शनिवार, 25 अप्रैल 2015

पता नहीं आज बहादुर शाह जफ़र की याद आ गयी जो कहने को तो पूरे हिंदुस्तान के बादशाह थे पर उनका हिंदुस्तान दिल्ली के लाल किले तक सीमित था ।
और शायद वाजिद अली शाह की भी जो पूछते रहे की दुश्मन की सेना अभी कितनी दूर है तब तक शतरंज की एक बाजी और हो जाये ।
बस यूँ ही । सन्दर्भ --बूझो तो जाने ।
आप किसी इंसान के शरीर से उसके बाल उखाड़ो तो उसे दर्द होगा या नहीं और वो हिलेगा या नहीं ,आप उसके शरीर से पहले पानी और फिर खून निचोड़ लो ,आप उसके शरीर में छेद करते जावो तो क्या होगा ।
यही तो कर रहे है हम सभो पृथ्वी के साथ उसके बाल यानी हरियाली विहीन करते जा रहे है ,उसकी नसों यानी नदियो को और नालो तथा नहरो को खत्म करते जा रहे है ,जमीन में छेद करते जा रहे है अंधाधुंध ,उसका पानी निचोड़ते जा रहे है तो उसे भी दर्द हो रहा है और वो भी हिल रही है ।अब उसके हिलने से क्या क्या होगा उसको क्या
माल्थस ने तो वर्षो पहले हमें बता दिया था की प्रकृति अपना संतुलन खुद तय करती है पर हमने उनकी बात पर गौर करना भी उचित नहीं समझ ।
अब भुगतने को तैयार रहे पूरी मानवता ।
पर आज के हादसे में जहा भी और जो भी प्राण गंवा बैठा है उसको श्रधांजलि और उसके परिवार के प्रति संवेदना और जहा भी नुक्सान हुआ है उनके प्रति भी ।
लेकिन सम्हल जाये इंसान भी और इंसानो की सरकारे भी तथा खास तौर पर पूंजीपति लोग जो प्रकृति के साथ सबसे ज्यादा खिलवाड़ करते है ।
किसी ने अपनी किस्मत अच्छी होने का ढिंढोरा पीटा था किसी बात पर । उनकी अच्छी किस्मत के कई नमूने देख लिए लोगो ने थोड़े ही समय में ।
जय हो । अच्छे दिन्न्न्न्न्न्न ??????
करोडो की जमीन खरीदेंगे और बड़े घर बनायेंगे पर एक पेड़ नहीं लगायेंगे और करोडो की सजावट करेंगे पर केवल २५ हजार रुपया खर्च कर वाटर रीचार्ज की बोरिंग नहीं करवाएंगे और जो जिम्मेदार है वो नदियों नहरों और पहाड़ो के संरक्षण और वृक्षारोपण का पैसा खा जायेंगे और फाईलो में ये सब काम कर देंगे और फिर जब पृथ्वी हिलेगी या समुद्र गुस्सा होगा तो डर कर कांपेंगे |
जिस दिन प्रकृति बदला लेगी खुद से छेड़छाड़ का और तबाही आयेगे कहा लेकर भागोगे ये हरम से कमाई दौलत ? जैसे मिलावट कर के दौलत तो कमाँ रहे हो पर एक दूसरे के द्वारा बेचीं गयी बीमारियों और कैंसर इत्यादि से खुद को बचा नहीं पा रहे है और न अपनों को |
जरा सोचो तबाही हमारी किसी और के कारण नहीं बल्कि हमारे कारण आती है और बड़ी तथा अंतिम तबाही हमारे ही कारण आएगी |
चाहो तो अब भी बाख जाओ या तबाही की इबारत अपने ही हाथो से लिखते जाओ |

सोमवार, 23 मार्च 2015

विपक्ष में रहते हुए कुछ भी बोल दो या आरोप लगा दो ,चाँद तोड़ लेने के वादे कर दो ,सबके घर सोने के बनाने की बात कर दो और शकर जी की पूरी बारात को सड़क पर उतार दो सब चलता है ।
पर जब सत्ता में हो और सारी जनता तथा चारो तरफ से हर वर्ग ने बहुमत की सत्ता दी हो तो सब कुछ इसके उलट हो जाता है । -हर शब्द तौला जाता है -हर निर्णय और बटवारे पर निगाह रहती है -हर कदम और भाव भंगिमा पर निगाह रहती है -चपरासी तक की नौकरी और नियुक्ति पर निगाह रहती है -साथ दिखने वालो पर निगाह रहती है -हर वादे पर और उसकी जमीनी हकीकत पर निगाह रहती है -हर न्याय और अन्याय पर निगाह रहती है ।
गलत और अयोग्य लोगो को न्याय तथा निर्णय के स्थानों पर बैठना सत्ता के गर्त में जाने की गारंटी होती है ।सत्ता के लिए योग्य ,ईमानदार और जानकार लोगो की जरूरत होती है जैसे संगठन के लिए संगठक और विनम्र तथा हर वक्त उपलब्ध की ।
जब सबने मिल कर बहुमत दिया हो तो सबको न्याय और सामान न्याय देना अगली बार सरकार बनाने के लिए जरूरी हो जाता है ।पर संघर्ष के सभी साथी भी महसूस करे की वो भी सत्ता के हिस्सेदार है , धन दौलत नहीं तो कम से कम सम्मान के तो है ही और वो अपनों से दूर नहीं हुए है ये जरूरी होता है ।
लोगो से अपनेपन की निगाह हटी और दुर्घटना घटी । ये सभी पर लागू होता है । आप केवल काम करे ये नौकरशाही में होता है पर राजनेता काम करे और हर काम में लोगो को उसका चेहरा तथा आदेश वाली वाणी दिखाई और सुनाई पड़ती रहे यह जरूरी है और यह भी जरूरी है की लीडर जो हो रहा है उसे मौके पर निर्देश और निरिक्षण कैरता दिखे तथा जनता को खुद उसी स्थान से समर्पित करता दिखे ।
पर सबको लगे की आप सबके है ये जरूरी है ।किसी को भी ओहदा देने और महत्व देने के तरीके हो सकते है और ऐसे ओहदे है जिनपर बैठ कर देश और समाज का बड़ा नुक्सान संभव नहीं है पर मूल्यों तथा संस्थाओ को नहीं बिगाड़ना चाहिए । क्योकि जब मूल्य तथा परम्पराएँ बिगड़ती है या जब संस्थाओ को खोखला किया जाता है तो उसके दुष्परिणाम पूरा देश ,पूरा समाज और पीढियां भुगतती है ।
( आज सुबह के चिंतन से )