में और उठकर चले गए | वो यानी रामगोपाल यादव |


१९९३ का चुनाव था | काफी पहले ही मुलायम सिंह यादव जी का काशीराम जी से समझौता हो चूका था तो मैंने आगरा में आगरा कैंट सीट के जातिगत और  धार्मिक समीकरणों को देखते हुए और जीत की गारंटी को देखते हुए एक साल में बाकि जगहों पर काम करते हुए विशेषकर इस इलाके में बिना किसी को एहसास करवाए हुये की मैं चुनाव लड़ना चाहता हूँ सभी पोलिंग बूथ पर लोगो को कर्यत्क्र्ता बना लिया था और इस पूरे क्षेत्र में काफी कार्यक्रम कर लिए थे | एक रोज इफ्तार भी किया था जिसमे हजारो अल्पसंख्यक समुदाय के लोग जुटे थे और एक कार्यक्रम चलाया था की होली दिवाली मिलन मुस्लिम इलाको में और ईद मिलन हिन्दू इलाको में करवाया था तथा और बहुत से कार्यक्रम कर दिए थे | इस क्षेत्र में केवल दलित और मुस्लिंम वोट ही जितने के लिए काफी थे इसके अलावा ब्राह्मण समुदाय के कार्यक्रमों में म एरी काफी भागीदारी रहती थी और तटस्थ रहने वाला वर्ग जो हमेशा छवि देखकर वोट देता है ये सब मिला कर भारी जीत का विश्वास था | यूँ तो न जाने कितने लोगो कोम टिकेट मेरे कारण मिला पर प्रक्रिया पूरी करने को मैंने भी टिकेट के लिए आवेदन कर दिया था | 


उस दिन लखनऊ के पार्टी कार्यालय में उत्तर प्रदेश की संसदीय बोर्ड की बैठक थी | प्रदेश के अध्यक्ष रामसरन दास जी और बोर्ड के सचिव बलराम यादव ,भगवती सिंह सहित सभी  सदस्य मौजूद थे | रामगोपाल यादव जी भी बैठक में आकर बैठ गए | पहले आगरा मंडल का नंबर था  और उसमे आगरा का | रामसरन दास जी ने बलराम यादव से कहा की क्या सी पी राय ने किसी सीट के लिए आवेदन किया है तो बलराम यादव ने लिस्ट देखकर कहा की हा आगरा कैंट के लिए आवेदन किया है तथा आगरा मंडल की सीटो पर उनकी भी एक लिस्ट है टिकेट के लिये | इसपर रामसरन दास जी बोले फिर विचार क्या करना सी पी राय की सीट फाइनल किया जाए और उनकी लिस्ट को भी रिकमेंड कर नेता जी {यानी मुलायम सिंह जी}  को भेज दिया जाये | इसपर रामगोपाल जी ने कड़े तेवर से कहा की कितने राय है आगरा में की सी पी राय की सीट फाइनल कर रहे है और उनकी लिस्ट क्यों रिकमेंड कर रहे हो बिना विचार किये और दूसरे नाम देखे हुए | फिर क्या था रामगोपाल जी मुलायम सिंह यादव के भाई कहलाते थे तो बोर्ड ने तय किया की सब मुलायम सिंह यादव जी पर छोड़ दिया जाए | 


जब रामसरन दास जी और भगवती सिंह जी ने ये बात मुझे बताया तो मैं मुलायम सिंह यादव जी से मिला और उनको बताया  की मैंने उस क्षेत्र में क्या क्या किया है और क्यों मैं चुनाव जीत जाऊंगा | मैंने कहा १९८९ में आप ने ये कह कर मुझे टिकेट नहीं मिलने दिया था की मैं आप का चुनाव देखु और आप के मुख्यमंत्री बन जाने के बाद विधायक क्या होता है मैं उससे बड़ा बन जाऊँगा और क्या हुआ ये आप भी जानते है और मैं भी जबकि तब संसदीय बोर्ड में बहुमत मेटे पक्ष में था | मुलायम सिंह यादव जी बोले की वो तो बीत गया पर आप के लिए मेरे दिमाग में बड़ी चीज है जो पिछली बार मैं नहीं कर पाया पर इस बार या तो वो करूँगा या फिर यहाँ आप को अपने साथ रखूँगा मंत्री बना कर | वो बोले की मेर्रे आलावा आप की इस पूरे इलाके में सभाए लगती है तथा आप और भी काम सम्हालते है ऐसे ,मे आप एक सीट पर अपने लिये फंस जायेंगे तो ५० सीट का नुक्सान होगा पार्टी का | आप मेरे ऊपर भरोसा रखो आगे सरकार बनेगी तो सब अच्छा होगा और मुझे मन मार कर मान लेना पड़ा | 


टिकेट के बटवारे की कवायद शुरू हो गयी | प्रदेश महामंत्री का काम करने के साथ मैं देश भए में और प्रदेश भर में तो मुलायम सिंह जिन के साथ दौड़ता रहता था पर आगरा मंडल जिसमे तब अलीगढ मंडल भी था और इटावा के हर छोटे से छोटे कार्यक्रम मे रहता था इसलिए हर विधान्सभा के बारे में पूरी जानकारी थी | मुलायम सिंह यादव जी के घर के अन्दर से बाहर तक मजमा लगा रहता था | एक दिन मुलायम सिंह यादव जी लोहिया ट्रस्ट में मीटिंग कर रहे थे और मैं उनके घर के ड्राइंग रूम में उनका इन्तजार कर रहा था ,तभी रामगोपाल जी ने आगरा मंडल के लोगो के नाम पुकारना शुरू किया और कहा की इनमे से जो जो भी हो आ जाए |लोग आते गए और वो उन लोगो को बी फॉर्म यानी टिकेट देने लगे | मैंने उन लोगो को देखा तो चौंका और धीरे से निकल कर लोहिया ट्रस्ट पहुच गया | मुलायम सिंह जी अपने कमरे से बाहर निकल रहे थे तो मैंने उनका हाथ पकड़ लिया की ये रामगोपाल जी क्या कर रहे है ,एक से एक वाहियात और गलत लोगो को टिकेट दे रहे है | मुलायम सिंह जी ने पुछा क्या बी फॉर्म दे दिया है तो मैंने एक दो नाम लेकर कहा की हा और वो लोग अभी आप के घर पर ही है | मुलायम सिंह जी ने कहा किन हाथ छोडिये मैं चल कर देखता हूँ | मैं जानबूझ कर उनकी गाडी मेर जाने के बजाय पैदल ही चला गया कत्रीब दौड़ता हुआ | मुलायम सिंह जी घर पहुचे और पुछा की रामगोपाल किस किस को बी फॉर्म दे दिया जरा बुलाओ सबको तो उनके स्टाफ ने आवाज लगाया की जिस जिस को बी फॉर्म मिल गया है नेता जी बुला रहे है तो सभी आ गए तो मुलायम सिंह जी सबसे बी फॉर्म मांग लिया और बगल में रख लिया की बी फॉर्म बाद में मिलेगा । सबके चेहरे लटक गए । मुलायम सिंह यादव जी ने कहा कि  अभी आप लोग जाओ बाद में बुलाएंगे । इसके बाद फिर मैं आगरा आ गया मुझे चिंता थी कि जिस सीट पर मुझे लड़ना था उसपर जीतने वाला उम्मीदवार हो या कम से कम सम्मानजनक लड़ाई हो । अभी रामगोपाल जी ने पता नही किसके कहने पर एक ऐसे आदमी को टिकट दे दिया था जो सदर के चौराहे पर अंडे की तेल पर रोज शाम को शराब पीता था । वह किसी तरह कैंट क्षेत्र के एक क्षेत्र से सभासद का चुनाव जीत गया था अपनी बिरादरी के उस क्षेत्र में वोट होने के कारण । 


अगल एपिसोड में में लिख चुका हूं की किस तरह मैने कांग्रेस के कई बार के विधायक जो कृषि मंत्री रह चुके थे डा कृष्णवीर सिंह कौशल और इस चुनाव में भी कांग्रेस से टिकट मांग रहे थे और टिकेट मिलने की उम्मीद में अपना पर्चा भरने आगरा की कलक्टरी में राजीव गांधी जिंदाबाद का नारा लगाते हुए आए थे और सीढ़ियों पर मेरी उनकी बात हो गई तो उन्होंने कांग्रेस का पर्चा जेब में रख लिया और समाजवादी पार्टी के नाम का नया पर्चा भरा तथा कांग्रेस का झंडा जेब में रखकर वापस मुलायम सिंह यादव जिंदाबाद का नारा लगाते हुए बाहर निकलने लगे तो पूरी कलेक्टरी संन्न देख रही थी ये अनोखा दृश्य जो पहले कभी नही देखा था । उन्ही के साथ फतेहपुर सीकरी क्षेत्र के एक ब्लॉक प्रमुख भी आ गए और उनके सब समर्थक भी । डा कौशल ने सिर्फ एक सवाल पूछा था की कही समाजवादी पार्टी का टिकट भी नही मिला तो बहुत बदनामी हो जाएगी तो मैने कहा की समझ लीजिए टिकेट मिल गया l कल मेरे साथ लखनऊ चलिए और बी फॉर्म लेकर आइए । घर लौट कर मैने मुलायम सिंह यादव जी को बता दिया की कांग्रेस के इस दिग्गज नेता को मैने तोड़ लिया है तो वो बहुत खुश हुए और बोले की वो अगर जीत गए तो वो तो विधान सभा अध्यक्ष के लायक है। आप उन्हें लेकर आ जाओ । 


