बुधवार, 2 मार्च 2016

कांग्रेस के घोटालो पर सत्ता का चुप


दो सवाल जनता पूछ रही है ---

1- कांग्रेस में लाखो करोड़ के घोटालो पर इन दो सालो में मोदी ने क्या क्या कार्यवाही किया और किनको जेल भेजा तथा कितना पैसा सरकारी खजाने में जमा करवाया ?

२- वो काला धन जिससे इण्डिया के मैदान पर पता नहीं कितने सौ मीटर ऊंचा पहाड़ लगने वाला था और पूरा भारत टैक्स फ्री होने वाला था और पता नहीं क्या क्या
उसमे से इन दो सालो में आरएसएस ,मोदी ,बीजेपी , रामदेव सलवारी और रविशंकर इत्यादि इन दो सालो में कितना ले आये ।

क्या ये सवाल आप सबके मन में नहीं है ?

पूंजीपति ही दोस्त


मोदी जी और बीजेपी के जुमलों और नारो की तरह आज का बजट भी छलावा और जुमला ही है और दिशाहीन बजट है ।
दो वर्ष से कुछ बड़े पूंजीपतियो की तिजोरी भरने वाली सरकार ने किसानो और मध्य वर्ग को जुमला देकर उस पाप से मुक्ति चाहा है ।
ये सरकार अभी तय ही नहीं कर पायी है की वह देश की अर्थ व्यवस्था को किस दिशा में ले जाना चाहती है ।
दो साल में विदेश व्यापार करीब 18 % घट गया तो कृषि उत्पादन वृद्धि जो पिछली सरकार में 4.1% रहती थी वो 1/2 % हो गयी है और इन्ही का आर्थिक सर्वे बता रहा है की किसान की आमदनी 20 हजार रुपया प्रति वर्ष है यानी करीब 1600 रुपया महीना उसे पाँच से में दोगुना करने का वादा किया गया है पर आधा प्रतिशत वृद्धि के ये दावा केवल छलावा है ।
गामीण सड़को के लिए 4000 करोड़ रखा गया है ।इतने कम पैसे से क्या होगा ।
दूसरी तरफ शिक्षा और स्वस्थ्य इत्यादि के बजट से कटौती जारी है ।
मनरेगा इत्यादि में भी बढ़ोतरी मामूली है ।
आयकर के छूट के अपने पुराने वादे से सरकार फिर पीछे हट कर वादाखिलाफी कर गयी है ।
जो छूट स्वाभाविक तौर पर जनता को मिलनी चाहिए थी और जिन पर विपक्ष में रहने पर बीजेपी हमलावर रहती थी वो जनता को नहीं देकर भी धोखा ही दे रही है जैसे पेट्रोलियम और जिंस के दाम अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगातार घटने पर भी जनता को उसका लाभ नहीं दिया जा रहा है ।
ये बजट बस छलावा है ।

गुरुवार, 10 दिसंबर 2015

छात्रो से सलूक

आज फिर बुरी तरह पिटे देश के भविष्य यानी दिल्ली के छात्र । ये आरएसएस की मोदी नेतृत्व वाली बीजेपी नामक सरकार किसी से भी बात नहीं करती बस हुकुम जारी कर देती है और कहती है की देखो मत ,सोचो मत और चिंतन तथा चिंता तो बिलकुल मत करना ,ये किसी का भी अधिकार नहीं है ।
कुछ भी ऐसा करोगे तो शायद मारे तो न जाओ पर पिटोगे जरूर और मुकदमे में फंसोगे जरूर ।और यही हो रहा है इनकी सरकारो में हर जगह ।
दिल्ली में इनकी सबसे बडी सरकार ने किसे नहीं पीटा ? देश के लिए कुर्बानी करने वाले फौजी जवान हो या देश का पेट भरने वाले किसान हो ,या देश का भविष्य मासूम छात्र नौजवान ।सब पिट रहे है इनके शासन में ।
हमारा इनकी इस प्रवृति से ही तो विरोध है की जो ये कहे वही अंतिम सत्य मानने की अनिवार्यता चाहते है ये ,जो ये तय कर दे उसी को कानून मनवाना चाहते है ये ,जो नागपुर कह दे उसी को संविधान के रूप में थोपना चाहते है ,और असहमति ,अधिकार तथा आग्रह का प्रतिकार चाहते है ये ।
यही तो था हिटलर और मुसोलिनी का सोचने का तरीका पर ये भारत है और भारत राम को आदर्श मानता है की सत्ता को लात मार किसी को न्याय देने वन चले गए ,पाषाण बानी अहिल्या यानि प्रताड़ित स्त्री को मान दे दिया ,सोने की लंका जीत लिए पर राज नहीं लिया बल्कि वही के लोगो को सौंप दिया । भारत कृष्ण को आदर्श मानता है जिसके भाई को लोग नही जानते पर सखा को जानते है ,जिसने जिसे नहीं मिल रहा है उसके खिलाने का आह्वान कर सर्वोच्च सत्ता को चुनौती दे दिया ,जीसने एक स्त्री के मान के लोए भारत को महाभारत में तब्दील कर दिया ,जिसने सत्ता के खिलाफ अपनों को खड़ा किया तो उनकी रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत बन गया ,भारत महात्मा गांधी को अपना  आदर्श मानता हैं जीसने सिर्फ सत्य बोला ,जिसने अहिंसा को हथियार बनाया ,जिसने त्याग को रास्ता बनाया ,जिसने उस ताकत को चुनौती दिया जिसके राज में सूरज अस्त नहीं होता था और उसे झुकाया भी तथा भगाया भी ,जिसमे सत्ता के सर्वोच्च लोगो से मिलने के लिए भी वेश नहीं बदला और लंगोटी लपेट कर एक धोती में आँख में आँख मिला कर दुनिया की सत्ता को चुनौती दे डाला ।
और ये ???????
फासीवादी भारत के न आदर्श हो सकते है और न भारत की आत्मा को समझ सकते है इसलिए ये है भारतीय को बस मारेंगे अभी लाठी से और देश तथा समाज ने याद नहीं रखा कही ये फासीवाद स्थापित करने में कामयाब हो गए तो फिर गैस चैंबर से लेकर पता नहीं किस किस चीज से बस ये मौत बटेंगे ।
इसलिए हम इनके खिलाफ भी है और इनसे हमारा सैद्धान्तिक युद्ध भी ।

बुधवार, 9 दिसंबर 2015

राजनीतिक याददाश्त

राजनीती में कभी भी कुछ भी कह देना और फिर भूल जाना और रोज नयी बाते कहते रहना शायद इस सोच का परिणाम है की जनता की याददाश्त बहुत कमजोर होती है |

बुधवार, 2 दिसंबर 2015

क्या मिला है किसी भी देश के चरमपंथियों को आजतक

क्या मिला है किसी भी देश के चरमपंथियों को आजतक कुछ बेगुनाहो की हत्या कर के और देशो को युद्धों से ही क्या हासिल।हुआ है तबाही के सिवाय ।इतिहास और अनुभव तो यही बताता है की कुछ भी हासिल नहीं हुआ है तो फिर ये सब क्यों जारी है लगातार ।
बहुत हो गया अब बंद होना चाहिए शैतानियत का ये तमाशा ,मौत का खेल और खून की ये होली ।