साईं बाबा के अपने कमरे से करोडो का सोना करोडो की चाँदी करोडो के हीरे जवाहरात और इतना रूपया जो पांच जीपों में भरकर बैंक गया मिला | दोस्तों जो समाज से कहते है भगवन में ध्यान लगाओ बाकि सब मिटटी है फिर उन्ही को इतनी मिटटी अपने कमरे में इकट्ठा करने की क्या जरूरत पद गयी ? या ये दोहरे चरित्र और दो मुह ,दो जबान का मामला है ? क्या इन स्वामियों इनके मंदिरों और सभी धर्मस्थलो के लिए भी कोई लोकपाल बनाया जाये ? क्या इन्हें नंबर दो का पैसा देने वाले सारे व्यापारियों के लिए भी कोई लोकपाल बनाया जाये ? क्या इनका मुद्दा भी अन्ना और रामदेव जैसे लोग उठाएंगे ? क्या सरकार इनके मानने वालो के वोट की परवाह नहीं करते हुए इन स्थानों पर जमा काले धन को निकालने का भी कोई अभियान चलाएगी ? दोस्तों एक बार फिर बाबाओ के बारे में उनकी असलियत के बारे में सोचना जरूर| १- लोगो को २०० साल की जिंदगी देने का दावा करने वाला ५ दिन में ही अस्पताल चला गया और खुद अपने दावो के विपरीत आयुर्वेद का नहीं बल्कि अंग्रेजी दवाओ का इलाज करवा रहा है | क्या इससे बड़े बाबा मनमोहन सिंह नहीं जिन्होंने अपने गंभीर इलाज के लिए विदेश जाने और बड़े प्राईवेट अस्पताल में भारती होने से इंकार कर एम्स में इलाज करवाया | २ - अब ये जो अपनी भभूत से लोगो की जन बचाने का दावा करते थे अपनी जिंदगी के लिए साधारण मनुष्यों पर आश्रित हो गए और चले भी गए | जाने के बाद ये भी सामने आ गया की आम लोगो की तरह इन लोगो को भी धन दौलत की कितनी भूख है ? क्या ये दौलत इन्होने सरकारी विभागों के सामने प्रकट किया था ? क्या आयकर और अन्य कर दिया था ? यदि नहीं दिया तो इन लोगो को किस श्रेणी में रखा जाये ? क्या इन्हें भी हम उन्ही शब्दों से संबोधित कर सकते है जिससे अन्य लोगो को करते है ? आइये ईमानदारी से इस बहस में भाग लीजिये ,देखते है कितने लोग जागरूक है तथा हिस्सा लेते है ? ये भी देखना है की अन्ना की टीम इस विषय पर कुछ बोलती है या नहीं ? जय हिंद |
समाज हो या सरकार, आगे तभी बढ़ सकते हैं, जब उनके पास सपने हों, वे सिद्धांतों कि कसौटी पर कसे हुए हो और उन सपनों को यथार्थ में बदलने का संकल्प हो| आजकल सपने रहे नहीं, सिद्धांतों से लगता है किसी का मतलब नहीं, फिर संकल्प कहाँ होगा ? चारों तरफ विश्वास का संकट दिखाई पड़ रहा है| ऐसे में आइये एक अभियान छेड़ें और लोगों को बताएं कि सपने बोलते हैं, सिद्धांत तौलते हैं और संकल्प राह खोलते हैं| हम झुकेंगे नहीं, रुकेंगे नहीं और कहेंगे, विजयी विश्व तिरंगा प्यारा, झंडा ऊँचा रहे हमारा|
शुक्रवार, 17 जून 2011
शनिवार, 11 जून 2011
तथाकथित योगी कहते थे की योग करो और निरोगी रहो और योग करने वाला महीनो बिना खाए पीये केवल सूर्य की रोशनी और योग के सहारे जिन्दा रह सकता है | भारत में योगी नहीं कहलाने वाले बहुत से लोग हुए है संघर्ष के इतिहास में भी और आज भी है समाज के लिए रोजमर्रा संघर्ष करने वाले जो बहुत दिनों तक भूखे प्यासे रहे पर अस्पताल जाने की नौबत नहीं आई | कुछ दिन पहले ८० साल के करीब के अन्ना भी कई दिन अनशन पर रहे पर अपने पैरों पर चल कर गए | लेकिन ४७ साल का ये कैसा योगी जो बड़े बड़े दावे करता है पर ५ दिन में ही मौत की कगार पर पहुँच गया | दोस्तों सभी संकीर्णता और लगाव से ऊपर उठ कर सचमुच एक बार सोच कर देखे की तथाकथित योगी की असलियत और उसके योग की असलियत क्या है ?