शुक्रवार, 14 मार्च 2025

जब सिंगापुर से अमर सिंह का फोन आया

उस दिन बैठा कुछ  पढ़ रहा था तभी मोबाइल की घंटी बजी । देखा तो प्राइवेट नंबर लिखा आ रहा था पर फोन उठा लिया । मेरे आश्चर्य का ठिकाना नहीं रहा जब उधर से बीमार सी आवाज में कहा गया "राय साहब ,अमर सिंह बोल रहा हूं सिंगापुर से "।
मैने पहले उनका हाल पूछा कि अब सब ठीक है न और ठीक होकर कब वापस भारत आ रहे है तो हल्की से उनके स्टाइल की हंसी की आवाज आई और बोले कि शायद अब जिंदा वापसी न हो इसीलिए फोन किया है । आप से पहले अमिताभ बच्चन और अनिल अंबानी ,सुब्रत राय सहित कई लोगों को फोन कर चुका हूं और कई लोगों को याद से फोन करना है ।राय साहब मैं अपने दिल पर कोई बोझ लेकर दुनिया से नहीं जाना चाहता हूं इसलिए मेरी वजह से जिन लोगों को भी कोई तकलीफ पहुंची है या जो लोग नाराज है उन्हें सफाई भी दे रहा हूं और माफी भी मांग ले रहा हूं ।
पार्टी के बड़े से बड़े नेता कभी न कभी मेरे घर मदद मांगने जरूर आए पर आप तो कभी मिलने भी नहीं आए लेकिन पता नहीं कैसे आप को नाराजगी है कि मैने आप का नुकसान किया और राज्यसभा में आप को नहीं आने दिया । जबकि सच ये है कि आप का हर वक्त नुकसान रामगोपाल यादव ने किया और नेता जी उनका नाम लेने के बजाय मेरे कंधे पर रख कर बंदूक चलाते रहे ।मैं मानता हूं कि आप के साथ ज्यादती हुई और न्याय नहीं हुआ । बस मुझे अपनी सफाई में इतना की कहना था और मैं चाहता हूं कि आप मेरे लिए अपने दिल से नाराजगी और नफरत निकाल कर मेरे लिए ईश्वर से दुवा करिए ।
मैं हतप्रभ था पर अपने को सम्हाल कर बोला कि आप वापस आयेंगे स्वस्थ होकर निश्चिंत रहिए और मैं पहले कभी नहीं आया पर जब आप वापस दिल्ली आ जाएंगे तो आप के स्वस्थ होने पर आप के लिए आगरा से मिठाई लेकर आऊंगा । यद्यपि आप खा तो नहीं सकते है क्योंकि जब आप मेरे घर आए थे तब भी आप ने केवल जूस पिया था पर आप के यहां आने जाने वाले खायेंगे । इसपर वो फिर फीकी से हंसी हंसे और बोले बस मैं इतना ही चाहता था कि आप के मन से मेरे प्रति गुस्सा निकल जाए । 
और चंद दिन बाद अमर सिंह नहीं रहे । 

