क्या आज के नेता कभी सोचते होंगे की भगत सिंह ने फाँसी के पहले क्या सोचा होगा
सुभाष ने जापान मे जाकर कैसे सेना खडी होगी और क्या सोच कर भारत विजय पर निकले होंगे
बापू और नेहरु अच्छी भली सुख की जिन्दगी छोड कर कर क्यो जेल गये होंगे इतने सालो के लिए जबकी पता ही नही था की फाँसी मिलेगी ता गोली
ना , बिल्कुल नही
समाज हो या सरकार, आगे तभी बढ़ सकते हैं, जब उनके पास सपने हों, वे सिद्धांतों कि कसौटी पर कसे हुए हो और उन सपनों को यथार्थ में बदलने का संकल्प हो| आजकल सपने रहे नहीं, सिद्धांतों से लगता है किसी का मतलब नहीं, फिर संकल्प कहाँ होगा ? चारों तरफ विश्वास का संकट दिखाई पड़ रहा है| ऐसे में आइये एक अभियान छेड़ें और लोगों को बताएं कि सपने बोलते हैं, सिद्धांत तौलते हैं और संकल्प राह खोलते हैं| हम झुकेंगे नहीं, रुकेंगे नहीं और कहेंगे, विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊँचा रहे हमारा|
मंगलवार, 25 जून 2019
क्या नेता सोचते होंगे
आज़ादी की लडाई
आज़ादी की लडाई के समय चंद अंग्रेजो से प्रभावित लोगो को छोडकर 98 %भारतीय स्वतंत्रता सेनानी धोती कुर्ता पहनते थे
तो
ये नेकर और कली टोपी कहा से आ गयी ।
आज मोदी जी का भाषण
आज #राष्ट्रपति जी के अभिभाषण पर जवाब देते हुये #प्रधान-मंत्री #मोदी जी के भाषण मे पिछ्ली 5 साल वाला #एरोगेंसी और #अहंकार नही था ।
महत्मा #गाँधी, #अम्बेडकर और डा #लोहिया का उन्होने जिक्र किया जो सुखद था ।
उन्होने #लोकतंत्र और #संविधान के प्रति भी #प्रतिबद्धता जाहिर किया ।
यदि ये #संघ के बदले सोच का परिणाम है तो सुखद है पर यदि यह रणनीतिक है तो हमारे जैसे लोगो के साथ देश भी इस पर निगाह रखेगा ।
आज लोकसभा मे
#मोदीजी आजआपने #गांधी और #लोहिया का नाम लिया तो देश को उन लोगो की इच्छाओ के अनुरूप #भीड़तंत्र के #न्याय और #लिन्चिँग के खिलाफ संदेश भी देते और घटनाओ की निन्दा कर देते तथा #बिहार के #बच्चो के निधन पर थोडा दुख प्रकट कर देते तो लगता की लोगो की कुछ चिंता है खासकर गरीबो की ।
इसलिये आप की बातो पर शक होता है ।
गांधी जी के 150 साल
क्या महात्मा #गांधी के 150 का उपयोग #मानवता की रक्षा , #सहअस्तित्व की भावना मजबूत करने के लिए होगा
या
केवल तमाशा होगा ?