ये भी सोचे की उस दिन प्रेस कांफ्रेंस में ज्यो ही पत्रकारों ने इनकी कंपनियों के बारे और पासपोर्ट के बारे में पूछना शुरू किया ये प्रेस कांफ्रेस छोड़ कर भाग क्यों खड़े हुए ? वह सवाल तो अभी तक अनुत्तरित है की पुलिस देख कर कूद कर औरत के वेश में भागे क्यों ? फिर प्रेस से भागना और अब योग की ताकत नहीं दिखा पाना ? आखिर सच क्या है ? दोस्तों ये कोई राजनीती का सवाल नहीं है बल्कि एक नागरिक का स्वाभाविक चिंतन है | उम्मीद है की सभी लोग दिल पर हाथ रख कर एक बार दिमाग से सोचेंगे जरूर | जय हिंद |
सोमवार, 6 जून 2011
कुछ घंटे पहले क्रन्तिकारी भाषण से लोगो को उत्तेजित करने वाला और जान की कोई कीमत नही है ये देश के लिए जाये तो जाये कहने वाला तथा सभी के साथ १२० करोड़ लोगो की लड़ाई की बात करने वाला रामदेव यादव औरत का भेष धारण कर भागा क्यों ? ये तो शिखंडी से भी गया गुजरा निकला | शिखंडी तो युद्ध भूमि में डटा रहा अपने लोगो के लिए पर ये तो कायरों की तरह भाग निकला | रामदेव यादव ने खुद अपनी हरिद्वार की प्रेस कांफ्रेंस में दो बाते कहा जिस पर देश जवाब चाहता है १- उसने कहा की छोटे छोटे बच्चो को उसके सामने घसीट कर मारा जा रहा था ,सवाल ये है की यह देख कर उसका पुर्सत्व मर गया की वह मुह छिपा कर भाग गया जबकि कमजोर से कमजोर आदमी ऐसे मौके पर औरतो और बच्चो की ढाल बन कर खुद पिट लेता है लेकिन उनकी रक्षा करता है ,रामदेव ने ऐसा क्यों नहीं किया | जो लोग इसके झूठे कार्यक्रम के लिए इसलिए इकट्ठे हो गए की शायद यहाँ बिना पैसे लिए ये योग सिखाएगा चाहे अपने स्वार्थ में ही सही उन्हें छोड़ कर ये भागा क्यों ? भागने के लिए इसने किस बहन बेटी के कपडे उतरवा कर पहने और उसे क्या पहनाया तथा वो कहा है ?खुद औरत बच्चो की ढाल बनने के स्थान पर इसने औरतो को ढाल क्यों बनाया ? जिस तरह ये पुलिस को देख कर ऊंचे मंच से कूदा, देश जानना चाहता है की क्या पुलिस को देख कर भागना इसकी पुँरानी आदत है ,आखिर इसने क्या किया है पूर्व में की पुलिस को देख कर इसे भागना पड़ता था ? २ - इसने बयान दिया की यदि तीन दिन धरना चल जाता तो केंद्र की सरकार गिर जाती | इस बात का क्या मतलब है ? किन लोगो के साथ और आगे की क्या साजिश थी यह भी जनता जानना चाहती है |जनता यह भी जानना चाहती है की तीन दिन में इसने क्या क्या छुपाया ? यह भी जानना चाहती है कुछ घंटे पहले तक सरकार और प्रधानमंत्री की तारीफ करने और उनकी शान में ताली बजवाने के पीछे इसका क्या मकसद था ? जनता यह भी जानना चाहती है बार बार मंच से पीछे जाकर ये क्या खेल रच रहा था ? जनता यह भी जानना चाहती है की रामदेव जिन लाखो या करोडो लोगो को अपना शिष्य बताता है देश और विदेश में उनमे से कितनो को भ्रस्टाचार न करने ,घूस न लेने और न देने के लिए प्रतिबद्ध कर चूका है | अपने तथाकथित शिष्यों का कितना पैसा विदेश से देश में मंगा चूका है ? खुद को विदेश में तथाकथित तौर पर मिलने वाला मॉल विदेश में ही है या देश में वापस ले आया है ?