शनिवार, 22 फ़रवरी 2025

जिंदगी के झरोखे से

डॉक्टर चंद्र प्रकाश राय जिनको मित्रमंडली में प्यार से सीपी राय कहकर जाना जाता है ,एक बहुत अच्छे इंसान, लोकप्रिय राज नायक संघर्षशील राजनेता, एक अच्छे लेखक कुशल सलाहकार और बहुमुखी प्रतिभा के धनी व्यक्ति हैं। मैं उनसे और उनके पूरे परिवार से अगली और पिछड़े पीढ़ी से भली बात परिचित रहा हूं बल्कि उनके परिवार का एक सदस्य रहा हूं। उनके परिवार की मेहमान नवाजी का साक्षी भी हूं।
वह एक अच्छे कवि और अच्छे गद्य लेखक भी है सोशल मीडिया पर अक्सर उनके राजनीतिक सामाजिक और धार्मिक मुद्दों पर विद्युत का पूर्ण लेख अक्सर पढ़ने को मिलते हैं ।
इधर उन्होंने अपनी रोचक जीवनी लिखी है जिसका नाम है "जिंदगी के झरोखों से"।
इस पुस्तक में उन्होंने अपने पचास साल के सामाजिक और राजनीतिक जीवन के खट्टे मीठे अनुभवों का रोचक ढंग से विस्तार से वर्णन किया है।उनके जीवन की  धूप छांव का बदलता हुआ क्रम बड़ा हृदय ग्राही है । राय साहब बड़े स्वाभिमानी व्यक्ति हैं ,उन्होने जीवन में कोई चीज झुक कर नहीं उठाई चाहे वह कितने भी बड़ी ,कीमती और महत्वपूर्ण हो ।जाहिर है की उनके इस जीवनी में यह भी छिपी हुई शिकायत होनी है कि उन्हें समाज से वह नहीं मिला, जो मिलना चाहिए था। और यह शिकायत उचित भी है ।मैं इस बात का चश्मा दीद गवाह हूं की क राय साहब नेताजी मुलायम सिंह के बहुत करीब रहे और उनके प्रति हर तरह समर्पित रहे ,नेताजी ने भी उनको सदा अपना माना और अत्यधिक स्नेह और प्यार दिया राय साहब ने समाजवादी पार्टी के  हितेषी चिंतक के रूप में दिन और रात एक करने में कोई कसर नहीं छोड़ी लेकिन उन्हें कोई कोई बड़ा पद या सम्मान नहीं मिला जिसके वे अधिकारी रहे। केवल नेता मुलायम सिंह ही नहीं जितने बड़े राजनीतिज्ञ हुए हैं चाहे वह बीपी सिंह हो जाए प्रधानमंत्री चंद्रशेखर जी हो , चौ देवी लाल जी हो या रामकृष्ण हेगड़े जो हो या और भी बहुत से बड़े नेता जो 70 के दशक 2020 के दशक  तक हुए है राय साहब की घनिष्ठता लगभग सभी से बराबर रही है राजनीति में उनका दर्जा अजातशत्रु राजनेता का रहा है। वर्तमान में वह कांग्रेस के एक बड़े नेता के रूप में उभर के आए हैं । 
राय साहब द्वारा कारगिल के शहीदों की पत्नियों को मिले आयकर कटौती के नोटिस के खिलाफ किए गए प्रयास जिसे अटल बिहारी वाजपेयी सरकार को वापस लेना पड़ा तथा बाकी वादे भी पूरे करने पड़े , अटल बिहारी वाजपेयी और जरनल मुशर्रफ की वार्ता के दिन इनके विरोध प्रदर्शन और गिरफ्तारी जो 1965 और 1971 के पाकिस्तान के जेलों में बंद युद्ध बंदियों की रिहाई की मांग के लिए हुआ था जरनल मुशर्रफ को इनकी बात माननी पड़ी और उन्होंने युद्ध बंदियों के परिवारों को अपने अतिथि के रूप में आमंत्रित किया कि वे लोग आकर जेलों में अपने परिजन को पहचान ले तो वो तुरंत ही छोड़ देंगे और जब लॉटरी से देश के लाखों लोग बर्बाद हो रहे थे तब राय साहब का पहले लॉटरी फाड़ो आंदोलन और फिर अपनी सरकार बन जाने पर मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव जी से उत्तर प्रदेश में लॉटरी बैन करवा देने जिसके दबाव में बाकी प्रदेशों की लॉटरी भी बैन हो गई इनकी राजनीति से इतर बड़ी उपलब्धियां है ।
राजनीति में चाहे समाजवादी पार्टी की स्थापना करवाना हो या तमाम और तमाम तरह के संघर्ष समाजवादी पार्टी इनके योगदान को भुला नहीं सकती है ।
राय साहब की लोकप्रियता का दायरा इतना बड़ा है कि उसमें राजनीतिज्ञ भी हैं ,साहित्यकार भी हैं, समाजसेवक भी है ,और भारत और विश्व की हर भाषा और हर राज्य के जाने-माने लोग उनके प्रिय हैं और वह लोग उनका नाम आदर से लेते हैं
 उनकी पुस्तक जिंदगी के झरोखों से की भाषा बहुत सरल और बोधगम्य है वह एक अच्छे गद्य लेखक  तो हैं ही उसके साथ उनकी सरल बोधगम्य भाषा की विशेषता भी अपना एक महत्व रखती है। मैं उनकी पुस्तक की सफलता और लोकप्रिय होने की कामना करता हूं उनकी दीर्घायु की कामना करता हूं जिससे वह अपने सामाजिक और राजनीतिक विचारों से देश और समाज का निरंतर हित करते रहें ।
जय हिंद

