शुक्रवार, 6 सितंबर 2024

#जिन्दगी_के_झरोखे_से मुलायम सिंह यादव जी से आखिरी बातचीत

#जिन्दगी_के_झरोखे_से 

मुलायम सिंह यादव जी से वो आखिरी बातचीत और मेरा बोला वाक्य जिसका मुझे आज भी अफसोस है :; 

2016/17 में सत्ता रहते हुए गैरकानूनी( क्योंकि पार्टी अध्यक्ष की अनुमति के बिना सम्मेलन नही बुलाया जा सकता था और अध्यक्ष मुलायम सिंह यादव जी थे ) तरीके से पार्टी का एक सम्मेलन बुलाया गया और उसमे मुलायम सिंह यादव जी को अध्यक्ष पद से हटा दिया गया था तथा मुख्यमंत्री अखिलेश यादव को अध्यक्ष बना दिया गया था । 

मुझे मुलायम सिंह यादव का ये अपमान तथा पार्टी विरोधी कार्य मंजूर नहीं था । भगवती सिंह जी ,अंबिका चौधरी , ओम प्रकाश सिंह , शादाब फातिमा , नारद राय के अलावा पूरी पार्टी और मुलायम सिंह यादव का शिवपाल सिंह यादव को छोड़कर पूरा खानदान सत्ता के साथ यानी अखिलेश यादव के साथ चला गया था । आजम खान साहब जरूर उस सम्मेलन में नही गए थे और लगातार मुलायम सिंह यादव तथा अखिलेश यादव के बीच में पुल बनने की असफल कोशिश किया था ।
 
उस सम्मेलन में अखिलेश यादव ने बोला था की आने वाले चुनाव में वो सरकार बना लेंगे तथा सरकार और पार्टी दोनो नेता जी को सौप देंगे पर क्या हुआ वो दुनिया ने देखा और सबको याद है ।

इसके बाद के चुनाव में भाजपा ने इस घटना का अपने लिए इस्तेमाल कर लिया तथा इतिहास के एक व्यक्ति से अखिलेश यादव को जोड़ते हुए नारा दे दिया की " जो न हुआ अपने बाप का वो क्या होगा आप का " और भाजपा ने माहौल अपने पक्ष में कर लिया तथा चुनाव जीत लिया ।

यद्यपि मैने तो मुलायम सिंह यादव जी  के निष्कासन के दिन ही मुलायम सिंह यादव जी के निर्देश पर उनके दरवाजे पर खड़े देश भर की मीडिया से बात करते हुए कह दिया था कि अखिलेश जी अभी भी भूल सुधार लीजिए वरना इस चुनाव में 50 सीट भी नही मिलेगी तथा आप के माथे पर जो कलंक लगेगा वो लंबे समय तथा पीछा नहीं छोड़ेगा और उस वक्त पार्टी की टूट पर बोलते हुए मैं रो पड़ा था । बाद में काफी लोगो ने बताया कि उस वक्त के मेरे बयान को सुन कर काफी लोग रो पड़े थे ।

उस वक्त पूरे देश का मीडिया केवल इस घटना पर केंद्रित था और लखनऊ का माहौल बहुत ही गर्म था और यहां तक तनाव बढ़ गया था की अखिलेश समर्थक नौजवानो ने मुलायम सिंह यादव की तस्वीर को पैरो से रौंदा था ।बाकी सब इतिहास में दर्ज है और ये भी दर्ज है की अखिलेश यादव के एक समर्थक ने एक चिट्ठी जारी किया जिसमें मुलायम सिंह यादव जी की पत्नी को कैकेई शब्द से विभूषित किया था।

बाकी सब इतिहास में दर्ज है । इस सारे घटना क्रम के लिए मुलायम सिंह यादव जी ने राम गोपाल यादव जी को जिम्मेदार ठहराया था और कहा था की अखिलेश राम गोपाल के बहकावे में आ गया ,रामगोपाल इसे कही का नही छोड़ेगा । 

