बुधवार, 27 अक्टूबर 2021

मुलायम सिंह यादव फिर अध्यक्ष हो

#मुलायम_सिंह_यादव जी उम्र के आख़िरी पड़ाव पर है और ज़्यादातर बीमार हो जाते है ऐसे में मेरा #अखिलेश_यादव जी को सुझाव है की उनको अध्यक्ष पद से हटा कर बडा अपमान किया गया था पर तब जो वादा किया था उसी चुनाव के बाद उनको अध्यक्ष पद लौटाने का कम से कम अब तो नेता जी का सम्मान लौटा अध्यक्ष बना दे और ख़ुद मुख्य महासचिव हो जाए ।पार्टी तो उनकी ही है और रहेगी और मुलायम सिंह यादव जी तब से जिस अपमान के सदमे मे जी रहे है क्योकी उनके चित्रो को जूते से रौदा था जवानी कुरबान ने ,उससे निकल कर अपनी अंतिम यात्रा सुकून से कर पायेंगे और अखिलेश जी को आशीर्वाद देकर जायेंगे ।
और विरोधी जो नारा लगाते है कि "जो न हुआ अपने बाप का वो क्या होगा आप का " ये नारा भी बेकार हो जायेगा ।
मैने वो दर्द अभी पिछ्ली मुलाकात मे भी महसूस किया ।ये अलग बात है की इस पोस्ट के बाद मेरी मुलाकात पर भी पाबंदी लगा दिया जाये ।
अगर ऐसा किया तो इस चुनाव में अखिलेश जी को बड़ा फ़ायदा होगा ।
मानना न मानना अब अखिलेश जी की मर्जी ।

रविवार, 24 अक्टूबर 2021

साड़ी शाल जिन्दाबाद पाकिस्तान मुर्दाबाद

आज लखनऊ को सड़कें खाली है 
एक तो करवा चौथ जिसे भारत की फिल्मो ने बहुत लोकप्रिय भी किया है और ग्लैमराइस भी किया है 
पर 
उससे भी ज्यादा आरएसएस और भाजपा के प्रेमी पाकिस्तान से कोई मैच है,अरे वही पाकिस्तान जो आतंकवादी भेजता है और कभी कभी सत्ता उसके साथ नही खेलने और न व्यापार करने का एलान करती है पर अडानी और अंबानी तथा सारे कृपापात्रो का व्यापार चालू रहता है। हा ये टुक टुक मैच भी कैसे नही होता जब शाह साहब के बेटे ही क्रिकेट के सर्वेसर्वा है 
सुना है कि सुरक्षा सलाहकार के बेटे का भी काफी वापरिक याराना है वहा 
दुश्मनी तो चीन से भी भारी वाली है क्योकी रोज घुसा जा रहा है भारत मे वैसे सच तो मोदीजी को ही मानिये जिन्होने एलान किया है की ना कोई आया और न घुसा ,ये अलग बात है कि उन्ही के सांसदो ने अरुणाचल से लेकर लदाख तक की सच्चाई बयान कर दिया और बात दर बार की खबरे भी सब आसमान पर लिख दे रही है ।
पर अपन को क्या ? अपना न व्यापार से सम्बंध है और न किरिकिट ही से ।
हम तो दीवाली मे चीन की झालर नही खरीदेंगे और कागज पर पाकिस्तान लिख कर पर लाल आंख से उसे ड़राएंगे ,फिर डांटेगे और उसके बाद उसे फाड कर जूते से कुचल देंगे और सिद्ध कर देंगे खुद को सच्चा राष्ट्रवादी और कम होगा तो कुछ गालियाँ भी ।
बोलो साड़ी और शाल के आदान प्रदान की जय ।
#मैं_भी_सोचूँ_तू_भी_सोच