पर सबसे पहले ये बता दे की शिखड़ी का भेस धारण कर भागा क्यों ?भारत तो बहादुरों का देश है क्या अब ये कायरो के पीछे चलेगा ? एक कायर खुद अपने मुह से खुद को महात्मा गाँधी तथा शिवाजी के बराबर रखेगा क्या ये देश इस बात को बर्दाश्त करेगा ?कोई कुछ हजार अपने व्यवसाय पर पलने वालो के परिवारों को तथा इसकी बातो में आ गए भोले भाले लोगो को इकठ्ठा कर महान हिंदुस्तान को ललकारेगा और देश ये बर्दाश्त करेगा ?क्या केवल रामदेव का मानवाधिकार है ? क्या दिल्ली में रहने वाले लोगो का कोई मौलिक अधकार और मानवाधिकार नहीं है ? क्या देश इसी तरह चलेगा की कुछ हजार लोग कही भी इकट्ठे हो जाये और तुरंत अपना मनचाहा करवाने को मजबूर करे ? क्या यदि ऐसे ही कुछ हजार लोग रामदेव के आश्रम को घेर कर तुरंत सब जानना चाहे तो वह अपने और अपने लोगो के हिसाब तथा अपनी तमाम संपत्ति का हिसाब तुरंत देने को तैयार है ? इसका समर्थन करने वाले भा जा पा,संघ ,नितीश कुमार ,मायावती नरेन्द्र मोदी सहित वे तमाम लोग अब इसी तरह की व्यवस्था चाहते है की कभी भी कुछ हजार लोग उनकी राजधानियों को घेर कर या जिला मुख्यालयों को घेर कर तुरंत मनचाहा आदेश और काम करवाए ? यदि ये सभी लोग अब से यही व्यवस्था चाहते है तो अपने अपने दलों और सरकारों का प्रस्ताव पास कर भारत सरकार को भेज दे की अब संविधान में परिवर्तन कर ऐसी व्यवस्था बने जहा कोई विधान सभा और लोक सभा न हो ,कोई प्रशासनिक व्यवस्था न हो बल्कि जहा जिसकी लाठी उसकी भैंस की व्यवस्था देश में लागू की जाये | क्या महान भारत यही व्यवस्था चाहता है ?फिर वही सवाल पूरा देश जानना चाहता है की कायर सेनापति औरतो और बच्चो को ढाल बना कर शिखंडी बन कर भागा क्यों ?
सोमवार, 2 मई 2011
"ओसामा के मानने वाले इतने और उसे दफ़नाने वाला कोई नहीं ,बेचारा !
ओसामा मारा गया ,ओसामा मारा गया ,ये समाचार क्या उछला पूरीं दुनिया में लोग ख़ुशी से उछल पड़े | कुछ छुपे हुए लोगो के चेहरे पर मुर्दनी छा गयी ,उनके खैरख्वाह और पालने वालों के चेहरे भी काले पड़ गए |था ही यह बड़ा समाचार दोनों तरफ के लोगो के लिए |जिसने दुनिया को हर वक्त दहशत में जीने को मजबूर कर रखा था | जिसने, खुद को दुनिया का राजा समझने वाले अमरीका को उसी के साधनों का इस्तेमाल कर एक बार तो परास्त कर ही दिया था, वो ओसामा अपने आका,अपने पालने वाले पाकिस्तान की आई एस आई और फ़ौज के द्वारा बनाये गए सबसे सुरक्षित इलाके के सबसे सुरक्षित घर में ही मारा गया | बहुत दिनों से घर में सबसे बड़े आतंकवादी को पालते हुए पाकिस्तान ,अमरीका से उसे और दूसरे आतंकवादियों को मारने के लिए अरबों डालर लेता रहा और उसी पैसे से ओसामा सहित सभी आतंकवादियों को पालता भी रहा| पाकिस्तान का यह चेहरा जिसके बारे में भारत लगातार दुनिया को तथा अमरीका को बता रहा था और उसे सहायता देने का विरोध कर रहा था दुनिया के सामने बहुत स्पस्ट रूप से आ गया |ये मुद्दा तो दुनिया और दुनिया में ही मौजूद अमरीका सहित सभी उसके दोस्त शायद बाद में तय कर सके |अगर उन्हें केवल भारत को तरक्की से रोकने की नाकाम कोशिश के लिए पाकिस्तान को हथियार नहीं बनाना है तो वह कोई सही निर्णय ले सकेंगे | दुनिया कें सबसे बड़े वांटेड ,सबसे बड़े इनामी ,सबसे बड़े आतंकवादी का उस वक्त का चेहरा[ अगर किसी कैमरेमें