जैसा मैने प्रारंभ में लिखा की मुझे ये अनैतिक काम मंजूर नहीं था इसलिए मैं पूरी ताकत से मुलायम सिंह यादव जी के साथ खड़ा हो गया था और मुलायम सिंह यादव जी का प्रवक्ता बन वो जो कहते रहे वो मैं बोलता रहा । पार्टी के महामंत्री पद और मंत्री दर्जा से मैने स्तीफा दे दिया था । इसके बाद के बाकी घटना क्रम पर अलग एपिसोड लिखूंगा । 
अभी उस दिन तक सीमित करता हूं । 

मुलायम सिंह यादव जी अकेले पड़ गए थे और उनके यहां पार्टी का क्या परिवार का भी कोई नही आता था । बस शिवपाल यादव और नेता जी के  कुछ गिने चुने पुराने साथी कभी कभी लखनऊ आने पर मिल लिया करते थे । मैने एक नियम बना लिया की लगातार उनसे मिलने जाना है और कुछ समय उनके साथ बिताना है ताकि उन्हें ये नही लगे की कोई उनके साथ नही है । 

मुलायम सिंह यादव जी के निधन के कुछ समय पहले मैं इसी तरह उनसे मिलने गया । जैसा कि हमेशा होता था वो घर के अंदर बुला लेते थे । उस दिन भी उन्होंने अंदर बुला लिया तथा वही पर उनकी पत्नी साधना यादव जी भी बैठी थी । हाल चाल और इधर उधर की कुछ बाते हुई की अचानक उन्होंने मुझसे पूछा की ये रामगोपाल आप के इतने खिलाफ क्यों है ? उसकी खिलाफत के कारण आप का बहुत नुकसान हुआ और साथ ही एस पी सिंह बघेल तथा रामशकल गुजर भी आप के खिलाफ बहुत शिकायते करते और आरोप लगाते जो जो जांच कराने पर सब गलत निकला । मैं आप को राज्य सभा मे रखना चाहता था पर रामगोपाल विरोध कर देता था । 

इसपर मैने पूछा कौन है रामगोपाल तो बोले पार्टी का महासचिव है आप नही जानते है । मैने कहा कि पार्टी के महासचिव तो रामजी लाल सुमन भी है जो मेरे पड़ोसी है,और भी कई है क्या उनकी भी आप ऐसे ही सुनते है । पार्टी के उपाध्यक्ष और बहुत बड़े नेता थे जनेश्वर मिश्र क्या उनकी आप ने कभी सुना इन मामलों में ? जहां तक राम गोपाल जी का सवाल है न मैने उनकी भैंस खोला और उनका खेत काट लिया तथा कभी उनके मेरे बीच कोई कहा सुनीं भी नहीं हुई । हा वैचारिक और पसंद न पसंद का अंतर उनके मेरे बीच रहा है ।वो आप के परिवार से जुड़े नही होते तो सिर्फ मास्टर होते । उनकी योग्यता इतनी है की तीस साल से संसद में होने के बावजूद कोई उनका महत्वपूर्ण भाषण किसी को याद नही है , कोई प्राइवेट मेंबर बिल याद नही है और पिछड़ों या  अल्पसंख्यको के सवाल पर या देश के सवाल पर कभी उन्होंने ऐसा कुछ नही किया की कुछ देर तक सदन डिस्टर्ब हो गया हो । आप को ऐसे ही सब पसंद आए राज्य सभा में भेजने को जो गए और कमा धमा कर वापस आ गए कोई नाम भी नही जान पाया पर मेरा देश में नाम होता और संसद में मेरी भूमिका होती जो आप को शायद इसलिए पसंद नहीं है की सत्ता नाराज न हो जाए । 

जाने दीजिए भाईसाहब अब आप का समय अपनी गलतियों पर अफसोस प्रकट करने का तथा किसी के साथ बुरा किया हो तो उसपर खेद व्यक्त करने का है ऐसी बाते करने का नही और वो भी मुझसे जो जब आप के साथ कोई नही तब भी लगातार आप के साथ बैठा है । जाने दीजिए । 