मैं अगले दिन डा कौशल और अन्य अपने लोगो को लेकर लखनऊ पहुंच गया । मुलायम सिंह जी के घर के ऊपर वाले हिस्से में दाहिनी तरफ के कमरे में मुलायम सिंह जी बैठे और और रामगोपाल जी भी थे । मुझे और डा कौशल को भी वही बुला लिया । पहले उन्होंने डा कौशल के पार्टी में आने पर खुशी जाहिर किया तथा उनके सामने भी कहा की आप जीत कर आइए आप को स्पीकर बनाऊंगा । उनका बी फॉर्म देने का आदेश रामगोपाल जी को दिया और जब उनको बी फॉर्म मिल गया तो मुलायम सिंह जी ने कहा की डाक्टर साहब आप नीच ड्राइंग रूम में बैठिए और चाय पीजिए क्योंकि अब हम लोग कुछ और बाते करेंगे ।आप को राय साहब के साथ जाना हो तो इंतजार करिए वरना आप वापस आगरा अपनी तैयारी में लिए जाना चाहे तो चले जाइए । जब पर्चा भरेंगे तो मैं सी पी राय को भी भेज दूंगा ।


डा कौशल के जाने के बाद हम तीन लोग ही रह गए और अब बाकी सीट के नामों की चर्चा शुरू हो गई । मैने कहा की सबसे पहले चंद्रभान मौर्य विधायक जिनको मैं रामगोपाल जी के राज्यसभा चुनाव में जनता दल से तोड़ कर लाया था उनका टिकेट तो जारी कर देना चाहिए ।तो उनका बी फॉर्म मुझे दे दिया गया । फिर मैंने फतेहपुर सीकरी क्षेत्र के लिए ब्लॉक प्रमुख रामनिवास शर्मा का नाम प्रस्तावित किया तो मुलायम सिंह जी उखड़ गए की वो सीट मिनी छपरौली कहलाती है और हमेशा वहा से जाट ही जीता है तो आप वहा ब्राह्मण क्यों लड़ाना चाहते है ।तो मैने कहा की इसीलिए क्योंकि ब्राह्मण वहा दूसरी बड़ी जाती है और मुस्लिम भी काफी है और काशीराम जी के कारण दलित मिल जाएंगे और ये जीत जाएंगे । मुलायम सिंह जी बहुत संतुष्ट नहीं थे पर कोई बहुत मजबूत और नाम वाला जाट भी हमारे पास नही था तो अनमने भाव से मान गए ये कहते हुए की जिम्मेदारी आप की है ।मैने कहा की पूरी जिम्मेदारी से ये टिकेट में दिलवा रहा हूं पर आप को वहा सभा का टाइम देना पड़ेगा । मुलायम सिंह जी ने कहा की आप तय कर के लिस्ट बना लीजिए की कहा कहा जीत की ज्यादा सभवना है जहा मेरी सभा जरूरी है । इसके बाद एक एक सीट पर मेरे और रामगोपाल जी के बीच जद्दोजहद होती रही । कभी मुलायम सिंह जी मुझे समझाते तो कभी रामगोपाल जी को । सिकंदराराउ पर मैं अमर सिंह यादव को टिकट चाह रहा था की वही जीतेगा और रामगोपाल जी एक फतेह सिंह को पर अमर सिंह का टिकट हो गया । मेरे सारे सुझाव मान लिए गए पर एक अलीगढ़ की सीट गंगीरी पर रामगोपाल जी एक पैसे वाले  महेश यादव को टिकट देना चाह रहे थे पर मैं पार्टी के दो पीढ़ी से वफादार और जमीन पर मजबूत वीरेश यादव को देना चाह रहा था । वीरेश यादव को टिकट देने के पीछे भी ये कारण था की में गंगिरी में समेलन में हिस्सा लेकर आया था । (गगीरी सम्मेलन के बारे में अलग एपिसोड में लिखूंगा ) इस मामले में मुलायम सिंह जी का झुकाव रामगोपाल जी के उम्मीदवार की तरफ देख कर मैने एक। राय दिया की अभी किसी को भेज कर जोर से कहलवा दिया जाए की गंगिरी में वीरेश का टिकट हो गया और उसके बाद अगर चार घंटे भी महेश यादव रुका रह जाए तो उसे टिकेट दे दिया जाए । एक आदमी को भेजा गया और भीड़ में उसने जोर से यही बोल दिया । इतना सुनते ही महेश यादव वहा से चला गया और बाद में मालूम हुआ की उसने कुछ घंटे में ही जानता दल ज्वाइन कर लिया ।इस पूरे एपिसोड में रामगोपाल जी मुझसे बहुत खफा हो गए जबकि मैने जो जो किया वो सिर्फ पार्टी के हित में किया था । ये दोनो मेरे उम्मीदवार जीत गए , चंद्रभान मौर्य भी जीत गए और भी लोग जीते और जो हारे वो बहुत नाम मात्र के वोट से हारे । 


चुनाव शुरू हो गया और मेरी व्यस्तता बहुत बढ़ गई । रोज तमाम सभाएं लगने लगी पर मैं डा कौशल के क्षेत्र में ये सोच कर नही गया की वो खुद कई बार विधायक और मंत्री रहे है ,बड़े नेता है तो अपना चुनाव तो वो खुद सम्हाल लेंगे लेकिन एक दिन उन्होंने मुलायम सिंह जी को फोन किया की वो मुझसे कह दे की मैं उनके इलाके में समय दे दूं , सभाएं भी कर दू तथा पार्टी के लोगो को भी उनसे जोड़ सुन । तब मुझे उनके क्षेत्र में कुल छोटी बड़ी 12/13 सभाएं करनी पड़ी और चार कार्यक्रता बैठक लेनी पड़ी । ऐसी ही मांग हर जगह से थी ।


एक दिन आगरा से फिरोजाबाद तक सुबह से रात तक काफी सभाएं लगा लिया लोगो ने ।आगरा के सभी विधान सभा क्षेत्र में कही एक कही दो सभाएं करता हुआ मैं जब फ्री हुआ तो तुमडला और फिरोजाबाद की सभा बची हुई थी । टुंडला बाजार में में रात को 10  बजे पहुंचा और फिर फिरोजाबाद में रात 11 के बाद पर फिरोजाबाद मे हमेशा ही सभाएं रात को देर से शुरू होती रही है और सुबह 3/4 बजे तक चलती रही है ।पहले सभाओं इत्यादि को लेकर इतनी सख्ती और मुकदमे नही होते थे बल्कि चुनाव उत्सव की तरह होता था ।


फिरोजाबाद में ही मेरा एक सभा में एक डेढ़ घंटे का कैसेट बन गया था जिस सभा में में डेढ़ घंटे से ज्यादा बोला था और फिर आजम खा साहब ये कह कर की कुछ कहने को बचा ही नहीं केवल बीस मिनट बोले थे । वहीं मेरा भाषण का कैसेट 45 रुपए में 1993 के चुनाव में प्रदेश कार्यलय से प्रदेश भर में बिका था और हर जगह पूरे टाइम बजता सुना जा सकता था । फिरोजाबाद में लोकप्रिय था तो लोग इंतजार कर रहे थे । ज्यो की मेरी कार की लाइट दिखलाई पड़ी लोग शोर करने लगे की आ गए आ गए । लोगो हाथ से मिलाता किसी तरह मंच पर पहुंचा ।भाषण  शुरू हुआ । उस वक्त मेरे भाषण का कुछ ऐसा जुनून था की भाषण थोड़ा होता और फिर नारे शुरू हो जाते । एक बार कुछ जोश की बात कह मैने हाथ ऊपर से नीचे किया तो मंच पर माइक के बगल में बैठे एक बहुत बुजुर्ग ने मेरा हाथ पकड़ लिया ।में। तोड़ विचलित हुआ पर भाषण जारी रखा । देख की वो मुझे अंगूठी पहना रहे थे । डा कौशल अपने मंत्री काल में लोगो से दूर हो गए थे जिसके कारण मेरी जीत जाने वाली सीट भी करीब तीन हजार से हार गए और फतेहपुर सीकरी में रामनिवास शर्मा ढाई हजार से इसलिए हार गया क्योंकि हेलीकॉप्टर में कुछ दिक्कत होने के कारण मुलायम सिंह जी की सभा नही लग सकी और काफी मुस्लिम वोट जनता दल में भी चला गया । पर सपा बसपा का गठबंधन जीत गया था ।मेरे अधिकतर उम्मीदवार जो नही जीते वो भी अच्छा और सम्मानजनक लड़े और हमारी सरकार आ गई तथा मुलायम सिंह यादव जी मुख्यमंत्री बन गए । (इस बीच की बहुत सी घटनाएं अलग एपिसोड में होगी या फिर झलकियों के रूप में होगी ।

रविवार, 6 अक्टूबर 2024

सत्ता पार्टी का महामंत्री और प्रवक्ता होते हुए जब मैं धरने प्रदर्शन में शामिल हो जाता था ।

जिंदगी के झरोखे से ;

मेरी जिंदगी का ये भी एक पक्ष रहा है ।

1: क :