कैद हो ]पूरी दुनिया देखना चाहती है, जब मौत उसके सामने थी और वो लाचार था और ये जान गया था कि अब उसके हाथ में कुछ नहीं है और अब वह मरने ही वाला है |मै भी देखना चाहता हूँ की किसी को भी और कितनो को भी बिना किसी कारण क्रूरता से मौत बाटने वाला और बूढ़े औरत और बच्चे की मौत पर अट्टहास करने वाला अपने मौत पर हँसा या नहीं |मौत उसके चहरे पर खौफ बन कर नाच रही थी या वह अपनी मौत पर भी अट्टहास कर रहा था ,या सद्दाम की तरह शांत चहरे से मौत को स्वीकार कर रहा था |यदि यह चेहरा सारी दुनिया सहित ओसामा के साथियों को भी देखने को मिल जाये तो बहुत भला हो जायेगा पूरी इंसानियत का | इंसानों को तसल्ली तो मिलेगी ही ,यह भी देखने को मिलेगा की मौत की दहशत का फर्क क्या होता है, जब आम आदमी मरता है बिना किसी कारण के ,बिना किसी दुश्मनी के |जब कोई बच्चा स्कूल जा रहा होता है ,या जब कोई बूढ़ा बच्चे की उंगली पकडे चल रहा होता है या जब कोई माँ बच्चे की दवा खरीद रही होती है या जब कोई अपने परिवार के साथ एक दिन इस आशा से निकला होता है बाजार या सिनेमा, कि रोज रोज कि भाग दौड़ से अलग आज थोडा ख़ुशी हासिल करेगा और ये आतंकवादी कभी बम फोड़ कर या कभी ए के ४७ से गोलियां दाग कर इन सभी मासूमों को मौत कि नीद सुला देते है |कभी ये तालिबान किसी औरत को गोलियों से भून देते है, कभी केवल पढ़ने के कारण ,कभी केवल संगीत सुनने के कारण किसी को कोड़े मार कर किसी को पत्थर मार कर मौत कि नीद सुलाते रहे है |उन सारे मरे हुए लोगो के परिजन और शुभचिंतक ये देखने को बेक़रार है कि मौत और मौत में क्या फर्क होता है |जब आम इन्सान मरता है या मौत देखता है तो बहुत रोता है| क्या ये मौत के सौदागर भी रोते है ,क्या उनके चेहरों पर ,उनकी आँखों में भी दहशत दिखती है ?अगर इंसानों जैसी दहशत इस शैतान कि आँखों में भी दिख गयी तो हो सकता है कि बड़ी तादात में शैतान उस दहशत को देख कर रास्ता बदल ले या अपनी मादों में छुप कर अपने अंत का इंतजार करे | दोनों ही हालत में भला तो इंसानियत का ही होगा |
तो राष्ट्रपति ओबामा ने अमरीका के अहंकार कि भाषा बोल ही दिया कि हम जो भी चाहे कर सकते है |जब २६/११ हुआ था क्या तब क्या कर रहे थे ? तब क्या नहीं चाहा था अपने देश कि सुरक्षा ?पर बोला तो सच ही है कि अमरीका जो भी चाहे वो कर सकता है | वह जब चाहे तब किसी देश पर हमला कर सकता है ,जब चाहे किसी देश को खतरनाक हथियार रखने वाला सिद्ध कर सकता है ,जब चाहे किसी को भी सत्ता से बेदखल कर सकता है ,जब चाहे भारत जैसे देश के खिलाफ जो अपने ऊपर हुए आक्रमण का केवल जवाब दे रहा था सातवाँ बेडा भेज सकता है |जो किसी देश के मंत्री की डर के मारे नंगा कर तलाशी ले सकता है ,जो केवल इसलिए हर इन्सान को आतंकवादी समझ सकता है कि उसका नाम कुछ मुसलमान जैसा है |हा अमरीका कुछ भी कर सकता है |जो पाकिस्तान आतंकवाद कि खेती करता है उसको इस खेती के लिए पर्याप्त पैसा और हथियार देने का काम केवल अमरीका ही कर सकता है |पर इस काम के लिए तो अमरीका के वो लोग तो बधाई के पात्र है ही जिन्होंने पाकिस्तान में होते हुए भी ओसामा को मार गिराया, अपनी सरकार कि अपनी जनता में विश्वसनीयता कायम करने के लिए ही सही | साथ ही डरपोक अमरीकियों ने ये भी ऐलान कर दिया है दुनिया के सामने कि अब कुछ भी हो सकता है |ये कुछ भी, अमरीका और उसके दोस्तों के यहाँ भी होगा या उन्हें छोड़ कर बाकी सारी दुनिया में होगा| अमरीका के पैसे और हथियार कि मदद से और पाकिस्तान के सम्पूर्ण प्रयासों से होगा ये दुनिया को आने वाले समय में बहुत ध्यान और दिलचस्पी के साथ देखना होगा और उसके लिए एक संयुक्त रणनीति भी बनानी होगी|