1989 में मैने आगरा के खेरागढ़ से टिकट मांगा था और मेरा संसदीय बोर्ड में बहुमत था तथा चौ देवीलाल और जॉर्ज फर्नांडीज सहित कई लोग मेरे पक्ष में थे । वो विश्वनाथ प्रताप सिंह की लहर का चुनाव था इसलिए खेरागढ़ में मैं क्या कोई भी चुनाव लड़ता तो जीत जाता वहा के जातिगत समीकरण के कारण पर आप एक अपराधी प्रवृति के व्यक्ति को टिकट देना चाहते थे इसलिए तब आप ने बोर्ड में ये कह दिया था की आप तो देश मे प्रचार के लिए निकलेंगे तो आप का चुनाव सी पी राय देखेंगे  और आप के मुख्यमंत्री हो जाने पर एम एल ए क्या होता है सी पी राय उससे ज्यादा बन जाएंगे । सबसे पहले जॉर्ज साहब बाहर आए थे और उन्होंने मुझसे कहा था कि होने वाला सी एम आपको अपना चुनाव इंचार्ज बनाना चाहता है और बोल रहा है की सी एम बनने के बाद सी पी राय एम एल ए से ज्यादा होंगे तो आप उसकी बात मानो। क्या पता वो आप को राज्य सभा में भेज दे या एम एल सी बना कर मंत्री बना दे । फिर यही सब देवी लाल जी , चंद्रशेखर जी इत्यादि ने भी कहा । फिर भी काफी कोशिश किया था मैंने की आप मान जाए और चुनाव जीत कर मेरा सदन का कैरियर शुरू हो जाए पर आप नही माने थे। मैं आप के चुनाव में इटावा आ गया और प्रचार में लगा रहा पर आप सत्ता आने के बाद आप मुझे मिले ही नही । तब मिले जब सरकार जा रही थी । 

भाई साहब आप मेरे साथ लगातार यही तो करते रहे है तो बोले दर्जा तो दिया । मैने कहा की वो तो मैं कभी नही चाहता था आपने  दबाव देकर दो बार ज्वाइन करवाया ये कह कर की अभी ये होने दो चुनाव आते ही राज्य सभा में भेज देंगे । यहां तक कि एक बार तो आप ने अपने घर जहा आप का और मेरा परिवार साथ लंच कर रहा था सबके सामने कहा था की इस बार फला फला कारण से आप को अनिल अंबानी तथा जया बच्चन को टिकट देना पड रहा है पर अभी मुझे कोपरेटिव फेडरेशन का अध्यक्ष बनायेंगे जो आप ने नहीं बनाया तथा अगली बार चाहे एक टिकट हो मुझे ही देंगे । 

आप ने तो आगरा में मेरी किताब के विमोचन करते वक्त भी सैकड़ों लोगों के सामने कहा था की आप लोग नही जानते होंगे पर मैं जानता हूं की सी पी राय देश में बहुत बड़े लोगो को जानते है वो किसी को भी बुला सकते थे पर उन्होंने मुझे बुला कर मेरा सम्मान बढ़ाया है । यहां समाज के सभी प्रमुख लोग और साहित्यकार तथा कवि बैठे है आज मैं सबके सामने बताना  चाहता हूं की सी पी राय ने क्या क्या किया मेरे लिए और आप ने बहुत कुछ बताने के बाद यह भी कहा था की मैने सी पी राय के साथ न्याय नहीं किया । अब सी  पी राय का जो सम्मान समाज तथा साहित्य में है वो मैं उन्हें राजनीति में दूंगा, अब उनको उनका हक मिलेगा ।

ऐसी ही कुछ बाते कहते कहते अचानक मुझे पता नही क्या सूझा कि मैंने बोल दिया की भाई साहब आप के और मेरे बीच 35/36 साल से एक लड़ाई चल रही है । 
वो बोले की मेरे आप के बीच लड़ाई चल रही है । तब बोले मेरे आप के बीच क्या लड़ाई है ? 
मेरे मुंह से निकल गया कि मेरी सच्चाई,ईमानदारी और वफादारी तथा आप का झूठ ,धोखा और दगाबाजी के बीच लड़ाई है ।
आप लगातार जीत रहे हो और मैं हार रहा हूं।
आप कभी रामगोपाल के कंधे पर रख कर बंदूक चला देते हो तो कभी अमर सिंह का इस्तेमाल कर लेते हो । बेनी प्रसाद वर्मा ने संसद में आप को गाली दिया तो उनको राज्य सभा दे दिया ,अमर सिंह ने आप के खिलाफ कोई कसर नहीं छोड़ा तो उसे दे दिया पर मेरा गुण आप की निगाह में अवगुण ही रहे इसलिए मैने ये लड़ाई बोला ।

