समाज हो या सरकार, आगे तभी बढ़ सकते हैं, जब उनके पास सपने हों, वे सिद्धांतों कि कसौटी पर कसे हुए हो और उन सपनों को यथार्थ में बदलने का संकल्प हो| आजकल सपने रहे नहीं, सिद्धांतों से लगता है किसी का मतलब नहीं, फिर संकल्प कहाँ होगा ? चारों तरफ विश्वास का संकट दिखाई पड़ रहा है| ऐसे में आइये एक अभियान छेड़ें और लोगों को बताएं कि सपने बोलते हैं, सिद्धांत तौलते हैं और संकल्प राह खोलते हैं| हम झुकेंगे नहीं, रुकेंगे नहीं और कहेंगे, विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊँचा रहे हमारा|
बुधवार, 2 मार्च 2016
कांग्रेस के घोटालो पर सत्ता का चुप
पूंजीपति ही दोस्त
गुरुवार, 10 दिसंबर 2015
छात्रो से सलूक
कुछ भी ऐसा करोगे तो शायद मारे तो न जाओ पर पिटोगे जरूर और मुकदमे में फंसोगे जरूर ।और यही हो रहा है इनकी सरकारो में हर जगह ।
दिल्ली में इनकी सबसे बडी सरकार ने किसे नहीं पीटा ? देश के लिए कुर्बानी करने वाले फौजी जवान हो या देश का पेट भरने वाले किसान हो ,या देश का भविष्य मासूम छात्र नौजवान ।सब पिट रहे है इनके शासन में ।
हमारा इनकी इस प्रवृति से ही तो विरोध है की जो ये कहे वही अंतिम सत्य मानने की अनिवार्यता चाहते है ये ,जो ये तय कर दे उसी को कानून मनवाना चाहते है ये ,जो नागपुर कह दे उसी को संविधान के रूप में थोपना चाहते है ,और असहमति ,अधिकार तथा आग्रह का प्रतिकार चाहते है ये ।
यही तो था हिटलर और मुसोलिनी का सोचने का तरीका पर ये भारत है और भारत राम को आदर्श मानता है की सत्ता को लात मार किसी को न्याय देने वन चले गए ,पाषाण बानी अहिल्या यानि प्रताड़ित स्त्री को मान दे दिया ,सोने की लंका जीत लिए पर राज नहीं लिया बल्कि वही के लोगो को सौंप दिया । भारत कृष्ण को आदर्श मानता है जिसके भाई को लोग नही जानते पर सखा को जानते है ,जिसने जिसे नहीं मिल रहा है उसके खिलाने का आह्वान कर सर्वोच्च सत्ता को चुनौती दे दिया ,जीसने एक स्त्री के मान के लोए भारत को महाभारत में तब्दील कर दिया ,जिसने सत्ता के खिलाफ अपनों को खड़ा किया तो उनकी रक्षा के लिए गोवर्धन पर्वत बन गया ,भारत महात्मा गांधी को अपना आदर्श मानता हैं जीसने सिर्फ सत्य बोला ,जिसने अहिंसा को हथियार बनाया ,जिसने त्याग को रास्ता बनाया ,जिसने उस ताकत को चुनौती दिया जिसके राज में सूरज अस्त नहीं होता था और उसे झुकाया भी तथा भगाया भी ,जिसमे सत्ता के सर्वोच्च लोगो से मिलने के लिए भी वेश नहीं बदला और लंगोटी लपेट कर एक धोती में आँख में आँख मिला कर दुनिया की सत्ता को चुनौती दे डाला ।
और ये ???????
फासीवादी भारत के न आदर्श हो सकते है और न भारत की आत्मा को समझ सकते है इसलिए ये है भारतीय को बस मारेंगे अभी लाठी से और देश तथा समाज ने याद नहीं रखा कही ये फासीवाद स्थापित करने में कामयाब हो गए तो फिर गैस चैंबर से लेकर पता नहीं किस किस चीज से बस ये मौत बटेंगे ।
इसलिए हम इनके खिलाफ भी है और इनसे हमारा सैद्धान्तिक युद्ध भी ।
बुधवार, 9 दिसंबर 2015
राजनीतिक याददाश्त
बुधवार, 2 दिसंबर 2015
क्या मिला है किसी भी देश के चरमपंथियों को आजतक
क्या मिला है किसी भी देश के चरमपंथियों को आजतक कुछ बेगुनाहो की हत्या कर के और देशो को युद्धों से ही क्या हासिल।हुआ है तबाही के सिवाय ।इतिहास और अनुभव तो यही बताता है की कुछ भी हासिल नहीं हुआ है तो फिर ये सब क्यों जारी है लगातार ।
बहुत हो गया अब बंद होना चाहिए शैतानियत का ये तमाशा ,मौत का खेल और खून की ये होली ।