दुसरे देशो में जाकर अपने देश की अन्दरूनी बाते करना और अपने देश की बुराई करना देश के साथ गद्दारी है या वफादारी ??
समाज हो या सरकार, आगे तभी बढ़ सकते हैं, जब उनके पास सपने हों, वे सिद्धांतों कि कसौटी पर कसे हुए हो और उन सपनों को यथार्थ में बदलने का संकल्प हो| आजकल सपने रहे नहीं, सिद्धांतों से लगता है किसी का मतलब नहीं, फिर संकल्प कहाँ होगा ? चारों तरफ विश्वास का संकट दिखाई पड़ रहा है| ऐसे में आइये एक अभियान छेड़ें और लोगों को बताएं कि सपने बोलते हैं, सिद्धांत तौलते हैं और संकल्प राह खोलते हैं| हम झुकेंगे नहीं, रुकेंगे नहीं और कहेंगे, विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊँचा रहे हमारा|
शनिवार, 25 अप्रैल 2015
किसी से शिकायत होने या प्रताड़ित होने पर आत्महत्या तो कोई हल नहीं है ।
बल्कि हल तो ये है की मजबूती से अपनी सुखद जिंदगी हँसते हुए जी कर दिखाओ ।ये शायद उस व्यक्ति के लिए बड़ी सजा होगी जिसने आप को दुःख दिया और सजा हो या न हो पर ईश्वर की दी हुयी जिंदगी को जी कर ईश्वर का आभार तो व्यक्त कर ही सकते हो ।
अनर्गल आरोप हो या आत्महत्या दोनों कायरो और कमजोर के काम है और आप की अपने प्रति प्रतिबद्धता पर भी सवाल खड़े करते है ।
( आज के चिंतन से )
बल्कि हल तो ये है की मजबूती से अपनी सुखद जिंदगी हँसते हुए जी कर दिखाओ ।ये शायद उस व्यक्ति के लिए बड़ी सजा होगी जिसने आप को दुःख दिया और सजा हो या न हो पर ईश्वर की दी हुयी जिंदगी को जी कर ईश्वर का आभार तो व्यक्त कर ही सकते हो ।
अनर्गल आरोप हो या आत्महत्या दोनों कायरो और कमजोर के काम है और आप की अपने प्रति प्रतिबद्धता पर भी सवाल खड़े करते है ।
( आज के चिंतन से )
उम्मीद की सुबह ---------------------------------हर किसी की सुबह बहुत
उम्मीदे और उमंग लेकर आती है इसीलिए शायद कहा गया है की उगते हुए सूरज को
देखो और प्रणाम करो तथा प्रेरणा लो की इतनी लम्बी अँधेरी रात भी सूरज को
उगने से रोक नहीं पाती और उसका स्याह साया सूरज की उगने की प्रवृति को डिगा
नहीं पाता तो तुम क्यों नहीं उग सकते हो नयी सुबह के साथ ।
हम करोडो सो रहे होते है पर सूरज खरामा खरामा अपनी आसमानी सफ़र पर पूरे ओज और ऊर्जा तथा चमक के साथ चल रहा होता है और हमें भी मजबूर कर रहा होता है आँखे खोलने और उठ खड़े होने के लिए ।
ये भी सच है की बहुत से लोग फिर शाम होते होते नाउम्मीद और पस्त हो जाते है लेकिन सूरज भी तो चमक खो देता है शाम तक और डूब रहा होता है कही क्षितिज की अनंत गहराइयो में ताकि फिर ऊर्जा के साथ सफ़र पर चल सके ।
इसलिए हर सुबह उम्मीदे बनाये रखिये और चिंता के नहीं बल्कि चिंतन के पथ पर मजबूत इरादे के साथ ,खुद के हौसलों के साथ और जोश के साथ कदम बढ़ाते चलिए ।
मंजिले कभी सीधे और सुगम रास्तो पर होती है ,कभी फिसलन भरे रास्तो से तो कभी बहुत कंटकपूर्ण ,कभी पथरीली तो अक्सर पहाड़ो के तरह घुमावदार और लम्बे रास्तो से मिलती है ।कभी दलदल ,नदी और अथाह समुद्र जैसे अवरोध भी सामने आ जाते है पर लोगो ने इनको भी पार किया है ।
रात को सोये होते है तो प्रायः अर्ध मृतप्राय ही तो होते है और सुबह जागते है तो एक तरह नया जन्म ही तो लेते है हम और हमारी किलकारी हो या क्रंदन दुनिया को बता देते है की हम है या हम भी है या अब हम आ गए है दुनिया की चुनौतियों के लिए ।बस यही भाव हो हर नयी सुबह का ।
सभी को हर सुबह नयी सुबह हो उठान की और नयी उड़ान की ।नयी सुबह की सभी को शुभकामनायें ।