उदय प्रताप सिंह 
देश के जाने माने कवि और शायर 
पूर्व सांसद लोकसभा , पूर्व सांसद राज्यसभा , पूर्व सदस्य पिछड़ा वर्ग आयोग भारत सरकार , पूर्व अध्यक्ष हिंदी संस्थान उत्तर प्रदेश

जिंदगी के झरोखे से



संस्मरणों की इस श्रृंखला के माध्यम से डॉ. सी. पी. राय ने अपने राजनैतिक जीवन के कुछ महत्वपूर्ण क्षणों को याद किया है, पाठक के लिए भी, अपने लिए भी। इन यादों में कुछ अच्छा कर
पाने का संतोष झलकता है तो अपना प्राप्य न पा सकने का स्वाभाविक दुख भी।
इस प्राप्य की व्याप्ति केवल व्यक्तिगत नहीं, विचारगत भी है। इन संस्मरणों में व्यक्तिगत जीवन के संकेत तो हैं, लेकिन बल समाज और राजनीति में लेखक की हिस्सेदारी पर ही है। उन्हें दुख भी इसी
बात का अधिक है कि भारतीय समाज के उत्तरोत्तर लोकतांत्रिकीकरण के लिए जिस राजनैतिक धारा से जुड़े रहे, वह कमजोर, कई बार तो विपथगा भी होती चली गयी। मार्के की बात यह है कि इसके बावजूद श्री राय की बुनियादी प्रतिबद्धता नहीं बदली, हिन्दुस्तान का हम हिन्दू और मुसलमान ( तथा अन्य समुदायों ) के मिलाप से ही बनता है, बहुसंख्यकवाद से नहीं—यह बुनियादी धारणा श्री राय के
कामों को तब भी निर्धारित करती थी, जब वे समाजवादी पार्टी में थे, अब भी करती है जब वे कांग्रेस में हैं।
राजनैतिक प्रतिबद्धता की निरंतरता की इस यात्रा में आने वाले व्यक्तिगत उतार चढ़ावों का विवरण तो यह पुस्तक देती ही है, अनेक महत्वपूर्ण राजनैतिक घटनाक्रमों को एक गंभीर राजनैतिक कार्यकर्ता
के दृष्टिकोण से देखने का अवसर भी देती है।

20 फरवरी 2025           

प्रोफेसर पुरुषोत्तम अग्रवाल , जाने माने लेखक , पूर्व सदस्य केंद्रीय लोक सेवा आयोग, पूर्व प्रोफेसर जवाहर लाल नेहरू विविश्वविद्यालय ।

