मोदी
सरकार और संघ गोलवलकर की किताब जिसमे हिटलर को महान बताया गया और उसकी
राज्य व्यवस्था लागू करना संघ का लक्ष्य बताया गया और जो संघ की गीता है
उसे कब से पाठ्यक्रम में शामिल कर रहे है ।
समाज हो या सरकार, आगे तभी बढ़ सकते हैं, जब उनके पास सपने हों, वे सिद्धांतों कि कसौटी पर कसे हुए हो और उन सपनों को यथार्थ में बदलने का संकल्प हो| आजकल सपने रहे नहीं, सिद्धांतों से लगता है किसी का मतलब नहीं, फिर संकल्प कहाँ होगा ? चारों तरफ विश्वास का संकट दिखाई पड़ रहा है| ऐसे में आइये एक अभियान छेड़ें और लोगों को बताएं कि सपने बोलते हैं, सिद्धांत तौलते हैं और संकल्प राह खोलते हैं| हम झुकेंगे नहीं, रुकेंगे नहीं और कहेंगे, विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊँचा रहे हमारा|
बुधवार, 13 अगस्त 2014
आज पहली बार भारत के कोई गृह मंत्री संसद में खड़े होकर इतना बड़ा असत्य ओन रेकोर्ड बोल रहे है ।
ये सभी को पता है की आज़ादी की लड़ाई में संघ ने हिस्सा नहीं लिया था बल्कि अंग्रेजो का साथ दिया था ।आज़ादी के बाद इतने वर्षो तक खुद संघ शर्मिंदा रहा और इस सवाल पर चुप रहा ।
क्या पूर्ण बहुमत की सरकार आते ही कही कोई कागज गढ़ लिया क्या ?
इतिहास का संघिकरण करने की दिशा क्या इसे भी एक सन्देश माना जाये ।
ये सभी को पता है की आज़ादी की लड़ाई में संघ ने हिस्सा नहीं लिया था बल्कि अंग्रेजो का साथ दिया था ।आज़ादी के बाद इतने वर्षो तक खुद संघ शर्मिंदा रहा और इस सवाल पर चुप रहा ।
क्या पूर्ण बहुमत की सरकार आते ही कही कोई कागज गढ़ लिया क्या ?
इतिहास का संघिकरण करने की दिशा क्या इसे भी एक सन्देश माना जाये ।
महंगाई
और केंद्र सरकार की लगातार होती वादाखिलाफी तथा सारी बुराइयों से ध्यान
हटाने के लिए संघ के 24 मुह में से कोई न कोई किसी न किसी तरह का वक्ताव्य
देता रहेगा ।
हम उनके वक्तव्यों में उलझे तो समझ लीजिए ये लोग अपने खेल में सफल हो गए ।
इसलिए ये कुछ भी बोलते रहे उस पर उलझने के बजाय इनको उन मुद्दों पर बोलने को मजबूर करिए जिन्हें कह कर ये सत्ता में आये ।
हम उनके वक्तव्यों में उलझे तो समझ लीजिए ये लोग अपने खेल में सफल हो गए ।
इसलिए ये कुछ भी बोलते रहे उस पर उलझने के बजाय इनको उन मुद्दों पर बोलने को मजबूर करिए जिन्हें कह कर ये सत्ता में आये ।
क्या बदायूं की सी बी आई रिपोर्ट आ जाने के बाद सभी टीवी वाले उतना ही समय देंगे और बहस करेंगे तथा अपनी अत्म्लोचना करेंगे ?
क्या वो सभी नेता और अन्य लोग जो दिन रात पानि पी पी कर हम लोगो को बलात्कारियो का साथी बता रहे थे उतनी ही शिद्दत से क्षमा मांगते हुए सफाई देंगे ?
क्या अमरीकी विदेश विभाग और भारत का विदेश विभाग खेद व्यक्त करेगा ?
क्या सयुक्त रास्त्र संघ खेद व्यक्त करते हुए ये कहेगा की भारत से कई गुना बलात्कार अमरीका सहित उन देशो में होता है जो सयुंक्त रास्त्र संघ के दादा है ?