सोमवार, 11 अक्टूबर 2021

ये रस्सियाँ

ये रस्सियाँ ----

आज तक समझ मे नही आया 
कि 
क्यो औरतों को 
रस्सियो से बांध दिया जाता है 
उनके गर्दन मे रस्सी
उनकी कमर मे रस्सी 
उनके हाथ मे रस्सी 
और
उनके पांव मे रस्सी 
जो 
उनकी खूबसुरती को 
बदसूरत बना देती है 
वैसे तो 
कुछ कमजोर पुरुष भी
रस्सियो मे बंध जाते है
अपनी अज्ञानता से 
या फर्जी आस्था से 
पर 
क्या बनाया या बिगाडा
किसी का इन रस्सियो ने
सिवाय गुलाम बनाने के
पहले जानवर गुलाम बने और 
रस्सियो मे बंध गये 
और 
अब कुछ इन्सान भी
कब मुक्ति मिलेगी 
इन इन्सानो को 
इन रस्सियो से 
ये सवाल आज मेरा है 
पर कल सबका होगा 
जानवर भी 
कहा बधना चाहते है रस्सियो मे 
और कोशिश करते रहते है 
तोड देने की 
पर इन्सान ने तो
इन रस्सियो को 
खुशी से कबूल किया है 
तो 
इन्हे कब और कौन तोड़ेगा ? 
इन्सान स्वाभाविक
नैसर्गिक सुन्दरता के
साथ कब जिएगा ?

शुक्रवार, 8 अक्टूबर 2021

उ प्र मे कांग्रेस की डगर आसान नही

#उत्तरप्रदेश_में_कांग्रेस_की_डगर_आसान_नही ।

प्रियंका गांधी रुपी तुरूप का इक्का फेंक दिया कांग्रेस ने उत्तर प्रदेश में , पर राह कुछ आसान नही लग रही है । जब जब प्रियंका गांधी किसी मुहिम पर निकली है उन्होने देश प्रदेश के मीडिया और जनता का ध्यान आकर्षित किया है पर अचानक उछाल लेकर फिर काफी दिनो के लिये दृश्य से बाहर हो जाना सारे किये कराये पर पानी फेर देता है ।ये कमजोरी राहुल जी को भी बार बार पीछे धकेल देती है और भारत की राजनीति मे गैर गम्भीर बना देती है । 
भारत की राजनीति और खासकर उत्तर भारत की राजनीति का चारित्र पूर्णकालिक है ।यहा की जनता तथा कार्यकर्ता नेता से हर वक्त अपने बीच मे होने और हर सुख दुख मे साझीदार होने की उम्मीद रखते है ।अखिलेश यादव भी मुख्य लडाई मे होने के बावजूद पिछले साढे चार साल की अनुपलब्धता के कारण ही लडाई मे उतने मजबूत नही दिख रहे है जबकी उनके पास उनका अधिकांश जातीय वोट मौजूद है जबकी कांग्रेस के पास कोई जातीय वोट बैंक स्पष्ट रूप से एकतरफा दिखलाई नही पड़ रहा है  और मायावती की लगातार चुप्पी और अदृश्य होने के कारण अभी भी कही नज़र नही आ रही है  ।पिछले कई चुनाओ से कांग्रेस 6 से 8 प्रतिशत वोटो के साथ आखिरी पायदान पर सघर्श कर रही है ।
प्रियंका गांधी ने जब उत्तर प्रदेश का जिम्मा लिया उसी वक्त कहा गया की अब वो लखनऊ मे ही रहेंगी और पूरा समय देंगी परंतु पता नही क्यो वो हो नही सका । सोनभद्र की घटना मे जनता का ध्यान आकर्षित किया फिर सन्नाटा रहा ।फिर हाथरस मे गरमी आई तो कभी नाव यात्रा पर हर बार उसके बाद लम्बा सन्नाटा रहा जबकी उस समय तक अन्य विरोधी दल मुखर नही हुये थे ।
उसी समय से यदि प्रियंका गांधी ने दिल्ली को त्याग दिया होता और इस सच्चाई को स्वीकार कर कि जाती भारत की राजनीति की बड़ी सच्चाई है कुछ जातिगत क्षत्रपो को जोड़ लिया होता जिससे वो सवाल खत्म हो जाता की कांग्रेस के पास कौन सा वोट है और उन सभी के साथ सामुहिक रूप से प्रदेश की नाप दिया होता तो आज ये सवाल ही खत्म हो गया होता की अगली सरकार किसकी ।प्रियंका जी ने यदि खुद को मुख्यमंत्री और कुछ अन्य नेताओ को उप मुख्यमंत्री घोसित कर मुहिम चलाया होता तो आज कांग्रेस भाजपा के खिलाफ विकल्प बन गयी होती ।अब हर जाती मे सत्ता मे भागीदारी को लेकर जागरुकता है और वो दिये बिना कोई भी सत्ता नही पा सकता है ।वो समय दूसरा था जब इन्दिरा गांधी या चौ चरण सिंह के नाम से जाती की दीवारे तोड कर वोट पडता था ।
लखीमपुर खीरी की घटना पर एक बार फिर प्रियंका गांधी ने लीड लिया है लेकिंन केवल तेवर और सांकेतिक लड़ाईयो से सत्ता की पायदान तो नही चढा जा सकता है ।यद्दपि अब देर हो चुकी है फिर भी नये सिरे से कोशिश की जा सकती है लचीला होकर , उप्लब्ध होकर और आगे बढ़ कर लीड कर के उत्तर प्रदेश में ब्लॉक ब्लॉक तक पहुच कर तथा वोट बैंक के लिये लोगो को जोड़कर ।पर अभी भी देखना होगा की गिरफ्तारी से छूटने के बाद उनका रुख क्या होता है ।
अगर रवैय्या पुराना ही रहेगा तो इस बात से भी इंकार किया जा सकता है कि ज्यो ज्यो लडाई भाजपा और सपा की आमने सामने होती जाएगी कांग्रेस बंगाल की गति को प्राप्त होती जाएगी । पर इसके लिये अगले एक महीने की घटनाओ पर निगाह रखना होगा ।