(मेरा सूरज विज्ञानं का नहीं बल्कि साहित्य का सूरज है अतः वैसे ही देखे )
(आज सुबह के चिंतन से )
हम करोडो सो रहे होते है पर सूरज खरामा खरामा अपनी आसमानी सफ़र पर पूरे ओज और ऊर्जा तथा चमक के साथ चल रहा होता है और हमें भी मजबूर कर रहा होता है आँखे खोलने और उठ खड़े होने के लिए ।
ये भी सच है की बहुत से लोग फिर शाम होते होते नाउम्मीद और पस्त हो जाते है लेकिन सूरज भी तो चमक खो देता है शाम तक और डूब रहा होता है कही क्षितिज की अनंत गहराइयो में ताकि फिर ऊर्जा के साथ सफ़र पर चल सके ।
इसलिए हर सुबह उम्मीदे बनाये रखिये और चिंता के नहीं बल्कि चिंतन के पथ पर मजबूत इरादे के साथ ,खुद के हौसलों के साथ और जोश के साथ कदम बढ़ाते चलिए ।
मंजिले कभी सीधे और सुगम रास्तो पर होती है ,कभी फिसलन भरे रास्तो से तो कभी बहुत कंटकपूर्ण ,कभी पथरीली तो अक्सर पहाड़ो के तरह घुमावदार और लम्बे रास्तो से मिलती है ।कभी दलदल ,नदी और अथाह समुद्र जैसे अवरोध भी सामने आ जाते है पर लोगो ने इनको भी पार किया है ।
रात को सोये होते है तो प्रायः अर्ध मृतप्राय ही तो होते है और सुबह जागते है तो एक तरह नया जन्म ही तो लेते है हम और हमारी किलकारी हो या क्रंदन दुनिया को बता देते है की हम है या हम भी है या अब हम आ गए है दुनिया की चुनौतियों के लिए ।बस यही भाव हो हर नयी सुबह का ।
सभी को हर सुबह नयी सुबह हो उठान की और नयी उड़ान की ।नयी सुबह की सभी को शुभकामनायें ।
(मेरा सूरज विज्ञानं का नहीं बल्कि साहित्य का सूरज है अतः वैसे ही देखे )
(आज सुबह के चिंतन से )
पता नहीं क्यों मुझे लगता है की अंधाधुंध पूंजीवादियों की रफ्तार और सरकारो
का केवल उनके लिए दिखना देश में नयी चेतना को जन्म देगा और राजनीती करवट
लेगी तथा राजनीती के केंद्र में किसान ,मजदूर और बेरोजगार नौजवान होगा ।
अपनी पार्टी के राष्ट्रीय सम्मलेन में पार्टी को मैंने इस दिशा में मोड़ने की कोशिश किया था मेरी आवाज खो गयी थी ।
आज अगर कोई चौ चरण सिंह होते तो देश की राजनीती की धुरी बन जाते ।पर ऐसे लोग जो खुद दिन रात पूंजीपतियो के साथ ही गलबहियां करते है वो कितनो भी कोशिश कर लें किसान और मजबूर के नेता वो नहीं हो सकते ।
अगर सरकारे अपने इस केवल पूंजीपति समर्थक रूप से अलग नहीं हो पायी और तंत्र गरीबो ,किसानो और मजदूरो तथा मजबूरों से घृणा नहीं छोड़ पाया और प्रकृति भी प्रहार करती रही तो स्थिति विस्फोटक भी हो सकती है ।
उससे बचने के लिए सभी को सोचना और बदलना होगा और इन लोगो के प्रति उपेक्षा का नजरिया बदलते हुए इन सभी के हालातो को बदलने के लिए गंभीर और ईमानदार प्रयास करना होगा ।
(आज सुबह के चिंतन से )
अपनी पार्टी के राष्ट्रीय सम्मलेन में पार्टी को मैंने इस दिशा में मोड़ने की कोशिश किया था मेरी आवाज खो गयी थी ।
आज अगर कोई चौ चरण सिंह होते तो देश की राजनीती की धुरी बन जाते ।पर ऐसे लोग जो खुद दिन रात पूंजीपतियो के साथ ही गलबहियां करते है वो कितनो भी कोशिश कर लें किसान और मजबूर के नेता वो नहीं हो सकते ।
अगर सरकारे अपने इस केवल पूंजीपति समर्थक रूप से अलग नहीं हो पायी और तंत्र गरीबो ,किसानो और मजदूरो तथा मजबूरों से घृणा नहीं छोड़ पाया और प्रकृति भी प्रहार करती रही तो स्थिति विस्फोटक भी हो सकती है ।
उससे बचने के लिए सभी को सोचना और बदलना होगा और इन लोगो के प्रति उपेक्षा का नजरिया बदलते हुए इन सभी के हालातो को बदलने के लिए गंभीर और ईमानदार प्रयास करना होगा ।
(आज सुबह के चिंतन से )
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