ओसामा के मानने वाले इतने और उसे दफ़नाने वाला कोई नहीं ,बेचारा! कितना बदकिस्मत निकला | पूरी दुनिया पर आतंक का राज कायम करने का सपना देखने वाले को दो गज जमीन भी नहीं नसीब हुई ,बेचारा !ओसामा | बताया गया कि उसे पाताल में भेज दिया गया जहा हिन्दू मान्यताओं के अनुसार नाग रहते है | आदमी के वेश में पैदा हुए एक नाग को नागलोक ही पहुंचा दिया अमरीका ने |पर अब क्या होगा ?केवल अपना अहम् संतुस्ट कर क्या अमरीका इस तथाकथित आतंकवाद विरोधी लड़ाई को छोड़ कर केवल अपने घर और अपने लोगो कि रक्षा तक सीमित हो जायेगा? क्या वो अब अफगानिस्तान ,इराक और आतंकवाद कि राजधानी पाकिस्तान को छोड़ कर घर वापस चला जायेगा ?बड़ा सवाल है ये सचमुच आतंकवाद का शिकार और लक्ष्य रहे देशो के चिंतन में |
डॉ सी. पी. राय[पूर्व राज्यमंत्री ]
स्वतंत्र राजनैतिक चिन्तक
बुधवार, 13 अप्रैल 2011
जय हिंद कहिये और भ्रस्टाचार से लड़िये
ऐसा लगता है कि पूरा मुल्क जुल्म से ,मिलावटखोरी से ,काला बाजारी से ,भ्रस्टाचार से घूसखोरी से ऊबने लगा है |यहाँ तक कि जो और जिसके परिवार के लोग खुद इन कामो में लिप्त है ,वे भी इनके खिलाफ बात करते है पता नहीं गंभीरता से या केवल बात करने के लिए | पर मजेदार ये है कि जो एक सामान बाजार से गायब कर मुनाफा कमाता है उसे और उसके परिवार को दूसरा सामान पाने में दिक्कत होती है पर वह अपने को चालाक समझता है |किसी एक चीज में मिलावट करने वाला समझता है कि वो चालाक है और उसने अपने इस्तेमाल का सामान तो अलग कर लिया बाकी जहर खाकर मरे तो उसकी बला से | पर वो नहीं जनता कि उसने अपने लिए एक सामान शुद्ध निकाल लिया है ,पर उसी कि तरह अपने को चालाक समझने वालो ने बाकी सभी चीजो में मिलावट कर उसे जहरीला बना दिया है | सभी मिलावट खोर जहर खा रहे है और खिला रहे है पूरे मुल्क को केवल इसलिए कि वो कई गाड़ियाँ रख सके ,एक बाथरूम जाने को, एक टहलने जाने को, एक ऑफिस जाने को और कुछ दिखाने को |वो बहुत बड़ी कोठी या बंगला बनवा सके या हर शहर में बनवा सके ,कि वे एक कमरे में जूते ,एक में चप्पल ,एक में कपडे और इसी तरह पता नहीं क्या क्या रख सके |वर्ना खाना तो रोटी सब्जी दाल या मीट मुर्गा ही होता है और इतना महंगा नहीं होता कि इतने पैसे कि जरूरत पड़े |कपडे भी आदमी कुछ ही पहनता है |
पर सभी एक दूसरे को या तो जहर खिला रहे है या सामान बाजार से गायब कर मुनाफा कमा रहे है |जबकि उत्पादन करने वाले किसान ने तो पसीना बहा कर खूब उत्पादन किया और पाया केवल मजदूरी फिर केवल इन तिजारत करने वालो को किसने हक़ दिया कि ये केवल शहर में किसान का पैदा सामान लाने के बदले सैकड़ो गुना मुनाफा कमाए ?अगर सामान यही भाव बिकना है तो वह मुनाफा किसान को क्यों नहीं मिले ?उसका खेत ,उसका बीज ,उसका पानी ,उसकी खाद ,उसकी रखवाली ,उसकी मेहनत ,उसका पसीना ,बाढ़ और सूखे में उसका नुकसान उसका फिर ये मुनाफा इन बेईमानो का क्यों ?