इस बात पर वो बहुत अपसेट हो गए तथा बोलने लगे  : क्या मैं दगाबाज हूं ,क्या में दगाबाज हूं ? 
और फिर यही वाक्य जल्दी जल्दी बोलने लगे ।तब साधना जी उठी और दौड़ कर एक प्याली में दो रसगुल्ला रख लाई तथा जबरन उनके मुंह में डालने लगी कि जल्दी खा लीजिए वरना बीमार हो जाएंगे और अभी अस्पताल ले जाना पड़ेगा ।  
मैं इस बात से आवाक रह गया तथा अंदर से बहुत दुखी हो गया । मेरा मन मुझे कचोटने लगा की मैने ये क्या कर दिया ।अभी कुछ हो जाएगा तो मैं खुद से निगाह नही मिला पाऊंगा। 
वहा सन्नाटा पसर गया । सब चुप । कोई कुछ नही बोला काफी देर तक । फिर करीब 20/25 मिनट बाद साधना जी ने सन्नाटा तोड़ा और बोली की रायसाहब से क्यों नाराज हो रहे हो । आप ने क्या कर दिया इनके लिए ? राय साहब ने क्या क्या किया है वो आप भी बताते रहे और मैं भी जानती हूं । इनकी पत्नी को आप ने बहन माना और राखी बंधवाया पर वो कैंसर से मर गई आप ने क्या किया ? वैसे तो आप लोगो को भी जहाज से भेज कर मेदांता में इलाज करवाते रहे ।

तब मैने कहा भाभी जी जाने दीजिए मुझे ऐसा नहीं कहना चाहिए था । मैं अपने शब्दो के लिए माफी चाहता हूं ।

इसपर साधना जी फिर नेता जी से बोली की मैने कई बार आपको कहा की राय साहब को अपना सलाहकार बना लो । ये भी कहा था की प्रोफेसर साहब को दिल्ली में अकेले मत रखो राय साहब को भी रखो पर आप ने बात नही माना। साधना जी बोली की ये जी बुरा वक्त हम लोग देख रहे है वो नही होता ।  मैं ये सब सुनकर हतप्रभ था क्योंकि साधना जी से मेरी कोई बात नही होती थी । 

मुलायम सिंह जी तब बोले सी पी राय अखिलेश को मुख्यमंत्री बना कर गलती हो गई । वो मुख्यमंत्री नही बनता तो लीडर बन जाता । अब वो  लीडर नही बन पाएगा । मैने कहा ये तो आप मुझसे कई बार कह चुके पर बन गया तो बन गया और आपने ही बनाया  । बोले  देखो क्या कर बैठा ।अपने मन का हो गया है हमारी बात ही नही मानता । मैने एम एल सी के लिए आप के लिए बोला था की आप लखनऊ में ही रहोगे और मंत्री बनवा दूंगा पर हरियाणा का वो क्या नाम है जो यूथ का नेता था , लाठर ! उसका नाम गवर्नर हाउस भेज कर कलकत्ता  चला गया था । 
मैने कहा की अब तो आप साथ है न । तो नेता जी बोले सी पी राय पेट और मुंह में अंतर होता है ।  बेटा है तो उसे कैसे छोड़ देता , माफ़ कर दिया और मेरी बनाई पार्टी भी तो खत्म नही होने देना था । 

मैने कहा की क्या आप को याद है की समाजवादी पार्टी कैसे बनीं। तो बोले सब याद है । आप ने ही पहली बार कहा था बनाने को और फिर जनेश्वर तथा कपिल देव बाबू को लेकर मिले था और मेरे पीछे पड़े रहे तब मैने पार्टी बनाया । आप ने भी बहुत साथ दिया और बहुत मेहनत किया पार्टी के लिए । 
फिर बोले की आप की अखिलेश से मुलाकात हुई । मैने कहा नही , वो आपके साथ गद्दारी नहीं करने वालो को अपना दुश्मन मानते है तो मुझसे क्यों मिलेंगे । भाई साहब अब जो हो गया वो हो गया पर ये नही पता की किसका जीवन ज्यादा है लेकिन जब तक मेरा जीवन है तब तक आप का साथ नही छोडूंगा । इसपर साधना जी बोली की देख लो एक ये रायसाहब है जो जिंदगी भर साथ निभाने की बात कर रहे है दूसरी तरफ वो लोग है जो हमारे घर का रास्ता ही भूल गए । 