शुक्रवार, 31 जनवरी 2025

उदय प्रताप जी

मुझे जैसे बहुत साधारण व्यक्ति द्वारा आदरणीय उदय प्रताप जी के बारे में कुछ लिखना अपनी सीमा का उल्लंघन करना है और सूरज को दिया दिखाने के समान है ।उदय प्रताप जी जो आदर्श शिक्षक रहे तो देश के जानेआने नेता पूर्व मुख्यमंत्री और पूर्व रक्षामंत्री ,पद्मविभूषण से सम्मानित आदरणीय मुलायम सिंह यादव जी के गुरु रहे , शिक्षक के रूप में एन सी सी के अधिकारी रहे , आदर्श प्रधानाचार्य रहे । उदय प्रताप जी जो देश के नहीं बल्कि जहां जहां हिंदी की कविता और गजल सुनी जाती है उन सभी देशों तक लोकप्रिय कवि है । उदय प्रताप जी ने जब राजनीति में पदार्पण किया तो मैनपुरी से लोकसभा 1989  का पहला चुनाव ही जीत लिया और फिर 1991 में चुनाव जीता । उदय प्रताप जी जो भारत सरकार में पिछड़ा वर्ग आयोग के सदस्य रहे । उदय प्रताप जी जो राज्यसभा के भी सदस्य रहे । उदय प्रताप जी जो संसद में भी अपनी कविताओं के कारण लोकप्रिय रहे और कविताओं से ही संसद की कार्यवाही में जान ही नहीं फूक दिया करते थे बल्कि कविता की चंद पंक्तियों से इतनी बड़ी और गंभीर बात कर दिया करते थे कि सब लोग देखते रह जाते थे ।उदय प्रताप जी जो देश के बड़े से बड़े कवि जैसे राष्ट्र कवि रामधारी सिंह दिनकर के समतुल्य कवियों के साथ कविता पाठ करते रहे ।उदय प्रताप जी जो अटल बिहारी वाजपेयी से लेकर देश के तमाम नेताओं में अपनी कविता और खरी तथा सच्ची बात कहने के कारण लोकप्रिय रहे ।उदय प्रताप जी जो उत्तर प्रदेश हिंदी संस्थान के तीन बार बहुत सम्मानित अध्यक्ष रहे और हिन्दी की सेवा करते रहे ।।उदय प्रताप जी जो 83 साल के जवान है और जिंदादिल है ,जो दोस्तों के दोस्त है और किसी के बारे में बुरा नहीं बोलते ,सबका हित चाहते है तथा सब उनकी सिर्फ तारीफ ही करते है ।उदय प्रताप जी जो इस उम्र में भी एक अनुशासित जिंदगी जीते है और रोज लिखते है ।उदय प्रताप जी जो चेस के खेल में कंप्यूटर को भी हरा देते है तथा सुडोकू हल करना जिनका शौक है ।उदय प्रताप जी जो 83 साल की उम्र में भी कभी मद्रास तो कभी दुबई में कवि सम्मेलन और मुशायरे की अध्यक्षता करने जाते है । उस उदय प्रताप जी के बारे में मैं कैसे कुछ लिख सकता है और किस हैसियत से लिख सकता हूं ।
उदय प्रताप जी जिनसे करीब 50 साल का मेरा रिश्ता है जो बड़े भाई भी है , सच्चे दोस्त भी है और शुभचिंतक भी है । 
हा उदय प्रताप जी का शिकोहाबाद का घर हो या सांसद के रूप में मिला हुआ दिल्ली का घर हो वो मेरा दूसरा घर रहा हमेशा । उदय प्रताप जी अगर आगरा आते थे तो मेरे घर पर जरूर आना होता था और फिर मेरे पूरे परिवार के साथ बैठ कर बाते करना और कविताएं सुनाना ये हर बार तय था । हम लोगो के बीच बिना रिश्ते के ऐसा रिश्ता बन गया था कि वो अगर आगरा आ रहे हो तो मैं गाड़ी लेकर स्टेशन चला जाता था । अगर उनको आगरा में रुकना होता था तो किसी होटल मालिक दोस्त को कह देता था और वो भी फख्र महसूस करता था कि उसके यह उदय प्रताप जी रुके है तथा कविता सुनने का लाभ भी कैसे कोई छोड़ सकता था ।अक्सर ऐसा होता था कि मैं उन्हें लेकर अपने घर आता और फिर देश के जाने माने कवि सोम ठाकुर के यहां तथा उनकी इच्छानुसार अन्य कवियों के यहां लेकर जाता था और फिर उनको छोड़ने शिकोहाबाद तक चला जाता था । 
अब भी यह नियमित। होता है कि मैं लखनऊ के उनके घर पहुंचता हूं और वो कुछ मेरी कविताएं सुनते है फिर उनकी कविताओं का दौर शुरू हो जाता है जिसको मैं लाइव भी करता हूं ताकि उनके चाहने वाले लोग भी उन रचनाओं से महरूम न हो जाए ।
मैने कुछ टूटी फूटी कविताएं लिखा जो प्रकाशित हो गई तो मेरी उस पुस्तक को आशीर्वाद देकर और उसपर लिख कर  उदय प्रताप जी ने उस पुस्तक को मायने दे दिया तथा उसके लोकार्पण की अध्यक्षता कर मेरे कार्यक्रम को भव्यता प्रदान कर दिया । कैसे कोई भूल सकता है अपनी जिंदगी में उनका ये सब आशीर्वाद ।
अच्छा किया उदय प्रताप जी ने की राजधानी लखनऊ के वासी हो गए ।अब लखनऊ को साहित्यिक कार्यक्रमों की अध्यक्षता के और उन कार्यक्रमों की शोभा बढ़ाने के लिए एक सचमुच का साहित्यकार मिल गया है ।
उनसे एक रिश्ता और रहा है कि जिस पार्टी से वो 1989 में सांसद हुए मैं उस समाजवादी विचारधारा से बचपन से जुड़ा रहा हूं तथा समाजवादी पार्टी का संस्थापक सदस्य और महामंत्री तथा प्रवक्ता रहा हूं।मुलायम सिंह यादव जी को उन्होंने पढ़ाया था और 1989 से उनके राजदार और गंभीर मुद्दों पर राय बात व्यक्ति रहे तो मुलायम सिंह यादव की का मुझे भी स्नेह प्राप्त रहा और उस कारण बहुत ज्यादा ऐसा मौका रहा जब हम तीन लोगों ने साथ सफर किया तथा साथ में फैसले भी किए ।मुलायम सिंह यादव उदय प्रताप जी का बहुत समान तो करते ही थे इनपर बहुत ज्यादा भरोसा भी करते थे और अब अखिलेश यादव भी उसी परम्परा का निर्वाह कर रहे है ।
ऐसे महान व्यक्ति उदय प्रताप जी के बारे में कुछ भी लिखने की जुर्रत भी मै कैसे कर सकता हूं।
हा ईश्वर से प्रार्थना जरूर कर सकता हूं कि उनका साथ और उनकी सरपरस्ती मुझे जैसे साधारण व्यक्ति को अभी उनकी उम्र के शतक के बाद भी हासिल रहे ।
जिन साथियों ने आदरणीय उदय प्रताप जी का अभिनंदन ग्रन्थ प्रकाशित करने का फैसला किया है वो लोग बधाई के पात्र है क्योंकि उन्होंने समाज और देश की एक बहुमूल्य धरोहर को भविष्य के लिए सहेजने का वीणा उठाया है । उन साथियों को भी शुभकामनाएं और आदरणीय उदय प्रताप जी को भी हार्दिक शुभकामनाएं।