लोगो को मिलावट कर जहर खिलने वाले तो उनसे भी ज्यादा देश द्रोही है जो कही बम लगा देते है ,क्योकि उस बम से तो केवल कुछ लोग मरते है पर ये तो सारी मानवता को ,सभी नागरिको को ,पूरे देश को धीमी मौत बाँट रहे है, हर वक्त ,हर दिन |क्या इन लोगो पर उन्ही धाराओं में मुकदमा नहीं चलाना चाहिए जिनमे देश द्रोहियों पर चलता है?
इन्ही के साथ जो हमारी मेहनत की हजारो करोड़ रूपये कि मुद्रा हर साल बेईमानो कि जेब में चली जा रही है ,यदि वो सचमुच अपने कामो में लग जाती तो एक बार बनी सड़क ,पुल या कोई भी चीज हर साल या साल में कई बार बनाने और ठीक करने कि जरूरत नहीं पड़ती बल्कि उसी तरह जैसे हम अपना माकन या कोई चीज बनाते है तो वह जीवन भर चलता है केवल रंग रोगन करने के साथ, उसी तरह ये सभी सरकार द्वारा बनाई गयी चीजे भी चलती और अब तक कोई गाँव और गली बिना सड़क ,बिना नाली ,बिना बिजली कि नहीं होती ,कोई गाँव बिना स्कूल का नहीं होता ,कोई पंचायत बिना चिकित्सालय के नहीं होती |कोई कारखाना बंद नहीं हुआ होता बल्कि तमाम नए बन गए होते और कोई बेरोजगार नहीं होता |अगर किसी व्यापारी का चन्द हजारो से शुरू कारोबार कुछ सालो में बहुत बड़ा और हजारो करोड़ का हो जाता है तो सरकार द्वारा शुरू किये गए सार्वजानिक उपक्रम बढ़ने के स्थान पर बंद क्यों हो गए ?.जबकि उनका सञ्चालन उन लोगो द्वारा किया गया जिन्हें इस पृथ्वी पर भागवान के बाद सबसे योग्य और बुद्धिमान माना गया यानी आइ ए एस अफसर |क्या सचमुच ये योग्य होते है या अंग्रेजो द्वारा छोड़ी गयी एक बुराई और उनकी निशानी आज भी देश को बर्बाद कर रही है और लूट रही है ?
अपने पड़ोस में रहने वाले किसी भी छोटी से छोटी हैसियत वाले सरकारी कर्मचारी को देखते रहिये उसकी पुरानी हैसियत और दिन दूनी रत चौगुनी बढ़ती हैसियत |किसी ठेकेदार को और उसकी हैसियत को देखते रहिये ,किसी इंजीनियर को देख लीजिये |किसी डॉ0 को देख लीजिये यहाँ तक कि आज के ६० % से अधिक शिक्षको को देख लीजिये जो जमीर औए शिक्षा दोनों बेचने को दिन रात बेचैन है |तब नेताओ को भी देखिये जिनके पास खाने को नहीं था आज वे किसी घर वाले के मरने पर और परिवार कि किसी शादी पर करोडो खर्च कर रहे है ,टूटी साईकिल नहीं थी और अब गाडियों का बेडा चलता है ,झोपड़ी नहीं थी और अब महलों कि संख्या उन्हें भी याद नहीं है |
घूसखोरी तो हम सभी के रक्त का हिस्सा बन गयी है ,मांगने वाला इस अधिकार से मांगता है कि उसकी तनख्वाह तो उसके पिता उसके लिए छोड़ गए थे और अब वह जो मांग रहा है यही उसका मेहनताना है और उसका अधिकार है |केवल गलत काम या गलत तरीके से काम में विश्वास करने वाले भी बेहिचक इस तरह घूस पेश करते है जैसे किसी प्यासे को पानी पिला रहे हो |बात लम्बी करना चाहे तो पूरी रामायण लिख कर भी बात पूरी नहीं होगी |वैसे मै बहुत साल पहले से मानता था कि इसका अंत आएगा और लोगो को इस देश द्रोह और समाज द्रोह