शनिवार, 18 सितंबर 2021

उत्तर प्रदेश की जाट राजनीति का पतन

उत्तर प्रदेश की जाट राजनीति को विश्वनाथ प्रताप सिंह ने पलीता लगाया था 1994 मे ।वैसे तो अजीत सिंह जी की अस्थिरता और राजनीति के प्रति कुछ चीजो का अभाव भी जिम्मेदार रहा ।
1989 मे जो चुनाव हुये थे उसमे शुरू दे स्पष्ट था कि विश्वनाथ प्रताप सिंह प्रधानमंत्री पद के और उत्तर प्रदेश में मुलायम सिंह यादव मुख्यमंत्री पद के अघोसित प्रत्याशी है ।
पर चुनाव के बाद पुरानी अदावत के कारण विश्वनाथ प्रताप सिंह ने अजीत सिंह को चढा दिया और मुख्यमंत्री का दावेदार बना दिया जबकी टिकेट के बटवारे मे ही मुलायम सिंह के लोग अधिक थे ।
अजित सिंह जी लखनऊ आ गये । 
उस चुनाव मे मैं मुलायम सिंह यादव का चुनाव देख रहा था क्योकी जब जनता दल के संसदीय बोर्ड मे खेरागढ से मेरे नाम पर ज्यादा सहमती बनी तो उन्होने कह दिया था की इस चुनाव मे सी पी राय मेरा चुनाव देखे क्योकी मैं तो देश और प्रदेश के दौरे पर रहूंगा और जब मैं मुख्यमंत्री बन जाऊंगा तो एम एल ए क्या होता है सी पी राय उससे बहुत बड़े होगे । बैठक खत्म होने पर सबसे पहले जोर्ज फर्नांडीज निकले तो मुझे सामने देखते ही बोले "राय आप मुलायम सिंह यादव का चुनाव देखो वो बैठक मे बोला कि मैं मुख्यमंत्री हो जाऊंगा तो सी पी राय एंम एल ए से बड़े होंगे ।हो सकता है वो आप को राज्य सभा मे रखे या एम एल सी बना कर मंत्री बना दे । बाद मे यही बात चौ देवीलाल ,चंद्रशेखर जी ,विश्वनाथ प्रताप सिंह इत्यादि सभी ने मुझसे कहा पर जो हुआ वो दुनिया को पता है पर ये कम लोग जानते है कि उस चुनाव के बाद मुख्यमंत्री बन कर मुलायम सिंह यादव जी मुझे मिले ही नही और जब सरकार गिर गयी तब मिले और मुझे संगठन मे जुट जाने के लिये बोल कर प्रदेश का महामंत्री बनाया ।
खैर उस समय प्रेक्षक बन कर मधू दंदवते ,जोर्ज फर्नांडीज और चिमन भाई पटेल लखनऊ आये थे । मधू जी और जोर्ज ने कोशिश किया की आम सहमती से मुख्यमंत्री चुन जाये और प्रारम्भ मे ही दरार न पड़े । तब मधू दंड्वते के साथ मुलायम सिंह यादव मिलने स्टेट गेस्ट हाउस गये और अजीत सिंह से उन्होने कहा की आप मेरे नेता हो क्योकी चौ साहब के बेटे हो ।आप दिल्ली मे रहो और वहा की राजनीति सम्हालो और मुझे प्रदेश मे रहने दो ।एक बार लगा की सहमती बन जाएगी ।