मुलायम सिंह यादव जी पता नही उम्र के कारण या यू ही भावुक हो गए और तब बोले की इस बार राज्य सभा चुनाव आने दो मैं अखिलेश के पास चल कर बैठ जाऊंगा जब तक आप को टिकट नहीं देता । साधना जी बोली की मैं भी साथ चलूंगी । मैने कहा भाईसाहब जाने दीजिए । अब आप के हाथ में कुछ नही है और मेरे लिए ऐसा करेंगे तो आप को फिर बेइज्जत होना पड़ेगा और वो मैं नही चाहूंगा । इसपर बोले की मैने आप के साथ बहुत गलत किया अब दुनिया से जाने के पहले भूल सुधारूंगा । मैने कहा जाने दीजिए फिर से एक असत्य मत बोलिए तो नेता जी बोले की असत्य क्यों आप देख लेना इस बार । 

साधना जी ने नौकर को आवाज दी की फला वाली मिठाई ले आओ और चाय ले आओ , पानी भी लेते आना । मिठाई खाकर जो मुलायम सिंह यादव जी ने जोर देकर तीन मिठाई खिला दिया और चाय पीकर एक बार फिर उनसे माफी मांग कर मैं विदा हो । 

अफसोस कि फिर मुलायम सिंह यादव जी नही बल्कि उनकी अंत्येष्ठि में उनकी मिट्टी से ही मुलाकात हुई । 
उन्होंने क्या किया वो उनके साथ गया पर उस दिन अपने बोले गए शब्दो पर जिससे वो आहत हो गए थे मुझे आज तक अफसोस है ।

मंगलवार, 16 जुलाई 2024

हम सभी को ही मीडिया बन जाना

#हम_खुद_मीडिया_है --

भारत की अधिकांश #मीडिया के देश और समाज से #गद्दारी करने और #फ़ासीवादी बन जाने पर 
क्या 
अब हम सभी को ही मीडिया बन जाना होगा और अपने अपने शहर गांव कस्बे की न्यूज़ सोशल मीडिया के माध्यम से सबको बताना होगा ।

1977_मे_जनता_पार्टी

#1977_मे_जनता_पार्टी की सरकार बनी थी सम्पूर्ण क्रांति के नाम पर तो दिल्ली के कुछ खास इलाके और प्रदेश के विधायक निवास गंधा गए थे 
खास तरह के जीते लोगो ने तो ये मान लिया की सम्पूर्ण क्रांति के लिये सुबह कुल्ला शराब से करो , 24 घंटे कुछ औरते और बाकी धन्धा ही सम्पूर्ण क्रांति का रास्ता है 
अब #भाजपा ने केवल कैसे भी चुनाव जीतना वर्ना कैसे भी सरकार बनाना राष्ट्रवाद मान लिया है ।