कि सजा मिलेगी |आज एक मंत्री जेल में है एक सचिव सहित कई आई ए एस अफसर जेल में है ,फ़ौज के लेफ्टिनेंट जनरल रैक के अफसर को पहली बार तीन साल कि सजा मिली है |नीरा यादव और अशोक चतुर्वेदी[ व्यापारी] को सजा हुई ,अभी जमानत मिल गयी है |गाजियाबाद में जजों के खिलाफ मुकदमा चल रहा है पर अभी ठेकेदार ,इंजीनियर ,करोडो कमाने वाले और रोज देश को पीछे ले जाने वाले तथा हर समय जनता का शोषण करने वाले कर्मचारियों का नंबर अभी नहीं आया ,अभी दिन रात भ्रस्टाचार करने वाले और करवाने वाले मूल और सारी बुराइयों की जड़ प्राणी व्यापारियों का जेल जाने और सजा पाने का नंबर नहीं आया ,अभी मुनाफाखोरी और मिलावटखोरी करने वालो को फांसी या आजीवन सजा पाने का नंबर नहीं आया ,अभी शिक्षा ,सुरक्षा और स्वस्थ्य को हजम कर जाने वालो को पूरी सजा मिलने कि शुरुवात नहीं हुई |कब होगा ये सब ?विश्वास तो है कि अब जल्दी ही होगा|
पर क्या हम सब भी कुछ कर सकते है, देश को बचाने के लिए अपनी लुटती हुई पूँजी को बचाने के लिए ,हर समय हर जगह लोगो को जुल्म से बचाने के लिए ,हर समय हर जगह लोगो को घूसखोरी से बचाने के लिए ?क्या हम सब सह कर तथा इस सब के खिलाफ आवाज नहीं उठा कर खुद भी इन सारी बुराइयों के लिए उतना ही जिम्मेदार नहीं है ?एक बार दिल पर हाथ रख कर पूछना जरूर चाहिए |शायद हम सभी शर्मिंदगी महसूस करे
मै एक तरीका बताना चाहता हूँ जिससे कोई कानून नहीं टूटेगा ,कोई रास्ता नहीं रुकेगा और इन सब चीजो के खिलाफ ऐसा युद्ध शुरू हो जायेगा जिसमे कोई हिंसा नहीं होगी और धीरे धीरे सभी गाँधीवादी तरीके से लड़ना सीख जायेंगे |जिसके खिलाफ आप लड़ेंगे वो अगर दफ्तर छोड़ कर भाग जायेगा तो उस पर कार्यवाही होगी या तुरंत बिना घूस के काम करेगा |यह तरीका सभी जगह चलेगा सड़क से लेकर जो भी बन रहा है उस पर उसकी उम्र लिखी जाये और ख़राब होने पर उसे बनवाने वाले अधिकारी ,इंजीनयर और ठेकेदार को दुबारा अपने पैसे से बनवाना पड़े और कुछ सजा भी मिले ,बस होने लगेगा कमाल |सभी तरह के मामलों में ऐसे ही नियम तय हो सकते है |
हम क्या करे ?बस देश भक्ति का वही नारा जो नेताजी सुभास चन्द्र बोस ने लगाया था वही जोर से लगाना सीख जाइये |जय हिंद कहिये और भ्रस्टाचार से लड़िये | ये देश भक्ति का ज्वार सब काम अपने आप कर देगा |जब जहा कूछ भी गलत हो आप ये नारा लगाने लगिए ,कुछ और लोग इकट्ठे हो जायेंगे उन्हें बात और मकसद बताइए वे भी आप के साथ शामिल हो जायेंगे |चूं कि आप केवल देश का नारा लगा रहे है अतः आप के खिलाफ कोई मामला नहीं बनता |कर के देखिये धीरे धीरे पूरे देश में जय हिंद का नारा गूजने लगेगा और आप जीतने लगेंगे और भ्रस्टाचार हारने लगेगा |बस बना लीजिये जय हिंद ग्रुप और प्रचार कर डालिए फिर देखिये इसका वही असर होगा जो नेताजी सुभास चन्द्र बोस के नारे से हुआ था |जय हिंद |
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