अजीत सिंह ने थोडा समय मांगा और वही चूक हो गयी । साथ के लोग जिनका नाम नही लिख रहा हूँ ने अजीत सिंह से कहा की राजा साथ है और ज्यादा विधायक हमारे पक्ष मे है ।इन लोगो को पता ही नही था की बसो मे भर कर विधायक कही और भेज दिये गये थे पिकनिक मनाने जो विधायको की बैठक के एक दिन पहले वाली शाम को सीधे मुलायम सिंह यादव के घर पर आये जहा वो अकेले रहते थे और ऊपर ही खाने का इन्तजाम था तथा उस दौरान उदय प्रताप जी और मेरी कविताए होती रही ।
अजीत सिंह जी चुनाव के लिये अड़ गये और मजबूरी मे चुनाव हुआ ।
इससे पहले चुनाव के पहले वाली शाम को हम लोग मुलायम सिंह यादव के घर मे ऊपर बैठे थे तभी नीचे से जगजीवन का फोन आया कि विश्वनाथ प्रताप सिंह के दो विधायक मिलने आये है । उन्हे ऊपर बुला लिया गया वो थे सच्चिदानंद वाजपेयी जो सरकार मे उच्च शिक्षा मंत्री बने और मुहमद असलम जो वन और पर्यावरण मंत्री बने । दोनो ने बताया की राजा साहब ने अपने ग्रुप के विधायको को आप का साथ देने का आदेश दिया है ।
राजा ने खेल कर दिया था आमने सामने कर के ।
चुनाव हुआ ,मुलायम सिंह यादव को कही बहुत ज्यादा वोट पड़ा तो मंच पर मधू दंदवते जी ने अजित सिंह जी से गिनती के बाद पूछा की वोट डिक्लेयर करे या रहने दे तो अजीत सिंह जी खिन्न होकर चले गये ।
आगे की कहानी सबको पता है और उसके पहले की भी ।
यदि उस दिन अजीत सिंह जी दिल्ली मे मुलायम सिंह का नेता बनना स्वीकार कर उन्हे मुख्यमंत्री बना गये होते तो शायद पुराने लोक दल का आधार बना रहता और इस फार्मूले पर राजनीति की लम्बी पारी चली होती ।
मैं जब सपा से निकाल दिया गया था और लाख कोशिश के बाद भी मुलायम सिंह यादव वापस लेने को तैयार नही थे तो डेढ साल इन्तजार के बाद जितेन्द्र प्रसाद जी तब प्रधानमंत्री के राजनैतिक सचिव थे के बुलावे पर कांग्रेस मे शामिल हो गया था और अजित सिह जी भी कांग्रेस मे आ गये थे तो एक बार अजीत सिंह जी के साथ मुझे पूरे दिन हेलिकोप्टर मे साथ रह कर सभाए करने का मौका मिला । उसी मे मैने उनसे कहा की कांग्रेस के पास जनाधार वाले नेता नही है ,आप यदि इसमे बने रहेंगे तो बहुत बड़े और प्रभावशाली नेता तो होंगे ही उत्तर प्रदेश में आप के बिना कुछ नही होगा और आप के कारण बहुत से पुराने लोक दली तथा।समाज वादी आप के कारन इसमे मिल जायेगे और आप मजबूत ताकत बन जायेंगे ।
पर वो नही हुआ ।आगे का सब जानते ही है ।