अन्ना आंदोलन

अन्ना तो अकेले थे और साधनविहीन भी थे पर कुछ दिखने वाले और कुछ न दिखाई देने वाली ताकतों ने पहले खुद भीड़ जुटाया और फिर विभिन्न माद्यमों से प्रचार कर ऐसे भी तमाम लोगों को जो या तो खुद परेशान है या परेशान तो नहीं है पर जब भी कुछ इवेन्ट होता दिखता है तो वे सभी में भाग लेना फैशन समझते है ,वे भी जो भ्रस्ताचार में लिप्त है ,सारी तरह के भ्रस्ताचार में और वे भी जिनका परिवार भ्रस्ट है ,वकील ,कर्मचारी .व्यापारी इत्यादि सभी को सड़क पर कामयाब हो गए | माहौल तो एक बार गरमा ही दिया है, इससे इंकार नहीं किया जा सकता | पहले भी ऐसें माहौल को देश ने देखा है पर तब से पीढ़ी बदल गयी और देश के लोगो की याददाश्त भी कमजोर है |इसलिए देश के कुछ लोगो को ये लगना की कोई बड़ा परिवर्तन करने जा रहा है यह दिशाहीन और पैसे वालो जिन्होंने बेईमानी से ही पैसा कमाया है उनके पैसे से चलने वाला ये आन्दोलन कोई बड़ी बात नहीं है|                       
लेकिन ये तो सभी को सोचना ही पड़ेगा कि क्या कानून से ही भ्रस्ताचार ख़त्म हो जायेगा ?अगर ऐसा है तो सारे अपराधों के लिए कड़े कानून बने है तो क्या अपराध ख़त्म हो गए ?क्या महिला उत्पीडन कानून बनाने से उत्पीडन ख़त्म हो गए ?अगर ऐसा है तो सर्वोच्च न्यायालय को इस मामले में तुरंत गिरफ़्तारी ना करने और ये कहने की जरूरत क्यों पड़ी कि इससे परिवार टूट रहे है अतः पहले लोगो को मिलाने की कोशिश की जाये | लोगो को मिलाना तो कानून का नहीं बल्कि समाज का और मनोवैज्ञानिकों का काम है| इसी तरह हरिजन सुरक्षा कानून जिसे एससी ,एसटी कानून कहा जाता है उसने भी इस वर्ग की नहीं किया बल्कि इस कानून का भी ९५% दुरूपयोग अपनी दुश्मनी निकालने में किया गया और ये कानून भी अपने मकसद के बजाय इस वर्ग को समाज के अन्य वर्गों से तोड़ने वाला साबित हुआ |ऐसा बहुत से कानूनों के बारे में कहा जा सकता है |
               एक सवाल ये भी है कि क्या जनता को केवल सरकारी दफ्तरों से ही रोज काम पड़ता है?और यही लोग केवल बेईमान है बाकि लोग जिनसे आम जनता को काम पड़ता है वे सब इमानदार और समाज तथा देश भक्त है ?क्या अध्यापक इमानदार है ? क्या डॉक्टर इमानदार है?क्या वकील इमानदार है?क्या स्कूल कालेज चलाने वाले इमानदार है? क्या एन जी ओ इमानदार है ? क्या धर्मगुरु और उनके संगठन इमानदार है ? और जिनसे जनता सबसे ज्यादा पीड़ित है वे उत्पादक और व्यवसाई वे जमीन ,मकान ,दूध, सब्जी ,कपडा ,या किसी भी चीज का हो जो जनता को चाहिए वे इमानदार है ?ये मतलब बिलकुल नहीं है कि सरकारी लोग या नेता गलत है तो उन्हें नहीं पकड़ा जाये ,वे किसी कानून दायरे में नहीं आये बल्कि जिनसे जनता का कोई भी काम पड़ता है और वहा पैसे का कोई लेन देन होता है ,वे सभी इन कड़े कानूनों के दायरे में लाये जाये |                                      जब अन्ना जी देश में इतने लोकप्रिय हो गए है समाचार माध्यमों के अनुसार पूरा देश उनके साथ आ गया है और सड़क पर आ गया है और भ्रस्ताचार को ख़त्म करने को कोई भी क़ुरबानी देने को तैयार है तो कानून बनाने से जो काम नहीं हो सकता अन्ना वो चमत्कार कर सकते है अपनी लोकप्रियता और जनता कि भ्रस्ताचार ख़त्म करने कि इस परम इच्छा इच्छा के कारण | ज्यादा कुछ नहीं करना है बस पूरे देश इस आन्दोलन का साथ देने वालो को कसम खिलाना है रोज सुबह कि १-इस आन्दोलन का साथ देने वाले सभी आज से घूस न लेंगे न देंगे ,कोई भी गलत काम न करेंगे न करने देंगे ,     
      