जब पूर्व मुख्यमंत्री और कांग्रेस के बड़े नेता नारायण दत्त तिवारी जी का कालर एकड़ कर एक सिपाही खीचने लगा+++

आगरा के व्यापारियों में भाजपा की पहले भी पैठ थी और आज भी है । आगरा में ताज ट्रेपेजियम जोन के नाम पर आगरा का सबसे बड़ा उद्योग उजडने वाला था क्योंकि ताजमहल को प्रदूषण से बचाने का मामला जोर पकड़ चुका था और सर्वोच्च न्यायालय में जा चुका था । मांग ये थी आगरा के उद्योगों के कारण ताजमहल पीला पड़ रहा है इसलिए प्रदूषण  फैलाने वाले सारे उद्योग आगरा से 100 किलोमीटर दूर ले जाये जाए । आगरा में फाउंड्री का बड़ा उद्योग था और चमड़ा सहित अन्य उद्योगों को भी इसी श्रेणी में रखा गया था । पूरा व्यापारी समाज बर्बाद हो रहा था और मजदूर भी परेशान थे । इस सभी में बहुत गुस्सा था । भाजपा ने शायद 1992 की बात है , तब शायद कल्याण सिंह की सरकार बर्खास्त हो चुकी थी और राष्ट्रपति शासन लग गया था । तो इसका विरोध करने को लालकिले के सामने आगरा के रामलीला मैदान में लोगो को एकत्र किया था ।  मैं समाजवादी जनता पार्टी का प्रदेश का महामंत्री था जिसके प्रदेश अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव जी थे । हम भी अपने लोगो को लेकर जनता के हर मुद्दे पर अक्सर सड़क से जिलाधिकारी कार्यालय तक जूझते ही रहते थे तो यहां भी हाजिर थे ।  वहा कांग्रेस के लोगो ने पूर्व मुख्यमंत्री तथा उत्तर प्रदेश में विकास की इबारत लिखने वाले नारायण दत्त तिवारी जी को भी बुला लिया था । भाजपाई भाषण दे रहे थे तब तक तिवारी जी आ गए तो तिवारी जी का जनता पर जादू था और उनके आने से भाजपा तथा संघ की चमक खत्म हो रही थी तो तिवारी जी भाषण देते उसके पहले ही पुलिस पर संघी लोगो  ने पत्थर फेंक दिया ।बस फिर क्या था पुलिस का लाठीचार्ज शुरू हो गया । पुलिस के लोगो ने तमाम गाड़ियों के शीशे तोड़ दिए । मेरी कार का भी अगला पिछला शीशा तोड़ दिया ।अति तो तब हुई जब एक सिपाही ने नारायण दत्त तिवारी जी का कालर पकड़ कर खींचना शुरू कर दिया तो हम सपा के कुछ लोग उधर दौड़े और चिल्लाए की ये पूर्व मुख्यमंत्री एन डी तिवारी जी है तो वो सिपाही सकपका गया और ये आवाज सुनकर एक इंस्पेक्टर भागे हुए उनके पास आए और उन्हें  गाड़ी में बैठा कर रकाबगंज थाने ले गए । एन डी तिवारी जी पुराने जमाने के नेता थे तो अपने साथ कोई सुरक्षा नहीं रखते थे और उसके नाते उन्हें ये अपमान झेलना पड़ा । उनके साथ के लोग भी उस वक्त पता नही कहा भाग गए थे । तिवारी जी के पीछे पीछे  हम लोगो थाने पहुंच गए । वहा उनको थानाध्यक्ष के कमरे में एक चारपाई पर आराम करने को कहा गया था ।जब कुछ लोग एकत्र हो गए तो मैने महसूस किया की इस घटना के कारण पुलिस के अधिकारी परेशान थे । शाम होने लगी थी और प्रेस के लोग भी आ गए थे तो तिवारी जी ने पूछा की अगर मुझे गिरफ्तार किया गया है तो मजिस्ट्रेट के सामने पेश करो और जेल भेजो । तो अधिकारी ने जवाब दिया की नही केवल आप को विश्राम के लिए ले आए थे । मैने पूछा की विश्राम की जगह ये थाना कब से तय हो गया? क्या पूर्व मुख्यमंत्री को और इतने वरिष्ठ नेता को सर्किट हाउस नही ले जाया जा सकता था तो उस अधिकारी ने मुझे घूर कर देखा की मैं माहौल खराब कर रहा हूं और तिवारी जी से किले के पास की घटना के लिए खेद व्यक्त किया तो तिवारी जी पूछा की क्या मैं जा सकता हूं ? और अधिकारी के हा कहते ही हंसते हुए तिवारी जी उठे और अपनी गाड़ी में बैठ कर रवाना हो गए । मुझे तो अच्छा नही लगा था ये सब। कम से कम आगरा के कमिश्नर , डी आई जी , डी एम , एस एस पी को बुलाना चाहिए था और कुछ लोगो का सस्पेंशन होना चाहिए था । खैर ये मान कर की कांग्रेस का यही तरीका होगा हम भी मन मसोस कर घर रवाना हो गए । 
1: ख 

जब भाजपा के लोग ताजमहल में घुस कर तमाशा करना चाहते थे ++++++

इसके बाद उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव जी की सरकार आ गई थी तो फिर टी टी जेड विरोधी आंदोलन ने जोर पकड़ा । इस बार भाजपा कि साजिश भीड़ को लेकर ताजमहल में  घुस कर प्रदर्शन करने और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मामला उठाने की थी । मुझे उनका इरादा पता लग गया था । मैं समाजवादी पार्टी का महामंत्री और प्रवक्ता था । मैने मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव जी को फोन किया और उनको पूरी बात बताया तो वो बोले की पुलिस प्रशासन अपने आप देख लेगा की क्या करना है तो मैने कहा की मैं इस आंदोलन में हिस्सा लेना चाहता हूं क्योंकि मेरा मानना है की कोई बड़ी सचमुच की जान समस्या है तो उसे केवल विपक्ष के लिए राजनीति करने को क्यों छोड़ दिया जाए । मुलायम सिंह जी ने मुझसे पूछा की इरादा क्या है ? जरूर आप के मन में कोई प्लान है पर आप सत्ता पार्टी के पदाधिकारी है इसलिए ध्यान रखना की आप का कोई टकराव न हो और किसी गलत बात का आरोप आप पर न लगे तो मैने कहा की क्या आप को मुझपर विश्वास नहीं है तो वो बोले विश्वास है फिर भी सचेत करना मेरी जिम्मेदारी है । मुलायम सिंह जी बोले की मैं अधिकारियों को निर्देश दे दूंगा कि। आसपास ही रहे तथा आप के साथ कुछ गलत न हो तो मैने कहा की आप चिंता मत करिए मेरे साथ कुछ नही होगा बल्कि भाजपा वाले बाद में पछताएंगे की मुझे आंदोलन में क्यों शामिल होने दिया । मैने आगरा के कलक्टर तथा एस एस पी से बात कर लिया की वो लोग ताजमहल के पश्चिमी गेट पर पर्याप्त पुलिस रखे और खुद भी उस गेट पर मौजूद रेस्त्रां में रहे तथा नीचे के अधिकारियों को प्रदर्शन स्थल के पास रहने को कहे और ये भी कह दिया की यदि मैं माईक से आप लोगो को आने के लिए बोलूं तो तुरंत आ जाईएगा । 
भाजपा ने प्रदर्शन के लिए ताजमहल के पश्चिमी गेट के पार्किंग स्थल तक जाने की इजाजत पता नही कैसे ले लिया था वही भाजपा जो आजकल किसी को प्रदर्शन तो दूर घर से निकलते ही तमाम मुकदमे लगा देती है । एक ट्रक पर बहुत अच्छा माइक सिस्टम लगा था और भाजपा के नेता हो संचालन कर रहे थे तथा अपने नेताओ को ही बुलवा रहे थे और व्यापारी तथा मजदूर में भी अपने संगठन से जुड़े लोगो को ही बुलवा रहे थे । पोर उत्तेजना फैलाने वाला भाषण चल रहा था । थोड़ी देर तो मैं दूर से सुनता रहा फिर धीरे धीरे ट्रक के बिलकुल पास जा खड़ा हुआ तो ये लोग मुझे देख कर चौकन्ना हो गए ।एक नेता ने पूछा आप यहां कैसे तो मैने कहा की क्या आगरा मेरा शहर नही है ? मेरा शहर पहले और पार्टी बाद में है । फिर भी मुझे बोलने का अवसर नहीं देना चाह रहे थे तो मैने व्यापारियों की तरफ मुखातिब होकर जोर से बोला कि क्या ये केवल भाजपा का प्रदर्शन है ? क्या मुझे अपना समर्थन देने लिए नही मौका मिलेगा ।इसपर जो तटस्थ व्यपारी थे उन सबने मेरा साथ दिया की इनको भी बोलने दिया जाए । ये सत्ता पार्टी के नेता है इनकी बात भी सुन लिया जाए । 
बस माइक मेरे हाथ में आ गया । मैं ट्रक पर चढ़ गया और पहले मैंने अपना और मुलायम सिंह यादव जिला व्यापारियों को समर्थन देने की बात कहा तो भाजपा वाले सवालों से हूंट करने की कोशिश करने लगे पर माइक बहुत अच्छा तथा तेज था उसका फायदा उठा कर मैने भाषण देना शुरू किया तथा कहा की आप लोगो की तकलीफ जायज है और कुछ ताकते है जो आगरा को उजाड़ देना चाहती है पर मैं विश्वास दिलाता हूं की हम सब ऐसा होने नही देंगे । पूरा भाषण कर मैने लोगो से पूछा की आप लोग तय करो की क्या ताजमहल में घुस जाने से हम आगरा को बदनाम नही कर देंगे और हम अंदर हल्ला करेंगे तो विदेशी डर कर भागने लगेंगे तथा यह बदनामी अगर दुनिया में पहुंच गई तो लोग आगरा आना बंद कर देंगे ।हमारा कारोबार न उजड़े वो मांग तो ठीक है पर क्या इसके लिए हम आगरा को बड़ी आमदनी देने वाला पर्यटन कारोबार भी उजाड़ दे तो हमारे पास बचेगा ही क्या । अगर सिर्फ नेतागिरी करना है तो हो चाहो सो करो वरना आप लोग मेरे साथ कल ही लखनऊ चलो और मैं आप को मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव जी से मिलवाता हूं।उनसे अपनी पूरी बात कहो और संतुष्ट न हो तो फिर जो चाहो करना । लोगो को मेरी बात समझ में आने लगी तो मैने पूछ लिया की बताओ क्या करना है ताजमहल में घुसना है जहा पुलिस पीटेगी और जेल भेजेगी या फिर मुख्यमंत्री से मिलने जाना है । फिर क्या था शोर उठा की मुख्यमंत्री से मिलना है क्योंकि अधिकांश लोग तो आप व्यापारी और मजदूर थे और भाजपा के लोगो के चेहरे देखने लायक थे । तब भाजपा के एक नेता बोले कितना समय हो गया भाईयो देख लो सरकार का अहंकार की अभी तक कोई अधिकारी पूछने तक नही आया तो मुख्यमंत्री मिलेंगे इसकी क्या गारंटी है। तो मैने माइक से ही जोर से आवाज लगाया की जो भी बड़े अधिकारी मेरी बात सुन रहे हो तत्काल यहां आ जाए और दो तीन मिनट में ही सब बड़े अधिकारी आ गए तथा ज्ञापन स्वीकार कर माइक से बोल दिया की मांगे हम सरकार तक पहुंचा देंगे । 
दो तीन दिन बाद व्यापारियों के एक प्रतिनिधि मंडल को हमने उत्तर प्रदेश के राजभवन में चाय पानी के साथ मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव जी से मिलवा दिया जिसमे आगरा अमर उजाला अखबार के स्थानीय संपादक भी व्यापारियों के साथ आए थे । मुलायम सिंह यादव जी ने उत्तर प्रदेश सरकार का टी टी जेड में कोई रोल नहीं होने की बात कह कर कहा की फिर भी हमसे आप लोग जो जो मदद चाहते हो तय कर के बता दो हम पूरी मदद करेंगे । और इस तरह भाजपा का एक हमला मैने भोथरा कर दिया था । अखबार तो दो बॉक्स आइटम बनाया : पहला की "भीड़ भाजपा की पर वाहवाही लूट लिया सी पी राय ने " और दूसरा की " जब सी पी राय के बुलाते ही अधिकारी आंदोलन स्थल पर पहुंच गए " । 

2;

जैन समाज जब डी एम से एस पी के घर तक हजारों की संख्या में एकत्र होकर आगरा की लाइफ लाइन महात्मा गांधी मार्ग पर धरना देखकर बैठ गया था। 
मुझे एक आई पी एस अधिकारी को कुछ घंटे में ही ट्रांसफर करवाना पड़ा क्योंकि वो एक तो जिम्मेदार था दूसरे तब के मेरे कार्यक्रता जो वर्तमान में केंद्रीय मंत्री है के साथ बदसलूकी कर दिया था । ++++++

आगरा शहर में या तो जाटव समाज की बड़ी आबादी है जिसके आंदोलित हो जाने पर एक बार पी ए सी भाग खड़ी हुई थी और फौज को फ्लैग मार्च कर स्थिति सम्हालना पड़ा था या फिर जैन समाज की भी काफी आबादी है । ये समाज पहले तो कांग्रेस का होता था पर पलटा खाया और भाजपाई हो गया तो आज तक भाजपा के साथ है पर सत्ता तो सभी के लिए होती है । 
हुआ ये था की हमारी मुलायम सिंह यादव जी की सरकार थी । किसी ग्वालियर के मामले में मध्य प्रदेश पुलिस आगरा आई और अपनी शंका के आधार पर आगरा के एक जैन समाज के व्यापारी के बेटे को आगरा के एस पी सिटी आदित्य मिश्रा जी की इजाजत लेकर उठा ले गए और उसपर थर्ड डिग्री का इतना प्रयोग कर दिया की वो मर गया तो उसका मृत शरीर इसके घर भिजवा दिया । बात आग की तरह फ़ैल गई । आगरा का छीपीटोला इलाका जैन समाज का बड़ा गढ़ है और इसी इलाके का लड़का भी था । जैन समाज का कहना था की व्यापारी परिवार का शरीफ लड़का था और उसे गलत उठाया गया और फिर मार कर भेज दिया । पूरे समाज में उत्तेजना फेल गई । छिपीटोला इलाका शहर के अधिकारियों के घर के पास ही है । फिर क्या था हजारों की संख्या में लोग आकर डी एम आगरा से उस वक्त एस पी सिटी का निवास भी पास में ही एम जी रोड पर ही था के सामने पूरा महात्मा गांधी मार्ग घेर पर सड़क पर बैठ गए । महात्मा गांधी मार्ग आगरा की मुख्य सड़क है और लाइफ लाइन है तो चारो तरफ जाम की हालत हो गई । उत्तेजना बहुत थी और मामला ऐसा था की पुलिस बैक फुट पर थी । 
मुझे पता चला तो मैं दूसरे रास्ते से अपने घर बैठे हुए कुछ पार्टी के साथियों को लेकर छीपीटोला के स्टेट बैंक तक पहुंच गया और उसके अंदर गाड़ी खड़ी कर के जैन समाज के लोगो के बीच पहुंच गया । मुझे देखते ही मेरा विरोध शुरू हो गया था मुलायम सिंह यादव और मेरे खिलाफ नारे लगने लगे । पर मैं सर झुका कर उन लोगो के धरने में जमीन पर बैठ गया की जब तक आप लोगो की मांग नही मानी जाएगी तब तक मैं भी यही बैठूंगा । तब बर्फ थोड़ा पिघली । करीब एक घंटा बैठे रहने के साथ मैं उन लोगो के बात सुनता रहा तो पता चला की ज्यादा गुस्सा एस पी आदित्य मिश्रा के खिलाफ है तथा लोग बच्चे की मौत की जांच करवाना चाहते है और जिम्मेदार अन्य पुलिस वालो के खिलाफ कार्यवाही चाहते है । सभी व्यापारी थीं और अपनी दुकान तथा बाजार बंद कर आ तो गए थे पर कितनी देर और कितने दिन दुकान बंद करते । 
मेरे साथ एस पी सिंह बघेल भी गए थे जी अब केंद्रीय मंत्री है । मैने उनको बोला की जाओ और एस पी सिटी को बुला लाओ की मैने बुलाया है । पुलिस अपनी कार्यवाही की रणनीति बना रही होगी । एस पी सिंह बघेल वापस आ गए और बहुत दुखी स्वर में बोले की भाई साहब एस पी सिटी में आने से मना कर दिया और बहुत बत्तमीजी का व्यवहार किया मेरे साथ । तब मैने जैन समाज के एक व्यक्ति को साथ लिया और डी एम के घर चला गया । डी एम से पहले मैने अकेले बात किया और फिर जैन समाज के व्यक्ति को भी बुला लिया । जैन समाज के व्यक्ति के सामने ही हॉट लाइन मिला कर मैने मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव जी से बात किया । उनको सब बात बताया तो उनको इंटेलिजेंस विभाग के चीफ से सब पता लग चुका था तो मैने आदित्य मिश्रा के व्यवहार के बारे में और इस मामले में इनपर आरोप के बारे में बताया तो मुलायम सिंह जी बोले की आप जैन समाज को बता दीजिए की आज ही आदित्य मिश्रा का ट्रांसफर हो जाएगा और मामले के जांच का आदेश भी अभी मैं कर दे रहा हूं तथा ये लोग और जो भी बात करना चाहे लखनऊ आ जाए । मैं बात सुनकर पूरी मदद करूंगा । मैं इस समाज के साथ हूं । यही बात मैने साथ आए जैन समाज के व्यक्ति को बता दिया और वैसे वो सुन भी रहे थे । तब डी एम से तय हुआ की वो ए डी एम सिटी को ये सब आश्वासन देने के लिए धरने में भेज दे। डी एम ने पूछा किला धरना खत्म हो जाएगा तो मैने जैन समाज के व्यक्ति से उनका जवाब पूछा । फिर हम लोग धरना स्थल पर आ गए । जैन समाज के उस व्यक्ति ने लोगो को डी एम के घर मेरे और मुख्यमंत्री के बीच हॉट लाइन से हुई बात बताया और ये भी की एस पी सिटी तो अभी थोड़ी देर में हटा दिए जाएंगे तथा मुख्यमंत्री ने मिलने को बुलाया है और सब मानने को तैयार है । कुछ समय पहले जो लोग मेरे और मुलायम सिंह यादव के खिलाफ नारा लगा रहे थे उनमें से कुछ लोगो ने समर्थन में नारा लगाया और धरना समाप्त हो गया । शाम तक एस पी सिटी के ट्रांसफर का आदेश आ गया और घटना की सी आई डी जांच का आदेश भी हो गया ।