बस ऐसा ही अधिकतर मामलों का सच है जिसे कुछ पूंजीपतियों का पैसा और मोदी शाह की निगाहे बदलवा दे रही है ।
और उत्तर प्रदेश को बदनाम कर यहाँ का व्यवसाय ,आने वाली पूँजी और आने वाले सैलानी सबको रोक रही है ।
ये मेरी शंका और कोरा आरोप नहीं बल्कि सिद्ध हो चूका सच है जिसकी इबारत आसमान पर लिखी दिखलाई पड़ रही है ।
क्या वो सभी नेता और अन्य लोग जो दिन रात पानि पी पी कर हम लोगो को बलात्कारियो का साथी बता रहे थे उतनी ही शिद्दत से क्षमा मांगते हुए सफाई देंगे ?
क्या अमरीकी विदेश विभाग और भारत का विदेश विभाग खेद व्यक्त करेगा ?
क्या सयुक्त रास्त्र संघ खेद व्यक्त करते हुए ये कहेगा की भारत से कई गुना बलात्कार अमरीका सहित उन देशो में होता है जो सयुंक्त रास्त्र संघ के दादा है ?
बस ऐसा ही अधिकतर मामलों का सच है जिसे कुछ पूंजीपतियों का पैसा और मोदी शाह की निगाहे बदलवा दे रही है ।
और उत्तर प्रदेश को बदनाम कर यहाँ का व्यवसाय ,आने वाली पूँजी और आने वाले सैलानी सबको रोक रही है ।
ये मेरी शंका और कोरा आरोप नहीं बल्कि सिद्ध हो चूका सच है जिसकी इबारत आसमान पर लिखी दिखलाई पड़ रही है ।
किसी
व्यक्ति या मैनेजर की जरूरत महसूस करना या किसी से गठबंधन की चर्चा करना
सिवाय अपने को कमजोर सिद्ध करने और विरोधी ताकत जो महज वक्ती हवा के सहारे
बवंडर दिखलाई पड़ रही है और बवंडर की ही तरह जिस तेजी से आई उतनी ही तेजी से
नीचे भी बैठ रही है उसके ही और हवा देने के आलावा और कुछ नहीं होगा ।
इन बातो में समय बर्बाद करने के स्थान पर समाजवादी पार्टी को अपने भीतर के लोगो को ही उनक योग्यता और क्षमता के अनुसार अधिकार और जवाबदेही तय करते हुए तत्काल काम पर लगा देना चाहिए ।
समाजवादी पार्टी को अपना रजिस्टर देख कर सभी जमीनी कार्यकरताओ से संवाद करना चाहिए और उन्हें विकास की किरण का एहसास करवाते हुए और सत्ता में भागीदारी देते हुए तथा उनकी व्यक्तिगत तथा पारिवारिक समस्याओ का योजनाबद्ध निराकरण करते हुए जनता में उतार देना चाहिये ।
समाजवादी पार्टी को दलों और मैनेजरो से गठजोड़ करने के बजाय सीधे जनता से गठजोड़ करना चाहिए और ये गठजोड़ अच्छी तरह हो गया तो तब तक नहीं टूटेगा जब तक हम खुद इसे बनाये रखेंगे अपनी नीतियों ,नेता ,नियत और कर्म तथा व्यवहार से ।
समाजवादी पार्टी को दो अलग फ्रन्ट पर काम करना चाहिए ।सरकार में बैठे लोग अपने कार्यो और छवि से जनता को जीते तो संगठन को अपने को सर्कार से अलग दिखाते हुए हमेशा जनता के साथ खड़ा रहना चाहिए और जनता की समस्याओं में अपनी सरकार के खिलाफ भी दूसरे दलों से पहले सड़क पर आ जाना चाहिए और किसी भी कार्यालय में यदि जनता परेशांन है तो संगठन को वहां बैठ कर जन समस्याओ का निदान करना चाहिए ।
हम पहले भी दो बार बुरी तरह हारे पर निराश नहीं हुए ।जहा 1984 में केवल दो सांसद जीते वही 1991 में दिल्ली और प्रदेश दोनों जगह सरकार होने के बावजूद केवल चार सांसद और 27 एम् एल ए आये थे ।