संसद और संविधान कल मुस्कराए

कल संसद और संविधान स्वतंत्र होकर मुस्कराए 

संसद में कल का दिन केवल और केवल प्रतिपक्ष के नेता राहुल गांधी का रहा । 
नई भूमिका में का प्रारंभ करते ही उन्होंने बहुत आत्मविश्वास के साथ बहुत गंभीर और जिम्मेदारीपूर्ण तथा रणनीतिक हमला किया सरकार पर , भाजपा और संघ पर की पूरी सरकार लगातार तिलमिलाती रही पर लाचार दिखती रही । प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को दो बार ,अमित शाह ,राजनाथ सिंह सहित कई मंत्रियों को राहुल गांधी के भाषण में बार बार उठ उठ कर टोकातकी करना पड़ा और अमित शाह तो अध्यक्ष से संरक्षण मागते हुए भी एक बार दिखाई पड़े जिनके खड़े होने पर पहले कोई बोलता नही था । इसी तरह भूपेंद्र यादव सहित कुछ लोगो ने नियमावली से राहुल गांधी को घेरने की कोशिश किया तो तो कई बार प्रमाणित करने के नाम पर परंतु राहुल गांधी पूरी तैयारी से आए थे इसलिए रुके नहीं । जब भी किसी ने भी टोकने की कोशिश किया राहुल गांधी ने पूरी सजगता से वही उसी समय उसका सटीक जवाब देकर ये बता दिया की पिछले सालो में संघी ट्रोल आर्मी द्वारा उनकी बारे में जो कुछ भी गढ़ा गया था वो ध्वस्त होने वाला है और आने वाला समय ससद में सरकार के लिए पिछले दस साल की भाती इतना आसान नहीं होगा और अब बिना काम किया केवल डरा कर , लोकसभा अध्यक्ष की ताकत का मानना दुरुपयोग कर और केवल जुमलो के सहारे संसद तथा सरकार नही चल पाएगी । 
ये अलग बात है की बिकाऊ सुपारी मीडिया अभी भी सुधरने का नाम नहीं ले  रहा है और संसद तथा लोकतंत्र का भी अपमान करते हुए उसने पूरे से राहुल गांधी को एक धर्म का अपराधी सिद्ध करने में पूरी ताकत लगा दिया । पहले ही सुपारी मीडिया को लोगो ने देखना बंद कर दिया है आगे इनका और पतन होगा जनता को अदालत में क्योंकि समानांतर मीडिया , यूट्यूब और वाट्सअप के माध्यम से राहुल गांधी का भाषण इतना अधिक देखा गया और लगातार देखा जा रहा है की एक नया रिकॉर्ड बन जाने की सभावना है ।
राहुल गांधी ने कल धर्म जैसे विषय को अपने तरीके से परिभाषित किया और उसके द्वारा उन्होंने शिव , बुद्ध , महावीर,  ईशा और मुस्लिम धर्म को एक साथ रख कर एक ही संदेश का वाहक सिद्ध किया तथा सभी आशीर्वाद वाली मुद्रा के हाथ को अभय मुद्रा बताते हुए बड़ी खूबसूरती से कांग्रेस के साथ जोड़ दिया तथा संदेश देने में कामयाब रहे की सभी धर्मो का संदेश है सत्य और अहिंसा तथा "डरो मत और डराओ मत" और यही कांग्रेस की विचारधारा है तथा सम्पूर्ण इंडिया गठबंधन की विचारधारा है । जब शिव की तस्वीर दिखाने पर लोकसभा अध्यक्ष  तथा भाजपा ने विरोध किया तो तुरंत हाजिरजवाबी का परिचय देते हुए राहुल गांधी ने कई बार पूछ लिया की क्या यह शिव की तस्वीर लाना गलत है तो अध्यक्ष तथा सत्ता दोनो अपने को घिरता  महसूस कर चुप हो गए और पिछले लोकसभा की भांति उसे कार्यवाही से निकलने की मांग करने की या निर्देश देने की हिम्मत भी किसी की भी नही हुई । राहुल गांधी द्वारा अभय मुद्रा का बार बार जिक्र जानबूझ कर किया गया और  ये मुद्दा संघ तथा भाजपा पर करारा हमला तब बन गया जब उन्होंने कहा की हिंदू धर्म अहिंसक है और वो हिंसा कर ही सकता है पर संघ और भाजपा लगातार देश मे हिंसा कर रही है तथा उसको बढ़ावा दे रही है ।ये संगठन देश को डरा कर रखना चाहते है पर हमने उसी के खिलाफ लड़ाई छेड़ दिया और जनता ने वोट से संदेश दे दिया । 