डा सी पी राय 
पूर्व मंत्री 
चेयरमैन 
मीडिया विभाग 
उत्तर प्रदेश कांग्रेस कमेटी ,लखनऊ 
9412254400 

सोमवार, 30 दिसंबर 2024

नव_वर्ष_मुबारक_हो

नव_वर्ष_मुबारक हो और आप सबकी जिंदगी में खुशहाली लाये | 

क्यों कहू मैं जब तय नहीं है की इस साल कोई तूफ़ान नहीं आएगा ,,
जब तय नहीं है की कोई किसी को नहीं रुलाएगा ,
जब तय नहीं है की इस साल कोई सुनामी नहीं आएगी ,
जब तय नहीं की इस साल कोई लड़की निर्भया  नहीं कहलाएगी ,
जब तय नहीं है की नकली दूध और दवा मौत का सामान नहीं बनेगी ,.
जब तय नहीं है की की जाती और धर्म में नफरत की छतरी नहीं तनेगी ,
जब तय नहीं है कोई मुजफ्फरनगर , शामली  आतंक नहीं फैलायेगा ,
तय नहीं की कोई अफवाह पर दादरी नहीं बनाएगा ,
तय नहीं की दहेज़ के लिए हत्या नहीं होगी 
और 
कोख में बेटियां नहीं मरेंगी 
और 
सड़क चलते बेटियां नहीं डरेंगी ,
कोई बच्चा कूड़ा नहीं बीनेगा 
और 
चौराहों पर हाथ नहीं फैलाएगा ,
कोई नहीं रहेगा निरक्षर न बिकेगा किसी का शरीर न होंगे कोठे आबाद 
और हम जब तक नहीं होंगे सच्चे मायने में आज़ाद ,
नहीं दूर होगी भुखमरी और 
लाचारी ,गरीब के हिस्से में बस होगी बीमारी | 
कैसे कह दूँ मैं नया वर्ष मंगलमय हो जब तय ये सब तय न हो ,|
आइये इनसे मुक्त दुनिया बनाये 
और 
तब नए साल की खुशियाँ मनाएं ,
नाचे और गाये ,,
तब जोर से चिल्लाएं-----
#happy_new_year ,,,#नव_वर्ष_मुबारक_हो |