3: 

जब स्वर्णकार लोगो ने आगरा के फौवारे चौराहे पर जाम लगा दिया था । 

हमारी सरकार थी । स्वर्णकार समाज के लोगो के साथ कुछ घटनाएं घट गई थी और ज्यादातर मामलों में उनके साथ काम करने वालो का ही हाथ निकला था । कुछ विभागों से उत्पीड़न की शिकायत भी थी । फिर वही हुआ । स्वर्णकार समाज के कुछ 2/3 सौ लोगो ने किनारी बाजार और फौवारे के तिराहे पर धरना दे दिया । 
इस बार ज्यादा विस्तार से नही लिखूंगा । मैं पहुंच गया । उस इलाके में जाने के लिए दो ही तरीके है की या तो मेडिकल कालेज में गाड़ी पार्क कर उतना दूर जाया जाए या कोतवाली के भीतर गाड़ी पार्क कर दिया जाए अगर वहा के इंस्पेक्टर जानते हो तो । मैने कोतवाली के अंदर गाड़ी पार्क किया और जाकर धरने में बैठ गया । कुछ देर बैठने और सब समझ लेने के बाद स्थानीय सी ओ, इंस्पेक्टर तथा अतिरिक्त सिटी मजिस्ट्रेट को बुला लिया और आश्वासन के बाद धरना खत्म हो गया ।स्वर्णकार समाज ने अच्छी मिठाई खिलाया और लस्सी भी पिलाया हम सभी को ।
ऐसी कई घटनाएं मेरे सत्ता में रहने के दौरान हुई ।
ये बताने का मकसद सिर्फ इतना है की एक तो सत्ता में आ जाने पर शासन में बैठे लोगो को वो काम करना चाहिए पर संगठन के लोगो को जन समस्याओं के सवाल पर जनता के साथ रहना चाहिए और कोशिश करना चाहिए की विपक्ष को स्पेस न मिले और समस्या हल हो तो उसका श्रेय सत्ता का संगठन भी ले ले ।दूसरा सत्ता में आते ही अहंकार में चूर होकर अपने दड़बे में कैद नही हो जाना चाहिए । तीसरा कितनी भी विपरीत परिस्थिति हो उससे भागने के बजाय उसमे घुस कर उसका सामना करना चाहिए ।




बुधवार, 2 अक्टूबर 2024

इन्सान का इन्सान से हो भाईचारा ,यही पैगाम तुम्हारा |

#रास्त्रपिता_बापू के नाम ------
#महात्मा #गांधी के जन्मदिन पर --------------------------------------------------------------बापू ये देश आप को अपनी आँखे झुका कर सलाम करता है ,अपनी सम्पूर्ण भावनाओ से आप को दुनिया का महामानव मानते हुए आप का आभार व्यक्त करता है  और आज भी आप का कर्जदार है केवल आप की मानवता और आजादी की लड़ाई के लिए ही नहीं इस बात के भी लिए की देश आप के हत्यारों की असली जिम्मेदार विचारधारा को आज भी सजा नहीं दे पाया ,उसे मिटा नहीं पाया | हम जानते है आप भटक रहे हो देखने को की आप का देश कही उस विचारधारा के पैरो तले कराहने न लगे | 
बापू आप कही हम लोगो पर हंस तो नहीं रहे हो या हमारी किस्मत पर रो तो नहीं रहे हो ,कही आप को ये तो नहीं लग रहा की हम आप की विरासत को सहेज कर रख नहीं पाए ,कही हम आप के द्वारा सिखाये गये  सत्य और अहिंसा के मूल मन्त्र को फैला नहीं पाए ,आप के द्वारा दी गयी आजादी को जिम्मेदारियों और नागरिकता के मूल मन्त्र से सजा नहीं पाए ,आपके सत्याग्रह को लोगो के दिलो में बसा नहीं पाए | 
बापू आज कही आप डर कर कही बैठ गए हो कही छुप कर की ये क्या हो रहा है और ये कौन सी साजिश है आप को फिर से मारने की,कि जो हर रोज पानी पी पी कर गालियां देते थे ,जिन्होंने आप को मारने की व्यवस्था किया था और फिर उसका हर्ष मनाया था और मिठाइयाँ बांटा था ये पलटी कैसे मारा उन्होंने ? सचमुच आप बहुत दहशत में होगे इस वक्त की इस बार ये कौन सी मौत देने जा रहे है आप को ? अब इनका क्या इरादा है ? आज़ादी की पूरी लड़ाई में तो ये आप के खिलाफ खड़े थे और आप के बहुत से साथियों को इन्होने पकड़वाया और गवाहियाँ देकर सजा करवाया था | ज्यो ही देश आजाद हुआ ये अचानक धर्म विशेष के राज्य के पक्षधर हो गए और तांडव मचा दिया था इन्होने | जब लाखो की क़ुरबानी के बाद देश आज़ादी का जश्न मना रहा था उस वक्त ये आपके  विचार की हत्या करने उतर गए थे मैदान में | जब आप शांति करवा कर लौटे तो पैर छूने के बहाने से दाग गिया था गोली इन्होने आपके कृशकाय शरीर में | 
आखिर चौकने की बात तो है बापू ,,आप भी चौंक रहे है और आप के सभी पुजारी भी चौंके है ,चौंका है ये आपका पूरा देश ही नहीं बल्कि पूरी दुनिया में आप को मानने वाले चौंके भी है और चौकन्ना भी है | 
बापू आप विश्राम करिए ,आप ने बहुत पुरसार्थ पहले ही किया है ,उतार दिए थे अपने महंगे कपडे की जब तक यहाँ सभी के शरीर पर पूरा कपडा नहीं होगा आप एक कपडे में रहेंगे ,,देख रहे होगे आप गरीबी का मजाक उड़ाते लोगो को हर घटे बदलते कपडे और विचार ,,आप हो गए कृशकाय पर नहीं झुके उनके सामने जिनका सूरज नहीं डूबता था बल्कि उनके सूरज को पच्छिम में जाकर डूब जाने को मजबूर करा दिया ,,चाहे किसी से मिले या कही भी गए अपनी वेश भूषा में गए और अपनी शर्तो पर मिले पर आपकी ये खुद्दारी कही दम तोड़ती दिख रही है | 
पूरी दुनिया में आप ने सिखा दिया अहिंसा का मंत्र और हिसक लोग आप को खिलौना बना कर खेलने की कोशिश कर रहे है | तोड़ दी आप ने देशो की सीमाए मानवता के सवाल पर, पर मानवता को कुचल देने का पूर्ण इरादा रखने वाले आप की भावना का मजाक उडा रहे है | आप ने लिख लिख कर जगा दिया था देश को और भगा दिया था आज़ादी के दुश्मनों को और आज लिख और बोल बोल कर लोग आप की दी गयी आज़ादी और लोकतंत्र को ग्रहण लगा रहे है | 
हाँ बापू हमें याद है हमारा नारा ;;बापू हम शर्मिंदा है तेरे हत्यारे जिन्दा है ;; पर क्या करे भावनाओ में बहने वाला ये देश कभी कभी १९४७ की तरह की अफवाहों और भावनाओ में बह जाता है ,,फिर जग भी जाता है और सुधार देता है अपनी भूल को और पश्चाताप कर लेता है और फिर मजबूत हो जाता है आप का देश ,आप की दी गयी आज़ादी ,आप के सपने का लोकतंत्र ,और मानवता | पर बापू बीच बीच में ग्रहण लगता रहता है आप के प्यारे हिन्दोस्तान को | हम शर्मिंदा है बापू इस बार बार लगने वाले ग्रहण के लिए | बापू फिर भी हम आप को प्रणाम करते है आप को आप के जन्मदिन पर और बस विश्वास ही दिला सकते है की आप ने अकेले इतना बड़ा साम्राज्य पलट दिया था तो अब तो आप के मानने वालो की बहुत तादात है | 
आप बस देखते रहो अपनी बेचैनी छोड़ कर हम पहरेदार बन कर खड़े है और आप के  प्यारे देश को अब गुलाम नहीं होने देंगे और दुबारा आप की हत्या नहीं होने देंगे वो चाहे किसी भी तरह करने को कोशिश हो रही हो ? आप के हत्यारे पहचाने हुए है और हमारी निगाह में है | हमें याद है आप का नारा करो या मरो ,,हमें याद है आप का भजन और उसका मर्म ;इश्वर अल्ला तेरो नाम ;; अगर भेष और भाषा बदल कर कोई साजिश भी हो रही है तो उसे हम सफल नहीं होने देंगे बापू  हम खुर्दबीन से देख रहे है गोलवलकर की किताब का भाष्य कहा कहा हो रहा है और उसका रास्ता कहा तय हो रहा है ,,हम ढूढ़ रहे है वो पुस्तके जिनमे आप को हर पल मारा गया है बापू | 
आप विश्राम करिए बापू हम खड़े है उसी तरह जिस तरह गरीब का बेटा खड़ा है सरहद पर की आप के दुश्मनों की फ़ौज चाहे कितना भ्रस्ताचार कर रही है और भर्स्ट व्यापर कर रही है पर वो खड़ा है की बापू के देश पर कोई गन्दी निगाह न पड़े | हम हम खड़े है बापू | हम हम समझ रहे है की हत्यारों के परिवारी जानो द्वारा आपकी तरफ बढ़ना आप को सचमुच बहुत बेचैन किये है पर बापू आप तो अनंत शक्तियों के मालिक हो तभी तो ये पूरी कोशिश कर भी महज आप के शरीर को मार पाए |  कहा मार पाए आप को | आप तो खड़े हो विचारो के साथ पूरी दुनिया में ,जिधर भी ये जाते है आप खड़े दिखाई देते हो और जिसके यहाँ भी जाते है वो बस आप की ही चर्चा करता है और आप की याद पर जाने को मजबूर करता है | क्या बीतती होगी इन पर बापू ये तो उसी क्षण बिना मौत ही मर जाते होंगे अपनी निगाह में ,अपने दिल में ,| बापू मजबूर हो गए है ये और इनके परिवारी जन आप की तरफ बढ़ने को दुनिया के सामने शर्मिंदगी से बचने को जब तक ये उतने शक्तिशाली न हो जाये की हर इन्सान के दिल से ,देश के कोने कोने से और दुनिया के चप्पे चप्पे से आप को मिटा न दे और ये मुझे तो संभव नहीं दिखता इसलिए बापू अपने विचारो की ताकत पर भरोसा कर आप विश्राम करिए और आपकी आभा पर विश्वास कर हम भी बैठ जाते है पर आँखे खोले हुए और हर पल चौक्कना इनके वार से आप को बचाने के लिए | 
अच्छा बापू हमें माफ़ करना अब तक के लिए की ३० जनवरी १९४८ को आप से किया वादा हम पूरा नहीं कर पाए की आप की हत्या करने वाली विचारधारा को अब सर नहीं उठाने देंगे | लेकिन हमें और शर्मिदा तो आप नहीं देखना चाहेंगे इसलिए हम पर विश्वास करते हुए अपने जन्मदिन को मनाने दीजिये और आप भी जन्मदिन पर हमरा कृतघ्न प्रणाम स्वीकार करिए बापू | 
इन्सान का इन्सान से हो भाईचारा ,यही पैगाम तुम्हारा | तुम्हारे प्रिय नेता जी का नारा ;जय हिन्द |