उन्होंने हमला करते हुए कहा की भाजपा  सरकार पिछले दस साल से संविधान और संवैधानिक संस्थाओं को कमजोर कर रही है इसलिए इंडिया गठबंधन ने संविधान को बचाने का प्रण ले लिए और जनता इस लड़ाई में साथ खड़ी हो गई ।
राहुल गांधी ने अपने हमले की शुरुवात सीधे लोकसभा अध्यक्ष पर हमले से किया जब उन्होंने कहा की अध्यक्ष के आसन पर दो व्यक्ति बैठे है एक अध्यक्ष और दूसरे ओम बिड़ला क्यों जब अध्यक्ष चुने जाने के बाद नरेंद्र मोदी और वो स्वयं उन्हें आसन तक पहुंचाने गए तो बिड़ला जी ने मोदी जी से झुक कर हाथ मिलाया पर उनसे तने रहकर । ये दोहरा व्यवहार था । इसपर बिड़ला जी ने जब सफाई देने की कोशिश किया की मोदी जी बड़े है इसलिए वो झुके तो तुरंत राहुल जी ने उन्हे फिर कटघरे में खड़ा कर दिया ये कहते हुए की लोकसभा में सबसे बड़े लोकसभा अध्यक्ष है और उनसे बड़ा कोई नही है इसलिए उन्हें किसी के सामने नही झुकना चाहिए ।
राहुल गांधी ने पिछले दस साल जो जो मुद्दे थे सब एक एक कर धारदार तरीके से उठाया । उन्होंने अग्निवीर पर सरकार को घेरा तो रक्षामंत्री राजनाथ सिंह खड़े हो गए पर राहुल गांधी ने बड़ी होशियारी से ये कहते हुए उन्हें निरुत्तर कर दिया की आप कुछ कहो और में कुछ कहूं इससे क्या फर्क पड़ता है क्योंकि अग्निववीर की सच्चाई खुद अग्निवीर जानते है और सेना भी जानती है । जब उन्होंने किसानों को आतंकवादी कहने का और स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश नही मानने तथा एम एस पी नही देने का सवाल उठाया तो शिवराज सिंह चौहान उठ खड़े हुए पर उनको भी काउंटर अटैक से राहुल ने निरुत्तर कर दिया ।
राहुल गांधी ने नीट परीक्षा , किसान , मणिपुर,,बेरोजगारी , नोटबंदी, जी एस टी, हिंसा , ,भय , अयोध्या ,गुजरात , जम्मू कश्मीर,लद्दाख , अडानी , अंबानी इत्यादि हर मुद्दे पर धारदार तरीके से सरकार को घेरा पर हमेशा को तरह इस बार न तो अध्यक्ष ने तेवर दिखा कर रोका और तुरंत भाषण का कोई हिस्सा स्पंज किया तथा न ही सत्ता पक्ष ने कोई हिस्सा हटाने की मांग किया । पर हो सकता है की बाद में उनके भाषण के कुछ हिस्से कार्यवाही से स्पंज कर दिए जाएं लेकिन उसका ये फायदा तो होगा की इतिहास के पन्नो में वो दर्ज नहीं रहेंगे लेकिन तीर तो कमान से निकल चुका है और अपने निशाने पर लग चुका है । करोड़ों की संख्या में देश की जनता सुन चुकी है तथा पूरा वीडियो करोड़ों लोगो के पास है जो इतिहास से मिटने नही देगा । 
दस सालो बाद कल संसद में लोकतंत्र  जिंदा दिखाई पड़ा । दस सालो बाद कल पक्ष और विपक्ष में संतुलन बनता दिखा । दस सालो बाद कल लोकसभा अध्यक्ष सत्ता के दबाव को भी कई बार किनारे करते दिखे । जी हा दस साल बाद कल संसद और संविधान दोनो मुस्कराते हुए दिखलाई पड़े स्वतंत्र और स्वच्छंद रूप से मुस्कराते हुए । 

डा सी पी राय 
पूर्व मंत्री 
चेयरमैन 
मीडिया विभाग 
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी