गुरुवार, 7 दिसंबर 2017

सच्चा इन्सांन ही सच्चा हिन्दू मुसलमान

सच्चा इंसान ही सच्चा हिन्दू ,सच्चा मुसलमान ,सच्चा ईसाई ,जैन ,बौद्ध या सिख हो सकता है और इनमे से कोई भी कभी भी आपस में धर्म के नाम पर दुश्मन नहीं हो सकता और न एक दूसरे पर हमला कर सकता है | सारी लडाई नकली लोगो के बीच है जो धर्म को न तो जानते है और न ही असलियत में मानते है |

अहंकार और अन्त

आपने बहुत से अहंकारियो को आसमानों में उड़ते और धूल में मिटते और खत्म होते देखा होगा ।
और 
आप जमीन पर अपने पैरों पर संघर्ष करते हुए मुस्कराते खड़े है या चल रहे है धीरे धीरे ।
पर 
अगर बडी महत्वकांक्षा नहीं है तो चैन से होंगे ।
बहुतो को दरवाजे की तरफ देखते हुए डींग मारते देखा होगा ,बहुतो को फ़टे कालीन पर शेर मारने की डींग हांकते और इतिहास में अहंकार को संतुष्ट करते देखा होगा ।
कुछ ऐसे ही और सही ।
आप खुश रहो और जमीन से आसमान को चुनौती देने की तैयारी करो अपनों जैसो के साथ ।
आज के चिन्तन से ।

वफादारी मे भी भेद

वैसे आपके लिए वफ़ादारी की परिभाषा क्या है हुजूर ? 
क्या सिर्फ खून के रिश्ते वाले वफादार होते है और बाकि सब गद्दार और शक के दायरे में ।
आप अपनों से कितने धोखे करते है ,कितने असत्य बोलते है और कितनो की जिंदगियां बर्बाद कर देते है पर वो सिर्फ हलकी फुलकी शिकायत कर आप के साथ खड़े रहते है ।
न गद्दारी करते है ,न विद्रोह और न आप का अपमान ।
आप उनकी शिकायत या सच को अपने अहंकार के खिलाफ मान उनसे किनारा कर ले ये अलग बात ।
पर जरा तथाकथित बिलकुल अपनों की ऐसी परीक्षा लेकर तो देखिये , अपनों में बटवारे के समय किसी तरफ झुक कर तो दिखाइए ,अपनों से अपने कमाये और दिए में से जरा सा वापस मांग कर तो दिखाइए या ऐसे ही थोड़ा सा अजमा कर तो देखिये दिन में ही तारे नज़र आ जायेंगे ।
आप ने उतना अपमान और उपेक्षा दुश्मनों से भी नहीं उम्मीद की होगी जितने आपके तथकथित अपने आप को दिखा देंगे ।
अब आप की मर्जी की अपने ऊपर पुनर्विचार करे और अपनी गलतियों पर या आप की मर्जी ।
अमेरिका में एक भाषण सुना की जितना प्यार आप को तथकथित खून वाले अपनों से होता हूं उतना ही तो जो आपने बनाया है उससे भी होता है और जिन लोगो ने इस यात्रा में मदद किया है उनसे भी ।
तो निर्णय करते हुए विचार इतने संकुचित क्यों ?
बस यूँ ही । आज के चिंतन से ।
राजनीती से इसका कोई सम्बन्ध नहीं ।

वादो का क्या

गुजरात के लोगो
क्या आप लोगो को याद है कि भगवान #राम के #मंदिर बनाने के नाम पर कितना #चंदा,कितना #धंधा ,कितने #दंगे ,कितनी #मौते ,कितनी आग क्या क्या हुआ था ।
क्या हुआ राम जी का ?
#भक्तो को भी याद नहीं ।
क्या याद है सामान #सिविल #कोड
भक्तो को भी याद नहीं
क्या याद है धारा #370
भक्तो को भी याद नहीं
क्या याद है हरे पत्ते और कूड़ा फैला कर ???
भक्तो को भी याद नहीं
क्या याद है #घर #वापसी
भक्तो को भी याद नहीं
क्या याद है #लव #जेहाद
भक्तो को भी याद नहीं
क्या याद है #पिंक #रेवल्युशन
भक्तो को भी याद नहीं
क्या याद है #बीफ जैसा शब्द
भक्तो को भी याद नहीं
क्या याद है #एक पर #सौ सर
भक्तो को भी याद नहीं
क्या याद है #15 #लाख
भक्तो को भी याद नहीं
क्या याद है #2 #करोड़ #रोजगार
भक्तो को भी याद नहीं
क्या याद है #विदेशी #काला #धन
भक्तो को भी याद नहीं
क्या याद है #आयकर की #5 #लाख सीमा
भक्तो को भी याद नहीं।
और
गुजरात मॉडल आप ने कही देखा क्या
और
अच्छे दिन ?
यार क्या क्या याद दिलाऊं
फिलहाल तो आप रेजगारी याद करो
कि
कहा कहा छुपाई है
और
सस्ता सामान कहा कहा मिलता है
और उधार भी
हां
आप वोट डाल कर फैसला करते हो
ये याद रखना
जुमलो में नहीं आवोगे
ये याद रखना
भावनाओ में बह कर वोट नहीं दोगे
ये याद रखना
#आरएसएस #विहिप और #बीजेपी की बातों में कभी नहीं आवोगे
ये हमेशा याद रखना ।
जय हिंद ।

सामाजिक क्रांति बनाम परिवर्तन

क्रांति ,सामाजिक क्रांति ,सामाजिक परिवर्तन ,व्यवस्था परिवर्तन 
इस देश की राजनीतिक व्यवस्था और राजनीती में 
उस बच्चे की तरह है 
जो भूखा किसी मिठाई की दुकान 
या 
रेस्टोरेन्ट के सामने खड़ा होता है
या
उस बच्चे के समान है
जो नंगा
किसी भव्य कपडे की दुकान के सामने खड़ा उसके शोकेस में सजे पुतलों को निहार रहा होता है ।
वैसे
जनता
या
राजनीतिक कार्यकर्ता
जाने दीजिए ये बात ।