ये कहा आ गए हम

ये कहा आ गये हम ?
(1947 से अब तक )
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आज़ादी के बाद आज़ादी की लडाई की सूत्रधार , कर्ता धर्ता कांग्रेस थी जिसने कुर्बानिया दिया था और बस एक सपना लेकर चली थी की मुल्क को सैकड़ो साल की गुलामी से आजाद करवाना है और तानाशाही शासन से लडते वक्त कहा पता होता है की एक दिन अचानक तानाशाह हार कर चल देगा । ये भी तो हो सकता था की लडाई के सारे नायक एक दिन जेलो मे फाँसी चढा दिये जाते या गोलियो से भून दिये जाते ।
आज़ादी मिलने की आहट के साथ कांग्रेस के नेताओ ने सोचना शुरू किया की आजाद देश कैसा बनाना है और चूंकि अन्ग्रेज लूट ले गया था इसलिए संसाधन का भी अभाव था और उसी मे प्राथमिकता तय करनी थी । जवाहर लाल नेहरु ने और साथियो ने तय किया की पहली प्राथमिकता देश को देश की शक्ल देना , शान्ती स्थापित करना और जनता को विश्वास दिलाना है की अब मुल्क हम सबका है और सबको मिल कर बनाना और बढ़ाना है । इसीलिए उन्होने बाँध ,सिचाई के साधन नहरे , बिजली , हर स्तर की और हर तरह की शिक्षा , चिकत्सा इत्यादि को प्राथमिकता दिया तो भविष्यदृष्टा होने के कारण आई आई टी , आई आई एम बनाया तो जमीन से लेकर आसमान तक के अनुसंधान की तरफ भी कदम बढाया ।
वो नही चाहते थे की भारत व्यर्थ की चीजो मे पैसा खर्च करे इसिलिए पंचशील सिद्धांत द्वारा पडोसियों को संदेश दिया की लडाइ के बजाय सह अस्तित्व ही विकास की कुन्जी है और इसमे वो चीन से धोखा खा गये जिस गम मे दुनिया से चले भी गये परंतु जाने से पहले प्राथमिकता मे परिवर्तन कर सैन्य क्षेत्र के लिए भी ऐसी नीव रख गये की फिर 1965 से लेकर बंगला देश होते हुये अब तक उस क्षेत्र मे भी भारत दुनिया की चार ताकतो मे शुमार है ।
आज़ादी की लडाई मे देश के साथ नही रहने वाले या गद्दारी तक करने वालो ने आज़ादी से 22 साल पहले एक संगठन बनाया जिसको कुछ लोग रायल सीक्रेट सर्विस भी कहते है और उनका लगातार यह मानना था की अंग्रेज उनके दुश्मन नही है बल्की मुस्लमान और साम्यवादी उनके बड़े दुश्मन है और इस सोच ने अन्ततः ऐसा जहर पैदा किया की आज़ादी के बाद मुल्क ठीक से सम्हला भी नही था कि अहिंसा से इतनी बडी लडाई जीतने वाले बापू की ह्त्या कर दिया इस विचार ने ।
यह विचार देश ही नही दुनिया की निगाह मे अछूत हो गया तो इन लोगो ने नया पैतरा चला और अपना एक राजनीतिक संगठन बनाया और उसका नाम रखा जनसंघ । काफी दिनो तक इस संगठन को भी लोगो ने भाव नही दिया क्योकी एक तरफ आज़ादी की लडाई मे बडी भूमिका निभाने वाले अलग तरह सोचने वाले ज्ञानी लोगो ने सोशलिस्ट पार्टी बना लिया था जो बहुत प्रभावशाली थी तो राजाओ ने स्वतंत्र पार्टी और कार्ल मार्क्स के विचार भी रुस की क्रांती से दुनिया मे फैल गये थे तो भारत मे भी साम्यवादी पार्टी स्थापित हो चुकी थी ।
राजाओ की स्वतंत्र पार्टी ने आगे चल कर जब विभिन्न दलो के विलय से लोक दल बना था तो उसमे विलय कर लिया था महारानी गायत्री देवी , पीलू मोदी के नेतृत्व मे ।
साम्यवादी पार्टी ने बंगाल और केरल के साथ अन्य स्थानो पर भी मजबूत पैठ बनायी जो काफी दिन तक रही पर भारत की जमीन और भारत की भाषा और सपने से न जुड़ पाने के कारण और लम्बे समय तक रुस और चीन का पिछ्लग्गू दिखने के कारण उसका क्षरण होता गया ।
सोशलिश्ट पार्टी के नेता डा राममनोहर लोहिया जो जवाहर लाल नेहरु के मित्र थे और महात्मा गांधी के भी प्रिय थे अज्ञात कारणो या काल्पनिक भविष्य की परिकल्पनाओ के कारण उसी नेहरु के इतने विरोधी हो गये जो हमेशा चाहते थे की आचार्य नरेंद्र देव ,लोहिया और जयप्रकाश इत्यादि कांग्रेस मे ही रहे और नया भारत बनाने मे सत्ता मे शामिल होकर योगदान दे और गांधी जी भी यही चाहते थे पर बापू की आकस्मिक हत्या के कारण यह नही हो पाया और डा लोहिया इतनी दूर निकल गये की कांग्रेस के सामने अपने को असहाय समझने वाले लोगो को उन्होने एक संजीवनी दे दिया "गैर कांग्रेसवाद "की और अलग अलग विचार के तथा विचारहीन लोग भी एक नाव पर सवार हो गये ।कहा सोशलिश्ट, कहा जनसंघ ,कहा साम्यवादी तो मुस्लिम लीग तक सब एक नाव पर सवार हो गये यद्दपि पूर्व मे भी श्यामाप्रसाद मुखर्जी मुस्लिम लीग के साथ सरकार बना चुके और इस समय काफी जगहो पर कांग्रेस के ही दल बदलुवो के साथ कुछ ही दिनॉ के लिए सरकार बना लिया जिसने यह संदेश भी दिया और इन लोगो मे आत्मविश्वास भी जगाया की इस फार्मूले से सरकार बनायी जा सकती है और फिर इसी तरह बेमेल खिचड़ी सरकारे बनती रही और गिरती रही ।
इस बीच पहले ताकत को केन्द्रित करने के चक्कर मे कांग्रेस ने प्रदेशो मे अपने को कमजोर किया तो आपात्काल लगा कर आज़ादी की लडाई की पूंजी को गंवा दिया ।फिर भी बाद मे उसके लिए प्रायश्चित किया और देश को इस स्थिति तक ला खड़ा किया की देश दुनिया की 5 बडी अर्थिक और सामरिक ताकतो मे शामिल हो गया लेकिन मजबूत और व्यवहारिक नेतृत्व के अभाव मे अपने को सहेज तथा समेट कर नही रख पाने के कारण कांग्रेस कमजोर होती गई और समझौते करते करते क्षेत्रीय दलो का पिछ्लग्गू भी होती गई काफी बड़े क्षेत्र मे और दूसरी तरफ व्यवहारिक और लचीली राजनीती के अभाव मे अपने मजबूत लोगो को खोती चली गई ।
लोकदल और समाजवादी परिवार वाद को ,ऊच नीच की खाई को और 10%बनाम 90%को मुद्दा बना कर चले थे जबकी चौ चरण सिंह जब तक जिन्दा रहे उन्होने किसान को राजनीती के केन्द्र मे रखा पर प्रधानमंत्री तक पहुच कर भी खुद अपने कृषी अर्थशास्त्र को फैसलाकुन तरीके से लागू नही कर पाये । परिवार वाद के खिलाफ राजनीती मे आगे बढे हुये सभी सिर्फ परिवार नही बल्की खानदान वाद और जातिवाद के कीचड़ मे धंस गये आगे चल कर और 90 %की लडाई की बस बात करते रहे और खुद खानदान समेत 10% मे शामिल हो गये और जब इसपर कभी सवाल हुआ तो बेशर्म जवाब था की समता के साथ संपन्नता की लडाई लड़ रहे है वो और अभी कुछ लोगो अंबानी अडानी के साथ बैठे है कभी न कभी सब बैठ जायेंगे ।