पर 22 मई को हारे और 31 को 425 विधायक और 85 संसद उमीदवारो की बैठक बुला लिया और आ गए 3000 से अधिक कार्यकर्ता ।अगस्त में आगरा में मैंने मंडलीय सम्मलेन बुला लिया जिसमे नेता जी सहित सभी नेता आये और उसकी अपार सफलता के प्रदेश भर में सड़क पर आ गए और फिर 1993 में सरकार बना लिया ।
इसलिए जरूरत सिर्फ इतनी है की नकारातम्क़ बात करने वालो से बचा जाए और संघर्ष से निकले हुए लोगो से फिर चर्चा चलायी जाये और आत्मविश्वास से खुद को और संगठन को लबरेज करते हुए जनता के बीच निकल लिया जाये ।
संगठन सत्ता द्वारा धेकेले जाने वाला धकेल संगठन न हो बल्कि सत्ता को जनहित की तरफ ले जाने वाला नकेल संगठन हो जैसा डॉ लोहिया ने कहा था ।
बाकी सब चर्चाएँ बेकार की बात है ।
इन बातो में समय बर्बाद करने के स्थान पर समाजवादी पार्टी को अपने भीतर के लोगो को ही उनक योग्यता और क्षमता के अनुसार अधिकार और जवाबदेही तय करते हुए तत्काल काम पर लगा देना चाहिए ।
समाजवादी पार्टी को अपना रजिस्टर देख कर सभी जमीनी कार्यकरताओ से संवाद करना चाहिए और उन्हें विकास की किरण का एहसास करवाते हुए और सत्ता में भागीदारी देते हुए तथा उनकी व्यक्तिगत तथा पारिवारिक समस्याओ का योजनाबद्ध निराकरण करते हुए जनता में उतार देना चाहिये ।
समाजवादी पार्टी को दलों और मैनेजरो से गठजोड़ करने के बजाय सीधे जनता से गठजोड़ करना चाहिए और ये गठजोड़ अच्छी तरह हो गया तो तब तक नहीं टूटेगा जब तक हम खुद इसे बनाये रखेंगे अपनी नीतियों ,नेता ,नियत और कर्म तथा व्यवहार से ।
समाजवादी पार्टी को दो अलग फ्रन्ट पर काम करना चाहिए ।सरकार में बैठे लोग अपने कार्यो और छवि से जनता को जीते तो संगठन को अपने को सर्कार से अलग दिखाते हुए हमेशा जनता के साथ खड़ा रहना चाहिए और जनता की समस्याओं में अपनी सरकार के खिलाफ भी दूसरे दलों से पहले सड़क पर आ जाना चाहिए और किसी भी कार्यालय में यदि जनता परेशांन है तो संगठन को वहां बैठ कर जन समस्याओ का निदान करना चाहिए ।
हम पहले भी दो बार बुरी तरह हारे पर निराश नहीं हुए ।जहा 1984 में केवल दो सांसद जीते वही 1991 में दिल्ली और प्रदेश दोनों जगह सरकार होने के बावजूद केवल चार सांसद और 27 एम् एल ए आये थे ।
पर 22 मई को हारे और 31 को 425 विधायक और 85 संसद उमीदवारो की बैठक बुला लिया और आ गए 3000 से अधिक कार्यकर्ता ।अगस्त में आगरा में मैंने मंडलीय सम्मलेन बुला लिया जिसमे नेता जी सहित सभी नेता आये और उसकी अपार सफलता के प्रदेश भर में सड़क पर आ गए और फिर 1993 में सरकार बना लिया ।
इसलिए जरूरत सिर्फ इतनी है की नकारातम्क़ बात करने वालो से बचा जाए और संघर्ष से निकले हुए लोगो से फिर चर्चा चलायी जाये और आत्मविश्वास से खुद को और संगठन को लबरेज करते हुए जनता के बीच निकल लिया जाये ।
संगठन सत्ता द्वारा धेकेले जाने वाला धकेल संगठन न हो बल्कि सत्ता को जनहित की तरफ ले जाने वाला नकेल संगठन हो जैसा डॉ लोहिया ने कहा था ।
बाकी सब चर्चाएँ बेकार की बात है ।
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