बुधवार, 13 अगस्त 2014

जिसे हम राजनीती समझते है वो आजकल बड़े पूजीपतियों का खेल निकलता हैं | पता नहीं किस फैसले के पीछे कौन सा पूंजीपति और पैसा काम कर रहा है | पता नहीं किसको किससे लेना है और किसको क्या देना है और इसके लिए मध्यस्थ चाहिए |
आज की राजनीती बहुत साधारण नहीं रहीं | अब सिद्धांत और कार्यक्रम की तथा दलों की लड़ाई नहीं हो रही बल्कि बड़े पूजीपतियो के घरानों की लडाई हो रही है | कार्यकर्त्ता ,समर्थक और जनता ये समझ कर वोट देती है और मरने मारने को तैयार हो जाती है की उसकी खुशहाली की लड़ाई हो रही है |
जब नेता और नीयत बदल रही है तो कार्यकर्ता और जनता को भी नए तरीके से सोचना चाहिये और फैसला करना चाहिए |
कर्म करो और फल की चिंता मत करो ।क्या ये शोषण के लिए गढा गया नारा नही है ।क्या ये गरीब को गरीब और गुलाम को गुलाम बनांये रखने के लिए नहीं रचा गया ?
मैं तो इसे इसी रूप में लेता हूँ ।
इश्वर से बस इतनी दुवा है की मोदी और संघ का पांच साल शासन रहने के बावजूद लोकतंत्र और स्वतत्रता कायम रहे ।लाखो लोगो की क़ुरबानी के बाद और सैकड़ो साल बाद मिली है ये ।
कही सचमुच फासीवाद न आ जाये वर्ना बर्बाद हो जायेगा मेरा मुल्क ।
मुलायम सिंह यादव जी सियाचीन सिर्फ गए नहीं बल्कि वहां रुके भी पर ये मीडिया को चर्चा लायक नहीं लगा ।एक तो यादव और दूसरे संघी नहीं होना उनका गुनाह है ।
कई दिन दिन से सियाचीन की ऐसे चर्चा की जा रही है और ऐसे महिमामंडन किया जा रहा है तथा बनावटी कहानियां गढी जा रही है मीडिया में बैठे संघियों द्वारा जैसे मोदी कोई अनोखा और ऐसा काम करने वाले पहले हो ।
देश के लोगो अब समझने की कोशिश करो संघी मीडिया का कमाल ।
अगर दिल्ली में सपा या कांग्रेस सरकार होती तो टीवी की सुर्खियों में - पांच साल की बच्ची से बलात्कार और सो रही है सरकार ।।स्कूलो में भी इज्जत महफूज नहीं आखिर क्या कर रही है सरकार ? एक बच्चे को पांच ने बेरहमी से चाकुओ से गोद ।कहा बचा सरकार का खौफ ।सरकार पस्त और बदमाश मस्त ।
और ये सब समाचार एक महीने तक बहसों का और प्राइम टाइम का विषय रहते ।
काश दिल्ली में मोदी सरकार नहीं होती तो अब तक विजय चौक पर मोमबत्तियां जलवा दिया होता मीडिया में घुसे संघियों ने ।
क्या आप सभी ने ये समाचार कही देखा क्या ? और देखा भी होगा तो कुछ पल में सामान्य समाचार के रूप में ।किसी ने मोदी पर सवाल नहीं उठाया होगा जैसे मध्यप्रदेश और राजस्थान पर नहीं उठाते है
शिकायत सिर्फ इतनी की मीडिया के लिए तो पूरा देश एक सामान होना चाहिए ।