बापू की हत्या के बाद पूरी दुनिया मे बदनाम हो गये लोगो ने नई रणनीति पर काम किया और भाषा तथा चेहरे पर प्रगतिशीलता का मुखौटा लगा लिया ,यहा तक की अपने संविधान मे गांधीवाद और समाजवाद को भी जोड़ लिया । जनसंघ की स्थापना के बाद के कई अध्यक्षो का नाम तो आज उनके नेताओ को भी नही याद है पर पहले दीन दयाल उपाध्याय के समय मे अन्त्योदय जैसी बातो से लोगो का ध्यान खीचा ।फिर लोहिया जी और उपाध्याय जी की मुलाकातो ने और साथ ने इनकी कालिख को कम कर समाज मे स्वीकार्यता बढाई तो आपातकाल के बाद जनता पार्टी मे शामिल हो और मंत्री बन कर चेहरे गढ़ने मे कामयाबी मिली ।जहा अटल बिहारी वाजपेयी के रूप मे रणनीतिक तौर पर एक उदारवादी चेहरा गढा गया और भारत के लिए स्वीकार्य बनाया गया वही अडवाणी जी ने 1977 मे ही सूचना प्रसारण मंत्री बनते ही अखबारो मे संघ के लोगो को भरना शुरू किया और आरएसएस की इच्छानुसार काम शुरू हो गया ।आगे चलकर विश्वनाथ प्रताप सिंह के रूप मे इन लोगो को एक और मोहर मिल गया और उन्हे राजा नही फकीर बना कर खुद को थोडा और मजबूत कर लिया ।अटल बिहारी वाजपेयी के चेहरे का फायदा उठा जहा केन्द्र से प्रदेश तक सत्ता पायी वही अपना संघी एजेन्डा भी जारी रखा ।
अन्ततः अन्ना ,विनोद राय जैसो का इस्तेमाल तो गुजरात मे हिन्दू अस्मिता का प्रतीक और फिर मॉडल से लेकर अच्छे दिन तक ने आरएसएस को भारी बहुमत की सत्ता तक पहुचा दिया ।
पर किसने किया क्या ? जो कांग्रेज़ सम्पूर्ण भारत को ही नही बल्की गुट निरपेक्ष आंदोलन के नाम पर 100 से ज्यादा देशो को समेट कर चलती थी वो अपने को भी समेटने मे असफल रही पर देश के प्रति समर्पण , दृष्टी , सपनो और संकल्प के कारण उसने जब और जितना मौका मिला देश के लिए सर्वश्रेस्ठ करने की कोशिश किया ।लेकिन साम्यवादियो ने तो जगह जगह कारखाने बंद करवा कर मजदूरो को बेकार ही किया और सही मायने मे मार्क्सवाद का विस्तार करने मे क्या अपने दल को भारतीय परिपेक्ष्य मे ढाल कर मजबूत करने मे पूरी तरह असफल रहे और अब नजर ही नही आ रहे है केरल के अलावा ।
समाजवादी आन्दोलन और लोहिया के विचार कही दफन हो गये और यह अन्दोलन पूंजीपतियो तथा भ्रष्टाचार की चेरी बन खानदान और जाति के मकडजाल मे फड़फड़ा रहा है और अन्तिम सांसे गिन रहा है ।
आरएसएस ने जरूर अपने को बहुत मजबूत बना लिया है और अपना विस्तार पूंजी से सत्ता के हर तंत्र तक कर लिया है ।चुनाव भाजपा लड़ती है और सामने वो दिखती है पर सत्ता का संचालन और फौसले आरएसएस के होते है ।बिना किसी जवाबदेही के सत्ता का पूरा उपभोग कर रहा है ये संगठन और अपने व्यक्तियो की पार्टी के संगठंन पर हर जगह तथा सत्ता और उसके संस्थनो मे हर जगह बैठता जा रहा है और इसके सभी लोग जिन चीजो की बदनामी होती है उन आरोपो से अछूते नही हौ 
है यद्दपि इसका कहना है कि ये संस्कृतिक संगठन है पर वह संस्कृतिक और समाजिक काम कही दिखता नही सिर्फ फोटो सेशन के अलावा न हिन्दू समाज के दुख दर्द मे ही कही भागीदारी दिखती है । हा भाजपा और उसके नेत्रत्व का चेहरा जरूर इन 9 सालो मे बदरंग हुआ है अज्ञानता और असफलता के कारण , अव्यव्हारिक फौसलो के कारण ।आज जहा देश अर्थिक इतिहास की सबसे बड़ी आर्थिक बदहाली का शिकार है तो सबसे बडी बेरोजगारी का भी ।विदेश नीति के हर मोर्चे पर फ़ेल है तो सारे पडोसियो से सम्बंध खराब किया बैठा है ।चीन ने इतने बड़े हिस्से पर कब्जा कर लिया है तो नेपाल , भूटान और बंगला देश भी आंख दिखा रहे है । जनसंघ का नारा था हर हाथ को काम हर खेत को पानी दोनो पता नही कहा विलुप्त हो गये ,हिन्दी सिसक रही है तो देश की बर्बादी मे हिन्दू भी बर्बाद है और हिन्दुस्तन आईने मे खुद को पहचानने की असम्भव कोशिश कर रहा है ।दीन दयाल उपाध्याय का अन्त्योदय आखिरी पायदान पर बैठे अंबानी और अडानी की चौकीदारी कर रहा है ।
लिखने को तो बहुत कुछ है पर सोचने को सिर्फ इतना है कि क्या इसी के लिए इतनी लम्बी आज़ादी की लडाई चली ? क्या इसी के लिए लाखो ने कुर्बानी दिया ? क्या बापू ,भगत ,सुभाष से नेहरु तक के ख्वाब इसी तरह चकनाचूर हो जायेंगे ? क्या राजनीतक दल ऐसे ही अपनी स्वीकार्यता खोते रहेंगे अपने कर्मो से और विचलन से ? क्या भारत  आरएसएस और उसके गुरु गोल्वल्कर के सपनो का हिटलर वाला भारत बन जायेगा जहा सिर्फ और सिर्फ मौत का तांडव और बर्बादी ही बर्बादी होगी ।
और ये भी कि---
ये कहा आ गये हम ?

मंगलवार, 1 अक्टूबर 2024

महात्मा_गाँधी को जवाब चाहिये -----

कल 2 अक्तूबर है --

#महात्मा_गाँधी को जवाब चाहिये -----

                                                                                                                                                                                                                                                                                       बहुत आश्चर्यचकित है हिंदुस्तान आज उन ताकतों के द्वारा महत्मा गाँधी की माला जपने से जिनके आदर्शो ने आज से 76 वर्ष पूर्व महात्मा गाँधी की महज शारीरिक हत्या कर दी थी ,लेकिन बापू मरे नही थे ।  अपने विचारो और आदर्शो के साथ वो आज भी जिन्दा है | 76 वर्ष बीत गए | इतनी  लम्बी अवधि में एक पूरी पीढ़ी गुजर जाती है । रास्ट्र के जीवन में अनगिनत संघर्षो ,संकल्पों और समीक्षाओ का दौर आता और जाता रहा | इतने उतार और चढाव के बावजूद अगर आज भी किसी का वजूद कायम है तों निश्चय ही उनमे कुछ तों चमत्कार होगा | बापू को इसी नजरिये से देखने की जरूरत है |

मुल्क को आजादी दिलाने के बाद भी वे संतुस्ट नही थे | सत्ता से अलग रहकर वह एक और कठिन काम में लगे थे | वे देश की आर्थिक ,सामाजिक और नैतिक आजादी के लिए एक नए संघर्ष की उधेड़बुन में थे | रामधुन ,चरखा ,चिंतन तथा प्रवचन उनकी दिनचर्या थी | एक दिन पहले ही उनकी प्रार्थना सभा के पास धमाका हुआ था लेकिन दुनिया का महानतम सत्याग्रही विचलित नही हुआ | वह स्वावलंबी भारत का स्वप्न देखते थे |वह गाँवो को अधिकार संपन्न ,जागरूक तथा अंतिम व्यक्ति को भी देश का मजबूत आधार बनाना चाहते थे |जब दिल्ली में उनके कारण आई सरकार स्वरुप ले रही थी ,स्वतंत्रता का जश्न मन रहा था ,तब बापू दूर बंगाल में खून खराबा रोकने के लिए आमरण कर रहे थे | बापू की दिनचर्या में परिवर्तन नही ,विचारो में लेशमात्र भटकाव नही ,लम्बी लड़ाई के बाद भी थकान नही और लक्ष्य के प्रति तनिक भी उदारता नही | अहिंसा को सबसे बड़ा हथियार मानने वाले बापू निर्विकार भाव से अपनी यात्रा पर चले जा रहे थे की तभी एक अनजान हाथ प्रकट हुआ जो आजादी की लड़ाई में कही नही दिखा था ,ना बापू के साथ ,ना सुभाष के साथ और ना भगत सिंह के साथ | उस हाथ में थी अंग्रेजो की बनाई पिस्तोल, उससे निकाली अंग्रेजो की बनाई गोली ,वह भी अंग्रेजो के दुम दबा कर भाग जाने के बाद ,तथाकथित हिन्दोस्तानी हाथ से |     वह महापुरुष जिसके कारण इतनी बड़ी साम्राज्यवादी ताकत का सब कुछ छीन रहा था ,फिर भी उनके शरीर पर एक खरोंच लगाने की हिम्मत नही कर पाई , जिस पर अफ्रीका की रंगभेदी सरकार भी बल प्रयोग नही कर सकी थी, उनके सीने में अंग्रेजो की गोली उतार दी एक सिरफिरे कायर ने और वह महापुरुष चला गया हे राम कहता हुआ |  गाँधी जी के राम सत्ता और राजनीति के लिए इस्तेमाल होने वाले राम नही थे बल्कि व्यक्तिगत जीवन में आस्था तथा आदर्श के प्रेरणाश्रोत राम  थे |
तब आर एस एस पर उगली उठी थी ,उसपर पाबन्दी भी लगी और संघ के कट्टर सदस्य होने के बावजूद अज्ञात कारणों से हत्यारे ने अपने संघ से रिश्ते नकार दिये थे | सवाल उठा की बापू की हत्या क्यों की गयी |आज भी यह सवाल अनुत्तरित है | इस सवाल की प्रेतछाया से बचाने के लिए ही शायद भाजपा ने कुछ वर्षो पहले गांधीवाद शब्द का प्रयोग  किया था संघ से बहुत विरोध हुआ था और फिर कभी नाम नही लिया । यह गिरगिट के रंग बदलने के समान ही था |
 
गाँधी जी फासीवाद के रास्ते की बड़ी बाधा थे | गाँधी जी 'ईश्वर- अल्ला तेरो नाम 'तथा 'वैष्णवजन तों तेने कहिये प्रीत पराई जाने रे 'की तरफ सबको ले जाना चाहते थे | बापू के आदर्श राम ,बुद्ध ,महावीर ,विवेकानंद तथा अरविन्द थे | हिटलर को आदर्श मानने वाले हिटलर कि तारीफ करते हुए किताब लिखने वाले और हिटलर को आदर्श बताने वाले और गान्धी जी के हत्यारे को महान बताने की किताब छाप कर बाटने वाले उन्हें कैसे स्वीकार करते ? गाँधी सत्य को जीवन का आदर्श मानते थे ,झूठ को सौ बार सौ जगह बोल कर सच बनाने वाले उन्हें कैसे स्वीकार करते ? शायद इसीलिए महात्मा के शरीर को मार दिया  गया | 
क्या इससे गाँधी सचमुच ख़त्म हो गए ? बापू यदि ख़त्म हो गए तों मार्टिन लूथर किंग को प्रेरणा किसने दी ? नेल्सन मंडेला ने किस की रोशनी के सहारे सारा जीवन जेल में बिता दिया ,परन्तु अहिंसक आन्दोलन चलते रहे और अंत में विजयी हुए ? दलाई लामा किस विश्वास पर लड़ रहे है इतने सालो से ? खान अब्दुल गफ्फार खान अंतिम समय तक सीमान्त गाँधी कहलाने में क्यों गर्व महसूस करते रहे ? अमरीका के पूर्व राष्ट्रपति बराक ओबामा आज भी किसको आदर्श मानते है और दुनिया में बाकी लोगो को भी मानने की शिक्षा देते रहते है ?अभी हाल मे कुछ देशो मे अहिंसक क्रान्ति किसके रास्ते पर चल कर हुई । संयुक्त रास्ट्र संघ के सभा कक्ष से लेकर 100 से ज्यादा देशो की राजधानियों ने महात्मा गाँधी को जिन्दा रखा है |कही उनके नाम पर सड़क बनी ,तों कही शोध या शिक्षा संस्थान और कुछ नही तों प्रतिमा तों जरूर लगी है |जिसको भारत में मिटाने का प्रयास किया गया ,वह पूरी दुनिया में जिन्दा है | महान वैज्ञानिक आइन्स्टीन ने कहा था कि आने वाली पीढियां शायद ही इस बात पर यकीन कर सकेंगी की कभी पृथ्वी पर ऐसा हाड़ मांस का पुतला भी चला था | जिस नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को गाँधी के विरुद्ध बताया गया ,उन्होंने जापान से महात्मा गाँधी को रास्ट्रपिता कह कर पुकारा तथा कहा की यदि आजादी मिलती है तों वे चाहेंगे की देश की बागडोर रास्ट्रपिता सम्हालें ,वह स्वयं एक सिपाही की भूमिका में ही रहना चाहेंगे | परन्तु बापू को सत्ता नही ,जनता की चिंता थी ,उसकी तकलीफों की चिंता थी |
उन्होंने कहा की भूखे आदमी के सामने ईश्वर को रोटी के रूप में आना चाहिए | यह वाक्य मार्क्सवाद के आगे का है | उन्होंने कहा की आदतन खादी पहने ,जिससे देश स्वदेशी तथा स्वावलंबन की दिशा में चल सके ,लोगो को रोजगार मिल सके | नई तालीम के आधार पर लोगो को मुफ्त शिक्षा दी जाये | लोगो को लोकतंत्र और मताधिकार का महत्व समझाया जाये और उसके लिए प्रेरित किया जाये | उन्होंने सत्ता के विकेन्द्रीकरण ,धर्म ,मानवता ,समाज और रास्ट्र सहित उन तमाम मुद्दों की तरफ लोगो का ध्यान खींचा जो आज भी ज्वलंत प्रश्न है|
वे और उनके विचार आज भी जिन्दा है और प्रासंगिक है | 
अमरीका में कुछ वर्ष पूर्व जब हिलेरी क्लिंटन ने बापू पर कोई हल्की बात कर दिया तों अमरीका के लोगो ने ही इतना विरोध किया की चार दिन के अन्दर ही हिलेरी को खेद व्यक्त करना पड़ा | गुजरात की घटनाओं के समय जब हैदराबाद में दो समुदाय के हजारों लोग आमने -सामने आँखों में खून तथा दिल में नफरत लेकर एकत्र हो गए थे तों वहा दोनों समुदाय की मुट्ठी भर औरते मानव श्रंखला बना कर दोनों के बीच खड़ी हो गयी थी ।  यह गाँधी का बताया रास्ता ही तों था ,वहा विचार के रूप में गाँधी ही तों खड़े थे | कुछ साल पहले अहिंसा के पुँजारी बापू के घर गुजरात में राम ,रहीम और गाँधी तीनो को पराजित करने की चेष्टा हुई  ,लेकिन हत्यारे ना गाँधी के हो सकते है ,ना राम के ना रहीम के ,और गुजरात काण्ड के हीरो पता नही कैसे महात्मा गान्धी का नाम लेने और लगातार लेने कि हिम्मत जुटा रहे है । समय बतायेगा कि बापू और सरदार का नाम लेने के पीछे असली मंशा क्या है । 
महत्मा गाँधी तों नही मरे ,फिर हत्यारे ने मारा किसे था ?ऐसे सिरफिरे लोग और उनके संगठन कितनी हत्याएं करेंगे ?पिछले 76 वर्षो में भी वे गाँधी को नही मार पाये है | वह कौन सा दिन होगा जब फासीवादी लोग गाँधी की पूर्ण हत्या करने में कामयाब हो पाएंगे ? सचेत रहना पड़ेगा की फासीवादी ताकतें अचानक बापू का इस्तेमाल करने लगी ? इसके पीछे देश को हिटलर की तरह भ्रमित कर सत्ता हथियाने और फासीवाद थोप कर बापू की अंतिम हत्या करने का उद्देश्य तो नहीं है ?  जिम्मेदारी और जवाबदेही बापू को मानने वालो की है की सत्ता की ताकत से महात्मा गाँधी को बौना करने ,उन्हें गाली देने और गोली मरने वालो से मानवता को बचाएं और देश को बचाएं  |रास्ता वही होगा जो गाँधीजी  ने दिखाया था | 76 वा वर्ष जवाब चाहता है दोनों से की फासीवादियो तुमने गाँधी को मारा क्यों था ?उद्देश्य क्या था ? तुम कहा तक पहुंचे ?उनके मानने  वालो से भी कि आर्थिक गैर बराबरी ,सामाजिक गैर बराबरी के खिलाफ ,नफ़रत और शोषण के खिलाफ बापू द्वारा छेड़ा गया युद्ध फैसलाकुन कब तक होगा ? उनके सपनो का भारत कब तक बनेगा ? इन सवालो के साथ महात्मा गाँधी तथा उनके विचार आज भी जिन्दा है और कल भी हमारे बीच मौजूद रहेंगे |